आपराधिक छवि के सांसदों-विधायकों के चुनाव लड़ने पर बैन लगाने की मांग वाली याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करेगा। पिछली सुनवाई (10 फरवरी) में कोर्ट ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग (EC) से इस पर 3 हफ्ते में जवाब मांगा था। कोर्ट ने कहा था कि केंद्र सरकार और EC तय समय में जवाब नहीं भी देते तो वे मामले को आगे बढ़ाएंगे। दोषी नेताओं के चुनाव लड़ने पर सिर्फ छह साल का बैन लगाने का कोई औचित्य नहीं है। कोर्ट ने कहा था- अगर किसी सरकारी कर्मचारी को दोषी ठहराया जाता है तो वह जीवन भर के लिए सेवा से बाहर हो जाता है। फिर दोषी व्यक्ति संसद में कैसे लौट सकता है? कानून तोड़ने वाले कानून बनाने का काम कैसे कर सकते हैं? वकील अश्विनी उपाध्याय ने 2016 में जनहित याचिका दायर कर जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 8 और 9 की वैधता को चुनौती दी थी। याचिका में सांसदों-विधायकों के खिलाफ क्रिमिनल केसों को जल्द खत्म करने और दोषी राजनेताओं पर आजीवन प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है। केंद्र ने आजीवन प्रतिबंध का विरोध किया
मामले की सुनवाई जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस मनमोहन की बेंच कर रही है। केंद्र सरकार ने 26 फरवरी को अपना जवाब दाखिल किया था। सरकार ने दागी नेताओं पर चुनाव लड़ने से आजीवन प्रतिबंध का विरोध किया था। सरकार ने कहा था कि 6 साल की पाबंदी काफी है। इस तरह की अयोग्यता पर फैसला लेना संसद के अधिकार क्षेत्र में आता है। पूरी खबर पढ़ें… कोर्ट ने निचली अदालतों में धीमी सुनवाई पर चिंता जताई सुप्रीम कोर्ट ने 2013 में दिया था फैसला
अप्रैल 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसला देते हुए कहा था कि 2 साल या उससे ज्यादा की सजा पाने वाले विधायकों और सांसदों को सदन से तत्काल प्रभाव से निष्कासित कर दिया जाए। इसमें अपील करने की 3 महीने की अवधि को नकार दिया गया था। इसके अलावा चुनाव लड़ने पर 6 साल के लिए बैन लगाया था। ——————————————-
सुप्रीम कोर्ट से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… सुप्रीम कोर्ट बोला- गवाही की कोई उम्र सीमा नहीं होती, 7 साल की बच्ची के बयान पर मां के हत्यारे पिता को उम्रकैद सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि गवाह की कोई उम्र सीमा नहीं होती है। अगर कोई बच्चा गवाह देने में सक्षम है तो उसकी गवाही उतनी ही मान्य होगी, जितनी किसी और गवाह की। दरअसल, कोर्ट ने 7 साल की बच्ची के गवाह के आधार पर हत्यारे पति को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। बच्ची ने अपने पिता को मां की हत्या करते देखा था। पूरी खबर पढ़ें…
आपराधिक छवि के सांसदों-विधायकों के चुनाव लड़ने पर बैन लगाने की मांग वाली याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करेगा। पिछली सुनवाई (10 फरवरी) में कोर्ट ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग (EC) से इस पर 3 हफ्ते में जवाब मांगा था। कोर्ट ने कहा था कि केंद्र सरकार और EC तय समय में जवाब नहीं भी देते तो वे मामले को आगे बढ़ाएंगे। दोषी नेताओं के चुनाव लड़ने पर सिर्फ छह साल का बैन लगाने का कोई औचित्य नहीं है। कोर्ट ने कहा था- अगर किसी सरकारी कर्मचारी को दोषी ठहराया जाता है तो वह जीवन भर के लिए सेवा से बाहर हो जाता है। फिर दोषी व्यक्ति संसद में कैसे लौट सकता है? कानून तोड़ने वाले कानून बनाने का काम कैसे कर सकते हैं? वकील अश्विनी उपाध्याय ने 2016 में जनहित याचिका दायर कर जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 8 और 9 की वैधता को चुनौती दी थी। याचिका में सांसदों-विधायकों के खिलाफ क्रिमिनल केसों को जल्द खत्म करने और दोषी राजनेताओं पर आजीवन प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है। केंद्र ने आजीवन प्रतिबंध का विरोध किया
मामले की सुनवाई जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस मनमोहन की बेंच कर रही है। केंद्र सरकार ने 26 फरवरी को अपना जवाब दाखिल किया था। सरकार ने दागी नेताओं पर चुनाव लड़ने से आजीवन प्रतिबंध का विरोध किया था। सरकार ने कहा था कि 6 साल की पाबंदी काफी है। इस तरह की अयोग्यता पर फैसला लेना संसद के अधिकार क्षेत्र में आता है। पूरी खबर पढ़ें… कोर्ट ने निचली अदालतों में धीमी सुनवाई पर चिंता जताई सुप्रीम कोर्ट ने 2013 में दिया था फैसला
अप्रैल 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसला देते हुए कहा था कि 2 साल या उससे ज्यादा की सजा पाने वाले विधायकों और सांसदों को सदन से तत्काल प्रभाव से निष्कासित कर दिया जाए। इसमें अपील करने की 3 महीने की अवधि को नकार दिया गया था। इसके अलावा चुनाव लड़ने पर 6 साल के लिए बैन लगाया था। ——————————————-
सुप्रीम कोर्ट से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… सुप्रीम कोर्ट बोला- गवाही की कोई उम्र सीमा नहीं होती, 7 साल की बच्ची के बयान पर मां के हत्यारे पिता को उम्रकैद सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि गवाह की कोई उम्र सीमा नहीं होती है। अगर कोई बच्चा गवाह देने में सक्षम है तो उसकी गवाही उतनी ही मान्य होगी, जितनी किसी और गवाह की। दरअसल, कोर्ट ने 7 साल की बच्ची के गवाह के आधार पर हत्यारे पति को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। बच्ची ने अपने पिता को मां की हत्या करते देखा था। पूरी खबर पढ़ें…