मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगने के बाद से ही हथियारों का सरेंडर जारी है। बुधवार को पुलिस ने बताया कि 87 तरह के हथियार, गोला-बारूद और अलग-अलग सामान लोग स्वेच्छा से सरेंडर कर रहे हैं। इंफाल ईस्ट, बिश्नुपुर, थौबल, कांगपोकपी, जिरीबाम, चुराचांदपुर और इंफाल वेस्ट जिलों में हथियार सरेंडर किए गए हैं। इधर, राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने मैतेई सशस्त्र समूह अरामबाई तेंगगोल के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की है। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल ने कहा- राज्यपाल ने उन्हें राज्य में शांति और स्थिति को सामान्य करने के लिए मदद को कहा है। हथियारों के सरेंडर को लेकर कुछ शर्तों पर चर्चा हुई है। मणिपुर में 13 फरवरी को केंद्र सरकार ने राष्ट्रपति शासन लगाया। यह फैसला मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह के इस्तीफे के 4 दिन बाद लिया गया। सिंह ने 9 फरवरी को गवर्नर को इस्तीफा सौंपा था। राज्य में 21 महीने (3 मई 2023) से जारी जातीय हिंसा के चलते 300 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं। हथियार सरेंडर की तस्वीरें कौन से जिले से कितने हथियार सरेंडर हुए 9 फरवरी को CM एन बीरेन ने इस्तीफा दिया था
मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने 9 फरवरी को अपना इस्तीफा गवर्नर को सौंपा था। गवर्नर अजय कुमार भल्ला ने इस्तीफा स्वीकार किया। बीरेन सिंह पर राज्य में 21 महीने से जारी हिंसा के चलते काफी दबाव था। विपक्षी पार्टियां भी लगातार NDA से इस मुद्दे पर सवाल पूछ रही थीं। इस्तीफे का फैसला लेने से पहले बीरेन सिंह ने रविवार सुबह केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से दिल्ली में मुलाकात की थी। लीक ऑडियो क्लिप में CM पर हिंसा भड़काने का आरोप लगा था 3 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर हिंसा पर सुनवाई की थी। कुकी ऑर्गेनाइजेशन फॉर ह्यूमन राइट्स ट्रस्ट (KOHUR) की तरफ से कोर्ट में याचिका दाखिल करके कुछ ऑडियो क्लिप्स की जांच की मांग की थी। दावा किया गया था कि ऑडियो में CM कथित तौर पर कह रहे हैं कि उन्होंने मैतियों को हिंसा भड़काने की अनुमति दी और उन्हें बचाया। याचिकाकर्ताओं के वकील प्रशांत भूषण ने कहा- जो टेप सामने आए हैं, वे बहुत गंभीर हैं। इस पर CJI संजीव खन्ना और जस्टिस पीवी संजय कुमार की बेंच ने मणिपुर सरकार से कहा कि सुनिश्चित करिए कि ये एक और मुद्दा न बने। इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सेंट्रल फॉरेंसिक साइंस लैब (CFSL) से सीलबंद लिफाफे में 6 हफ्ते में रिपोर्ट मांगी है। पूरी खबर यहां पढ़ें.. मणिपुर की ये खबर भी पढ़ें… मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगाया गया: 9 फरवरी को CM ने इस्तीफा दिया था; 21 महीने से जारी हिंसा में अब तक 300 से ज्यादा मौतें मणिपुर में केंद्र सरकार ने गुरुवार को राष्ट्रपति शासन लगा दिया। यह फैसला मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह के इस्तीफे के 4 दिन बाद लिया गया। सिंह ने 9 फरवरी को गवर्नर को इस्तीफा सौंपा था। पूरी खबर यहां पढ़ें…
मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगने के बाद से ही हथियारों का सरेंडर जारी है। बुधवार को पुलिस ने बताया कि 87 तरह के हथियार, गोला-बारूद और अलग-अलग सामान लोग स्वेच्छा से सरेंडर कर रहे हैं। इंफाल ईस्ट, बिश्नुपुर, थौबल, कांगपोकपी, जिरीबाम, चुराचांदपुर और इंफाल वेस्ट जिलों में हथियार सरेंडर किए गए हैं। इधर, राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने मैतेई सशस्त्र समूह अरामबाई तेंगगोल के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की है। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल ने कहा- राज्यपाल ने उन्हें राज्य में शांति और स्थिति को सामान्य करने के लिए मदद को कहा है। हथियारों के सरेंडर को लेकर कुछ शर्तों पर चर्चा हुई है। मणिपुर में 13 फरवरी को केंद्र सरकार ने राष्ट्रपति शासन लगाया। यह फैसला मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह के इस्तीफे के 4 दिन बाद लिया गया। सिंह ने 9 फरवरी को गवर्नर को इस्तीफा सौंपा था। राज्य में 21 महीने (3 मई 2023) से जारी जातीय हिंसा के चलते 300 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं। हथियार सरेंडर की तस्वीरें कौन से जिले से कितने हथियार सरेंडर हुए 9 फरवरी को CM एन बीरेन ने इस्तीफा दिया था
मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने 9 फरवरी को अपना इस्तीफा गवर्नर को सौंपा था। गवर्नर अजय कुमार भल्ला ने इस्तीफा स्वीकार किया। बीरेन सिंह पर राज्य में 21 महीने से जारी हिंसा के चलते काफी दबाव था। विपक्षी पार्टियां भी लगातार NDA से इस मुद्दे पर सवाल पूछ रही थीं। इस्तीफे का फैसला लेने से पहले बीरेन सिंह ने रविवार सुबह केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से दिल्ली में मुलाकात की थी। लीक ऑडियो क्लिप में CM पर हिंसा भड़काने का आरोप लगा था 3 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर हिंसा पर सुनवाई की थी। कुकी ऑर्गेनाइजेशन फॉर ह्यूमन राइट्स ट्रस्ट (KOHUR) की तरफ से कोर्ट में याचिका दाखिल करके कुछ ऑडियो क्लिप्स की जांच की मांग की थी। दावा किया गया था कि ऑडियो में CM कथित तौर पर कह रहे हैं कि उन्होंने मैतियों को हिंसा भड़काने की अनुमति दी और उन्हें बचाया। याचिकाकर्ताओं के वकील प्रशांत भूषण ने कहा- जो टेप सामने आए हैं, वे बहुत गंभीर हैं। इस पर CJI संजीव खन्ना और जस्टिस पीवी संजय कुमार की बेंच ने मणिपुर सरकार से कहा कि सुनिश्चित करिए कि ये एक और मुद्दा न बने। इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सेंट्रल फॉरेंसिक साइंस लैब (CFSL) से सीलबंद लिफाफे में 6 हफ्ते में रिपोर्ट मांगी है। पूरी खबर यहां पढ़ें.. मणिपुर की ये खबर भी पढ़ें… मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगाया गया: 9 फरवरी को CM ने इस्तीफा दिया था; 21 महीने से जारी हिंसा में अब तक 300 से ज्यादा मौतें मणिपुर में केंद्र सरकार ने गुरुवार को राष्ट्रपति शासन लगा दिया। यह फैसला मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह के इस्तीफे के 4 दिन बाद लिया गया। सिंह ने 9 फरवरी को गवर्नर को इस्तीफा सौंपा था। पूरी खबर यहां पढ़ें…