पहलगाम में आतंकी हमले में मारे गए बिहार के मनीष रंजन का पार्थिव शरीर गुरुवार को पश्चिम बंगाल के झालदा लाया गया। अंतिम यात्रा में शव को तिरंगे से लिपटा रहा। सैकड़ों की भीड़ ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी। लोगों ने भारत माता जय के नारे भी लगाए। मनीष बिहार के सासाराम के रहने वाले थे। पिछले 2 सालों से IB के हैदराबाद ऑफिस में सेक्शन ऑफिसर के पद पर पोस्टेड थे। झालदा में ही मनीष के पिता मंगलेश मिश्रा हाई स्कूल के प्रधानाध्यापक थे। कुछ साल पहले रिटायर हुए हैं। अब यहीं उनका परिवार रहता है। परिवार का कहना है कि उनकी पहली नौकरी एक्साइज इंस्पेक्टर के तौर पर थी, बाद में IB अफसर बने। हालांकि, सरकार की लिस्ट में उन्हें एक्साइज इंस्पेक्टर बताया गया है। अंतिम यात्रा की 2 तस्वीरें… सुबह 9 बजे रांची एयरपोर्ट पर दी गई श्रद्धांजलि मनीष का पार्थिव शरीर गुरुवार सुबह 9 बजे रांची एयरपोर्ट पहुंचा। एयरपोर्ट पर पूर्व सीएम बाबू लाल मरांडी ने मनीष को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद पार्थिव शरीर CRPF कैंप लाया गया, जहां जवानों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। उसके बाद परिवार एम्बुलेंस से पार्थिव शरीर को लेकर पश्चिम बंगाल स्थित झालदा के लिए निकल गए। परिजनों ने बताया कि मनीष की पत्नी जया बेसुध हैं। वो स्ट्रेचर पर हैं। पवन सिंह की पत्नी ज्योति ने मनीष के परिजनों से की मुलाकात भोजपुरी सुपरस्टार पवन सिंह की पत्नी ज्योति सिंह ने गुरुवार को रोहतास के करगहर स्थित अरुही गांव में मनीष के परिजनों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने आतंकियों पर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। ज्योति सिंह ने कहा- इस घटना की जितनी निंदा की जाए कम है। आतंकियों ने देश और सरकार को सीधे तौर पर चुनौती देने का काम किया है। ऐसे में जल्द से जल्द इनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए और इन आतंकवादियों को मुंहतोड़ जवाब देना चाहिए, जिससे फिर इस तरह की घटनाएं दोबारा ना हो। ऐसा करने से पहले आतंकवादी सौ बार सोचे। ‘पत्नी-बच्चों को मनीष ने बचाया’ मनीष के चाचा आलोक प्रियदर्शी ने बताया कि घटना की जानकारी के बाद मुश्किल से बहू जया से बात हुई। वह कुछ बोल पाने की स्थिति में नहीं थी। बताया कि, ‘अंतिम वक्त तक मनीष ने उसकी और बच्चों की जान बचाने की कोशिश की। फायरिंग की आवाज सुनते ही कहा कि, तुमलोग जल्दी कहीं छिप जाओ। उसके बाद आतंकियों ने नाम पूछा और मनीष को गोली मार दी।’ पूरा परिवार कश्मीर घूमने गया था। 30 अप्रैल को औरंगाबाद आने वाले थे मनीष मनीष रोहतास के अरूहीं गांव के मूल निवासी थे। वे हैदराबाद में आईबी अधिकारी थे। 30 अप्रैल को औरंगाबाद के बेलाई में रिश्तेदार की शादी में आने वाले थे। अरूहीं में चाचा-चाची रहते हैं। तीन भाई में मनीष बड़े थे। मंझले विनीत झारखंड में उत्पाद इंस्पेक्टर हैं। छोटा राहुल अंबिकापुर में फूड इंस्पेक्टर हैं। भाई विनीत ने बताया कि उन्हें कश्मीर से वैष्णो देवी जाना था। हम भी वहां के लिए निकले पर मंगलवार दोपहर मनीष की मौत की खबर मिली। हम रास्ते से लौट आए। आतंकियों के खिलाफ एक्शन ले सरकार मनीष के बचपन के दोस्त राजीव उनयन बोले- ‘ये कायराना हरकत है। सरकार को सख्त एक्शन लेते हुए आतंकियों को नेस्तनाबूद कर देना चाहिए।’ मनीष के बचपन के एक अन्य दोस्त विशाल सिंह ने बताया कि ‘टीवी पर हमले की खबर देखी, लेकिन मनीष के शहीद होने की जानकारी उनके चाचा से मिली।’ चाचा बोले- आतंकियों को खत्म कर देना चाहिए मनीष के चाचा आलोक कुमार ने बताया- ‘मनीष की शादी इलाहाबाद में साल 2010 में हुई थी। उनकी एक बेटी और बेटा है। मुझे मंगलवार रात 9 बजे टीवी से आतंकी हमले की जानकारी मिली। हम न्याय चाहते हैं। सरकार को आतंकियों को खत्म कर देना चाहिए।’ मनीष के परिवार के एक सदस्य ने कहा- मैं प्रधानमंत्री जी से मांग करता हूं कि आतंकवादियों को कड़ा मुंह तोड़ जवाब दिया जाए। बार-बार आतंकवादी घटनाएं होती हैं, लेकिन कोई ठोस एक्शन नहीं लिया जाता है। अगर इसके लिए पाकिस्तान जिम्मेदार है तो सरकार को उस पर भी आक्रमण करना चाहिए।’ 2010 में हुई थी शादी, 12 साल का बड़ा बेटा मनीष ने शुरुआती पढ़ाई सासाराम में ही की थी। 2008 में रांची IB में जॉब लगी। 2010 में मनीष की शादी हुई थी। 12 साल का बड़ा बेटा है और 8 साल की लड़की है। मनीष के चाचा आलोक प्रियदर्शी ने बताया- ‘मैं भी मनीष के परिवार के साथ कश्मीर जाने वाला था, लेकिन तबीयत खराब होने की वजह से नहीं जा सका।’
———————– ये खबर भी पढ़िए… मनीष की पत्नी ने आर्मी जवानों को समझा आतंकवादी:पहलगाम अटैक के बाद जवानों से बच्चों को छोड़ने की गुहार लगाने लगीं; VIDEO जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमले में 27 लोगों की मौत हो गई। बिहार के रहने वाले IB अफसर मनीष रंजन की भी आतंकियों ने गोली मारकर हत्या कर दी। मनीष पिछले 2 सालों से IB के हैदराबाद ऑफिस में सेक्शन ऑफिसर के पद पर पोस्टेड थे। हमले के बाद का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। इसमें मनीष की पत्नी और बच्चे दिखाई दे रहे हैं। पहलगाम अटैक के बाद जब भारतीय सेना के जवान बैसरन घाटी पहुंचे तो मनीष की पत्नी ने उन्हें आतंकवादी समझ लिया। पूरी खबर पढ़िए
पहलगाम में आतंकी हमले में मारे गए बिहार के मनीष रंजन का पार्थिव शरीर गुरुवार को पश्चिम बंगाल के झालदा लाया गया। अंतिम यात्रा में शव को तिरंगे से लिपटा रहा। सैकड़ों की भीड़ ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी। लोगों ने भारत माता जय के नारे भी लगाए। मनीष बिहार के सासाराम के रहने वाले थे। पिछले 2 सालों से IB के हैदराबाद ऑफिस में सेक्शन ऑफिसर के पद पर पोस्टेड थे। झालदा में ही मनीष के पिता मंगलेश मिश्रा हाई स्कूल के प्रधानाध्यापक थे। कुछ साल पहले रिटायर हुए हैं। अब यहीं उनका परिवार रहता है। परिवार का कहना है कि उनकी पहली नौकरी एक्साइज इंस्पेक्टर के तौर पर थी, बाद में IB अफसर बने। हालांकि, सरकार की लिस्ट में उन्हें एक्साइज इंस्पेक्टर बताया गया है। अंतिम यात्रा की 2 तस्वीरें… सुबह 9 बजे रांची एयरपोर्ट पर दी गई श्रद्धांजलि मनीष का पार्थिव शरीर गुरुवार सुबह 9 बजे रांची एयरपोर्ट पहुंचा। एयरपोर्ट पर पूर्व सीएम बाबू लाल मरांडी ने मनीष को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद पार्थिव शरीर CRPF कैंप लाया गया, जहां जवानों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। उसके बाद परिवार एम्बुलेंस से पार्थिव शरीर को लेकर पश्चिम बंगाल स्थित झालदा के लिए निकल गए। परिजनों ने बताया कि मनीष की पत्नी जया बेसुध हैं। वो स्ट्रेचर पर हैं। पवन सिंह की पत्नी ज्योति ने मनीष के परिजनों से की मुलाकात भोजपुरी सुपरस्टार पवन सिंह की पत्नी ज्योति सिंह ने गुरुवार को रोहतास के करगहर स्थित अरुही गांव में मनीष के परिजनों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने आतंकियों पर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। ज्योति सिंह ने कहा- इस घटना की जितनी निंदा की जाए कम है। आतंकियों ने देश और सरकार को सीधे तौर पर चुनौती देने का काम किया है। ऐसे में जल्द से जल्द इनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए और इन आतंकवादियों को मुंहतोड़ जवाब देना चाहिए, जिससे फिर इस तरह की घटनाएं दोबारा ना हो। ऐसा करने से पहले आतंकवादी सौ बार सोचे। ‘पत्नी-बच्चों को मनीष ने बचाया’ मनीष के चाचा आलोक प्रियदर्शी ने बताया कि घटना की जानकारी के बाद मुश्किल से बहू जया से बात हुई। वह कुछ बोल पाने की स्थिति में नहीं थी। बताया कि, ‘अंतिम वक्त तक मनीष ने उसकी और बच्चों की जान बचाने की कोशिश की। फायरिंग की आवाज सुनते ही कहा कि, तुमलोग जल्दी कहीं छिप जाओ। उसके बाद आतंकियों ने नाम पूछा और मनीष को गोली मार दी।’ पूरा परिवार कश्मीर घूमने गया था। 30 अप्रैल को औरंगाबाद आने वाले थे मनीष मनीष रोहतास के अरूहीं गांव के मूल निवासी थे। वे हैदराबाद में आईबी अधिकारी थे। 30 अप्रैल को औरंगाबाद के बेलाई में रिश्तेदार की शादी में आने वाले थे। अरूहीं में चाचा-चाची रहते हैं। तीन भाई में मनीष बड़े थे। मंझले विनीत झारखंड में उत्पाद इंस्पेक्टर हैं। छोटा राहुल अंबिकापुर में फूड इंस्पेक्टर हैं। भाई विनीत ने बताया कि उन्हें कश्मीर से वैष्णो देवी जाना था। हम भी वहां के लिए निकले पर मंगलवार दोपहर मनीष की मौत की खबर मिली। हम रास्ते से लौट आए। आतंकियों के खिलाफ एक्शन ले सरकार मनीष के बचपन के दोस्त राजीव उनयन बोले- ‘ये कायराना हरकत है। सरकार को सख्त एक्शन लेते हुए आतंकियों को नेस्तनाबूद कर देना चाहिए।’ मनीष के बचपन के एक अन्य दोस्त विशाल सिंह ने बताया कि ‘टीवी पर हमले की खबर देखी, लेकिन मनीष के शहीद होने की जानकारी उनके चाचा से मिली।’ चाचा बोले- आतंकियों को खत्म कर देना चाहिए मनीष के चाचा आलोक कुमार ने बताया- ‘मनीष की शादी इलाहाबाद में साल 2010 में हुई थी। उनकी एक बेटी और बेटा है। मुझे मंगलवार रात 9 बजे टीवी से आतंकी हमले की जानकारी मिली। हम न्याय चाहते हैं। सरकार को आतंकियों को खत्म कर देना चाहिए।’ मनीष के परिवार के एक सदस्य ने कहा- मैं प्रधानमंत्री जी से मांग करता हूं कि आतंकवादियों को कड़ा मुंह तोड़ जवाब दिया जाए। बार-बार आतंकवादी घटनाएं होती हैं, लेकिन कोई ठोस एक्शन नहीं लिया जाता है। अगर इसके लिए पाकिस्तान जिम्मेदार है तो सरकार को उस पर भी आक्रमण करना चाहिए।’ 2010 में हुई थी शादी, 12 साल का बड़ा बेटा मनीष ने शुरुआती पढ़ाई सासाराम में ही की थी। 2008 में रांची IB में जॉब लगी। 2010 में मनीष की शादी हुई थी। 12 साल का बड़ा बेटा है और 8 साल की लड़की है। मनीष के चाचा आलोक प्रियदर्शी ने बताया- ‘मैं भी मनीष के परिवार के साथ कश्मीर जाने वाला था, लेकिन तबीयत खराब होने की वजह से नहीं जा सका।’
———————– ये खबर भी पढ़िए… मनीष की पत्नी ने आर्मी जवानों को समझा आतंकवादी:पहलगाम अटैक के बाद जवानों से बच्चों को छोड़ने की गुहार लगाने लगीं; VIDEO जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमले में 27 लोगों की मौत हो गई। बिहार के रहने वाले IB अफसर मनीष रंजन की भी आतंकियों ने गोली मारकर हत्या कर दी। मनीष पिछले 2 सालों से IB के हैदराबाद ऑफिस में सेक्शन ऑफिसर के पद पर पोस्टेड थे। हमले के बाद का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। इसमें मनीष की पत्नी और बच्चे दिखाई दे रहे हैं। पहलगाम अटैक के बाद जब भारतीय सेना के जवान बैसरन घाटी पहुंचे तो मनीष की पत्नी ने उन्हें आतंकवादी समझ लिया। पूरी खबर पढ़िए