आठ हजार करोड़ की ठगी में राजस्थानियों के करोड़ों रुपए डूब गए। हैदराबाद की फाल्कन इनवॉइस डिस्काउंटिंग कंपनी के झांसे में आकर प्रदेश के 98 लोगों ने मोटी रकम गंवाई है। जोधपुर के एक पीड़ित बिजनेसमैन ने 18 अप्रैल को रिपोर्ट दर्ज कराई तो एक-एक कर जयपुर, उदयपुर, पाली, झुंझुनूं सहित कई जिलों से अबतक 98 पीड़ित सामने आए। किसी ने क्रेडिट कार्ड से तो किसी ने भविष्य निधि (पीएफ) का पैसा कंपनी में इन्वेस्ट किया था। कंपनी ने पैसा निवेश करने वालों को 17 से 24 प्रतिशत ब्याज के साथ मूल लौटाने का वादा किया था। अफसोस ऐसा नहीं हुआ और कंपनी का मालिक और ठगी का मास्टरमाइंड पूरा पैसा लेकर दुबई फरार हो गया। भास्कर ने पीड़ितों से बात कर जाना कि वो इस ठगी का शिकार कैसे बने? पढ़िए ये रिपोर्ट… केस-1 : जोधपुर का बिजनेसमैन, गंवाए करीब 38 लाख रुपए
जोधपुर के सरदारपुरा निवासी बिजनेसमैन आदित्य लोढ़ा के 37 लाख 90 हजार रुपए डूबे हैं। आदित्य लोढ़ा ने बताया कि उन्होंने ऑनलाइन ही फाल्कन इनवॉइस डिस्काउंटिंग कंपनी के बारे में सुना था। कंपनी के बारे में ऑनलाइन सर्च किया। कंपनी ने अपनी वेबसाइट पर बताया था कि टाटा, पीरामल, अमेजन, डी-मार्ट जैसी देश की नामी 30 कंपनियां उसकी क्लाइंट हैं। इससे मुझे विश्वास हो गया कि कंपनी की अच्छी मार्केट है। फोन नंबर पर संपर्क किया तब जानकारी दी गई कि यह कंपनी एक व्यक्ति से 50 हजार से 9 लाख तक ही निवेश करवाती है। एक निश्चित टाइम में 17 व 24 प्रतिशत ब्याज के साथ मूल रकम रिटर्न कर देती है। शुरुआत में 50 हजार रुपए का निवेश किया। 10 दिन बाद ही अच्छे ब्याज के साथ पैसे वापस खाते में आ गए। इससे मुझे भरोसा बढ़ गया। अक्टूबर से दिसंबर तक तीन चार ट्रांजैक्शन में 37 लाख 90 हजार रुपए का निवेश कर दिया। यह पैसा फरवरी में रिटर्न होना था। जब पैसा रिटर्न नहीं हुआ तब फ्रॉड का शक हुआ। हैदराबाद पहुंचा तब तक कंपनी का ऑफिस बंद हो चुका था। सभी वर्कर वहां से जा चुके थे। कंपनी ने सर्वर भी डाउन कर दिया था। मार्च में हैदराबाद डीसीपी, इकोनॉमिक ऑफेंस विंग, साइबर थाने के चक्कर लगाए। तब पता चला कि कंपनी का मालिक पूरा पैसा समेटकर दुबई भाग चुका है। इसके बाद कोर्ट के जरिए जोधपुर के सरदारपुरा थाने में मुकदमा दर्ज कराया है। केस- 2 : प्राइवेट नौकरी में बचत के पैसे इन्वेस्ट किए, 15 लाख डूबे
झुंझुनूं के परमवीर वर्मा प्राइवेट नौकरी करते हैं। उन्होंने बताया कि उसका एक दोस्त इस कंपनी में पैसा इन्वेस्ट करता था। उसे अच्छा रिटर्न मिलता देख मैंने भी अगस्त 2024 में 15 लाख रुपए कंपनी में इन्वेस्ट कर दिए। कुछ पैसे उधार लिए थे तो कुछ मेरी सेविंग के थे। फरवरी में मैच्योरिटी डेट थी। कंपनी को 22 प्रतिशत ब्याज के साथ पैसा रिटर्न करना था। फरवरी में पता चला कि सब कुछ बंद करके कंपनी भाग चुकी है। परमवीर ने बताया कि कंपनी के फ्रॉड के बाद सदमे में आए पिता हॉस्पिटलाइज्ड हैं। हमारी मेहनत की पूरी पूंजी डूब चुकी है। केस-3 : पीएफ से निकलवाकर पैसे इन्वेस्ट किए
जयपुर के परमागम जैन बाड़मेर में वेदांता कंपनी में असिस्टेंट मैनेजर हैं। उन्होंने बताया कि हैदराबाद की इस कंपनी में करीब 13 लाख रुपए पीएफ से निकलवाकर निवेश किए थे। जनवरी में खबर आई कि कंपनी ने अपना सर्वर डाउन कर दिया है। कंपनी का डायरेक्टर और उसके कर्मचारी सभी गायब हैं। यह हमारे लिए किसी सदमे से कम नहीं था। इसी तरह जयपुर के सरजीत कुमार यादव, सीए कनिका जैन, ओम प्रकाश अग्रवाल, विशिक टाक, अजय मित्तल, आयुष चौपड़ा, नवीन अग्रवाल, दीपेश जैन, भरतपुर के गौरव जैन, कोटा के दिवाकर पोरवाल, अजमेर के भूपेंद्र माहापात्रा सहित प्रदेशभर के 98 लोग हैं, जिनके साथ करोड़ों की ठगी हुई है। अब समझते हैं कैसे हुई हजारों करोड़ की ठगी? सिक्योरिटी कंपनी को बनाया ठगी का अड्डा, बड़ी कंपनियों के लोगो लगाए
फाल्कन इनवॉइस डिस्काउंटिंग कंपनी के मालिक अमरदीप कुमार ने बड़ी चालाकी से इस ठगी को अंजाम दिया। दरअसल, हैदराबाद में कैपिटल प्रोटेक्शन फोर्स प्राइवेट लिमिटेड के नाम से एक सिक्योरिटी कंपनी रजिस्टर्ड है। यह सिक्योरिटी गार्ड प्रोवाइड करवाती थी, इसे फॉल्कन ग्रुप के नाम से भी जाना जाता है। अमरदीप ने इसी कंपनी की सिस्टर कंपनी बनाई। उस कंपनी का नाम रखा- फाल्कन इनवॉइस डिस्काउंटिंग प्लेटफॉर्म। मास्टरमाइंड अमरदीप ने कंपनी की एक वेबसाइट बनाई। उसमें देश की बड़ी ब्लू चीप कंपनियों यानी ऐसी कंपनियां जिनका देश में मजबूत वित्तीय रिकॉर्ड है। उनके लोगो का इस्तेमाल किया। जैसे- पीरामल, एनसीसी, टाटा, फ्लिपकार्ट, अमेजन, यूनीलीवर, बिग बास्केट, पॉलिकेब, कोका कोला, पीडिलाइट, क्रोमा, विप्रो, वेदांता, डीपी वर्ल्ड, ओयो, इन्फोसिस आदि। ठगी के लिए बनाया इन्वेस्टमेंट प्लान : इनवॉइस डिस्काउंटिंग का दिया झांसा
ब्लू चिप कंपनियों को माल सप्लाई करने वाली कंपनियों के नाम पर इन्वेस्ट करवाया। अच्छे ब्याज का लालच दिया। ठग ने वेबसाइट पर बताया कि उसकी कंपनी देश की नामी कंपनियों के लिए इनवॉइस डिस्काउंटिंग का काम करती है। इन बड़ी कंपनियों में रॉ मेटिरियल सप्लाई करने वाली कंपनियों को तुरंत भुगतान नहीं मिलता। बड़ी कंपनियां माल बिकने के बाद या कुछ अंतराल के बाद ही उनको पेमेंट करती हैं। भुगतान के इस गैप के दौरान सप्लाई कंपनियों को पैसे की सख्त जरूरत रहती है। ऐसे में सप्लाई कंपनियां कुछ समय के लिए इनवॉइस डिस्काउंटिंग कंपनियों पर निर्भर रहती हैं। अगर इन सप्लाई कंपनियों के अकाउंट में पैसा डिपॉजिट किया जाए तो वह बड़ी कंपनियों से भुगतान मिलने पर 17 से 24 प्रतिशत ब्याज के साथ मूल रकम लौटाती हैं। ठग ने लोगों को झांसा दिया कि उसकी कंपनी भी यही कामकाज करती है जिससे वह अपने पैसे पर 24% का मोटा ब्याज कमाती है। कोई भी ग्राहक हमारी कंपनी के जरिए कम से कम 50 और अधिकतम 9 लाख रुपए इन्वेस्ट कर मोटा ब्याज कमा सकता है। देश भर में ठगी, बनाए वॉट्सऐप ग्रुप, क्रेडिट कार्ड से लिया पैसा
अमरदीप ने लोगों को झांसे में लेने के लिए कंपनी में निवेश करने वालों का वॉट्सऐप ग्रुप बनाया। अलग-अलग स्टेट के नाम से बने ग्रुप में हजारों लोगों को जोड़ा। राजस्थान, यूपी, महाराष्ट्र, बंगाल, छत्तीसगढ़, केरल, दिल्ली एनसीआर, एमपी, हरियाणा, तेलंगाना, कर्नाटक, लद्दाख, बिहार, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश, असम आदि के नाम से वॉट्सऐप ग्रुप बनाए थे। उन्हें इन्वेस्टमेंट बढ़ाने का लालच दिया। जिनके पास खुद का पैसा नहीं होता था, उन्हें क्रेडिट कार्ड से पैसा लगाने का लालच दिया जाता था। क्रेडिट कार्ड से पैसे जमा करवाने पर धारक को कैशबैक और क्रेडिट टाइम का ऑफर मिलता है। ऐसे में हजारों निवेशकों ने आसानी से पैसे 17 से 24 प्रतिशत ब्याज के लालच में क्रेडिट कार्ड से निवेश कर बैठे। फाल्कन इनवॉइस डिस्काउंटिंग कंपनी ने ‘वर्ल्ड लाइन इ पेमेंट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड’ में क्रेडिट कार्ड के माध्यम से पैसा लिया। एसबीआई, एचडीएफसी, आईडीएफसी, पीएनबी, एयू, कॉटेक, एचएसबीसी सहित कई नामी बैंकों ने क्रेडिट कार्ड से इस गेटवे कंपनी को पैसा लेने की परमिशन दी। कंपनी 2021 में खुली थी, लेकिन इसकी केवाईसी बैंको ने एक ही बार की, जबकि हर 6 महीने में केवाईसी जरूरी होती है। इससे बैंक यह पता लगाते हैं कि कंपनी जो पैसा ले रही है, वह कहां जा रहा है। मालिक के पास खुद का चार्टर, लग्जरी गाड़ियां
हैदराबाद की इस कंपनी के मालिक अमरदीप कुमार के पास खुद का चार्टर प्लेन, महंगी व लग्जरी गाड़ियों का काफिला है। 8 मार्च को ईडी ने 15 करोड़ का प्राइवेट जेट हैदराबाद एयरपोर्ट से जब्त किया था। ईडी का मानना है कि इसी जेट से अमरदीप 22 जनवरी को दुबई भागा था। अधिकारियों के मुताबिक, फाल्कन ग्रुप की पोंजी योजना का उपयोग जेट खरीदने में किया गया। क्या है पोंजी स्कीम स्कैम और इससे कैसे बचें?
साइबर एक्सपर्ट अंकित चौधरी के अनुसार ऐसी स्कीम जो धरातल पर कहीं हो ही नहीं उसमें बड़ा फायदा दिखा कर आम लोगों को झांसे में लिया जाता है। इसे पोंजी स्कीम स्कैम कहते हैं। यह साइबर ठगी का नया ट्रेंड हैं। पोंजी स्कीम यानि फर्जी स्कीम को ऑनलाइन लॉन्च कर आम जनता को 22 से 25 प्रतिशत ब्याज का लालच देकर निवेश करवाया जा रहा है। राजस्थान में रोज तीन से चार कंपनियां पोंजी स्कीम लेकर आती हैं। हर दिन एक दो कंपनियां बड़ी रकम का घोटाला कर भाग जाती हैं। बड़े रिटर्न के झांसे से बचना चाहिए। साइबर एक्सपर्ट मुकेश चौधरी ने बताया कि पोंजी स्कीम के जरिए ठगी करने वाले सेलिब्रिटी और नेताओं को अपना इन्वेस्टर बताकर लोगों को झांसे में लेते हैं। यहां तक कि प्राइम मिनिस्टर, फाइनेंस मिनिस्टर तक के फोटो और डीप फेक वीडियो का यूज किया जा रहा है। ठग आम पब्लिक को बताते हैं कि वो AI टेक्नोलॉजी से आपका पैसा चार से पांच गुना कर देंगे। लेकिन हकीकत में यह फ्रॉड है। निवेश करने के ऐसे प्लेटफॉर्म और ऑफर्स से बचना चाहिए।
आठ हजार करोड़ की ठगी में राजस्थानियों के करोड़ों रुपए डूब गए। हैदराबाद की फाल्कन इनवॉइस डिस्काउंटिंग कंपनी के झांसे में आकर प्रदेश के 98 लोगों ने मोटी रकम गंवाई है। जोधपुर के एक पीड़ित बिजनेसमैन ने 18 अप्रैल को रिपोर्ट दर्ज कराई तो एक-एक कर जयपुर, उदयपुर, पाली, झुंझुनूं सहित कई जिलों से अबतक 98 पीड़ित सामने आए। किसी ने क्रेडिट कार्ड से तो किसी ने भविष्य निधि (पीएफ) का पैसा कंपनी में इन्वेस्ट किया था। कंपनी ने पैसा निवेश करने वालों को 17 से 24 प्रतिशत ब्याज के साथ मूल लौटाने का वादा किया था। अफसोस ऐसा नहीं हुआ और कंपनी का मालिक और ठगी का मास्टरमाइंड पूरा पैसा लेकर दुबई फरार हो गया। भास्कर ने पीड़ितों से बात कर जाना कि वो इस ठगी का शिकार कैसे बने? पढ़िए ये रिपोर्ट… केस-1 : जोधपुर का बिजनेसमैन, गंवाए करीब 38 लाख रुपए
जोधपुर के सरदारपुरा निवासी बिजनेसमैन आदित्य लोढ़ा के 37 लाख 90 हजार रुपए डूबे हैं। आदित्य लोढ़ा ने बताया कि उन्होंने ऑनलाइन ही फाल्कन इनवॉइस डिस्काउंटिंग कंपनी के बारे में सुना था। कंपनी के बारे में ऑनलाइन सर्च किया। कंपनी ने अपनी वेबसाइट पर बताया था कि टाटा, पीरामल, अमेजन, डी-मार्ट जैसी देश की नामी 30 कंपनियां उसकी क्लाइंट हैं। इससे मुझे विश्वास हो गया कि कंपनी की अच्छी मार्केट है। फोन नंबर पर संपर्क किया तब जानकारी दी गई कि यह कंपनी एक व्यक्ति से 50 हजार से 9 लाख तक ही निवेश करवाती है। एक निश्चित टाइम में 17 व 24 प्रतिशत ब्याज के साथ मूल रकम रिटर्न कर देती है। शुरुआत में 50 हजार रुपए का निवेश किया। 10 दिन बाद ही अच्छे ब्याज के साथ पैसे वापस खाते में आ गए। इससे मुझे भरोसा बढ़ गया। अक्टूबर से दिसंबर तक तीन चार ट्रांजैक्शन में 37 लाख 90 हजार रुपए का निवेश कर दिया। यह पैसा फरवरी में रिटर्न होना था। जब पैसा रिटर्न नहीं हुआ तब फ्रॉड का शक हुआ। हैदराबाद पहुंचा तब तक कंपनी का ऑफिस बंद हो चुका था। सभी वर्कर वहां से जा चुके थे। कंपनी ने सर्वर भी डाउन कर दिया था। मार्च में हैदराबाद डीसीपी, इकोनॉमिक ऑफेंस विंग, साइबर थाने के चक्कर लगाए। तब पता चला कि कंपनी का मालिक पूरा पैसा समेटकर दुबई भाग चुका है। इसके बाद कोर्ट के जरिए जोधपुर के सरदारपुरा थाने में मुकदमा दर्ज कराया है। केस- 2 : प्राइवेट नौकरी में बचत के पैसे इन्वेस्ट किए, 15 लाख डूबे
झुंझुनूं के परमवीर वर्मा प्राइवेट नौकरी करते हैं। उन्होंने बताया कि उसका एक दोस्त इस कंपनी में पैसा इन्वेस्ट करता था। उसे अच्छा रिटर्न मिलता देख मैंने भी अगस्त 2024 में 15 लाख रुपए कंपनी में इन्वेस्ट कर दिए। कुछ पैसे उधार लिए थे तो कुछ मेरी सेविंग के थे। फरवरी में मैच्योरिटी डेट थी। कंपनी को 22 प्रतिशत ब्याज के साथ पैसा रिटर्न करना था। फरवरी में पता चला कि सब कुछ बंद करके कंपनी भाग चुकी है। परमवीर ने बताया कि कंपनी के फ्रॉड के बाद सदमे में आए पिता हॉस्पिटलाइज्ड हैं। हमारी मेहनत की पूरी पूंजी डूब चुकी है। केस-3 : पीएफ से निकलवाकर पैसे इन्वेस्ट किए
जयपुर के परमागम जैन बाड़मेर में वेदांता कंपनी में असिस्टेंट मैनेजर हैं। उन्होंने बताया कि हैदराबाद की इस कंपनी में करीब 13 लाख रुपए पीएफ से निकलवाकर निवेश किए थे। जनवरी में खबर आई कि कंपनी ने अपना सर्वर डाउन कर दिया है। कंपनी का डायरेक्टर और उसके कर्मचारी सभी गायब हैं। यह हमारे लिए किसी सदमे से कम नहीं था। इसी तरह जयपुर के सरजीत कुमार यादव, सीए कनिका जैन, ओम प्रकाश अग्रवाल, विशिक टाक, अजय मित्तल, आयुष चौपड़ा, नवीन अग्रवाल, दीपेश जैन, भरतपुर के गौरव जैन, कोटा के दिवाकर पोरवाल, अजमेर के भूपेंद्र माहापात्रा सहित प्रदेशभर के 98 लोग हैं, जिनके साथ करोड़ों की ठगी हुई है। अब समझते हैं कैसे हुई हजारों करोड़ की ठगी? सिक्योरिटी कंपनी को बनाया ठगी का अड्डा, बड़ी कंपनियों के लोगो लगाए
फाल्कन इनवॉइस डिस्काउंटिंग कंपनी के मालिक अमरदीप कुमार ने बड़ी चालाकी से इस ठगी को अंजाम दिया। दरअसल, हैदराबाद में कैपिटल प्रोटेक्शन फोर्स प्राइवेट लिमिटेड के नाम से एक सिक्योरिटी कंपनी रजिस्टर्ड है। यह सिक्योरिटी गार्ड प्रोवाइड करवाती थी, इसे फॉल्कन ग्रुप के नाम से भी जाना जाता है। अमरदीप ने इसी कंपनी की सिस्टर कंपनी बनाई। उस कंपनी का नाम रखा- फाल्कन इनवॉइस डिस्काउंटिंग प्लेटफॉर्म। मास्टरमाइंड अमरदीप ने कंपनी की एक वेबसाइट बनाई। उसमें देश की बड़ी ब्लू चीप कंपनियों यानी ऐसी कंपनियां जिनका देश में मजबूत वित्तीय रिकॉर्ड है। उनके लोगो का इस्तेमाल किया। जैसे- पीरामल, एनसीसी, टाटा, फ्लिपकार्ट, अमेजन, यूनीलीवर, बिग बास्केट, पॉलिकेब, कोका कोला, पीडिलाइट, क्रोमा, विप्रो, वेदांता, डीपी वर्ल्ड, ओयो, इन्फोसिस आदि। ठगी के लिए बनाया इन्वेस्टमेंट प्लान : इनवॉइस डिस्काउंटिंग का दिया झांसा
ब्लू चिप कंपनियों को माल सप्लाई करने वाली कंपनियों के नाम पर इन्वेस्ट करवाया। अच्छे ब्याज का लालच दिया। ठग ने वेबसाइट पर बताया कि उसकी कंपनी देश की नामी कंपनियों के लिए इनवॉइस डिस्काउंटिंग का काम करती है। इन बड़ी कंपनियों में रॉ मेटिरियल सप्लाई करने वाली कंपनियों को तुरंत भुगतान नहीं मिलता। बड़ी कंपनियां माल बिकने के बाद या कुछ अंतराल के बाद ही उनको पेमेंट करती हैं। भुगतान के इस गैप के दौरान सप्लाई कंपनियों को पैसे की सख्त जरूरत रहती है। ऐसे में सप्लाई कंपनियां कुछ समय के लिए इनवॉइस डिस्काउंटिंग कंपनियों पर निर्भर रहती हैं। अगर इन सप्लाई कंपनियों के अकाउंट में पैसा डिपॉजिट किया जाए तो वह बड़ी कंपनियों से भुगतान मिलने पर 17 से 24 प्रतिशत ब्याज के साथ मूल रकम लौटाती हैं। ठग ने लोगों को झांसा दिया कि उसकी कंपनी भी यही कामकाज करती है जिससे वह अपने पैसे पर 24% का मोटा ब्याज कमाती है। कोई भी ग्राहक हमारी कंपनी के जरिए कम से कम 50 और अधिकतम 9 लाख रुपए इन्वेस्ट कर मोटा ब्याज कमा सकता है। देश भर में ठगी, बनाए वॉट्सऐप ग्रुप, क्रेडिट कार्ड से लिया पैसा
अमरदीप ने लोगों को झांसे में लेने के लिए कंपनी में निवेश करने वालों का वॉट्सऐप ग्रुप बनाया। अलग-अलग स्टेट के नाम से बने ग्रुप में हजारों लोगों को जोड़ा। राजस्थान, यूपी, महाराष्ट्र, बंगाल, छत्तीसगढ़, केरल, दिल्ली एनसीआर, एमपी, हरियाणा, तेलंगाना, कर्नाटक, लद्दाख, बिहार, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश, असम आदि के नाम से वॉट्सऐप ग्रुप बनाए थे। उन्हें इन्वेस्टमेंट बढ़ाने का लालच दिया। जिनके पास खुद का पैसा नहीं होता था, उन्हें क्रेडिट कार्ड से पैसा लगाने का लालच दिया जाता था। क्रेडिट कार्ड से पैसे जमा करवाने पर धारक को कैशबैक और क्रेडिट टाइम का ऑफर मिलता है। ऐसे में हजारों निवेशकों ने आसानी से पैसे 17 से 24 प्रतिशत ब्याज के लालच में क्रेडिट कार्ड से निवेश कर बैठे। फाल्कन इनवॉइस डिस्काउंटिंग कंपनी ने ‘वर्ल्ड लाइन इ पेमेंट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड’ में क्रेडिट कार्ड के माध्यम से पैसा लिया। एसबीआई, एचडीएफसी, आईडीएफसी, पीएनबी, एयू, कॉटेक, एचएसबीसी सहित कई नामी बैंकों ने क्रेडिट कार्ड से इस गेटवे कंपनी को पैसा लेने की परमिशन दी। कंपनी 2021 में खुली थी, लेकिन इसकी केवाईसी बैंको ने एक ही बार की, जबकि हर 6 महीने में केवाईसी जरूरी होती है। इससे बैंक यह पता लगाते हैं कि कंपनी जो पैसा ले रही है, वह कहां जा रहा है। मालिक के पास खुद का चार्टर, लग्जरी गाड़ियां
हैदराबाद की इस कंपनी के मालिक अमरदीप कुमार के पास खुद का चार्टर प्लेन, महंगी व लग्जरी गाड़ियों का काफिला है। 8 मार्च को ईडी ने 15 करोड़ का प्राइवेट जेट हैदराबाद एयरपोर्ट से जब्त किया था। ईडी का मानना है कि इसी जेट से अमरदीप 22 जनवरी को दुबई भागा था। अधिकारियों के मुताबिक, फाल्कन ग्रुप की पोंजी योजना का उपयोग जेट खरीदने में किया गया। क्या है पोंजी स्कीम स्कैम और इससे कैसे बचें?
साइबर एक्सपर्ट अंकित चौधरी के अनुसार ऐसी स्कीम जो धरातल पर कहीं हो ही नहीं उसमें बड़ा फायदा दिखा कर आम लोगों को झांसे में लिया जाता है। इसे पोंजी स्कीम स्कैम कहते हैं। यह साइबर ठगी का नया ट्रेंड हैं। पोंजी स्कीम यानि फर्जी स्कीम को ऑनलाइन लॉन्च कर आम जनता को 22 से 25 प्रतिशत ब्याज का लालच देकर निवेश करवाया जा रहा है। राजस्थान में रोज तीन से चार कंपनियां पोंजी स्कीम लेकर आती हैं। हर दिन एक दो कंपनियां बड़ी रकम का घोटाला कर भाग जाती हैं। बड़े रिटर्न के झांसे से बचना चाहिए। साइबर एक्सपर्ट मुकेश चौधरी ने बताया कि पोंजी स्कीम के जरिए ठगी करने वाले सेलिब्रिटी और नेताओं को अपना इन्वेस्टर बताकर लोगों को झांसे में लेते हैं। यहां तक कि प्राइम मिनिस्टर, फाइनेंस मिनिस्टर तक के फोटो और डीप फेक वीडियो का यूज किया जा रहा है। ठग आम पब्लिक को बताते हैं कि वो AI टेक्नोलॉजी से आपका पैसा चार से पांच गुना कर देंगे। लेकिन हकीकत में यह फ्रॉड है। निवेश करने के ऐसे प्लेटफॉर्म और ऑफर्स से बचना चाहिए।