हरियाणा-पंजाब के शंभू और खनौरी बॉर्डर से किसानों को जबरन हटाने को लेकर किसान पंजाब सरकार पर भड़के हुए हैं। पंजाब सरकार ने संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) के पंजाब चैप्टर और भारतीय किसान यूनियन (उगराहां) की चंडीगढ़ में शाम 7 बजे मीटिंग बुलाई गई थी। मगर, BKU उगराहां ने इसका बहिष्कार कर दिया है। संगठन के प्रधान जोगिंदर उगराहां ने कहा कि हमें यह नहीं पता कि शंभू-खनौरी बॉर्डर से कितने किसान हिरासत में लिए, वह कहां हैं। ऐसी स्थिति में हम मीटिंग नहीं कर सकते। SKM की तरफ से फैसला लिया जाना बाकी है। किसानों पर कार्रवाई को लेकर शुक्रवार को पंजाब विधानसभा के बजट सत्र के पहले दिन कांग्रेस ने हंगामा किया। इस दौरान गवर्नर गुलाब चंद कटारिया अभिभाषण देते रहे तो कांग्रेस ने भी वॉकआउट कर दिया। वहीं खनौरी बॉर्डर को आज पूरी तरह से खोला जा सकता है। यहां से हरियाणा पुलिस ने कल, गुरुवार को बैरिकेडिंग हटा दी थी। पंजाब साइड हाईवे पर ट्रॉलियां होने की वजह से यहां कल ट्रैफिक शुरू नहीं हो पाया। इसके खुलने से जींद-संगरूर के रास्ते दिल्ली और पटियाला आने-जाने वालों को राहत मिलेगी। शंभू बॉर्डर की दोनों लेन गुरुवार को ही खोल दी गईं थी। जिस वजह से पंजाब से हरियाणा और दिल्ली आने-जाने वालों को बड़ी राहत मिली है। ये दोनों ही बॉर्डर किसानों के प्रदर्शन की वजह से 13 महीने से बंद थे। किसान मजदूर मोर्चा (KMM) के संयोजक सरवण सिंह पंधेर समेत 101 किसानों को पटियाला की सेंट्रल जेल भेजा गया है। जबकि संयुक्त किसान मोर्चा (नॉन पॉलिटिकल) के नेता जगजीत डल्लेवाल ने इलाज लेने से इनकार कर दिया। डॉक्टरों की टीम आर्मी कंट्रोल वाले एरिया जालंधर कैंट के रेस्ट हाउस में उनकी निगरानी कर रही है। शंभू-खनौरी बॉर्डर बंद होने और खुलने की 13 महीने की पूरी कहानी… किसान दिल्ली जाने से रोके तो शंभू बॉर्डर पर रुके
फसलों की MSP की कानूनी गारंटी को लेकर पंजाब के किसान 12 फरवरी 2024 को दिल्ली जाने के लिए निकले थे। इसका पता चलते ही हरियाणा पुलिस ने उन्हें अंबाला-पटियाला के बीच शंभू बॉर्डर और संगरूर-जींद के बीच खनौरी बॉर्डर पर ही रोक लिया। किसानों पर आंसू गैस के गोले दागे गए। इससे नाराज किसान वहीं धरना लगाकर दिल्ली जाने की जिद पर अड़ गए। यह देख हरियाणा पुलिस ने दोनों बॉर्डर पर सीमेंट की पक्की बैरिकेडिंग कर दी। किसान पंजाब वाली साइड शेड बनाकर बैठ गए। इधर, बैरिकेडिंग पर हरियाणा पुलिस और पैरामिलिट्री फोर्स तैनात कर दी गई। किसानों ने 4 बार दिल्ली मार्च की कोशिश की
किसानों के आंदोलन से पहले ही केंद्र सरकार भी एक्टिव हुई। किसानों से पहली मीटिंग 8 फरवरी 2024 को हुई। जिसमें किसान MSP पर गारंटी कानून की मांग पर अड़े रहे। 4 दिन बाद 12 फरवरी को फिर मीटिंग हुई। इसके बाद 15 और 18 फरवरी यानी 10 दिन में 4 बार वार्ता हुई लेकिन हल नहीं निकला। तब तक किसानों ने अनिश्चितकालीन धरना लगा दिया। जिसके बाद केंद्र से वार्ता बंद हो गई। इसी बीच किसानों ने दिसंबर महीने में 4 बार दिल्ली कूच की कोशिश की लेकिन चारों बार हरियाणा पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागकर उन्हें रोक लिया। हाईकोर्ट से मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, डल्लेवाल के अनशन पर वार्ता शुरू
केंद्र के वार्ता न करने से शंभू बॉर्डर खुलवाने को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर हुई। हाईकोर्ट ने एक महीने में शंभू बॉर्डर खोलने को कहा। हरियाणा सरकार इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट चली गई। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र-किसानों के बीच मध्यस्थता के लिए कमेटी बना दी। इसी बीच 26 नवंबर से किसान नेता जगजीत डल्लेवाल ने अनशन शुरू कर दिया। जिसके बाद केंद्र फिर वार्ता के लिए राजी हुआ। 14 फरवरी 2025 को चंडीगढ़ में वार्ता हुई लेकिन इसका कोई हल नहीं निकला। 22 फरवरी को फिर मीटिंग हुई लेकिन किसानों ने MSP पर गारंटी कानून बनने तक आंदोलन खत्म करने से इनकार कर दिया। पंजाब सरकार का आंदोलन हटाने का फैसला, 72 घंटे पहले प्लानिंग
किसान आंदोलन के चलते शंभू बॉर्डर बंद होने से पंजाब के कारोबारियों को नुकसान हो रहा था। इससे पंजाब सरकार पर बॉर्डर खुलवाने का दबाव बन रहा था। सरकार ने केंद्र-किसानों के बीच मध्यस्थता की। किसानों को भी मनाने की कोशिश की लेकिन वह धरना हटाने पर राजी नहीं हुए। इसके बाद पंजाब सरकार ने 72 घंटे पहले तैयार कर ली कि आंदोलन को पुलिस के जरिए बलपूर्वक हटाया जाएगा। इसके लिए 19 मार्च का दिन चुना गया। उस दिन केंद्रीय मंत्रियों की चंडीगढ़ में किसान नेताओं से मीटिंग थी। शंभू और खनौरी बॉर्डर पर आंदोलन की अगुआई करने वाले ज्यादातर किसान नेता मीटिंग में शामिल होने पहुंचे। मीटिंग शुरू होने से पहले फोर्स भेजी, खत्म होने के बाद पंधेर-डल्लेवाल हिरासत में लिए
केंद्र-किसानों की मीटिंग 11 से 3 बजे तक यानी 4 घंटे चली। यहां से शंभू बॉर्डर लौट रहे सरवण पंधेर को मोहाली की एयरपोर्ट रोड से हिरासत में ले लिया गया। अनशन पर बैठे डल्लेवाल एम्बुलेंस में खनौरी बॉर्डर लौट रहे थे, उन्हें संगरूर में घेर लिया गया। पुलिस एम्बुलेंस समेत डल्लेवाल को लेकर चली गई। इसके बाद तुरंत पंजाब पुलिस ने खनौरी और शंभू बॉर्डर से किसानों को हटाना शुरू कर दिया। जो अड़े, उन्हें हिरासत में ले लिया गया। हरियाणा पुलिस ने 10 घंटे में शंभू बॉर्डर खोला, खनौरी से भी बैरिकेडिंग हटाई
पंजाब पुलिस के किसानों को हटाते ही गुरुवार (20 मार्च) को हरियाणा पुलिस भी एक्शन में आई। सुबह करीब साढ़े 8 बजे पुलिस बुलडोजर लेकर बैरिकेडिंग तोड़ने के लिए पहुंच गई। दोपहर डेढ़ बजे तक पुलिस ने पटियाला से अंबाला जाने वाला हिस्सा खोल दिया। फिर शाम साढ़े 6 बजे बॉर्डर के दोनों हिस्से खेल दिए गए। वहीं खनौरी बॉर्डर पर भी पुलिस इसी टाइम पहुंची। हरियाणा पुलिस ने अपनी दोनों लेन की बैरिकेडिंग हटा दी। पंजाब की तरफ ट्रैक्टर होने की वजह से ट्रैफिक चालू नहीं हो सका। ************ ये खबरें भी पढ़ें :- पंजाब विधानसभा के बजट सत्र में हंगामा:शंभू-खनौरी बॉर्डर से किसानों को हटाने पर कांग्रेस का प्रदर्शन; गवर्नर विरोध के बीच भाषण दे रहे पंजाब विधानसभा के बजट सत्र के पहले ही दिन हंगामा हो गया। शंभू और खनौरी बॉर्डर खाली कराने और किसानों को हिरासत में लेने के विरोध में कांग्रेस विधायकों ने नारेबाजी की। इसके बाद कांग्रेस विधायकों ने वॉकआउट कर दिया। पढ़ें पूरी खबर शंभू-खनौरी बॉर्डर से किसानों को हटाने की इनसाइड स्टोरी:72 घंटे पहले प्लानिंग, टकराव टालने को मीटिंग का दिन, पंधेर-डल्लेवाल की गैरमौजूदगी में एक्शन शंभू और खनौरी बॉर्डर को 13 महीने बाद पंजाब पुलिस ने खाली करा लिया है। अफसरों ने इसके लिए 72 घंटे पहले ही तैयारी शुरू कर दी थी। योजना बनाने के साथ ही 18 मार्च को पंजाब के DGP गौरव यादव और स्पेशल DGP लॉ एंड ऑर्डर अर्पित शुक्ला की अध्यक्षता में हाईलेवल मीटिंग हुई। पढ़ें पूरी खबर
हरियाणा-पंजाब के शंभू और खनौरी बॉर्डर से किसानों को जबरन हटाने को लेकर किसान पंजाब सरकार पर भड़के हुए हैं। पंजाब सरकार ने संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) के पंजाब चैप्टर और भारतीय किसान यूनियन (उगराहां) की चंडीगढ़ में शाम 7 बजे मीटिंग बुलाई गई थी। मगर, BKU उगराहां ने इसका बहिष्कार कर दिया है। संगठन के प्रधान जोगिंदर उगराहां ने कहा कि हमें यह नहीं पता कि शंभू-खनौरी बॉर्डर से कितने किसान हिरासत में लिए, वह कहां हैं। ऐसी स्थिति में हम मीटिंग नहीं कर सकते। SKM की तरफ से फैसला लिया जाना बाकी है। किसानों पर कार्रवाई को लेकर शुक्रवार को पंजाब विधानसभा के बजट सत्र के पहले दिन कांग्रेस ने हंगामा किया। इस दौरान गवर्नर गुलाब चंद कटारिया अभिभाषण देते रहे तो कांग्रेस ने भी वॉकआउट कर दिया। वहीं खनौरी बॉर्डर को आज पूरी तरह से खोला जा सकता है। यहां से हरियाणा पुलिस ने कल, गुरुवार को बैरिकेडिंग हटा दी थी। पंजाब साइड हाईवे पर ट्रॉलियां होने की वजह से यहां कल ट्रैफिक शुरू नहीं हो पाया। इसके खुलने से जींद-संगरूर के रास्ते दिल्ली और पटियाला आने-जाने वालों को राहत मिलेगी। शंभू बॉर्डर की दोनों लेन गुरुवार को ही खोल दी गईं थी। जिस वजह से पंजाब से हरियाणा और दिल्ली आने-जाने वालों को बड़ी राहत मिली है। ये दोनों ही बॉर्डर किसानों के प्रदर्शन की वजह से 13 महीने से बंद थे। किसान मजदूर मोर्चा (KMM) के संयोजक सरवण सिंह पंधेर समेत 101 किसानों को पटियाला की सेंट्रल जेल भेजा गया है। जबकि संयुक्त किसान मोर्चा (नॉन पॉलिटिकल) के नेता जगजीत डल्लेवाल ने इलाज लेने से इनकार कर दिया। डॉक्टरों की टीम आर्मी कंट्रोल वाले एरिया जालंधर कैंट के रेस्ट हाउस में उनकी निगरानी कर रही है। शंभू-खनौरी बॉर्डर बंद होने और खुलने की 13 महीने की पूरी कहानी… किसान दिल्ली जाने से रोके तो शंभू बॉर्डर पर रुके
फसलों की MSP की कानूनी गारंटी को लेकर पंजाब के किसान 12 फरवरी 2024 को दिल्ली जाने के लिए निकले थे। इसका पता चलते ही हरियाणा पुलिस ने उन्हें अंबाला-पटियाला के बीच शंभू बॉर्डर और संगरूर-जींद के बीच खनौरी बॉर्डर पर ही रोक लिया। किसानों पर आंसू गैस के गोले दागे गए। इससे नाराज किसान वहीं धरना लगाकर दिल्ली जाने की जिद पर अड़ गए। यह देख हरियाणा पुलिस ने दोनों बॉर्डर पर सीमेंट की पक्की बैरिकेडिंग कर दी। किसान पंजाब वाली साइड शेड बनाकर बैठ गए। इधर, बैरिकेडिंग पर हरियाणा पुलिस और पैरामिलिट्री फोर्स तैनात कर दी गई। किसानों ने 4 बार दिल्ली मार्च की कोशिश की
किसानों के आंदोलन से पहले ही केंद्र सरकार भी एक्टिव हुई। किसानों से पहली मीटिंग 8 फरवरी 2024 को हुई। जिसमें किसान MSP पर गारंटी कानून की मांग पर अड़े रहे। 4 दिन बाद 12 फरवरी को फिर मीटिंग हुई। इसके बाद 15 और 18 फरवरी यानी 10 दिन में 4 बार वार्ता हुई लेकिन हल नहीं निकला। तब तक किसानों ने अनिश्चितकालीन धरना लगा दिया। जिसके बाद केंद्र से वार्ता बंद हो गई। इसी बीच किसानों ने दिसंबर महीने में 4 बार दिल्ली कूच की कोशिश की लेकिन चारों बार हरियाणा पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागकर उन्हें रोक लिया। हाईकोर्ट से मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, डल्लेवाल के अनशन पर वार्ता शुरू
केंद्र के वार्ता न करने से शंभू बॉर्डर खुलवाने को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर हुई। हाईकोर्ट ने एक महीने में शंभू बॉर्डर खोलने को कहा। हरियाणा सरकार इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट चली गई। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र-किसानों के बीच मध्यस्थता के लिए कमेटी बना दी। इसी बीच 26 नवंबर से किसान नेता जगजीत डल्लेवाल ने अनशन शुरू कर दिया। जिसके बाद केंद्र फिर वार्ता के लिए राजी हुआ। 14 फरवरी 2025 को चंडीगढ़ में वार्ता हुई लेकिन इसका कोई हल नहीं निकला। 22 फरवरी को फिर मीटिंग हुई लेकिन किसानों ने MSP पर गारंटी कानून बनने तक आंदोलन खत्म करने से इनकार कर दिया। पंजाब सरकार का आंदोलन हटाने का फैसला, 72 घंटे पहले प्लानिंग
किसान आंदोलन के चलते शंभू बॉर्डर बंद होने से पंजाब के कारोबारियों को नुकसान हो रहा था। इससे पंजाब सरकार पर बॉर्डर खुलवाने का दबाव बन रहा था। सरकार ने केंद्र-किसानों के बीच मध्यस्थता की। किसानों को भी मनाने की कोशिश की लेकिन वह धरना हटाने पर राजी नहीं हुए। इसके बाद पंजाब सरकार ने 72 घंटे पहले तैयार कर ली कि आंदोलन को पुलिस के जरिए बलपूर्वक हटाया जाएगा। इसके लिए 19 मार्च का दिन चुना गया। उस दिन केंद्रीय मंत्रियों की चंडीगढ़ में किसान नेताओं से मीटिंग थी। शंभू और खनौरी बॉर्डर पर आंदोलन की अगुआई करने वाले ज्यादातर किसान नेता मीटिंग में शामिल होने पहुंचे। मीटिंग शुरू होने से पहले फोर्स भेजी, खत्म होने के बाद पंधेर-डल्लेवाल हिरासत में लिए
केंद्र-किसानों की मीटिंग 11 से 3 बजे तक यानी 4 घंटे चली। यहां से शंभू बॉर्डर लौट रहे सरवण पंधेर को मोहाली की एयरपोर्ट रोड से हिरासत में ले लिया गया। अनशन पर बैठे डल्लेवाल एम्बुलेंस में खनौरी बॉर्डर लौट रहे थे, उन्हें संगरूर में घेर लिया गया। पुलिस एम्बुलेंस समेत डल्लेवाल को लेकर चली गई। इसके बाद तुरंत पंजाब पुलिस ने खनौरी और शंभू बॉर्डर से किसानों को हटाना शुरू कर दिया। जो अड़े, उन्हें हिरासत में ले लिया गया। हरियाणा पुलिस ने 10 घंटे में शंभू बॉर्डर खोला, खनौरी से भी बैरिकेडिंग हटाई
पंजाब पुलिस के किसानों को हटाते ही गुरुवार (20 मार्च) को हरियाणा पुलिस भी एक्शन में आई। सुबह करीब साढ़े 8 बजे पुलिस बुलडोजर लेकर बैरिकेडिंग तोड़ने के लिए पहुंच गई। दोपहर डेढ़ बजे तक पुलिस ने पटियाला से अंबाला जाने वाला हिस्सा खोल दिया। फिर शाम साढ़े 6 बजे बॉर्डर के दोनों हिस्से खेल दिए गए। वहीं खनौरी बॉर्डर पर भी पुलिस इसी टाइम पहुंची। हरियाणा पुलिस ने अपनी दोनों लेन की बैरिकेडिंग हटा दी। पंजाब की तरफ ट्रैक्टर होने की वजह से ट्रैफिक चालू नहीं हो सका। ************ ये खबरें भी पढ़ें :- पंजाब विधानसभा के बजट सत्र में हंगामा:शंभू-खनौरी बॉर्डर से किसानों को हटाने पर कांग्रेस का प्रदर्शन; गवर्नर विरोध के बीच भाषण दे रहे पंजाब विधानसभा के बजट सत्र के पहले ही दिन हंगामा हो गया। शंभू और खनौरी बॉर्डर खाली कराने और किसानों को हिरासत में लेने के विरोध में कांग्रेस विधायकों ने नारेबाजी की। इसके बाद कांग्रेस विधायकों ने वॉकआउट कर दिया। पढ़ें पूरी खबर शंभू-खनौरी बॉर्डर से किसानों को हटाने की इनसाइड स्टोरी:72 घंटे पहले प्लानिंग, टकराव टालने को मीटिंग का दिन, पंधेर-डल्लेवाल की गैरमौजूदगी में एक्शन शंभू और खनौरी बॉर्डर को 13 महीने बाद पंजाब पुलिस ने खाली करा लिया है। अफसरों ने इसके लिए 72 घंटे पहले ही तैयारी शुरू कर दी थी। योजना बनाने के साथ ही 18 मार्च को पंजाब के DGP गौरव यादव और स्पेशल DGP लॉ एंड ऑर्डर अर्पित शुक्ला की अध्यक्षता में हाईलेवल मीटिंग हुई। पढ़ें पूरी खबर