लाखों राजस्थानियों के लिए राहत की खबर है। अब प्रदेश के मरीज दूसरे राज्य के किसी हॉस्पिटल में फ्री इलाज करा सकेंगे। मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना (MAAY) में पंजीकृत लोगों को इसका लाभ मिलेगा। इसके लिए राज्य सरकार जल्द ही ‘इंटर स्टेट पोर्टेबिलिटी’ लागू करेगी। इससे देश के अन्य राज्यों में नौकरी कर रहे मूल राजस्थानियों को भी इसका बड़ा फायदा मिलने वाला है। अन्य राज्यों के मरीज भी राजस्थान आकर इस योजना का लाभ ले पाएंगे। दूसरे राज्य के निवासियों को यह लाभ कैसे मिलेगा?
क्या नियम व शर्तें रखी जाएंगी?
कितने तक का इलाज मुफ्त हो पाएगा?
बाहरी राज्य के मरीजों राजस्थान में मुफ्त इलाज के लिए क्या करना होगा? ऐसे सभी सवालों के जवाब भास्कर टीम ने स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख सचिव गायत्री राठौड़ से लिए…. सवाल : राजस्थान के रहने वाले लोग दूसरे राज्य में इलाज कैसे करा पाएंगे?
जवाब : राज्य में इंटर स्टेट पोर्टेबिलिटी लागू होने के बाद राजस्थान के रहने वाले लोग दूसरे राज्यों में इलाज करा पाएंगे। सवाल : पोर्टेबिलिटी लागू करने के लिए क्या किया जा रहा है?
जवाब : इसके लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण, नई दिल्ली के साथ मिलकर तकनीकी प्रावधान किए जा रहे हैं। इससे राज्य के जन आधार और MAA योजना में पंजीकृत लोगों का डाटा दूसरे राज्यों और केंद्र द्वारा संचालित योजनाओं के साथ शेयर हो जाएगा। सवाल : क्या इसके लिए मरीजों को अलग से कोई रजिस्ट्रेशन करना पड़ेगा?
जवाब : जी नहीं। मरीज को दूसरे राज्य में इलाज लेने के लिए अलग से किसी प्रकार के रजिस्ट्रेशन की जरूरत नहीं होगी। अगर कोई राजस्थान का मूल निवासी है तो उसे इलाज जन आधार कार्ड के माध्यम से मुफ्त में हो जाएगा। सवाल : राजस्थान के मरीज को अन्य राज्य में इलाज कैसे मिलेगा?
जवाब : एक उदाहरण से समझते हैं। मान लीजिए आप किसी भी मकसद से दूसरे राज्य में हैं। अगर आप वहां बीमार पड़ गए और वहीं के हॉस्पिटल में इलाज कराना चाहते हैं तो आपको उस हॉस्पिटल में अपना जन आधार कार्ड दिखाना होगा। हॉस्पिटल सॉफ्टवेयर के जरिए जनाधार कार्ड का डेटा चेक करेगा। वैलिड होने पर राजस्थान स्टेट हेल्थ एश्योरेंस एजेंसी से अप्रूवल मिलते ही इलाज शुरू हो जाएगा। जितने का मुफ्त इलाज राजस्थान में मिलता है, उसका लाभ वहां भी मिल जाएगा। सवाल : राजस्थानी को दूसरे राज्यों के प्राइवेट या सरकारी कौन से हॉस्पिटल में इलाज मुफ्त मिलेगा?
जवाब : अलग-अलग राज्यों द्वारा अधिकृत सरकारी और प्राइवेट हॉस्पिटल में इलाज मिल पाएगा। आप जिस राज्य में हैं और जिस हॉस्पिटल में इलाज करवाना चाहते हैं, उस हॉस्पिटल का राज्य या केंद्र की योजना से अधिकृत होना जरूरी है। सवाल : अन्य राज्य के मरीज को राजस्थान में मुफ्त इलाज कैसे मिलेगा?
जवाब : अन्य राज्य के मरीज के पास प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PMJY) कार्ड होना आवश्यक है। मान लीजिए बाहर के किसी मरीज को जयपुर के SMS हॉस्पिटल में इलाज करवाना है, तो वह अपना PMJY कार्ड दिखाएगा। डेटाबेस से कार्ड की वैलिडिटी चेक करने के बाद उस राज्य की हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी से अप्रूवल मिलने पर इलाज शुरू हो जाएगा। सवाल : अगर राजस्थान के किसी व्यक्ति के साथ दूसरे राज्य में कोई इमरजेंसी होती है तो क्या होगा?
जवाब : योजना में नियमानुसार इमरजेंसी केस में उपचार की व्यवस्था होगी। जनाधार कार्ड या MAA योजना की निशुल्क, सशुल्क सभी श्रेणी वाले भी इसका लाभ ले सकेंगे। सवाल : कब तक इंटर स्टेट पोर्टेबिलिटी लागू होने की संभावना है?
जवाब : आगामी दो माह में इंटर स्टेट पोर्टेबिलिटी शुरू कर दी जाएगी। इसके बाद दूसरे राज्य के मरीज भी प्रदेश में आकर इलाज ले पाएंगे। इसी प्रकार आगामी 6 महीने में राजस्थान के नागरिक भी दूसरे राज्य में जाकर MAA योजना के तहत इलाज करा सकेंगे। सवाल : अभी बजट में योजना में नए पैकेज शामिल किए गए हैं, इनका लाभ कब से मिलेगा?
जवाब : योजना में 9 नए डे-केयर पैकेज शामिल किए गए हैं। इनका लाभ मरीजों को अगले वित्त वर्ष यानी 1 अप्रैल 2025 से मिलना शुरू हो जाएगा। सवाल : बहुत बार सवाल उठता है कि योजना में 5 लाख तक का ही इलाज फ्री है, जबकि पिछली सरकार ने 25 लाख की घोषणा की थी?
जवाब : योजना के तहत पंजीकृत लोगों को 25 लाख तक का ही कवरेज दिया जा रहा है। प्रदेश में मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना में 1.34 करोड़ परिवार पंजीकृत हैं। योजना में हर रोज औसतन 8200 मरीजों को 9.42 करोड़ राशि का इलाज मिल रहा है। 2370 बीमारियों का इलाज मुफ्त हो रहा
गायत्री राठौड़ कहती हैं- इस योजना के लिए हर साल बजट में बढ़ोतरी की जा रही है। साल 2023 में इस योजना का बजट 2200 करोड़ रुपए था। साल 2024 में बढ़ाकर 3300 करोड़ कर दिया गया। इस साल बजट में 3500 करोड़ का MAA कोष गठित किया गया है। पूर्ववर्ती सरकार के दौरान चिरंजीवी योजना में 1806 पैकेज थे, जबकि अब 2370 पैकेज हैं। MAA योजना राज्य सरकार की फ्लैगशिप योजना है। इस योजना में मरीजों को 25 लाख का इंश्योरेंस कवरेज मिला है। पोर्टेबिलिटी को लागू करने के लिए स्वास्थ्य विभाग नेशनल हेल्थ अथॉरिटी के साथ काम कर तकनीकी समस्याओं को दूर कर रहा है। ताकि योजना लागू होने के बाद मरीजों को दिक्कतों का सामना न करना पड़े।
लाखों राजस्थानियों के लिए राहत की खबर है। अब प्रदेश के मरीज दूसरे राज्य के किसी हॉस्पिटल में फ्री इलाज करा सकेंगे। मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना (MAAY) में पंजीकृत लोगों को इसका लाभ मिलेगा। इसके लिए राज्य सरकार जल्द ही ‘इंटर स्टेट पोर्टेबिलिटी’ लागू करेगी। इससे देश के अन्य राज्यों में नौकरी कर रहे मूल राजस्थानियों को भी इसका बड़ा फायदा मिलने वाला है। अन्य राज्यों के मरीज भी राजस्थान आकर इस योजना का लाभ ले पाएंगे। दूसरे राज्य के निवासियों को यह लाभ कैसे मिलेगा?
क्या नियम व शर्तें रखी जाएंगी?
कितने तक का इलाज मुफ्त हो पाएगा?
बाहरी राज्य के मरीजों राजस्थान में मुफ्त इलाज के लिए क्या करना होगा? ऐसे सभी सवालों के जवाब भास्कर टीम ने स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख सचिव गायत्री राठौड़ से लिए…. सवाल : राजस्थान के रहने वाले लोग दूसरे राज्य में इलाज कैसे करा पाएंगे?
जवाब : राज्य में इंटर स्टेट पोर्टेबिलिटी लागू होने के बाद राजस्थान के रहने वाले लोग दूसरे राज्यों में इलाज करा पाएंगे। सवाल : पोर्टेबिलिटी लागू करने के लिए क्या किया जा रहा है?
जवाब : इसके लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण, नई दिल्ली के साथ मिलकर तकनीकी प्रावधान किए जा रहे हैं। इससे राज्य के जन आधार और MAA योजना में पंजीकृत लोगों का डाटा दूसरे राज्यों और केंद्र द्वारा संचालित योजनाओं के साथ शेयर हो जाएगा। सवाल : क्या इसके लिए मरीजों को अलग से कोई रजिस्ट्रेशन करना पड़ेगा?
जवाब : जी नहीं। मरीज को दूसरे राज्य में इलाज लेने के लिए अलग से किसी प्रकार के रजिस्ट्रेशन की जरूरत नहीं होगी। अगर कोई राजस्थान का मूल निवासी है तो उसे इलाज जन आधार कार्ड के माध्यम से मुफ्त में हो जाएगा। सवाल : राजस्थान के मरीज को अन्य राज्य में इलाज कैसे मिलेगा?
जवाब : एक उदाहरण से समझते हैं। मान लीजिए आप किसी भी मकसद से दूसरे राज्य में हैं। अगर आप वहां बीमार पड़ गए और वहीं के हॉस्पिटल में इलाज कराना चाहते हैं तो आपको उस हॉस्पिटल में अपना जन आधार कार्ड दिखाना होगा। हॉस्पिटल सॉफ्टवेयर के जरिए जनाधार कार्ड का डेटा चेक करेगा। वैलिड होने पर राजस्थान स्टेट हेल्थ एश्योरेंस एजेंसी से अप्रूवल मिलते ही इलाज शुरू हो जाएगा। जितने का मुफ्त इलाज राजस्थान में मिलता है, उसका लाभ वहां भी मिल जाएगा। सवाल : राजस्थानी को दूसरे राज्यों के प्राइवेट या सरकारी कौन से हॉस्पिटल में इलाज मुफ्त मिलेगा?
जवाब : अलग-अलग राज्यों द्वारा अधिकृत सरकारी और प्राइवेट हॉस्पिटल में इलाज मिल पाएगा। आप जिस राज्य में हैं और जिस हॉस्पिटल में इलाज करवाना चाहते हैं, उस हॉस्पिटल का राज्य या केंद्र की योजना से अधिकृत होना जरूरी है। सवाल : अन्य राज्य के मरीज को राजस्थान में मुफ्त इलाज कैसे मिलेगा?
जवाब : अन्य राज्य के मरीज के पास प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PMJY) कार्ड होना आवश्यक है। मान लीजिए बाहर के किसी मरीज को जयपुर के SMS हॉस्पिटल में इलाज करवाना है, तो वह अपना PMJY कार्ड दिखाएगा। डेटाबेस से कार्ड की वैलिडिटी चेक करने के बाद उस राज्य की हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी से अप्रूवल मिलने पर इलाज शुरू हो जाएगा। सवाल : अगर राजस्थान के किसी व्यक्ति के साथ दूसरे राज्य में कोई इमरजेंसी होती है तो क्या होगा?
जवाब : योजना में नियमानुसार इमरजेंसी केस में उपचार की व्यवस्था होगी। जनाधार कार्ड या MAA योजना की निशुल्क, सशुल्क सभी श्रेणी वाले भी इसका लाभ ले सकेंगे। सवाल : कब तक इंटर स्टेट पोर्टेबिलिटी लागू होने की संभावना है?
जवाब : आगामी दो माह में इंटर स्टेट पोर्टेबिलिटी शुरू कर दी जाएगी। इसके बाद दूसरे राज्य के मरीज भी प्रदेश में आकर इलाज ले पाएंगे। इसी प्रकार आगामी 6 महीने में राजस्थान के नागरिक भी दूसरे राज्य में जाकर MAA योजना के तहत इलाज करा सकेंगे। सवाल : अभी बजट में योजना में नए पैकेज शामिल किए गए हैं, इनका लाभ कब से मिलेगा?
जवाब : योजना में 9 नए डे-केयर पैकेज शामिल किए गए हैं। इनका लाभ मरीजों को अगले वित्त वर्ष यानी 1 अप्रैल 2025 से मिलना शुरू हो जाएगा। सवाल : बहुत बार सवाल उठता है कि योजना में 5 लाख तक का ही इलाज फ्री है, जबकि पिछली सरकार ने 25 लाख की घोषणा की थी?
जवाब : योजना के तहत पंजीकृत लोगों को 25 लाख तक का ही कवरेज दिया जा रहा है। प्रदेश में मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना में 1.34 करोड़ परिवार पंजीकृत हैं। योजना में हर रोज औसतन 8200 मरीजों को 9.42 करोड़ राशि का इलाज मिल रहा है। 2370 बीमारियों का इलाज मुफ्त हो रहा
गायत्री राठौड़ कहती हैं- इस योजना के लिए हर साल बजट में बढ़ोतरी की जा रही है। साल 2023 में इस योजना का बजट 2200 करोड़ रुपए था। साल 2024 में बढ़ाकर 3300 करोड़ कर दिया गया। इस साल बजट में 3500 करोड़ का MAA कोष गठित किया गया है। पूर्ववर्ती सरकार के दौरान चिरंजीवी योजना में 1806 पैकेज थे, जबकि अब 2370 पैकेज हैं। MAA योजना राज्य सरकार की फ्लैगशिप योजना है। इस योजना में मरीजों को 25 लाख का इंश्योरेंस कवरेज मिला है। पोर्टेबिलिटी को लागू करने के लिए स्वास्थ्य विभाग नेशनल हेल्थ अथॉरिटी के साथ काम कर तकनीकी समस्याओं को दूर कर रहा है। ताकि योजना लागू होने के बाद मरीजों को दिक्कतों का सामना न करना पड़े।