तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन शुक्रवार को भाजपा को चैलेंज किया कि हिम्मत है तो विधानसभा चुनाव में ट्राई लैंग्वेज को मुद्दा बनाकर दिखाएं। उन्होंने कहा कि LKG स्टूडेंट PhD होल्डर को समझा रहे हैं। स्टालिन ने अपनी X पोस्ट में केंद्र सरकार पर हिंदी थोपने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु कभी भी इस जबरदस्ती को स्वीकार नहीं करेगा। यह ब्रिटिश शासन जैसा है। शिक्षा मंत्री ने तमिलनाडु को हिंदी स्वीकारने की धमकी दी, अब उन्हें इसका जवाब मिलेगा। वहीं, इसके जवाब में गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि स्टालिन ने तमिल के लिए कोई बड़ा काम नहीं किया। वे तमिल भाषा के इतने ही हितैषी हैं तो राज्य में मेडिकल और इंजीनियरिंग की पढ़ाई तमिल में शुरू करवाएं। हम पिछले दो साल से यह अनुरोध कर रहे हैं। शाह ने तमिलनाडु के रानीपेट जिले के केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के 56वें स्थापना दिवस परेड में ये बाते कहीं। स्टालिन बोले- हिंदी थोपने की हर कोशिश नाकाम हुई
स्टालिन ने इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि हर बार जब किसी ने तमिलनाडु में हिंदी थोपने की कोशिश की तो उसे हार मिली या फिर उन्हें DMK के साथ आना पड़ा। स्टालिन ने कहा कि हिंदी थोपने से गैर-हिंदी भाषी लोगों को बहुत परेशानी होती है। भारत में गैर-हिंदी भाषी लोगों का ही बहुमत है। सरकारी योजनाओं, पुरस्कारों और केंद्र सरकार की संस्थाओं तक में हिंदी को थोपा जा रहा है। लोग आते हैं और चले जाते हैं, लेकिन जब हिंदी का वर्चस्व खत्म होगा, तब भी इतिहास याद रखेगा कि DMK ने इसके खिलाफ सबसे पहले और सबसे मजबूती से लड़ाई लड़ी थी। जानिए कैसे शुरू हुआ ट्राई लैंग्वेज वॉर… 15 फरवरी: धर्मेंद्र प्रधान ने वाराणसी के एक कार्यक्रम में तमिलनाडु सरकार पर राजनीतिक हितों को साधने का आरोप लगाया। 18 फरवरी: उदयनिधि बोले- केंद्र लैंग्वेज वॉर शुरू न करे
चेन्नई में DMK की रैली में डिप्टी सीएम उदयनिधि स्टालिन ने कहा- धर्मेंद्र प्रधान ने खुलेआम धमकी दी है कि फंड तभी जारी किया जाएगा, जब हम ट्राई लैंग्वेज फॉर्मूला स्वीकार करेंगे। लेकिन हम आपसे भीख नहीं मांग रहे हैं। जो राज्य हिंदी को स्वीकार करते हैं, वे अपनी मातृभाषा खो देते हैं। केंद्र लैंग्वेज वॉर शुरू न करें। 23 फरवरी: शिक्षा मंत्री ने स्टालिन को लेटर लिखा
ट्राई लैंग्वेज विवाद पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन को लेटर लिखा। उन्होंने नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) के विरोध की आलोचना की। उन्होंने लिखा, ‘किसी भी भाषा को थोपने का सवाल नहीं है। लेकिन विदेशी भाषाओं पर अत्यधिक निर्भरता खुद की भाषा को सीमित करती है। NEP इसे ही ठीक करने का प्रयास कर रही है।’ 25 फरवरी: स्टालिन बोले- हम लैंग्वेज वॉर के लिए तैयार हैं
स्टालिन ने कहा- केंद्र हमारे ऊपर हिंदी न थोपे। अगर जरूरत पड़ी तो राज्य एक और लैंग्वेज वॉर के लिए तैयार है। NEP 2020 के तहत, स्टूडेंट्स को तीन भाषाएं सीखनी होंगी, लेकिन किसी भाषा को अनिवार्य नहीं किया गया है। राज्यों और स्कूलों को यह तय करने की आजादी है कि वे कौन-सी तीन भाषाएं पढ़ाना चाहते हैं। किसी भी भाषा की अनिवार्यता का प्रावधान नहीं है। प्राइमरी क्लासेस (क्लास 1 से 5 तक) में पढ़ाई मातृभाषा या स्थानीय भाषा में करने की सिफारिश की गई है। वहीं, मिडिल क्लासेस (क्लास 6 से 10 तक) में तीन भाषाओं की पढ़ाई करना अनिवार्य है। गैर-हिंदी भाषी राज्य में अंग्रेजी या एक आधुनिक भारतीय भाषा होगी। सेकेंड्री सेक्शन यानी 11वीं और 12वीं में स्कूल चाहे तो विदेशी भाषा भी विकल्प के तौर पर दे सकेंगे। गैर-हिंदी भाषी राज्यों में हिंदी दूसरी भाषा
5वीं और जहां संभव हो 8वीं तक की क्लासेस की पढ़ाई मातृभाषा, स्थानीय या क्षेत्रीय भाषा में करने पर जोर है। वहीं, गैर-हिंदी भाषी राज्यों में हिंदी दूसरी भाषा के रूप में पढ़ाई जा सकती है। साथ ही, हिंदी भाषी राज्यों में दूसरी भाषा के रूप में कोई अन्य भारतीय भाषा (जैसे- तमिल, बंगाली, तेलुगु आदि) हो सकती है। ———————————————- ट्राई लैंग्वेज वॉर से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें…. तमिलनाडु भाजपा ने सिग्नेचर कैंपेन शुरू किया, अन्नामलाई बोले- इंदिरा-राजीव के नाम पर योजनाओं से बेहतर हिन्दी नाम नई शिक्षा नीति (NEP) के तहत ट्राई लैंग्वेज पॉलिसी के समर्थन में तमिलनाडु भाजपा ने हस्ताक्षर कैंपेन शुरू किया। इस दौरान तमिलनाडु भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के अन्नामलाई ने ट्राई लैंग्वेज पॉलिसी को समय की जरूरत बताया। पूरी खबर पढ़ें…
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन शुक्रवार को भाजपा को चैलेंज किया कि हिम्मत है तो विधानसभा चुनाव में ट्राई लैंग्वेज को मुद्दा बनाकर दिखाएं। उन्होंने कहा कि LKG स्टूडेंट PhD होल्डर को समझा रहे हैं। स्टालिन ने अपनी X पोस्ट में केंद्र सरकार पर हिंदी थोपने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु कभी भी इस जबरदस्ती को स्वीकार नहीं करेगा। यह ब्रिटिश शासन जैसा है। शिक्षा मंत्री ने तमिलनाडु को हिंदी स्वीकारने की धमकी दी, अब उन्हें इसका जवाब मिलेगा। वहीं, इसके जवाब में गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि स्टालिन ने तमिल के लिए कोई बड़ा काम नहीं किया। वे तमिल भाषा के इतने ही हितैषी हैं तो राज्य में मेडिकल और इंजीनियरिंग की पढ़ाई तमिल में शुरू करवाएं। हम पिछले दो साल से यह अनुरोध कर रहे हैं। शाह ने तमिलनाडु के रानीपेट जिले के केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के 56वें स्थापना दिवस परेड में ये बाते कहीं। स्टालिन बोले- हिंदी थोपने की हर कोशिश नाकाम हुई
स्टालिन ने इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि हर बार जब किसी ने तमिलनाडु में हिंदी थोपने की कोशिश की तो उसे हार मिली या फिर उन्हें DMK के साथ आना पड़ा। स्टालिन ने कहा कि हिंदी थोपने से गैर-हिंदी भाषी लोगों को बहुत परेशानी होती है। भारत में गैर-हिंदी भाषी लोगों का ही बहुमत है। सरकारी योजनाओं, पुरस्कारों और केंद्र सरकार की संस्थाओं तक में हिंदी को थोपा जा रहा है। लोग आते हैं और चले जाते हैं, लेकिन जब हिंदी का वर्चस्व खत्म होगा, तब भी इतिहास याद रखेगा कि DMK ने इसके खिलाफ सबसे पहले और सबसे मजबूती से लड़ाई लड़ी थी। जानिए कैसे शुरू हुआ ट्राई लैंग्वेज वॉर… 15 फरवरी: धर्मेंद्र प्रधान ने वाराणसी के एक कार्यक्रम में तमिलनाडु सरकार पर राजनीतिक हितों को साधने का आरोप लगाया। 18 फरवरी: उदयनिधि बोले- केंद्र लैंग्वेज वॉर शुरू न करे
चेन्नई में DMK की रैली में डिप्टी सीएम उदयनिधि स्टालिन ने कहा- धर्मेंद्र प्रधान ने खुलेआम धमकी दी है कि फंड तभी जारी किया जाएगा, जब हम ट्राई लैंग्वेज फॉर्मूला स्वीकार करेंगे। लेकिन हम आपसे भीख नहीं मांग रहे हैं। जो राज्य हिंदी को स्वीकार करते हैं, वे अपनी मातृभाषा खो देते हैं। केंद्र लैंग्वेज वॉर शुरू न करें। 23 फरवरी: शिक्षा मंत्री ने स्टालिन को लेटर लिखा
ट्राई लैंग्वेज विवाद पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन को लेटर लिखा। उन्होंने नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) के विरोध की आलोचना की। उन्होंने लिखा, ‘किसी भी भाषा को थोपने का सवाल नहीं है। लेकिन विदेशी भाषाओं पर अत्यधिक निर्भरता खुद की भाषा को सीमित करती है। NEP इसे ही ठीक करने का प्रयास कर रही है।’ 25 फरवरी: स्टालिन बोले- हम लैंग्वेज वॉर के लिए तैयार हैं
स्टालिन ने कहा- केंद्र हमारे ऊपर हिंदी न थोपे। अगर जरूरत पड़ी तो राज्य एक और लैंग्वेज वॉर के लिए तैयार है। NEP 2020 के तहत, स्टूडेंट्स को तीन भाषाएं सीखनी होंगी, लेकिन किसी भाषा को अनिवार्य नहीं किया गया है। राज्यों और स्कूलों को यह तय करने की आजादी है कि वे कौन-सी तीन भाषाएं पढ़ाना चाहते हैं। किसी भी भाषा की अनिवार्यता का प्रावधान नहीं है। प्राइमरी क्लासेस (क्लास 1 से 5 तक) में पढ़ाई मातृभाषा या स्थानीय भाषा में करने की सिफारिश की गई है। वहीं, मिडिल क्लासेस (क्लास 6 से 10 तक) में तीन भाषाओं की पढ़ाई करना अनिवार्य है। गैर-हिंदी भाषी राज्य में अंग्रेजी या एक आधुनिक भारतीय भाषा होगी। सेकेंड्री सेक्शन यानी 11वीं और 12वीं में स्कूल चाहे तो विदेशी भाषा भी विकल्प के तौर पर दे सकेंगे। गैर-हिंदी भाषी राज्यों में हिंदी दूसरी भाषा
5वीं और जहां संभव हो 8वीं तक की क्लासेस की पढ़ाई मातृभाषा, स्थानीय या क्षेत्रीय भाषा में करने पर जोर है। वहीं, गैर-हिंदी भाषी राज्यों में हिंदी दूसरी भाषा के रूप में पढ़ाई जा सकती है। साथ ही, हिंदी भाषी राज्यों में दूसरी भाषा के रूप में कोई अन्य भारतीय भाषा (जैसे- तमिल, बंगाली, तेलुगु आदि) हो सकती है। ———————————————- ट्राई लैंग्वेज वॉर से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें…. तमिलनाडु भाजपा ने सिग्नेचर कैंपेन शुरू किया, अन्नामलाई बोले- इंदिरा-राजीव के नाम पर योजनाओं से बेहतर हिन्दी नाम नई शिक्षा नीति (NEP) के तहत ट्राई लैंग्वेज पॉलिसी के समर्थन में तमिलनाडु भाजपा ने हस्ताक्षर कैंपेन शुरू किया। इस दौरान तमिलनाडु भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के अन्नामलाई ने ट्राई लैंग्वेज पॉलिसी को समय की जरूरत बताया। पूरी खबर पढ़ें…