मुंबई सीरियल बम धमाकों के 32 साल बाद स्पेशल टाडा कोर्ट ने टाइगर मेमन की संपत्तियां केंद्र को सौंपने का आदेश दिया है। विशेष टाडा कोर्ट ने कहा कि 1993 के मुंबई सीरियल बम धमाकों के मास्टरमाइंड टाइगर मेमन और उसके परिवार की 14 संपत्तियां केंद्र सरकार को सौंप दी जाएं। ये संपत्तियां 1994 से टाडा (आतंकवादी और विध्वंसकारी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम) अदालत के आदेश के बाद बॉम्बे हाईकोर्ट के रिसीवर के कब्जे में थीं। संपत्तियों को 1994 में स्पेशल टाडा कोर्ट ने कुर्क कर लिया था, तब से वे हाईकोर्ट के कब्जे में थीं। 26 मार्च को जारी आदेश में, स्पेशल टाडा कोर्ट के जज वीडी केदार ने कहा कि अचल संपत्तियों का कब्जा केंद्र सरकार को सौंप दिया जाना चाहिए। मेमन के खिलाफ जब्ती की कार्यवाही विदेशी मुद्रा संरक्षण और तस्करी रोकथाम अधिनियम 1974 और महाराष्ट्र सरकार के 1992 में जारी आदेश के प्रावधानों के तहत हुई थी। 12 मार्च 1993 को मुंबई में 13 जगह सीरियल ब्लास्ट हुए, जिसमें 257 लोगों की जान गई थी और 700 से ज्यादा लोग घायल हो गए। बाद में CBI ने विस्फोट मामले की जांच की। मेमन और उसके परिवार की 14 प्रॉपर्टी में 4 फ्लैट-4 दुकानें टाइगर मेमन और उसके परिवार की 14 संपत्तियों में बांद्रा (पश्चिम) में एक इमारत में एक फ्लैट, माहिम में एक ऑफिस, माहिम में एक ओपन प्लॉट, सांताक्रूज़ (पूर्व) में एक खाली प्लॉट और एक फ्लैट, कुर्ला में एक इमारत में दो फ्लैट, मोहम्मद अली रोड पर एक ऑफिस, डोंगरी में एक दुकान और प्लॉट, मनीष मार्केट में तीन दुकानें और मुंबई के शेख मेमन स्ट्रीट पर एक इमारत शामिल है। चपरासी की नौकरी करता था टाइगर 24 नवंबर 1960 को जन्मे इब्राहीम मुश्ताक अब्दुल रजाक नादिम मेमन को अंडरवर्ल्ड की दुनिया में टाइगर मेमन के नाम से जाना जाता है। पांच छोटे भाइयों संग उसका बचपन दक्षिण मुंबई के मोहम्मद अली रोड इलाके में बनी कड़ीया बिल्डिंग के एक कमरे के फ्लैट में बीता। मुश्ताक के पिता अब्दुल रजाक वेल्डिंग का काम करते थे। उसने मुंबई के स्माइल बेग मोहम्मद स्कूल से दसवीं तक की पढ़ाई पूरी की। घर की आर्थिक स्थिति खराब होने के चलते मुश्ताक ने पढ़ाई बीच में ही छोड़ कर मुंबई के मेमन कोआपरेटिव बैंक में बतौर चपरासी काम शुरू किया। लेकिन वहां भी वह ज्यादा दिनों तक वह टिक नहीं सका। चाय लाने के विवाद के बाद उसने अपने बैंक मैनेजर की पिटाई कर दी, जिसके बाद उसे नौकरी से निकाल दिया गया। ऐसे मिला टाइगर का नाम
नौकरी छोड़ने के बाद मुश्ताक की मुलाकात स्मगलर मोहम्मद मुश्तफा दौसा से हुई। उसने उसे अपना ड्राइवर रख लिया। दौसा के साथ काम करते हुए मुश्ताक दुबई के स्मगलर याकूब भट्टी से मिला और उसने उसे अपना कैरियर रख लिया। अब मुश्ताक को दुबई से सोना स्मगलिंग करने का काम मिल गया था। इसी दौरान मुश्ताक पाकिस्तानी स्मगलर तौफीक जलियांवाला के संपर्क में आया और सिर्फ एक साल के भीतर मुश्ताक मुंबई का बड़ा गोल्ड स्मगलर बन गया।अपनी दिलेरी के लिए पूरी मुंबई में फेमस मुश्ताक को स्मगलिंग की दुनिया में टाइगर के नाम से पुकारा जाने लगा। क्यों रची धमाकों की साजिश
मुंबई में हुए एक दंगे के दौरान टाइगर मेमन द्वारा शुरू की गई तिजारत इंटरनेशनल कंपनी को आग के हवाले कर दिया गया। इसी बात से नाराज टाइगर ने मुंबई में बम धमाका करने की प्लानिंग शुरू की। इसे अंजाम देने के लिए टाइगर ने पाकिस्तानी स्मगलर तौफीक जलियांवाला, अनीस इब्राहीम, मुश्तफा दौसा, आईएसआई से जुड़े कुछ अधिकारी और अरब के कई रईस व्यापारियों संग दुबई में एक मीटिंग की। खुफिया सूत्रों की माने तो टाइगर को इस मीटिंग का निर्देश दाऊद इब्राहिम से मिला था।
मुंबई सीरियल बम धमाकों के 32 साल बाद स्पेशल टाडा कोर्ट ने टाइगर मेमन की संपत्तियां केंद्र को सौंपने का आदेश दिया है। विशेष टाडा कोर्ट ने कहा कि 1993 के मुंबई सीरियल बम धमाकों के मास्टरमाइंड टाइगर मेमन और उसके परिवार की 14 संपत्तियां केंद्र सरकार को सौंप दी जाएं। ये संपत्तियां 1994 से टाडा (आतंकवादी और विध्वंसकारी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम) अदालत के आदेश के बाद बॉम्बे हाईकोर्ट के रिसीवर के कब्जे में थीं। संपत्तियों को 1994 में स्पेशल टाडा कोर्ट ने कुर्क कर लिया था, तब से वे हाईकोर्ट के कब्जे में थीं। 26 मार्च को जारी आदेश में, स्पेशल टाडा कोर्ट के जज वीडी केदार ने कहा कि अचल संपत्तियों का कब्जा केंद्र सरकार को सौंप दिया जाना चाहिए। मेमन के खिलाफ जब्ती की कार्यवाही विदेशी मुद्रा संरक्षण और तस्करी रोकथाम अधिनियम 1974 और महाराष्ट्र सरकार के 1992 में जारी आदेश के प्रावधानों के तहत हुई थी। 12 मार्च 1993 को मुंबई में 13 जगह सीरियल ब्लास्ट हुए, जिसमें 257 लोगों की जान गई थी और 700 से ज्यादा लोग घायल हो गए। बाद में CBI ने विस्फोट मामले की जांच की। मेमन और उसके परिवार की 14 प्रॉपर्टी में 4 फ्लैट-4 दुकानें टाइगर मेमन और उसके परिवार की 14 संपत्तियों में बांद्रा (पश्चिम) में एक इमारत में एक फ्लैट, माहिम में एक ऑफिस, माहिम में एक ओपन प्लॉट, सांताक्रूज़ (पूर्व) में एक खाली प्लॉट और एक फ्लैट, कुर्ला में एक इमारत में दो फ्लैट, मोहम्मद अली रोड पर एक ऑफिस, डोंगरी में एक दुकान और प्लॉट, मनीष मार्केट में तीन दुकानें और मुंबई के शेख मेमन स्ट्रीट पर एक इमारत शामिल है। चपरासी की नौकरी करता था टाइगर 24 नवंबर 1960 को जन्मे इब्राहीम मुश्ताक अब्दुल रजाक नादिम मेमन को अंडरवर्ल्ड की दुनिया में टाइगर मेमन के नाम से जाना जाता है। पांच छोटे भाइयों संग उसका बचपन दक्षिण मुंबई के मोहम्मद अली रोड इलाके में बनी कड़ीया बिल्डिंग के एक कमरे के फ्लैट में बीता। मुश्ताक के पिता अब्दुल रजाक वेल्डिंग का काम करते थे। उसने मुंबई के स्माइल बेग मोहम्मद स्कूल से दसवीं तक की पढ़ाई पूरी की। घर की आर्थिक स्थिति खराब होने के चलते मुश्ताक ने पढ़ाई बीच में ही छोड़ कर मुंबई के मेमन कोआपरेटिव बैंक में बतौर चपरासी काम शुरू किया। लेकिन वहां भी वह ज्यादा दिनों तक वह टिक नहीं सका। चाय लाने के विवाद के बाद उसने अपने बैंक मैनेजर की पिटाई कर दी, जिसके बाद उसे नौकरी से निकाल दिया गया। ऐसे मिला टाइगर का नाम
नौकरी छोड़ने के बाद मुश्ताक की मुलाकात स्मगलर मोहम्मद मुश्तफा दौसा से हुई। उसने उसे अपना ड्राइवर रख लिया। दौसा के साथ काम करते हुए मुश्ताक दुबई के स्मगलर याकूब भट्टी से मिला और उसने उसे अपना कैरियर रख लिया। अब मुश्ताक को दुबई से सोना स्मगलिंग करने का काम मिल गया था। इसी दौरान मुश्ताक पाकिस्तानी स्मगलर तौफीक जलियांवाला के संपर्क में आया और सिर्फ एक साल के भीतर मुश्ताक मुंबई का बड़ा गोल्ड स्मगलर बन गया।अपनी दिलेरी के लिए पूरी मुंबई में फेमस मुश्ताक को स्मगलिंग की दुनिया में टाइगर के नाम से पुकारा जाने लगा। क्यों रची धमाकों की साजिश
मुंबई में हुए एक दंगे के दौरान टाइगर मेमन द्वारा शुरू की गई तिजारत इंटरनेशनल कंपनी को आग के हवाले कर दिया गया। इसी बात से नाराज टाइगर ने मुंबई में बम धमाका करने की प्लानिंग शुरू की। इसे अंजाम देने के लिए टाइगर ने पाकिस्तानी स्मगलर तौफीक जलियांवाला, अनीस इब्राहीम, मुश्तफा दौसा, आईएसआई से जुड़े कुछ अधिकारी और अरब के कई रईस व्यापारियों संग दुबई में एक मीटिंग की। खुफिया सूत्रों की माने तो टाइगर को इस मीटिंग का निर्देश दाऊद इब्राहिम से मिला था।