मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू होने के बाद राज्य में शांति की बहाली के लिए, राज्य के 21 विधायकों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लेटर लिखा। इसमें लिखा गया कि राज्य में वो सरकार हो जिसका चुनाव जनता करे। लेटर पर 13 भाजपा विधायकों, 3 एनपीपी विधायकों, 3 नगा पीपुल्स फ्रंट विधायकों और विधानसभा के दो सदस्यों ने साइन किए हैं। इसमें कहा गया कि मणिपुर के लोगों ने बहुत उम्मीद और अपेक्षा के साथ राष्ट्रपति शासन को स्वीकार किया। हालांकि, तीन महीने होने जा रहे हैं, लेकिन अभी तक शांति और सामान्य स्थिति लाने के लिए कोई कार्रवाई नहीं देखी गई है। ‘राज्य में फिर से हिंसा हो सकती है’ राज्य के लोगों का मानना है कि हिंसा फिर से हो सकती है। कई नागरिक संगठन राष्ट्रपति शासन लागू करने के खिलाफ खुलकर सामने आए हैं और एक लोकप्रिय सरकार की स्थापना की मांग कर रहे हैं। विधायकों ने 10 अप्रैल को लिखे लेटर में कहा- इन संगठनों ने सार्वजनिक रैलियां, नुक्कड़ सभाएं आयोजित करना, आम जनता को भड़काना, सत्तारूढ़ विधायकों पर लोकप्रिय सरकार बनाने का दावा न करने का आरोप लगाना और राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करने के लिए जिम्मेदारी तय करना शुरू कर दिया है। 29 अप्रैल को गृह मंत्रालय को मिला लेटर एक विधायक ने बताया कि यह लेटर गृह मंत्रालय को 29 अप्रैल को मिला था और बुधवार को सामने आया। विधायकों ने यह भी कहा, ‘हमें लगता है कि मणिपुर में शांति और सामान्य स्थिति लाने के लिए ऐसी सरकार की स्थापना की जाए जिसे लोग पसंद करें, यही एकमात्र उपाय है।’ उन्होंने गृह मंत्री से अनुरोध किया कि मणिपुर के लोगों के हित में जल्द से जल्द लोकप्रिय सरकार स्थापित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं। हम आपको आश्वासन देते हैं कि लोकप्रिय सरकार की स्थापना के बाद हम शांति और सामान्य स्थिति लाने के लिए पूरी लगन और निष्ठा से काम करेंगे। कांग्रेस के अध्यक्ष केशम मेघचंद्र ने विधायकों की आलोचना की हालांकि, मणिपुर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष केशम मेघचंद्र सिंह ने राज्यपाल को दरकिनार कर केंद्र को पत्र लिखने के लिए 21 विधायकों की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि इन विधायकों ने राज्य में सरकार बनाने के लिए नियम-कानून को दरकिनार कर दिया, जो वर्तमान में राष्ट्रपति शासन के अधीन है। मेघचंद्र ने X पर एक पोस्ट में लिखा, ‘इन विधायकों को नई सरकार के गठन का दावा करने के लिए इंफाल में राजभवन जाना चाहिए था, लेकिन उन्होंने मणिपुर के राज्यपाल को लेटर लिखने की जगह प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृहमंत्री को लेटर लिखा। मणिपुर के लोग बदलाव चाहते हैं। मणिपुर के लोग एक नया विकल्प चाहते हैं।’ 2023 में मणिपुर में हुई जातीय हिंसा केंद्र ने 13 फरवरी को मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया था। मई 2023 से मैतेई और कुकी समूहों के बीच जातीय हिंसा में 250 से अधिक लोग मारे गए और हजारों लोग बेघर हो गए। मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह के इस्तीफा देने के बाद राष्ट्रपति शासन लगाया गया। राज्य विधानसभा का कार्यकाल 2027 तक था इसको निलंबित कर दिया गया था। मणिपुर हिंसा की 4 तस्वीरें… —————————— मणिपुर हिंसा से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस बीआर गवई ने रविवार को कहा कि संवैधानिक तरीकों से सभी समस्याओं का समाधान किया जा सकता है। जब संवाद होता है तो समाधान आसानी से मिल जाता है। पूरी खबर पढ़ें…
मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू होने के बाद राज्य में शांति की बहाली के लिए, राज्य के 21 विधायकों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लेटर लिखा। इसमें लिखा गया कि राज्य में वो सरकार हो जिसका चुनाव जनता करे। लेटर पर 13 भाजपा विधायकों, 3 एनपीपी विधायकों, 3 नगा पीपुल्स फ्रंट विधायकों और विधानसभा के दो सदस्यों ने साइन किए हैं। इसमें कहा गया कि मणिपुर के लोगों ने बहुत उम्मीद और अपेक्षा के साथ राष्ट्रपति शासन को स्वीकार किया। हालांकि, तीन महीने होने जा रहे हैं, लेकिन अभी तक शांति और सामान्य स्थिति लाने के लिए कोई कार्रवाई नहीं देखी गई है। ‘राज्य में फिर से हिंसा हो सकती है’ राज्य के लोगों का मानना है कि हिंसा फिर से हो सकती है। कई नागरिक संगठन राष्ट्रपति शासन लागू करने के खिलाफ खुलकर सामने आए हैं और एक लोकप्रिय सरकार की स्थापना की मांग कर रहे हैं। विधायकों ने 10 अप्रैल को लिखे लेटर में कहा- इन संगठनों ने सार्वजनिक रैलियां, नुक्कड़ सभाएं आयोजित करना, आम जनता को भड़काना, सत्तारूढ़ विधायकों पर लोकप्रिय सरकार बनाने का दावा न करने का आरोप लगाना और राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करने के लिए जिम्मेदारी तय करना शुरू कर दिया है। 29 अप्रैल को गृह मंत्रालय को मिला लेटर एक विधायक ने बताया कि यह लेटर गृह मंत्रालय को 29 अप्रैल को मिला था और बुधवार को सामने आया। विधायकों ने यह भी कहा, ‘हमें लगता है कि मणिपुर में शांति और सामान्य स्थिति लाने के लिए ऐसी सरकार की स्थापना की जाए जिसे लोग पसंद करें, यही एकमात्र उपाय है।’ उन्होंने गृह मंत्री से अनुरोध किया कि मणिपुर के लोगों के हित में जल्द से जल्द लोकप्रिय सरकार स्थापित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं। हम आपको आश्वासन देते हैं कि लोकप्रिय सरकार की स्थापना के बाद हम शांति और सामान्य स्थिति लाने के लिए पूरी लगन और निष्ठा से काम करेंगे। कांग्रेस के अध्यक्ष केशम मेघचंद्र ने विधायकों की आलोचना की हालांकि, मणिपुर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष केशम मेघचंद्र सिंह ने राज्यपाल को दरकिनार कर केंद्र को पत्र लिखने के लिए 21 विधायकों की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि इन विधायकों ने राज्य में सरकार बनाने के लिए नियम-कानून को दरकिनार कर दिया, जो वर्तमान में राष्ट्रपति शासन के अधीन है। मेघचंद्र ने X पर एक पोस्ट में लिखा, ‘इन विधायकों को नई सरकार के गठन का दावा करने के लिए इंफाल में राजभवन जाना चाहिए था, लेकिन उन्होंने मणिपुर के राज्यपाल को लेटर लिखने की जगह प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृहमंत्री को लेटर लिखा। मणिपुर के लोग बदलाव चाहते हैं। मणिपुर के लोग एक नया विकल्प चाहते हैं।’ 2023 में मणिपुर में हुई जातीय हिंसा केंद्र ने 13 फरवरी को मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया था। मई 2023 से मैतेई और कुकी समूहों के बीच जातीय हिंसा में 250 से अधिक लोग मारे गए और हजारों लोग बेघर हो गए। मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह के इस्तीफा देने के बाद राष्ट्रपति शासन लगाया गया। राज्य विधानसभा का कार्यकाल 2027 तक था इसको निलंबित कर दिया गया था। मणिपुर हिंसा की 4 तस्वीरें… —————————— मणिपुर हिंसा से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस बीआर गवई ने रविवार को कहा कि संवैधानिक तरीकों से सभी समस्याओं का समाधान किया जा सकता है। जब संवाद होता है तो समाधान आसानी से मिल जाता है। पूरी खबर पढ़ें…