आजादी के बाद पहली बार देश में कास्ट सेंसस यानी जाति जनगणना होगी। केंद्र सरकार ने 30 अप्रैल की इसकी घोषणा की। सरकार के फैसले पर विपक्ष ने खुशी जताई। कांग्रेस ने इसके लिए राहुल गांधी को श्रेय दिया। केंद्रीय मंत्री भाजपा नेता धर्मेंद्र प्रधान ने गुरुवार को जाति जनगणना पर प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने 50% आरक्षण सीमा खत्म करने के सवाल पर कहा- राहुल गांधी की बातों को गंभीरता से लेना ही नहीं चाहिए। उन्हें सर्वे और सेंसस के बीच का अंतर भी नहीं पता। उन्होंने कहा- यह जाति जनगणना का फैसला लिया गया तो कुछ लोग बौखलाए हुए हैं। वे कहते हैं- सरकार उनकी है, पर सिस्टम हमारा है, लेकिन सवाल ये है कि 1951 में सरकार और सिस्टम किसके हाथ में था? तब यह निर्णय क्यों नहीं लिया गया? प्रधान ने कह- ऐसा इसलिए नहीं हो पाया क्योंकि पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू सहित पूरी कांग्रेस जातिगत आरक्षण की सबसे कट्टर विरोधी थी। अगर बापू (महात्मा गांधी), सरदार पटेल, संविधान सभा न होते तो कांग्रेस आरक्षण भी नहीं होने देती। इधर, कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने गुरुवार को कहा- आज तक केंद्र सरकार ने जाति जनगणना के लिए पर्याप्त फंड नहीं बांटा है। बिना फंड के सर्वे कैसे किया जा सकता है? सरकार को जाति जनगणना के लिए समय-सीमा भी बतानी चाहिए। सरकार को 2-3 महीने में सर्वे शुरू कर देना चाहिए। धमेंद्र प्रधान के बयान के 2 बड़ी बातें… पक्ष के नेताओं के बयान केशव प्रसाद मौर्य: विपक्ष जो भी कहे, लेकिन जब वे सत्ता में थे, तो उनके पास पर्याप्त समय था। 10 साल तक राहुल गांधी ने केंद्र में मनमोहन सिंह की सरकार चलाई। अखिलेश यादव ने कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार का समर्थन किया, RJD ने भी कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार का समर्थन किया, लेकिन उनमें से किसी ने भी पिछड़े लोगों के लिए कुछ नहीं किया। अनुप्रिया पटेल: I.N.D.I.A के लिए सामाजिक न्याय एक राजनीतिक हथियार है। मैं विपक्ष के साथियों से बस इतना पूछना चाहती हूं कि जब आप सरकार में थे, तो आपको यह फैसला लेने से किसने रोका था। एकनाथ शिंदे: जाति जनगणना से वाकई में सामाजिक न्याय के द्वार खुलेंगे। ये फैसला देश के सभी लोगों के लिए ऐतिहासिक है। पिछड़े वर्ग के लोगों को मुख्यधारा में लाया जा सकेगा। इससे सभी को न्याय मिलेगा। जादी के बाद से यह एकमात्र ऐसा बड़ा फैसला है। विपक्ष के नेताओं के बयान मल्लिकार्जुन खड़गे मैं राजनीति में नहीं जाना चाहता। जो भी अच्छा है मैं उसका स्वागत करता हूं, जो भी बुरा है मैं उसका विरोध करता हूं, क्योंकि आखिरकार देश महत्वपूर्ण है, लोग महत्वपूर्ण हैं। चूंकि लोग जाति जनगणना चाहते थे, इसलिए हमने इसकी मांग करते हुए आंदोलन किया। सभी विपक्षी दलों ने पूरे देश में इसके लिए दबाव डाला और आंदोलन किया, और राहुल गांधी ने जाति जनगणना की मांग में अगुवाई की, हमने इसे हासिल किया और हम खुश हैं। असदुद्दीन ओवैसी: क्या 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले रिपोर्ट जनगणना की रिपोर्ट उपलब्ध होगी या नहीं। जाति जनगणना होनी चाहिए ताकि यह पता चल सके कि कौन सी जाति विकसित है और कौन सी जाति अविकसित है। आपने OBC आरक्षण को सिर्फ 27 प्रतिशत पर रोक दिया है, यह पर्याप्त नहीं है। केसी वेणुगोपाल: आखिरकार केंद्र सरकार इस बात पर सहमत हुए कि जाति जनगणना देश की जरूरत है और समय की मांग है। पिछले 3-4 सालों से राहुल गांधी लगातार जाति जनगणना की मांग कर रहे हैं और भाजपा उन पर हमला करती रही है। हमारे पीएम ने कहा था कि इस देश में केवल चार जातियां हैं, फिर जाति सर्वेक्षण की क्या जरूरत है?…हम बहुत खुश हैं। सिद्धारमैया: बिहार चुनाव को ध्यान में रखकर जाति जनगणना का फैसला लिया गया है। राहुल गांधी पिछले 5 साल से जाति जनगणना की मांग कर रहे थे। केंद्र सरकार इस सर्वे के लिए तारीख और समय की जानकारी दे। ……………………… जाति जनगणना की पूरी जानकारी के लिए इस खबर को पढ़ें… देश में आजादी के बाद पहली बार जातिगत जनगणना होगी: बिहार चुनाव से पहले केंद्र का फैसला; राहुल बोले- फैसले का समर्थन, डेडलाइन तय हो देश में आजादी के बाद पहली बार जाति जनगणना कराई जाएगी। केंद्रीय कैबिनेट ने 30 अप्रैल को जाति जनगणना को मंजूरी दी। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इसे मूल जनगणना के साथ ही कराया जाएगा। देश में इसी साल के आखिर में बिहार विधानसभा के चुनाव होने हैं। पूरी खबर पढ़ें…
आजादी के बाद पहली बार देश में कास्ट सेंसस यानी जाति जनगणना होगी। केंद्र सरकार ने 30 अप्रैल की इसकी घोषणा की। सरकार के फैसले पर विपक्ष ने खुशी जताई। कांग्रेस ने इसके लिए राहुल गांधी को श्रेय दिया। केंद्रीय मंत्री भाजपा नेता धर्मेंद्र प्रधान ने गुरुवार को जाति जनगणना पर प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने 50% आरक्षण सीमा खत्म करने के सवाल पर कहा- राहुल गांधी की बातों को गंभीरता से लेना ही नहीं चाहिए। उन्हें सर्वे और सेंसस के बीच का अंतर भी नहीं पता। उन्होंने कहा- यह जाति जनगणना का फैसला लिया गया तो कुछ लोग बौखलाए हुए हैं। वे कहते हैं- सरकार उनकी है, पर सिस्टम हमारा है, लेकिन सवाल ये है कि 1951 में सरकार और सिस्टम किसके हाथ में था? तब यह निर्णय क्यों नहीं लिया गया? प्रधान ने कह- ऐसा इसलिए नहीं हो पाया क्योंकि पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू सहित पूरी कांग्रेस जातिगत आरक्षण की सबसे कट्टर विरोधी थी। अगर बापू (महात्मा गांधी), सरदार पटेल, संविधान सभा न होते तो कांग्रेस आरक्षण भी नहीं होने देती। इधर, कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने गुरुवार को कहा- आज तक केंद्र सरकार ने जाति जनगणना के लिए पर्याप्त फंड नहीं बांटा है। बिना फंड के सर्वे कैसे किया जा सकता है? सरकार को जाति जनगणना के लिए समय-सीमा भी बतानी चाहिए। सरकार को 2-3 महीने में सर्वे शुरू कर देना चाहिए। धमेंद्र प्रधान के बयान के 2 बड़ी बातें… पक्ष के नेताओं के बयान केशव प्रसाद मौर्य: विपक्ष जो भी कहे, लेकिन जब वे सत्ता में थे, तो उनके पास पर्याप्त समय था। 10 साल तक राहुल गांधी ने केंद्र में मनमोहन सिंह की सरकार चलाई। अखिलेश यादव ने कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार का समर्थन किया, RJD ने भी कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार का समर्थन किया, लेकिन उनमें से किसी ने भी पिछड़े लोगों के लिए कुछ नहीं किया। अनुप्रिया पटेल: I.N.D.I.A के लिए सामाजिक न्याय एक राजनीतिक हथियार है। मैं विपक्ष के साथियों से बस इतना पूछना चाहती हूं कि जब आप सरकार में थे, तो आपको यह फैसला लेने से किसने रोका था। एकनाथ शिंदे: जाति जनगणना से वाकई में सामाजिक न्याय के द्वार खुलेंगे। ये फैसला देश के सभी लोगों के लिए ऐतिहासिक है। पिछड़े वर्ग के लोगों को मुख्यधारा में लाया जा सकेगा। इससे सभी को न्याय मिलेगा। जादी के बाद से यह एकमात्र ऐसा बड़ा फैसला है। विपक्ष के नेताओं के बयान मल्लिकार्जुन खड़गे मैं राजनीति में नहीं जाना चाहता। जो भी अच्छा है मैं उसका स्वागत करता हूं, जो भी बुरा है मैं उसका विरोध करता हूं, क्योंकि आखिरकार देश महत्वपूर्ण है, लोग महत्वपूर्ण हैं। चूंकि लोग जाति जनगणना चाहते थे, इसलिए हमने इसकी मांग करते हुए आंदोलन किया। सभी विपक्षी दलों ने पूरे देश में इसके लिए दबाव डाला और आंदोलन किया, और राहुल गांधी ने जाति जनगणना की मांग में अगुवाई की, हमने इसे हासिल किया और हम खुश हैं। असदुद्दीन ओवैसी: क्या 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले रिपोर्ट जनगणना की रिपोर्ट उपलब्ध होगी या नहीं। जाति जनगणना होनी चाहिए ताकि यह पता चल सके कि कौन सी जाति विकसित है और कौन सी जाति अविकसित है। आपने OBC आरक्षण को सिर्फ 27 प्रतिशत पर रोक दिया है, यह पर्याप्त नहीं है। केसी वेणुगोपाल: आखिरकार केंद्र सरकार इस बात पर सहमत हुए कि जाति जनगणना देश की जरूरत है और समय की मांग है। पिछले 3-4 सालों से राहुल गांधी लगातार जाति जनगणना की मांग कर रहे हैं और भाजपा उन पर हमला करती रही है। हमारे पीएम ने कहा था कि इस देश में केवल चार जातियां हैं, फिर जाति सर्वेक्षण की क्या जरूरत है?…हम बहुत खुश हैं। सिद्धारमैया: बिहार चुनाव को ध्यान में रखकर जाति जनगणना का फैसला लिया गया है। राहुल गांधी पिछले 5 साल से जाति जनगणना की मांग कर रहे थे। केंद्र सरकार इस सर्वे के लिए तारीख और समय की जानकारी दे। ……………………… जाति जनगणना की पूरी जानकारी के लिए इस खबर को पढ़ें… देश में आजादी के बाद पहली बार जातिगत जनगणना होगी: बिहार चुनाव से पहले केंद्र का फैसला; राहुल बोले- फैसले का समर्थन, डेडलाइन तय हो देश में आजादी के बाद पहली बार जाति जनगणना कराई जाएगी। केंद्रीय कैबिनेट ने 30 अप्रैल को जाति जनगणना को मंजूरी दी। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इसे मूल जनगणना के साथ ही कराया जाएगा। देश में इसी साल के आखिर में बिहार विधानसभा के चुनाव होने हैं। पूरी खबर पढ़ें…