पटना में वक्फ संशोधन बिल के खिलाफ बुधवार को गर्दनीबाग में मुस्लिम संगठनों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शन को RJD का समर्थन मिला। धरनास्थल पर RJD सुप्रीमो लालू यादव, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव भी पहुंचे। दोपहर बाद प्रशांत किशोर भी गर्दनीबाग पहुंचे और वक्फ बिल के खिलाफ विरोध प्रदर्शन का समर्थन किया। लालू यादव ने कहा- ‘गलत हो रहा है। सरकार को देखना चाहिए। हम इसके विरोध में हैं। किसी के साथ अन्याय नहीं होगा। नीतीश कुमार उन लोगों के साथ हैं, वो इस बिल का समर्थन कर रहे हैं। जनता सब समझ रही है।’ वहीं, सभा को संबोधित करते हुए तेजस्वी यादव ने कहा- ‘किसी भी कीमत पर नागपुरिया कानून लागू नहीं होने देंगे। आप लोगों की लड़ाई में मजबूती से हम साथ हम खड़े हैं। आप लोग एक कदम चलिएगा तो हम चार कदम चलेंगे।’ ‘इस कानून को रोकने का काम करेंगे। कुछ लोग साजिश कर रहे हैं। देश को तोड़ने का काम किया जा रहा है।’ नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कहा- CM पर बोलना ठीक नहीं होगा RJD MLC सुनील सिंह ने कहा- ‘इसका असर पूरे देश में होगा। हम लोग गोडसे के आदर्श पर नहीं चलते हैं। जिस पर RSS वाले चलते हैं। हमारे नेता लालू यादव इसका विरोध कर रहे हैं। हम लोग मरते दम तक इस बिल का विरोध करेंगे। भारत धर्म निरपेक्ष देश है। ये हमारी खूबसूरती है। CM नीतीश कुमार पर बोलना अभी सही नहीं होगा। वो कभी नीम-नीम, कभी शहद-शहद वाली बात बोलते हैं। ये उनकी रणनीति रही है।’ हक के लिए हम लोग लड़ेंगे मुस्लिम संगठनों के प्रदर्शन को आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद का भी समर्थन मिला है। प्रदर्शन में शामिल होने के लिए चंद्रशेखर आजाद पटना पहुंचे। उन्होंने कहा- आज देश में अजीब तरह का माहौल है। जिनके भी अधिकारों पर हमला होगा, उसकी रक्षा के लिए आगे आएंगे। बहुजन समाज, कमजोर वर्ग के अधिकारों पर हमले को रोकने के लिए संविधान ने विरोध का अधिकार दिया है। आज उसी का इस्तेमाल करने के लिए बिहार में हैं। बिल संविधान के विरोध में है ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रदर्शन को विकासशील इंसान पार्टी ने भी अपना समर्थन दिया है। धरनास्थल पर पहुंचे पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता देव ज्योति ने कहा कि हमारे नेता मुकेश सहनी इस बिल का शुरू से विरोध कर रहे हैं। हमारे नेता का कहना है कि यह बिल भीमराव अंबेडकर के संविधान के विरोध में है। अब पढ़िए वक्फ बोर्ड क्या है, इसका क्या इतिहास है और इसका क्या काम है वक्फ’ अरबी भाषा के वकुफा शब्द से बना है, जिसका अर्थ होता है रुकना या ठहरना। इस्लाम में वक्फ दान का एक तरीका है, ऐसी संपत्ति जो समाज के लिए समर्पित की गई हो। अपनी संपत्ति वक्फ को देने वाला इंसान वकिफा कहलाता है। वकिफा दान देते वक्त ये शर्त रख सकता है कि उसकी संपत्ति से होने वाली आमदनी सिर्फ पढ़ाई पर या अस्पतालों पर ही खर्च हो। 27 देशों के वक्फ की संपत्तियों पर काम करने वाली संस्था ‘औकाफ प्रॉपर्टीज इन्वेस्टमेंट फंड’ यानी AIPF के मुताबिक कानूनी शब्दों में कहें तो इस्लाम में कोई व्यक्ति जब धार्मिक वजहों से या ईश्वर के नाम पर अपनी संपत्ति दान करता है तो वो वक्फ कहलाता है। इसमें चल या अचल संपत्ति दोनों हो सकती है। आमतौर पर वक्फ की संपत्ति या इससे होने वाली आमदनी को शैक्षणिक संस्थाओं, कब्रिस्तानों, मस्जिदों में धर्मार्थ और अनाथालयों में खर्च किया जाता है। वक्फ बोर्ड का काम क्या है? वक्फ में मिलने वाली जमीन या संपत्ति की देखरेख के लिए कानूनी तौर पर एक संस्था बनी, जिसे वक्फ बोर्ड कहते हैं। 1947 में देश का बंटवारा हुआ तो काफी संख्या में मुस्लिम देश छोड़कर पाकिस्तान गए थे। वहीं, पाकिस्तान से काफी सारे हिंदू लोग भारत आए थे। 1954 में संसद ने वक्फ एक्ट 1954 के नाम से कानून बनाया। इस तरह पाकिस्तान जाने वाले लोगों की जमीनों और संपत्तियों का मालिकाना हक इस कानून के जरिए वक्फ बोर्ड को दे दिया गया। 1955 में यानी कानून लागू होने के एक साल बाद, इस कानून में बदलाव कर हर राज्यों में वक्फ बोर्ड बनाए जाने की बात कही गई। इस वक्त देश में अलग-अलग प्रदेशों के करीब 32 वक्फ बोर्ड हैं, जो वक्फ की संपत्तियों का रजिस्ट्रेशन, देखरेख और मैनेजमेंट करते हैं। बिहार समेत कई प्रदेशों में शिया और सुन्नी मुस्लिमों के लिए अलग-अलग वक्फ बोर्ड हैं। वक्फ बोर्ड का काम वक्फ की कुल आमदनी कितनी है और इसके पैसे से किसका भला किया गया, उसका पूरा लेखा-जोखा रखना होता है। इनके पास किसी जमीन या संपत्ति को लेने और दूसरों के नाम पर ट्रांसफर करने का कानूनी अधिकार है। बोर्ड किसी व्यक्ति के खिलाफ कानूनी नोटिस भी जारी कर सकता है। किसी ट्रस्ट से ज्यादा पावर वक्फ बोर्ड के पास होती है।
पटना में वक्फ संशोधन बिल के खिलाफ बुधवार को गर्दनीबाग में मुस्लिम संगठनों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शन को RJD का समर्थन मिला। धरनास्थल पर RJD सुप्रीमो लालू यादव, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव भी पहुंचे। दोपहर बाद प्रशांत किशोर भी गर्दनीबाग पहुंचे और वक्फ बिल के खिलाफ विरोध प्रदर्शन का समर्थन किया। लालू यादव ने कहा- ‘गलत हो रहा है। सरकार को देखना चाहिए। हम इसके विरोध में हैं। किसी के साथ अन्याय नहीं होगा। नीतीश कुमार उन लोगों के साथ हैं, वो इस बिल का समर्थन कर रहे हैं। जनता सब समझ रही है।’ वहीं, सभा को संबोधित करते हुए तेजस्वी यादव ने कहा- ‘किसी भी कीमत पर नागपुरिया कानून लागू नहीं होने देंगे। आप लोगों की लड़ाई में मजबूती से हम साथ हम खड़े हैं। आप लोग एक कदम चलिएगा तो हम चार कदम चलेंगे।’ ‘इस कानून को रोकने का काम करेंगे। कुछ लोग साजिश कर रहे हैं। देश को तोड़ने का काम किया जा रहा है।’ नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कहा- CM पर बोलना ठीक नहीं होगा RJD MLC सुनील सिंह ने कहा- ‘इसका असर पूरे देश में होगा। हम लोग गोडसे के आदर्श पर नहीं चलते हैं। जिस पर RSS वाले चलते हैं। हमारे नेता लालू यादव इसका विरोध कर रहे हैं। हम लोग मरते दम तक इस बिल का विरोध करेंगे। भारत धर्म निरपेक्ष देश है। ये हमारी खूबसूरती है। CM नीतीश कुमार पर बोलना अभी सही नहीं होगा। वो कभी नीम-नीम, कभी शहद-शहद वाली बात बोलते हैं। ये उनकी रणनीति रही है।’ हक के लिए हम लोग लड़ेंगे मुस्लिम संगठनों के प्रदर्शन को आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद का भी समर्थन मिला है। प्रदर्शन में शामिल होने के लिए चंद्रशेखर आजाद पटना पहुंचे। उन्होंने कहा- आज देश में अजीब तरह का माहौल है। जिनके भी अधिकारों पर हमला होगा, उसकी रक्षा के लिए आगे आएंगे। बहुजन समाज, कमजोर वर्ग के अधिकारों पर हमले को रोकने के लिए संविधान ने विरोध का अधिकार दिया है। आज उसी का इस्तेमाल करने के लिए बिहार में हैं। बिल संविधान के विरोध में है ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रदर्शन को विकासशील इंसान पार्टी ने भी अपना समर्थन दिया है। धरनास्थल पर पहुंचे पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता देव ज्योति ने कहा कि हमारे नेता मुकेश सहनी इस बिल का शुरू से विरोध कर रहे हैं। हमारे नेता का कहना है कि यह बिल भीमराव अंबेडकर के संविधान के विरोध में है। अब पढ़िए वक्फ बोर्ड क्या है, इसका क्या इतिहास है और इसका क्या काम है वक्फ’ अरबी भाषा के वकुफा शब्द से बना है, जिसका अर्थ होता है रुकना या ठहरना। इस्लाम में वक्फ दान का एक तरीका है, ऐसी संपत्ति जो समाज के लिए समर्पित की गई हो। अपनी संपत्ति वक्फ को देने वाला इंसान वकिफा कहलाता है। वकिफा दान देते वक्त ये शर्त रख सकता है कि उसकी संपत्ति से होने वाली आमदनी सिर्फ पढ़ाई पर या अस्पतालों पर ही खर्च हो। 27 देशों के वक्फ की संपत्तियों पर काम करने वाली संस्था ‘औकाफ प्रॉपर्टीज इन्वेस्टमेंट फंड’ यानी AIPF के मुताबिक कानूनी शब्दों में कहें तो इस्लाम में कोई व्यक्ति जब धार्मिक वजहों से या ईश्वर के नाम पर अपनी संपत्ति दान करता है तो वो वक्फ कहलाता है। इसमें चल या अचल संपत्ति दोनों हो सकती है। आमतौर पर वक्फ की संपत्ति या इससे होने वाली आमदनी को शैक्षणिक संस्थाओं, कब्रिस्तानों, मस्जिदों में धर्मार्थ और अनाथालयों में खर्च किया जाता है। वक्फ बोर्ड का काम क्या है? वक्फ में मिलने वाली जमीन या संपत्ति की देखरेख के लिए कानूनी तौर पर एक संस्था बनी, जिसे वक्फ बोर्ड कहते हैं। 1947 में देश का बंटवारा हुआ तो काफी संख्या में मुस्लिम देश छोड़कर पाकिस्तान गए थे। वहीं, पाकिस्तान से काफी सारे हिंदू लोग भारत आए थे। 1954 में संसद ने वक्फ एक्ट 1954 के नाम से कानून बनाया। इस तरह पाकिस्तान जाने वाले लोगों की जमीनों और संपत्तियों का मालिकाना हक इस कानून के जरिए वक्फ बोर्ड को दे दिया गया। 1955 में यानी कानून लागू होने के एक साल बाद, इस कानून में बदलाव कर हर राज्यों में वक्फ बोर्ड बनाए जाने की बात कही गई। इस वक्त देश में अलग-अलग प्रदेशों के करीब 32 वक्फ बोर्ड हैं, जो वक्फ की संपत्तियों का रजिस्ट्रेशन, देखरेख और मैनेजमेंट करते हैं। बिहार समेत कई प्रदेशों में शिया और सुन्नी मुस्लिमों के लिए अलग-अलग वक्फ बोर्ड हैं। वक्फ बोर्ड का काम वक्फ की कुल आमदनी कितनी है और इसके पैसे से किसका भला किया गया, उसका पूरा लेखा-जोखा रखना होता है। इनके पास किसी जमीन या संपत्ति को लेने और दूसरों के नाम पर ट्रांसफर करने का कानूनी अधिकार है। बोर्ड किसी व्यक्ति के खिलाफ कानूनी नोटिस भी जारी कर सकता है। किसी ट्रस्ट से ज्यादा पावर वक्फ बोर्ड के पास होती है।