देश में बढ़ते भाषा विवाद के बीच महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ( MNS) ने राज्य की सभी बैंकों में मराठी को अनिवार्य बनाने की अपनी मांग तेज कर दी है। बुधवार को मुंबई में ये विवाद और तेज हो गया जब MNS कार्यकर्ता एक बैंक में घुस गए और मैनेजर पर मराठी में ही बात करने का दबाव बनाने लगे। कार्यकर्ताओं ने मैनेजर पर आरोप लगाया कि वह ग्राहकों से बातचीत करते समय मराठी में बात नहीं कर रहा है। इस झड़प का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में कार्यकर्ताओं को यह कहते सुना जा सकता है कि अगर यहां नौकरी करनी है, तो मराठी सीखनी होगी। हालांकि, बैंक प्रबंधक ने कहा कि बैंक देश में स्वीकार्य किसी भी आधिकारिक संचार भाषा का इस्तेमाल अपने काम-काज के लिए कर सकता है। किसी से स्थानीय भाषा तुरंत सीखने की उम्मीद नहीं की जा सकती – बैंक प्रबंधक वायरल वीडियो में कार्यकर्ताओं को टेबल पीटते, कंप्यूटर को धक्का देते और मैनेजर पर चिल्लाते हुए देखा गया और मराठी में बात करने की मांग की गई। बैंक प्रबंधक ने कहा कि किसी से भी स्थानीय भाषा तुरंत सीखने की उम्मीद नहीं की जा सकती, इसमें समय लगता है। राज ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी की स्थानीय इकाई ने इस घटना में अपने सदस्यों के शामिल होने की पुष्टि की है। हालांकि, यह अभी तक स्पष्ट नहीं है कि इस विवाद के संबंध में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई है या नहीं। यह आक्रामक रुख MNS प्रमुख राज ठाकरे के गुड़ी पड़वा रैली में दिए भाषण के बाद आया है। जहां उन्होंने आधिकारिक उद्देश्यों के लिए मराठी को अनिवार्य बनाने के अपने पार्टी के रुख को दोहराया था। इससे पहले, मुंबई में काम करने वाले एक सुरक्षा गार्ड की MNS कार्यकर्ताओं ने मराठी न बोल पाने के कारण पिटाई कर दिया था। घटना का एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें कार्यकर्ता मुंबई के पवई में सुरक्षा गार्ड को पीटते हुए दिखाई दे रहे थे। MNS कार्यकर्ताओं ने बैंक अधिकारियों को फूल और पत्थर दिया मंगलवार को अपने विरोध प्रदर्शन के तहत MNS कार्यकर्ताओं ने यस बैंक का दौरा किया था। कार्यकर्ताओं ने बैंक अधिकारियों को फूल और पत्थर सौंपे। यह उनकी मांग की याद दिलाने और चेतावनी देने का संकेत था। पार्टी ने घोषणा की है कि आज से सभी बैंकों में इसी तरह के प्रदर्शन किए जाएंगे। इसके साथ ही MNS छात्र विंग के महासचिव संदीप पाचंगे के नेतृत्व में छात्र प्रतिनिधिमंडल ने जिला परिषद में शिक्षा अधिकारी से मुलाकात की है। विंग ने छात्रों को मराठी बोलने से रोकने वाले अंग्रेजी माध्यम स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए एक ज्ञापन सौंपा। यह पहली बार नहीं है जब MNS ने मराठी भाषा के मुद्दे पर आक्रामक रुख अपनाया है। MNS ने पहले भी किए है विरोध प्रदर्शन 2006 में राज ठाकरे ने शिवसेना से अलग होकर पार्टी बनाई थी, तो उनका एक प्रमुख एजेंडा ” मराठी मानुष ” (मराठी लोग) के अधिकारों की वकालत करना था। शुरुआती अभियानों में दुकानदारों पर मराठी में अपना नाम लिखने के लिए दबाव बनाया था। जिसके कारण हिंसक विरोध प्रदर्शन हुए और पार्टी कार्यकर्ताओं के खिलाफ कानूनी मामले दर्ज किए गए। 2007-08 में, MNS कार्यकर्ताओं ने रेलवे भर्ती परीक्षा के लिए मुंबई आए उत्तर प्रदेश और बिहार के उम्मीदवारों पर हमला किया था। उनका तर्क था कि महाराष्ट्र में नौकरियों में स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इन घटनाओं से पूरे देश में आक्रोश फैल गया और सभी दलों के नेताओं ने MNS की हरकतों की निंदा की। MNS ने मल्टीप्लेक्स पर मराठी फिल्मों के लिए स्क्रीन आवंटित करने का दबाव बनाया है। पार्टी ने चेतावनी दी है कि अगर मराठी सिनेमा को दरकिनार किया गया तो इसके परिणाम भुगतने होंगे। मराठी वोट बैंक बड़ा फैक्टर MNS को राजनीतिक पकड़ बनाए रखने में संघर्ष करना पड़ा है। 2009 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में, पार्टी ने 13 सीटें जीतीं, जिसका मुख्य रूप से मराठी मतदाताओं ने समर्थन किया। हालांकि, बाद के चुनावों में भाजपा और शिवसेना के विभिन्न गुटों जैसे प्रतिद्वंद्वी दलों के बढ़ते प्रभाव के कारण इसके वोट शेयर में गिरावट आई थी। _______________________ MNS से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… MNS कार्यकर्ताओं ने शिवसेना का बोर्ड फाड़ा: इसमें राज ठाकरे से पूछा था-क्या आपके विचार शुद्ध; ठाकरे ने गंगा की शुद्धता पर सवाल उठाए थे महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे के कुंभ मेले में गंगा जल की शुद्धता पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि यह कैसा धर्म है, अगर हम अपने प्राकृतिक संसाधनों को नष्ट कर रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें…
देश में बढ़ते भाषा विवाद के बीच महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ( MNS) ने राज्य की सभी बैंकों में मराठी को अनिवार्य बनाने की अपनी मांग तेज कर दी है। बुधवार को मुंबई में ये विवाद और तेज हो गया जब MNS कार्यकर्ता एक बैंक में घुस गए और मैनेजर पर मराठी में ही बात करने का दबाव बनाने लगे। कार्यकर्ताओं ने मैनेजर पर आरोप लगाया कि वह ग्राहकों से बातचीत करते समय मराठी में बात नहीं कर रहा है। इस झड़प का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में कार्यकर्ताओं को यह कहते सुना जा सकता है कि अगर यहां नौकरी करनी है, तो मराठी सीखनी होगी। हालांकि, बैंक प्रबंधक ने कहा कि बैंक देश में स्वीकार्य किसी भी आधिकारिक संचार भाषा का इस्तेमाल अपने काम-काज के लिए कर सकता है। किसी से स्थानीय भाषा तुरंत सीखने की उम्मीद नहीं की जा सकती – बैंक प्रबंधक वायरल वीडियो में कार्यकर्ताओं को टेबल पीटते, कंप्यूटर को धक्का देते और मैनेजर पर चिल्लाते हुए देखा गया और मराठी में बात करने की मांग की गई। बैंक प्रबंधक ने कहा कि किसी से भी स्थानीय भाषा तुरंत सीखने की उम्मीद नहीं की जा सकती, इसमें समय लगता है। राज ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी की स्थानीय इकाई ने इस घटना में अपने सदस्यों के शामिल होने की पुष्टि की है। हालांकि, यह अभी तक स्पष्ट नहीं है कि इस विवाद के संबंध में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई है या नहीं। यह आक्रामक रुख MNS प्रमुख राज ठाकरे के गुड़ी पड़वा रैली में दिए भाषण के बाद आया है। जहां उन्होंने आधिकारिक उद्देश्यों के लिए मराठी को अनिवार्य बनाने के अपने पार्टी के रुख को दोहराया था। इससे पहले, मुंबई में काम करने वाले एक सुरक्षा गार्ड की MNS कार्यकर्ताओं ने मराठी न बोल पाने के कारण पिटाई कर दिया था। घटना का एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें कार्यकर्ता मुंबई के पवई में सुरक्षा गार्ड को पीटते हुए दिखाई दे रहे थे। MNS कार्यकर्ताओं ने बैंक अधिकारियों को फूल और पत्थर दिया मंगलवार को अपने विरोध प्रदर्शन के तहत MNS कार्यकर्ताओं ने यस बैंक का दौरा किया था। कार्यकर्ताओं ने बैंक अधिकारियों को फूल और पत्थर सौंपे। यह उनकी मांग की याद दिलाने और चेतावनी देने का संकेत था। पार्टी ने घोषणा की है कि आज से सभी बैंकों में इसी तरह के प्रदर्शन किए जाएंगे। इसके साथ ही MNS छात्र विंग के महासचिव संदीप पाचंगे के नेतृत्व में छात्र प्रतिनिधिमंडल ने जिला परिषद में शिक्षा अधिकारी से मुलाकात की है। विंग ने छात्रों को मराठी बोलने से रोकने वाले अंग्रेजी माध्यम स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए एक ज्ञापन सौंपा। यह पहली बार नहीं है जब MNS ने मराठी भाषा के मुद्दे पर आक्रामक रुख अपनाया है। MNS ने पहले भी किए है विरोध प्रदर्शन 2006 में राज ठाकरे ने शिवसेना से अलग होकर पार्टी बनाई थी, तो उनका एक प्रमुख एजेंडा ” मराठी मानुष ” (मराठी लोग) के अधिकारों की वकालत करना था। शुरुआती अभियानों में दुकानदारों पर मराठी में अपना नाम लिखने के लिए दबाव बनाया था। जिसके कारण हिंसक विरोध प्रदर्शन हुए और पार्टी कार्यकर्ताओं के खिलाफ कानूनी मामले दर्ज किए गए। 2007-08 में, MNS कार्यकर्ताओं ने रेलवे भर्ती परीक्षा के लिए मुंबई आए उत्तर प्रदेश और बिहार के उम्मीदवारों पर हमला किया था। उनका तर्क था कि महाराष्ट्र में नौकरियों में स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इन घटनाओं से पूरे देश में आक्रोश फैल गया और सभी दलों के नेताओं ने MNS की हरकतों की निंदा की। MNS ने मल्टीप्लेक्स पर मराठी फिल्मों के लिए स्क्रीन आवंटित करने का दबाव बनाया है। पार्टी ने चेतावनी दी है कि अगर मराठी सिनेमा को दरकिनार किया गया तो इसके परिणाम भुगतने होंगे। मराठी वोट बैंक बड़ा फैक्टर MNS को राजनीतिक पकड़ बनाए रखने में संघर्ष करना पड़ा है। 2009 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में, पार्टी ने 13 सीटें जीतीं, जिसका मुख्य रूप से मराठी मतदाताओं ने समर्थन किया। हालांकि, बाद के चुनावों में भाजपा और शिवसेना के विभिन्न गुटों जैसे प्रतिद्वंद्वी दलों के बढ़ते प्रभाव के कारण इसके वोट शेयर में गिरावट आई थी। _______________________ MNS से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… MNS कार्यकर्ताओं ने शिवसेना का बोर्ड फाड़ा: इसमें राज ठाकरे से पूछा था-क्या आपके विचार शुद्ध; ठाकरे ने गंगा की शुद्धता पर सवाल उठाए थे महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे के कुंभ मेले में गंगा जल की शुद्धता पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि यह कैसा धर्म है, अगर हम अपने प्राकृतिक संसाधनों को नष्ट कर रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें…