जोधपुर में नकली नोट छापने वाली गैंग का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। आरोपियों के पास 7.50 लाख की फेक करेंसी भी मिली है। आरोपियों ने यूट्यूब देखकर नोट छापने का तरीका सीखा। शक न हो, इसके लिए आरोपियों ने खास तरह का पेपर मध्य प्रदेश से मंगवाया था। मंगलवार (29 अप्रैल) को मंडोर कृषि उपज मंडी में हुई कार्रवाई में 500 रुपए के 1483 नोट बरामद हुए। आरोपियों ने ये नोट 1 महीने में छाप लिए थे। दोनों बदमाशों को गिरफ्तार कर लिया। भास्कर ने पड़ताल की तो सोशल मीडिया पर भी नकली नोट छापने वाले कई गैंग एक्टिव थे। भास्कर रिपोर्टर ने ग्राहक बनकर संपर्क किया तो दावा किया- ऐसे नकली नोट देंगे, जिन्हें नोट गिनने वाली मशीन और एटीएम भी नहीं पकड़ सकता। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… मंडी में खपाते थे, हवाला में भी करते थे यूज नागौर के रहने वाले आरोपी श्रवण व्यास (28) और बाबूलाल प्रजापत (40) ने यूट्यूब से जाली नोट छापना सीखा। जोधपुर के मंडोर मंडी क्षेत्र में एक कमरा किराये पर लेकर नकली नोट छापने का सेटअप लगाया था। आरोपी 2 लाख के असली नोटों के बदले 10 लाख के जाली नोट बेचते थे। पूछताछ में सामने आया कि आरोपी बड़े व्यापारियों को फेक करेंसी सेल किया करते थे। मंडी में ही नकली करेंसी खपाते थे। बाहर के लोगों को नकली नोट नहीं बेचते थे। जिन व्यापारियों के पास बल्क में कैश आता था, उसमें फेक करेंसी एड कर सर्कुलेट की जा रही थी। यही नहीं हवाला में भी फेक करेंसी का यूज हो रहा था। हालांकि पुलिस अब इस जांच में जुटी है कि मंडोर कृषि व उपज मंडी व जीरा मंडी में ऐसे कौनसे व्यापारी थे जो इनके ग्राहक थे। साथ ही इस गैंग में और कौन-कौन शामिल हैं? एक आरोपी पहले भी छाप चुका नकली नोट सरदारपुरा एसएचओ शेषकरण चारण ने बताया कि बाबूलाल प्रजापत ने पहले भी नकली नोट छापे थे और मार्केट में खपा दिए थे। जल्दी पैसा कमाने के लालच में फिर से उसने नकली नोट छापने की टेक्निक यूट्यूब से सीखी। अपने साथ नागौर के श्रवण व्यास को साथ लिया। क्योंकि श्रवण को कंप्यूटर की अच्छी जानकारी थी, लेकिन वो भी क्रिमिनल माइंड है। वह पहले नकली घी के मामले में पकड़ा जा चुका है। आरोपियों ने बिल्कुल असली जैसे नोट छापने के लिए सोशल मीडिया पर भी फेक करेंसी के वीडियो देखे। इसके बाद पूरा सेटअप तैयार किया और मध्यप्रदेश से खास कागज भी मंगवाया। असली नोट जैसा पेपर यूज करते थे पुलिस ने मौके से नकली नाेट छापने वाले जो पेपर बरामद किए हैं, उनकी क्वालिटी असली नोटों के कागज जैसी ही थी। पेपर के साथ खास तरह की इंक व अन्य सामान भी बरामद किया गया है। आरोपी नोट छाप कर बंडल बना कर छोटी-छोटी क्वांटिटी में खपा देते थे। नोट का स्टॉक नहीं रखते थे, ताकि पकड़े भी जाएं तो पुलिस के हाथ ज्यादा नोट नहीं लगे। मंगलवार को 7 लाख के करीब नोटों की सप्लाई से पहले ही पुलिस ने कार्रवाई कर फेक करेंसी जब्त कर ली। एक ही दिन में छाप देते थे 5 लाख के नकली नोट पुलिस के अनुसार दोनों आरोपी दिन में 8 से 10 घंटे तक फेक करेंसी प्रिंट करते थे। इस हिसाब से वे एक दिन में 5 लाख तक के नकली नोट तैयार कर लेते थे। फिर करेंसी को मंडी में खपाने की प्लानिंग होती थी। आरोपी नकली नोट जिसे बेचते थे उसके साथ एक शर्त रखते थे कि इस करेंसी का इस्तेमाल बैंक, पेट्रोल पंप, मॉल में नहीं करोगे। आशंका है कि दोनों आरोपियों ने जीरा किसानों को सबसे ज्यादा चूना लगाया है। हालांकि, ऐसे कितने लोग हैं इसकी जानकारी जुटाई जा रही है। भास्कर पड़ताल : सोशल मीडिया पर फेक करेंसी बेचने वाली गैंग जोधपुर में मिले जाली नोटों की तरह ही सोशल मीडिया पर कई ऐसी गैंग सक्रिय हैं जो फेक करेंसी का कारोबार करती हैं। एक लाख के असली नोट के बदले असली जैसे दिखने वाले 7 लाख के नकली नोट देने का दावा करते हैं। गैंग ये तक दावा करते हैं नोट गिनने वाली मशीन और एटीएम भी इन नोटों को नहीं पकड़ सकते। इन वीडियो पर दिए गए नंबरों पर भास्कर ने कॉल किए तो खुलासा हुआ कि यह वीडियो महाराष्ट्र, गुजरात व दिल्ली से जारी हो रहे हैं। भास्कर रिपोर्टर ने नोटों के सौदे की बात की तो गैंग ने अपने ठिकाने पर बुलाया। साथ ही कहा कि वह महिलाओं के साथ डील नहीं करेंगे। साथ में पुरुष को लाना होगा। महाराष्ट्र में डील करने बुलाया, लोकेशन भेजी गैंग के सदस्य ने कहा- महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले के मल्कापुर पर आओ। वहां स्टेशन पर उसका आदमी मिलेगा और वह उनके ठिकाने पर लाएगा। गैंग के मेंबर ने लोकेशन भी भेजी। उसने दावा किया कि नोटों को मशीन में जांच परख कर ले जाना। इन नोटों की 12 महीने तक की गारंटी रहती है कुछ नहीं बिगड़ता। इसी तरह दूसरे नंबरों पर बात की तो सूरत रेलवे स्टेशन या फिर दिल्ली के रेलवे स्टेशन पर बुलाया गया। यह भी कहा गया कि राजस्थान में नोट सप्लाई हो जाएंगे, लेकिन एक बार हमारे ठिकाने आना होगा। विश्वास बनने के बाद जहां चाहे वहां नोटों की सप्लाई हो जाएगी। भास्कर ने करीब 50 नंबरों पर कॉल किया। इसमें से अधिकांश नंबर महाराष्ट्र, गुजरात और दिल्ली के थे। …. जोधपुर में नकली नोट की गैंग से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… जोधपुर में नकली नोट की गैंग, 500-500 की गडि्डयां मिलीं:2 लाख में बेच रहे थे 10 लाख कीमत की फेक करेंसी, 2 आरोपी हिरासत में पुलिस अधिकारियों के अनुसार आरोपियों ने मंडी की एक दुकान के ऊपर ही ठिकाना बना रखा था। अंदेशा है कि वे बड़े व्यापारियों को नकली नोट खपाने का प्रयास करते थे। गैंग 2 लाख रुपए के बदले में 500-500 के 10 लाख के जाली नोट देती थी। पूरी खबर पढ़ें…
जोधपुर में नकली नोट छापने वाली गैंग का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। आरोपियों के पास 7.50 लाख की फेक करेंसी भी मिली है। आरोपियों ने यूट्यूब देखकर नोट छापने का तरीका सीखा। शक न हो, इसके लिए आरोपियों ने खास तरह का पेपर मध्य प्रदेश से मंगवाया था। मंगलवार (29 अप्रैल) को मंडोर कृषि उपज मंडी में हुई कार्रवाई में 500 रुपए के 1483 नोट बरामद हुए। आरोपियों ने ये नोट 1 महीने में छाप लिए थे। दोनों बदमाशों को गिरफ्तार कर लिया। भास्कर ने पड़ताल की तो सोशल मीडिया पर भी नकली नोट छापने वाले कई गैंग एक्टिव थे। भास्कर रिपोर्टर ने ग्राहक बनकर संपर्क किया तो दावा किया- ऐसे नकली नोट देंगे, जिन्हें नोट गिनने वाली मशीन और एटीएम भी नहीं पकड़ सकता। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… मंडी में खपाते थे, हवाला में भी करते थे यूज नागौर के रहने वाले आरोपी श्रवण व्यास (28) और बाबूलाल प्रजापत (40) ने यूट्यूब से जाली नोट छापना सीखा। जोधपुर के मंडोर मंडी क्षेत्र में एक कमरा किराये पर लेकर नकली नोट छापने का सेटअप लगाया था। आरोपी 2 लाख के असली नोटों के बदले 10 लाख के जाली नोट बेचते थे। पूछताछ में सामने आया कि आरोपी बड़े व्यापारियों को फेक करेंसी सेल किया करते थे। मंडी में ही नकली करेंसी खपाते थे। बाहर के लोगों को नकली नोट नहीं बेचते थे। जिन व्यापारियों के पास बल्क में कैश आता था, उसमें फेक करेंसी एड कर सर्कुलेट की जा रही थी। यही नहीं हवाला में भी फेक करेंसी का यूज हो रहा था। हालांकि पुलिस अब इस जांच में जुटी है कि मंडोर कृषि व उपज मंडी व जीरा मंडी में ऐसे कौनसे व्यापारी थे जो इनके ग्राहक थे। साथ ही इस गैंग में और कौन-कौन शामिल हैं? एक आरोपी पहले भी छाप चुका नकली नोट सरदारपुरा एसएचओ शेषकरण चारण ने बताया कि बाबूलाल प्रजापत ने पहले भी नकली नोट छापे थे और मार्केट में खपा दिए थे। जल्दी पैसा कमाने के लालच में फिर से उसने नकली नोट छापने की टेक्निक यूट्यूब से सीखी। अपने साथ नागौर के श्रवण व्यास को साथ लिया। क्योंकि श्रवण को कंप्यूटर की अच्छी जानकारी थी, लेकिन वो भी क्रिमिनल माइंड है। वह पहले नकली घी के मामले में पकड़ा जा चुका है। आरोपियों ने बिल्कुल असली जैसे नोट छापने के लिए सोशल मीडिया पर भी फेक करेंसी के वीडियो देखे। इसके बाद पूरा सेटअप तैयार किया और मध्यप्रदेश से खास कागज भी मंगवाया। असली नोट जैसा पेपर यूज करते थे पुलिस ने मौके से नकली नाेट छापने वाले जो पेपर बरामद किए हैं, उनकी क्वालिटी असली नोटों के कागज जैसी ही थी। पेपर के साथ खास तरह की इंक व अन्य सामान भी बरामद किया गया है। आरोपी नोट छाप कर बंडल बना कर छोटी-छोटी क्वांटिटी में खपा देते थे। नोट का स्टॉक नहीं रखते थे, ताकि पकड़े भी जाएं तो पुलिस के हाथ ज्यादा नोट नहीं लगे। मंगलवार को 7 लाख के करीब नोटों की सप्लाई से पहले ही पुलिस ने कार्रवाई कर फेक करेंसी जब्त कर ली। एक ही दिन में छाप देते थे 5 लाख के नकली नोट पुलिस के अनुसार दोनों आरोपी दिन में 8 से 10 घंटे तक फेक करेंसी प्रिंट करते थे। इस हिसाब से वे एक दिन में 5 लाख तक के नकली नोट तैयार कर लेते थे। फिर करेंसी को मंडी में खपाने की प्लानिंग होती थी। आरोपी नकली नोट जिसे बेचते थे उसके साथ एक शर्त रखते थे कि इस करेंसी का इस्तेमाल बैंक, पेट्रोल पंप, मॉल में नहीं करोगे। आशंका है कि दोनों आरोपियों ने जीरा किसानों को सबसे ज्यादा चूना लगाया है। हालांकि, ऐसे कितने लोग हैं इसकी जानकारी जुटाई जा रही है। भास्कर पड़ताल : सोशल मीडिया पर फेक करेंसी बेचने वाली गैंग जोधपुर में मिले जाली नोटों की तरह ही सोशल मीडिया पर कई ऐसी गैंग सक्रिय हैं जो फेक करेंसी का कारोबार करती हैं। एक लाख के असली नोट के बदले असली जैसे दिखने वाले 7 लाख के नकली नोट देने का दावा करते हैं। गैंग ये तक दावा करते हैं नोट गिनने वाली मशीन और एटीएम भी इन नोटों को नहीं पकड़ सकते। इन वीडियो पर दिए गए नंबरों पर भास्कर ने कॉल किए तो खुलासा हुआ कि यह वीडियो महाराष्ट्र, गुजरात व दिल्ली से जारी हो रहे हैं। भास्कर रिपोर्टर ने नोटों के सौदे की बात की तो गैंग ने अपने ठिकाने पर बुलाया। साथ ही कहा कि वह महिलाओं के साथ डील नहीं करेंगे। साथ में पुरुष को लाना होगा। महाराष्ट्र में डील करने बुलाया, लोकेशन भेजी गैंग के सदस्य ने कहा- महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले के मल्कापुर पर आओ। वहां स्टेशन पर उसका आदमी मिलेगा और वह उनके ठिकाने पर लाएगा। गैंग के मेंबर ने लोकेशन भी भेजी। उसने दावा किया कि नोटों को मशीन में जांच परख कर ले जाना। इन नोटों की 12 महीने तक की गारंटी रहती है कुछ नहीं बिगड़ता। इसी तरह दूसरे नंबरों पर बात की तो सूरत रेलवे स्टेशन या फिर दिल्ली के रेलवे स्टेशन पर बुलाया गया। यह भी कहा गया कि राजस्थान में नोट सप्लाई हो जाएंगे, लेकिन एक बार हमारे ठिकाने आना होगा। विश्वास बनने के बाद जहां चाहे वहां नोटों की सप्लाई हो जाएगी। भास्कर ने करीब 50 नंबरों पर कॉल किया। इसमें से अधिकांश नंबर महाराष्ट्र, गुजरात और दिल्ली के थे। …. जोधपुर में नकली नोट की गैंग से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… जोधपुर में नकली नोट की गैंग, 500-500 की गडि्डयां मिलीं:2 लाख में बेच रहे थे 10 लाख कीमत की फेक करेंसी, 2 आरोपी हिरासत में पुलिस अधिकारियों के अनुसार आरोपियों ने मंडी की एक दुकान के ऊपर ही ठिकाना बना रखा था। अंदेशा है कि वे बड़े व्यापारियों को नकली नोट खपाने का प्रयास करते थे। गैंग 2 लाख रुपए के बदले में 500-500 के 10 लाख के जाली नोट देती थी। पूरी खबर पढ़ें…