सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा- ऑनर किलिंग के लिए कड़ी सजा मिलनी चाहिए। कोर्ट ने तमिलनाडु के 2003 के एक कपल की हत्या मामले में 11 दोषियों की सजा को बरकरार रखते हुए यह बात कही। कोर्ट ने घटना के बारे में बताया- पीड़ित मुरुगेसन और कन्नगी को गांव के लोगों के सामने जहर देकर मारा था। इस घिनौने अपराध के मास्टरमाइंड महिला के पिता और भाई थे। कन्नगी ‘वन्नियार’ समुदाय से थी, जबकि मुरुगेसन दलित था। मई 2003 में दोनों ने छिपकर शादी कर ली। इसी वजह से उनकी हत्या कर दी गई। जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की बेंच ने कहा- भारत में गहराई से जड़े जमाए जातिगत व्यवस्था के कारण यह अपराध हुआ। विडंबना है कि इस शर्मनाक हत्या को ‘ऑनर किलिंग’ कहा जाता है। साथ ही मद्रास हाईकोर्ट के जून 2022 के फैसले पर दखलअंदाजी से मना कर दिया, जिसमें आरोपियों की सजा को बरकरार रखा गया था। पुलिस अधिकारी अपराध में शामिल, पीड़ित को 5 लाख मुआवजा
सुप्रीम कोर्ट ने कहा- दो पुलिस अधिकारियों ने जानबूझकर मामले में FIR दर्ज नहीं की और अपराधियों को बचाने की कोशिश की। इस वजह से उन्हें भारतीय दंड संहिता की धारा 217 और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 के तहत दोषी ठहराया गया है। इनमें से एक की सजा घटाकर दो साल कर दी गई, जबकि दूसरे की उम्रकैद बरकरार रखी गई है। कोर्ट ने मुरुगेसन के परिवार को 5 लाख रुपए का अतिरिक्त मुआवजा देने का आदेश दिया, जो पहले दिए गए मुआवजे से अलग होगा। यह राशि तमिलनाडु सरकार को देनी होगी। 18 साल बाद ट्रायल पूरा हुआ
सुप्रीम कोर्ट ने बताया कि घटना 2003 की थी, लेकिन मुकदमा सितंबर 2021 में खत्म हुआ। मुरुगेसन के परिवार ने हाईकोर्ट का रुख किया, जिसके बाद अप्रैल 2004 में जांच CBI को सौंपी गई। यह दुर्भाग्यपूर्ण लेकिन सच्चाई है कि इस मामले में ट्रायल कोर्ट का फैसला आने में 18 साल लग गए। कोर्ट ने कहा- भारत में आपराधिक न्याय व्यवस्था में ट्रायल में देरी आम बात हो गई है। इसी वजह से गवाह मुकरने लगते हैं। फिर भी कोर्ट का कर्तव्य है कि उपलब्ध साक्ष्यों पर निष्पक्ष निर्णय दे। साथ ही आदेश दिया कि जो आरोपी जमानत पर हैं, वे दो हफ्ते के भीतर सरेंडर करें और बची हुई सजा पूरी करें। हत्या मामले में कुल 15 लोगों पर मुकदमा चला था, जिनमें से 13 दोषी पाए गए। इनमें 11 को हत्या का दोषी करार दिया गया। एक आरोपी को ट्रायल कोर्ट ने मौत की सजा सुनाई थी, जिसे हाईकोर्ट ने उम्रकैद में बदल दिया। ——————————— क्राइम से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… प्रेमी नहीं, पति के साथ बेटी ने रचा खूनी खेल:एक ही रात में 8 कत्ल, दोनों को सजा-ए-मौत 23 अगस्त 2001, हिसार में पूर्व विधायक रेलू राम पूनिया के घर 8 कत्ल हुए। 68 साल के बुजुर्ग से लेकर सवा महीने की बच्ची तक को 50 किलो की रॉड से कुचलकर मारा गया था। रेलू राम की बेटी सोनिया ने कबूल कर लिया था कि उसने ही संपत्ति के लिए अपने मां-बाप समेत 8 लोगों का कत्ल किया है, लेकिन पुलिस ये मानने को तैयार नहीं थी कि अकेली सोनिया सभी का कत्ल कर सकती है। पूरी खबर पढ़ें…
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा- ऑनर किलिंग के लिए कड़ी सजा मिलनी चाहिए। कोर्ट ने तमिलनाडु के 2003 के एक कपल की हत्या मामले में 11 दोषियों की सजा को बरकरार रखते हुए यह बात कही। कोर्ट ने घटना के बारे में बताया- पीड़ित मुरुगेसन और कन्नगी को गांव के लोगों के सामने जहर देकर मारा था। इस घिनौने अपराध के मास्टरमाइंड महिला के पिता और भाई थे। कन्नगी ‘वन्नियार’ समुदाय से थी, जबकि मुरुगेसन दलित था। मई 2003 में दोनों ने छिपकर शादी कर ली। इसी वजह से उनकी हत्या कर दी गई। जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की बेंच ने कहा- भारत में गहराई से जड़े जमाए जातिगत व्यवस्था के कारण यह अपराध हुआ। विडंबना है कि इस शर्मनाक हत्या को ‘ऑनर किलिंग’ कहा जाता है। साथ ही मद्रास हाईकोर्ट के जून 2022 के फैसले पर दखलअंदाजी से मना कर दिया, जिसमें आरोपियों की सजा को बरकरार रखा गया था। पुलिस अधिकारी अपराध में शामिल, पीड़ित को 5 लाख मुआवजा
सुप्रीम कोर्ट ने कहा- दो पुलिस अधिकारियों ने जानबूझकर मामले में FIR दर्ज नहीं की और अपराधियों को बचाने की कोशिश की। इस वजह से उन्हें भारतीय दंड संहिता की धारा 217 और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 के तहत दोषी ठहराया गया है। इनमें से एक की सजा घटाकर दो साल कर दी गई, जबकि दूसरे की उम्रकैद बरकरार रखी गई है। कोर्ट ने मुरुगेसन के परिवार को 5 लाख रुपए का अतिरिक्त मुआवजा देने का आदेश दिया, जो पहले दिए गए मुआवजे से अलग होगा। यह राशि तमिलनाडु सरकार को देनी होगी। 18 साल बाद ट्रायल पूरा हुआ
सुप्रीम कोर्ट ने बताया कि घटना 2003 की थी, लेकिन मुकदमा सितंबर 2021 में खत्म हुआ। मुरुगेसन के परिवार ने हाईकोर्ट का रुख किया, जिसके बाद अप्रैल 2004 में जांच CBI को सौंपी गई। यह दुर्भाग्यपूर्ण लेकिन सच्चाई है कि इस मामले में ट्रायल कोर्ट का फैसला आने में 18 साल लग गए। कोर्ट ने कहा- भारत में आपराधिक न्याय व्यवस्था में ट्रायल में देरी आम बात हो गई है। इसी वजह से गवाह मुकरने लगते हैं। फिर भी कोर्ट का कर्तव्य है कि उपलब्ध साक्ष्यों पर निष्पक्ष निर्णय दे। साथ ही आदेश दिया कि जो आरोपी जमानत पर हैं, वे दो हफ्ते के भीतर सरेंडर करें और बची हुई सजा पूरी करें। हत्या मामले में कुल 15 लोगों पर मुकदमा चला था, जिनमें से 13 दोषी पाए गए। इनमें 11 को हत्या का दोषी करार दिया गया। एक आरोपी को ट्रायल कोर्ट ने मौत की सजा सुनाई थी, जिसे हाईकोर्ट ने उम्रकैद में बदल दिया। ——————————— क्राइम से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… प्रेमी नहीं, पति के साथ बेटी ने रचा खूनी खेल:एक ही रात में 8 कत्ल, दोनों को सजा-ए-मौत 23 अगस्त 2001, हिसार में पूर्व विधायक रेलू राम पूनिया के घर 8 कत्ल हुए। 68 साल के बुजुर्ग से लेकर सवा महीने की बच्ची तक को 50 किलो की रॉड से कुचलकर मारा गया था। रेलू राम की बेटी सोनिया ने कबूल कर लिया था कि उसने ही संपत्ति के लिए अपने मां-बाप समेत 8 लोगों का कत्ल किया है, लेकिन पुलिस ये मानने को तैयार नहीं थी कि अकेली सोनिया सभी का कत्ल कर सकती है। पूरी खबर पढ़ें…