उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ गुरुवार को लखनऊ दौरे पर हैं। उन्होंने राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की किताब ‘चुनौतियां मुझे पसंद हैं’ का विमोचन किया। इस दौरान आतंकी हमले का जिक्र करते हुए कहा- पहलगाम में हमें चुनौती मिली है। लेकिन हमारे पास डायनामिक पीएम मोदी हैं। उन्होंने चुनौतियों को अवसर में बदला है। उन्होंने कहा- राज्यपाल महोदया, मेरे लिए घर में एक बड़ी चुनौती है। उस चुनौती को पार करने के लिए मैं राजभवन में भोजन के दौरान आपसे गुरुमंत्र लूंगा। अगर आपने मुझे चुनौती से उबरने का कोई गुरुमंत्र नहीं दिया, तो फिर मजबूरन मुझे एकलव्य बनाना पड़ेगा। उपराष्ट्रपति ने कहा कि आनंदीबेन नाम ही काफी है। किताब लॉन्च करने के लिए उन्होंने 1 मई यानी मजूदरों का दिन चुना। गुजरात इनके दिल में धड़कता है। वहीं, आनंदी बेन पटेल ने कहा- इस पुस्तक को लिखने में मेरे माता-पिता, बेटे-बेटी-बहू सभी का इनपुट है। इसकी कीमत 500 रुपए रखी है। किसी को फ्री में नहीं मिलेगी क्योंकि मैं अहमदाबादी हूं। एक ही कप में हम तीन लोग चाय पीते हैं। इस मौके पर सीएम योगी ने कहा- ये किताब समुद्र मंथन के बाद निकली है, ये किताब नहीं ग्रंथ है। इसमें राज्यपाल की जिंदगी का सार समाहित है। धनखड़ की चुनौतियों को लेकर कही 4 बड़ी बातें- विधायिका और न्यायपालिका का टकराव याद दिलाया धनखड़ ने पुस्तक विमोचन के दौरान 60 के दशक का उल्लेख करते हुए न्यायपालिका और विधायिका के टकराव की याद दिलाई। कहा कि संविधान के मूल ढांचे को बनाकर रखना बेहद आवश्यक है। हर व्यक्ति निर्दोष है, जब तक कि उस पर दोष साबित न हो। उपराष्ट्रपति ने न्याय और कानून व्यवस्था पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा- मेरा दिव्य मत है कि हर व्यक्ति निर्दोष है, जब तक उसके खिलाफ अपराध साबित न हो जाए। आम आदमी को छूनेवाला अपराध बर्दाश्त नहीं होना चाहिए। धनखड़ ने कहा- मैंने न्यायपालिका के क्षेत्र में 40 साल तक काम किया है। हमारे जज सर्वश्रेष्ठ जजों में से हैं। उपराष्ट्रपति ने कहा कि जैसे विधायिका कानूनी निर्णय नहीं दे सकती, क्योंकि वह न्यायपालिका का क्षेत्र है। वैसे ही न्यायपालिका को भी विधायिका के मामले में बचना चाहिए। उन्होंने अभिव्यक्ति और बहस की स्वतंत्रता को लोकतंत्र का आवश्यक तत्व बताया। साथ ही आगाह किया कि जब कोई भी खुद को सही और दूसरों को गलत माने तो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता विकृत हो जाती है। इससे पहले, उपराष्ट्रपति को बख्शी का तालाब एयरफोर्स स्टेशन पर राज्यपाल और CM योगी ने रिसीव किया। वहां से वह डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम टेक्निकल यूनिवर्सिटी (AKTU) न्यू कैंपस पहुंचे। वहां किताब का विमोचन किया। उपराष्ट्रपति राजभवन में लंच करने के बाद अपने सेक्रेटरी के पिता डॉ. एससी गुप्ता से मिलने उनके घर गए। उपराष्ट्रपति के लखनऊ दौरे के लाइव अपडेट्स के लिए ब्लॉग से गुजर जाएं…
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ गुरुवार को लखनऊ दौरे पर हैं। उन्होंने राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की किताब ‘चुनौतियां मुझे पसंद हैं’ का विमोचन किया। इस दौरान आतंकी हमले का जिक्र करते हुए कहा- पहलगाम में हमें चुनौती मिली है। लेकिन हमारे पास डायनामिक पीएम मोदी हैं। उन्होंने चुनौतियों को अवसर में बदला है। उन्होंने कहा- राज्यपाल महोदया, मेरे लिए घर में एक बड़ी चुनौती है। उस चुनौती को पार करने के लिए मैं राजभवन में भोजन के दौरान आपसे गुरुमंत्र लूंगा। अगर आपने मुझे चुनौती से उबरने का कोई गुरुमंत्र नहीं दिया, तो फिर मजबूरन मुझे एकलव्य बनाना पड़ेगा। उपराष्ट्रपति ने कहा कि आनंदीबेन नाम ही काफी है। किताब लॉन्च करने के लिए उन्होंने 1 मई यानी मजूदरों का दिन चुना। गुजरात इनके दिल में धड़कता है। वहीं, आनंदी बेन पटेल ने कहा- इस पुस्तक को लिखने में मेरे माता-पिता, बेटे-बेटी-बहू सभी का इनपुट है। इसकी कीमत 500 रुपए रखी है। किसी को फ्री में नहीं मिलेगी क्योंकि मैं अहमदाबादी हूं। एक ही कप में हम तीन लोग चाय पीते हैं। इस मौके पर सीएम योगी ने कहा- ये किताब समुद्र मंथन के बाद निकली है, ये किताब नहीं ग्रंथ है। इसमें राज्यपाल की जिंदगी का सार समाहित है। धनखड़ की चुनौतियों को लेकर कही 4 बड़ी बातें- विधायिका और न्यायपालिका का टकराव याद दिलाया धनखड़ ने पुस्तक विमोचन के दौरान 60 के दशक का उल्लेख करते हुए न्यायपालिका और विधायिका के टकराव की याद दिलाई। कहा कि संविधान के मूल ढांचे को बनाकर रखना बेहद आवश्यक है। हर व्यक्ति निर्दोष है, जब तक कि उस पर दोष साबित न हो। उपराष्ट्रपति ने न्याय और कानून व्यवस्था पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा- मेरा दिव्य मत है कि हर व्यक्ति निर्दोष है, जब तक उसके खिलाफ अपराध साबित न हो जाए। आम आदमी को छूनेवाला अपराध बर्दाश्त नहीं होना चाहिए। धनखड़ ने कहा- मैंने न्यायपालिका के क्षेत्र में 40 साल तक काम किया है। हमारे जज सर्वश्रेष्ठ जजों में से हैं। उपराष्ट्रपति ने कहा कि जैसे विधायिका कानूनी निर्णय नहीं दे सकती, क्योंकि वह न्यायपालिका का क्षेत्र है। वैसे ही न्यायपालिका को भी विधायिका के मामले में बचना चाहिए। उन्होंने अभिव्यक्ति और बहस की स्वतंत्रता को लोकतंत्र का आवश्यक तत्व बताया। साथ ही आगाह किया कि जब कोई भी खुद को सही और दूसरों को गलत माने तो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता विकृत हो जाती है। इससे पहले, उपराष्ट्रपति को बख्शी का तालाब एयरफोर्स स्टेशन पर राज्यपाल और CM योगी ने रिसीव किया। वहां से वह डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम टेक्निकल यूनिवर्सिटी (AKTU) न्यू कैंपस पहुंचे। वहां किताब का विमोचन किया। उपराष्ट्रपति राजभवन में लंच करने के बाद अपने सेक्रेटरी के पिता डॉ. एससी गुप्ता से मिलने उनके घर गए। उपराष्ट्रपति के लखनऊ दौरे के लाइव अपडेट्स के लिए ब्लॉग से गुजर जाएं…