आपको कितनी गर्मी लगेगी… ये इस बात पर भी निर्भर करता है कि आप किस बिल्डिंग में रह रहे हैं। शहरों में बन रही ज्यादातर इमारतों में रहने वाले लोग वहां के औसत तापमान से 4-5 डिग्री ज्यादा गर्मी झेल रहे हैं। पहली बार एआई की मदद से की गई ‘हीट रिस्क’ यानी तापमान जोखिम की प्रोफाइलिंग में ये चौंकाने वाली बात सामने आई है। बेंगलुरु स्थित स्टार्टअप ‘रेजिलिएंस एआई’ ने पांच शहरों (बेंगलुरु, लखनऊ, विशाखापट्टनम, पुणे, जबलपुर) के कुछ इलाकों की हीट प्रोफाइलिंग की। इसमें पता चला कि 80% बिल्डिंग ऐसी हैं, जो सामान्य तापमान से उच्च या अत्यधिक जोखिम में हैं। बड़ी वजह है- इन भवनों के निर्माण का तौर-तरीका। स्टार्टअप ने स्थान, जमीन, आबोहवा, बिल्डिंग निर्माण के तरीके, उसमें इस्तेमाल की गई सामग्री, बाहरी स्ट्रक्चर और इंटीरियर जैसे 22 मानकों के आधार पर यह हीट प्रोफाइलिंग की। रिपोर्ट के अनुसार पुणे का चाकण इलाका इस सर्वे में शामिल किया गया, जो ऑटो हब है। यहां कई बड़ी कंपनियों की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट हैं। इसके बावजूद यहां की जमीन पेड़-पौधे लगाने के लिए ज्यादा उपयुक्त होने से यहां तापमान के लिहाज से ज्यादा जोखिम नहीं है। इसकी तुलना में विशाखापट्टनम की रेलवे कॉलोनी में लगभग सारी इमारतें उच्च या अत्यधिक जोखिम में आती हैं। मार्च और जून के बीच में गर्मी के दौरान तापमान 41 डिग्री तक पहुंच जाता है। लेकिन जोखिम ज्यादा होने से इस पोर्ट सिटी की रेलवे कॉलोनी में लोग घर में बैठे हुए 46 डिग्री तक तापमान झेलने को मजबूर हैं। 5 में से 3 शहरों में एक भी बिल्डिंग कम या बहुत कम जोखिम के दायरे में नहीं जबलपुर के राइट टाउन में 65% घर अत्यधिक जोखिम में बेंगलुरु के इंदिरा नगर में 85% बिल्डिंग में रहने वाले शहर के लोग मार्च से मई तक 37-38 डिग्री तक तापमान झेलते हैं। यह औसत तापमान से 5-6 डिग्री ज्यादा है। जबलपुर के राइट टाउन में 65% घर इन गर्मियों में अधिक और अत्यधिक जोखिम में रहेंगे। अकेले अत्यधिक जोखिम वाले घर और भवनों की संख्या 50% से ज्यादा है। लखनऊ के गोमती नगर का जो इलाका इस सर्वे में शामिल है, वहां की 59% बिल्डिंग ही उच्च या उच्चतम जोखिम में हैं। शेष 41% कम जोखिम में हैं। एक्सपर्ट व्यू- ऐसे घटाएं घर का पारा कांच की बिल्डिंग न बनाएं, रूफटॉप गार्डनिंग, वेंटिलेशन हो किस बिल्डिंग में रहने वालों को गर्मी के थपेड़े कितने झेलने पड़ेंगे, यह काफी कुछ इस पर निर्भर है कि वहां कहां स्थित है। उसे बनाने में किस तरह की सामग्री का उपयोग किया गया है। यानी उस बिल्डिंग में एलिवेशन कैसा है। स्लोब कैसा दिया है। बिल्डिंग आरसीसी की है या वेंटिलेशन नहीं है तो वहां तापमान ज्यादा होगा। वेंटिलेशन के साथ आरसीसी बिल्डिंग में हीट रिस्क कम होता है। कच्ची मिट्टी की छत हो तो तापमान बढ़ने का जोखिम कम होता है। लेकिन शहरों के बीचों बीच कोई कच्ची मिट्टी की छत से घर बनाने से रहा। इसलिए आरसीसी की छत पर वेंटिलेशन या रूफटॉप गार्डनिंग से तापमान को नियंत्रित किया जा सकता है। भवन निर्माण और एरिया डेवलप करने की अनुमति देने वाली सरकारी एजेंसियां इलाकों की हीट प्रोफाइलिंग करके बिल्डर्स और निजी लोगों से निश्चित ग्रीन कवर लगाने को कह सकती हैं। लेकिन अभी उनके पास एरिया विशेष की कोई जानकारी नहीं होती। वे पूरे शहर को और भवनों को एक समान ही मानकर चलते हैं। निर्माण खत्म होते ही उनकी जिम्मेदारी खत्म हो जाती है। लेकिन वे पहले से विकसित इलाकों में रहने वालों को अत्यधिक गर्मी से बचाने के उपाय कर सकती हैं। पौधरोपण एक समान न किया जाए। रेलवे या मेट्रो के पास स्थित इलाकों में बड़े पेड़ न लगाए जाएं। कंपन से इनके टूट जाने का डर रहता है। इसलिए यहां आसपास की जमीन में हम घास या फिर गुलाब लगाने की सलाह देते हैं। सोलर पैनल वाले घरों में वेंटिलेशन या बागवानी बेहद जरूरी है। ————————————————- गर्मी से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें…. सबसे गर्म साल होगा 2025:मौसम विभाग का अनुमान- इस बार हीटवेव के दिन दोगुने होंगे देश में इस बार उम्मीद से कहीं ज्यादा गर्मी पड़ने वाली है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक, इस साल देश के नॉर्थ-वेस्ट राज्यों यानी हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, दिल्ली में हीटवेव (लू) के दिनों की संख्या दोगुनी होने की आशंका है। आमतौर पर अप्रैल से जून के महीनों में लगातार 5-6 दिन लू चलती है, लेकिन इस बार 10 से 12 दिनों के ऐसे कई दौर आ सकते हैं। पूरी खबर पढ़ें…
आपको कितनी गर्मी लगेगी… ये इस बात पर भी निर्भर करता है कि आप किस बिल्डिंग में रह रहे हैं। शहरों में बन रही ज्यादातर इमारतों में रहने वाले लोग वहां के औसत तापमान से 4-5 डिग्री ज्यादा गर्मी झेल रहे हैं। पहली बार एआई की मदद से की गई ‘हीट रिस्क’ यानी तापमान जोखिम की प्रोफाइलिंग में ये चौंकाने वाली बात सामने आई है। बेंगलुरु स्थित स्टार्टअप ‘रेजिलिएंस एआई’ ने पांच शहरों (बेंगलुरु, लखनऊ, विशाखापट्टनम, पुणे, जबलपुर) के कुछ इलाकों की हीट प्रोफाइलिंग की। इसमें पता चला कि 80% बिल्डिंग ऐसी हैं, जो सामान्य तापमान से उच्च या अत्यधिक जोखिम में हैं। बड़ी वजह है- इन भवनों के निर्माण का तौर-तरीका। स्टार्टअप ने स्थान, जमीन, आबोहवा, बिल्डिंग निर्माण के तरीके, उसमें इस्तेमाल की गई सामग्री, बाहरी स्ट्रक्चर और इंटीरियर जैसे 22 मानकों के आधार पर यह हीट प्रोफाइलिंग की। रिपोर्ट के अनुसार पुणे का चाकण इलाका इस सर्वे में शामिल किया गया, जो ऑटो हब है। यहां कई बड़ी कंपनियों की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट हैं। इसके बावजूद यहां की जमीन पेड़-पौधे लगाने के लिए ज्यादा उपयुक्त होने से यहां तापमान के लिहाज से ज्यादा जोखिम नहीं है। इसकी तुलना में विशाखापट्टनम की रेलवे कॉलोनी में लगभग सारी इमारतें उच्च या अत्यधिक जोखिम में आती हैं। मार्च और जून के बीच में गर्मी के दौरान तापमान 41 डिग्री तक पहुंच जाता है। लेकिन जोखिम ज्यादा होने से इस पोर्ट सिटी की रेलवे कॉलोनी में लोग घर में बैठे हुए 46 डिग्री तक तापमान झेलने को मजबूर हैं। 5 में से 3 शहरों में एक भी बिल्डिंग कम या बहुत कम जोखिम के दायरे में नहीं जबलपुर के राइट टाउन में 65% घर अत्यधिक जोखिम में बेंगलुरु के इंदिरा नगर में 85% बिल्डिंग में रहने वाले शहर के लोग मार्च से मई तक 37-38 डिग्री तक तापमान झेलते हैं। यह औसत तापमान से 5-6 डिग्री ज्यादा है। जबलपुर के राइट टाउन में 65% घर इन गर्मियों में अधिक और अत्यधिक जोखिम में रहेंगे। अकेले अत्यधिक जोखिम वाले घर और भवनों की संख्या 50% से ज्यादा है। लखनऊ के गोमती नगर का जो इलाका इस सर्वे में शामिल है, वहां की 59% बिल्डिंग ही उच्च या उच्चतम जोखिम में हैं। शेष 41% कम जोखिम में हैं। एक्सपर्ट व्यू- ऐसे घटाएं घर का पारा कांच की बिल्डिंग न बनाएं, रूफटॉप गार्डनिंग, वेंटिलेशन हो किस बिल्डिंग में रहने वालों को गर्मी के थपेड़े कितने झेलने पड़ेंगे, यह काफी कुछ इस पर निर्भर है कि वहां कहां स्थित है। उसे बनाने में किस तरह की सामग्री का उपयोग किया गया है। यानी उस बिल्डिंग में एलिवेशन कैसा है। स्लोब कैसा दिया है। बिल्डिंग आरसीसी की है या वेंटिलेशन नहीं है तो वहां तापमान ज्यादा होगा। वेंटिलेशन के साथ आरसीसी बिल्डिंग में हीट रिस्क कम होता है। कच्ची मिट्टी की छत हो तो तापमान बढ़ने का जोखिम कम होता है। लेकिन शहरों के बीचों बीच कोई कच्ची मिट्टी की छत से घर बनाने से रहा। इसलिए आरसीसी की छत पर वेंटिलेशन या रूफटॉप गार्डनिंग से तापमान को नियंत्रित किया जा सकता है। भवन निर्माण और एरिया डेवलप करने की अनुमति देने वाली सरकारी एजेंसियां इलाकों की हीट प्रोफाइलिंग करके बिल्डर्स और निजी लोगों से निश्चित ग्रीन कवर लगाने को कह सकती हैं। लेकिन अभी उनके पास एरिया विशेष की कोई जानकारी नहीं होती। वे पूरे शहर को और भवनों को एक समान ही मानकर चलते हैं। निर्माण खत्म होते ही उनकी जिम्मेदारी खत्म हो जाती है। लेकिन वे पहले से विकसित इलाकों में रहने वालों को अत्यधिक गर्मी से बचाने के उपाय कर सकती हैं। पौधरोपण एक समान न किया जाए। रेलवे या मेट्रो के पास स्थित इलाकों में बड़े पेड़ न लगाए जाएं। कंपन से इनके टूट जाने का डर रहता है। इसलिए यहां आसपास की जमीन में हम घास या फिर गुलाब लगाने की सलाह देते हैं। सोलर पैनल वाले घरों में वेंटिलेशन या बागवानी बेहद जरूरी है। ————————————————- गर्मी से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें…. सबसे गर्म साल होगा 2025:मौसम विभाग का अनुमान- इस बार हीटवेव के दिन दोगुने होंगे देश में इस बार उम्मीद से कहीं ज्यादा गर्मी पड़ने वाली है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक, इस साल देश के नॉर्थ-वेस्ट राज्यों यानी हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, दिल्ली में हीटवेव (लू) के दिनों की संख्या दोगुनी होने की आशंका है। आमतौर पर अप्रैल से जून के महीनों में लगातार 5-6 दिन लू चलती है, लेकिन इस बार 10 से 12 दिनों के ऐसे कई दौर आ सकते हैं। पूरी खबर पढ़ें…