आर्थिक संकट झेल रही हिमाचल की कांग्रेस सरकार ने 2 फ्लैगशिप योजनाएं चलाने के लिए मंदिरों से जमा राशि मांगी है। इस पर पूर्व CM और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने विरोध जताते हुए कहा, ‘मंदिरों का पैसा मांगने का फैसला दुर्भाग्यपूर्ण और पूरी तरह अस्वीकार्य है। एक तरफ सनातन का विरोध और मंदिरों को गालियां दी जा रही हैं। दूसरी तरफ मंदिरों के पैसे से सरकारी योजनाएं चलाई जा रही हैं।’ सरकार के भाषा, कला एवं संस्कृत विभाग के सचिव ने कुल्लू और किन्नौर को छोड़कर अन्य सभी जिलों के DC को पत्र लिखा है। इसमें सरकार की सुख शिक्षा योजना और मुख्यमंत्री सुखाश्रय योजना के लिए अंशदान देने को कहा है। यह पैसा सरकार के अधीन चल रहे मंदिरों व ट्रस्ट से मांगा गया है। फिलहाल प्रदेश में सरकारी नियंत्रण में 36 मंदिर हैं। कांग्रेस सरकार के इस फैसले के बाद इन सभी मंदिरों व ट्रस्ट से सरकार को पैसा वापस आएगा। जयराम बोले- ये सनातन विरोधी फैसला
जयराम ठाकुर ने वीडियो जारी कर कहा कि मंदिरों का पैसा कोरोना काल, आपदा या फिर मुख्यमंत्री राहत कोष के लिए जरूर खर्च किया जाता है। मगर, सरकारी योजनाएं चलाने के लिए कभी भी खर्च नहीं किया गया। कांग्रेस सरकार का यह फैसला दुर्भाग्यपूर्ण है। एक सचिव ने सभी DC को पत्र लिखा और बार-बार फोन करके जल्दी पैसा भेजने को कहा जा रहा है। इस फैसला का विरोध होना चाहिए। भाजपा आगामी बजट सत्र में इसका विरोध करेगी। कांग्रेस सरकार के फैसले दुनियाभर में चर्चित रहे हैं। अब एक और सनातन विरोधी फैसला लिया गया है। सरकार की दोनों योजनाओं के बारे में सिलसिलेवार ढंग से जानिए सुखाश्रय योजना: 28 फरवरी, 2023 को शुरुआत हुई
हिमाचल में बिना माता-पिता के बच्चों की देखभाल और पढ़ाई के लिए सुखाश्रय योजना शुरू की गई थी। इसके लिए बाकायदा कानून बनाकर ऐसे बच्चों को चिल्ड्रंस ऑफ द स्टेट का दर्जा दिया गया है, ताकि बिन मां-बाप के बच्चों को सहारा दिया जा सके। इन बच्चों के मकान, विवाह, शिक्षा के साथ ही स्वरोजगार का भी सरकार ध्यान रख रही है। ऐसे बच्चों की 27 साल की उम्र तक सरकार देखभाल कर रही है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खू ने कहा कि ऐसे बच्चों की सरकार ही माता है और सरकार ही पिता है। हम अपने बच्चों की तरह अनाथ बच्चों की देखभाल करेंगे। प्रदेश में लगभग 6 हजार बच्चे हैं, जिनके मां-बाप नहीं हैं। चाहे वे आश्रम में रह रहे हों या किसी रिश्तेदार के पास रह रहे हों। सभी की सहायता करेंगे। इसी मंशा से सरकार ने कानून बनाया है। सुख शिक्षा योजना: 3 सितंबर, 2024 को शुरुआत हुई
मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खू ने कांग्रेस सरकार के 2 साल पूरे होने पर ‘इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना’ का शुभारंभ किया था। इस योजना का मुख्य उद्देश्य विधवा, बेसहारा, तलाकशुदा महिलाओं और दिव्यांग माता-पिता को उनके बच्चों की शिक्षा और कल्याण के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना है। इस योजना के तहत पात्र महिलाओं और दिव्यांग माता-पिता को उनके 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण संबंधी खर्चों को पूरा करने के लिए एक हजार रुपए का मासिक अनुदान प्रदान किया जा रहा है। इसके अलावा ग्रेजुएशन, MA, डिप्लोमा या व्यवसायिक पाठयक्रमों में प्रवेश पाने वाले बच्चों को ट्यूशन और छात्रावास का खर्च भी इस योजना के तहत उठाया जा रहा है। इस योजना में 1.38 करोड़ रुपए 5,145 लाभार्थियों को वितरित किए जा चुके हैं।
आर्थिक संकट झेल रही हिमाचल की कांग्रेस सरकार ने 2 फ्लैगशिप योजनाएं चलाने के लिए मंदिरों से जमा राशि मांगी है। इस पर पूर्व CM और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने विरोध जताते हुए कहा, ‘मंदिरों का पैसा मांगने का फैसला दुर्भाग्यपूर्ण और पूरी तरह अस्वीकार्य है। एक तरफ सनातन का विरोध और मंदिरों को गालियां दी जा रही हैं। दूसरी तरफ मंदिरों के पैसे से सरकारी योजनाएं चलाई जा रही हैं।’ सरकार के भाषा, कला एवं संस्कृत विभाग के सचिव ने कुल्लू और किन्नौर को छोड़कर अन्य सभी जिलों के DC को पत्र लिखा है। इसमें सरकार की सुख शिक्षा योजना और मुख्यमंत्री सुखाश्रय योजना के लिए अंशदान देने को कहा है। यह पैसा सरकार के अधीन चल रहे मंदिरों व ट्रस्ट से मांगा गया है। फिलहाल प्रदेश में सरकारी नियंत्रण में 36 मंदिर हैं। कांग्रेस सरकार के इस फैसले के बाद इन सभी मंदिरों व ट्रस्ट से सरकार को पैसा वापस आएगा। जयराम बोले- ये सनातन विरोधी फैसला
जयराम ठाकुर ने वीडियो जारी कर कहा कि मंदिरों का पैसा कोरोना काल, आपदा या फिर मुख्यमंत्री राहत कोष के लिए जरूर खर्च किया जाता है। मगर, सरकारी योजनाएं चलाने के लिए कभी भी खर्च नहीं किया गया। कांग्रेस सरकार का यह फैसला दुर्भाग्यपूर्ण है। एक सचिव ने सभी DC को पत्र लिखा और बार-बार फोन करके जल्दी पैसा भेजने को कहा जा रहा है। इस फैसला का विरोध होना चाहिए। भाजपा आगामी बजट सत्र में इसका विरोध करेगी। कांग्रेस सरकार के फैसले दुनियाभर में चर्चित रहे हैं। अब एक और सनातन विरोधी फैसला लिया गया है। सरकार की दोनों योजनाओं के बारे में सिलसिलेवार ढंग से जानिए सुखाश्रय योजना: 28 फरवरी, 2023 को शुरुआत हुई
हिमाचल में बिना माता-पिता के बच्चों की देखभाल और पढ़ाई के लिए सुखाश्रय योजना शुरू की गई थी। इसके लिए बाकायदा कानून बनाकर ऐसे बच्चों को चिल्ड्रंस ऑफ द स्टेट का दर्जा दिया गया है, ताकि बिन मां-बाप के बच्चों को सहारा दिया जा सके। इन बच्चों के मकान, विवाह, शिक्षा के साथ ही स्वरोजगार का भी सरकार ध्यान रख रही है। ऐसे बच्चों की 27 साल की उम्र तक सरकार देखभाल कर रही है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खू ने कहा कि ऐसे बच्चों की सरकार ही माता है और सरकार ही पिता है। हम अपने बच्चों की तरह अनाथ बच्चों की देखभाल करेंगे। प्रदेश में लगभग 6 हजार बच्चे हैं, जिनके मां-बाप नहीं हैं। चाहे वे आश्रम में रह रहे हों या किसी रिश्तेदार के पास रह रहे हों। सभी की सहायता करेंगे। इसी मंशा से सरकार ने कानून बनाया है। सुख शिक्षा योजना: 3 सितंबर, 2024 को शुरुआत हुई
मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खू ने कांग्रेस सरकार के 2 साल पूरे होने पर ‘इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना’ का शुभारंभ किया था। इस योजना का मुख्य उद्देश्य विधवा, बेसहारा, तलाकशुदा महिलाओं और दिव्यांग माता-पिता को उनके बच्चों की शिक्षा और कल्याण के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना है। इस योजना के तहत पात्र महिलाओं और दिव्यांग माता-पिता को उनके 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण संबंधी खर्चों को पूरा करने के लिए एक हजार रुपए का मासिक अनुदान प्रदान किया जा रहा है। इसके अलावा ग्रेजुएशन, MA, डिप्लोमा या व्यवसायिक पाठयक्रमों में प्रवेश पाने वाले बच्चों को ट्यूशन और छात्रावास का खर्च भी इस योजना के तहत उठाया जा रहा है। इस योजना में 1.38 करोड़ रुपए 5,145 लाभार्थियों को वितरित किए जा चुके हैं।