
बसोहली क्षेत्र मे अवैध माईनिग का सिलसिला धडडले से जारी है, सुबह शाम ट्रैक्टर व टिप्पर धडडले से बसोहली शीतलनगर सडक पर दौड रहे है, जिन्हें रोकने में प्रशासन भी बेबस नजर आ रहा है हालांकि अवैध माईनिग का सिलसिला बीते कई वर्षों से चल रहा है खानापूर्ति के नाम पर उचचअधिकारियों को खुश करने के लिए नामात्र कार्रवाई की जाती है, उसके बाद धडडले से अवैध माईनिग का सिलसिला फिर से शुरू हो जाता है। पूर्व वरषो में भी प्रशासनिक अधिकारियों ने मामले का संज्ञान लिया था और जिस स्थान से रेत बजरी निकाला जाता था वहां जेसीवी से गढढे निकालकर रास्ता बंद कर दिया था। लेकिन माइनिंग माफिया कहां मानने वाला था उसके कुछ दिनों बाद से फिर से माईनिंग का सिलसिला शुरू हुआ जो आज भी जारी है, क्षेत्र वासियों के मुताबिक अवैध माइनिंग तभी संभव हो पाती है जब इसमें मिली भगत हो और इसी मिलीभगत का नतीजा है कि यह माईनिग धडडले से हो रही है।
सांधर ,डाली खडड,चिरल नाले मे ट्रैक्टर और डंपरों में भरकर रेत निकाला जा रहा है और उसे चिरल नाले मे जलशकति के बाटर टैंक के नजदीक और मुख्य सड़कों पर एकत्रित किया जा रहा है। सांधर , डाली, चिरला, हटट, माशका आदि ईलाको मे लाखो कयूसिक सेंटीमीटर रेत के ढेर लगे हुए है, मांग बढने पर यही से रेत ट्रैक्टर की ट्रालियों में भरा जाता है जिसमें 70 से 80 स्क्वायर फीट के 3500 से 4000 रूपये प्रति ट्राली बेची जा रही है। इस रेत की सपलाई तहसील महानपुर , नगरोटा, पलासी, करणवाडा , शारा , सांधर, शीतलनगर , पलासी, हटट, माशका आदि ईलाको मे हो रही है रोजाना करीब 50 से जयादा ट्रैक्टर ट्राली समेत डंपर अवैध खनन की गतिविधियों में शामिल है। हालांकि सूत्रों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक यहां से रेत निकाला जा रहा है वह इलाका डैम के अधीन है और वहां के कर्मियों व अधिकारियों को इसकी खबर है इसके बावजूद भी मिलिभगत से अवैध माइनिंग का सिलसिला धडडले से जारी है रोजाना रेत बजरी से भरे हुए बाहन प्रशासनिक कारयालय और पुलिस स्टेशन के करीब 100 मीटर के दायरे से गुजरते हैं लेकिन आपसी सेटिंग के चलते कोई कार्रवाई नहीं हो रही है माइनिंग माफिया के हौसले पूरी तरह से बुलंद है जिसके आगे पुलिस और प्रशासन भी बेबस है।
हालांकि माईनिग ब्लॉक बनाने की मांग भी कई दफा उठ चुकी है बीते वर्षों में माईनिंग ब्लॉक के चयन हेतु टीमे डाली ,चिरल, के साथ लगते इलाकों का दौरा कर चुकी है यहां माईनिंग ब्लॉक के लिए आगामी कार्रवाई की जानी थी। लेकिन करीब तीन वर्ष का समय बीत जाने के बावजूद भी ना तो खनन ब्लॉक बनाए गए हैं और ना ही खनन को लीगल करने के लिए कोई कदम उठाए गए हैं।