UP की राजधानी लखनऊ में दैनिक भास्कर के ऑपरेशन मासूम के बाद पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। चाइल्ड ट्रैफिकिंग गिरोह के 6 सदस्यों को गिरफ्तार किया है। 20 दिन के बच्ची का रेस्क्यू किया। बच्ची को 2 लाख रुपए में बेचने की तैयारी थी। उसको अस्पताल में भर्ती कराया गया है। सभी आरोपियों को कोर्ट में पेश करके जेल भेज दिया गया। इनमें संतोषी भी शामिल है, जिसने बच्ची के सौदे के समय कहा था- सांवली है…इसको जॉनसन बेबी पाउडर लगाना, 8 दिन में गोरी हो जाएगी। इसका रेट 30 हजार कम करा देंगे। ज्यादा सुंदर बच्चा चाहिए, तो मई तक रुक जाइए। हमारी एक पार्टी का 7वां महीना चल रहा है। 5 हजार रुपए में लखीमपुर से पता लगा लेंगे कि बड़ा (बेटा) निकल रहा है या छोटी (बेटी)। लखनऊ पुलिस ने बताया कि 22 फरवरी को दैनिक भास्कर की इन्वेस्टिगेशन स्टोरी पब्लिश हुई थी। इसके बाद संतोष कुमारी उर्फ संतोषी और बच्चों के सौदा करने वाले गैंग के अज्ञात सदस्यों के खिलाफ FIR दर्ज की गई थी। पुलिस आरोपियों की तलाश कर रही थी। इसी बीच मुखबिर से सूचना मिली कि संतोषी और गैंग के अन्य 5 सदस्य भागने की फिराक में हैं। सभी शंकरपुर ढाल के पास वाहन का इंतजार कर रहे हैं। लखनऊ की मड़ियांव थाना पुलिस और क्राइम ब्रांच की टीम ने छापा मारकर 3 महिलाओं और 3 पुरुषों को गिरफ्तार कर लिया। 20 दिन की बच्ची का रेस्क्यू किया गया
पुलिस ने आरोपियों के पास से 20 दिन की बच्ची का रेस्क्यू किया है। उसे 2 लाख रुपए में बेचने की तैयारी थी। पुलिस जांच कर रही है कि यह किसकी बच्ची है? आरोपियों को रिमांड पर लेकर इस बारे में भी पुलिस पूछताछ करेगी। लखनऊ क्राइम ब्रांच के प्रभारी शिवानंद मिश्रा ने बताया- भास्कर की इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट 5 लाख में लड़का, 3 लाख में लड़की प्रकाशित होने के बाद इस मामले का पता चला। इसके लिए पुलिस की टीम लगी थी। कड़ी मशक्कत के बाद 3 पुरुष और 3 महिलाओं के साथ एक 20 दिन की बच्ची बरामद की गई है। भास्कर की टीम 20 दिन के इन्वेस्टिगेशन के बाद गैंग तक पहुंची थी। रिपोर्टर ने गैंग को बताया कि उसकी कोई संतान नहीं है। इसके बाद संतोषी ने बच्चे का सौदा किया। पढ़िए भास्कर इन्वेस्टिगेशन में कैसे चेहरे सामने आए थे… लखनऊ के गुडंबा में चोरी का बच्चा बेचने वाली एक महिला की गिरफ्तारी के बाद हमने इन्वेस्टिगेशन शुरू की। हमें इस गिरोह की सदस्य संतोषी का पता चला, जिसकी उम्र 45 साल है। उसका मोबाइल नंबर मिला। हमने फोन पर कहा कि हमारी कोई संतान नहीं है। बच्चा चाहिए, चाहें जितना पैसा लगे। उसका पहला सवाल था कि मेरा नंबर कहां से मिला? हमने कहा कि जिन लोगों ने आपसे बच्चा खरीदा है, उन्होंने दिया है। हमने उससे मिलने की इच्छा जताई। दो-तीन जगह बदलकर लखनऊ में सीतापुर रोड पर छठा-मिल के पास वह बुजुर्ग व्यक्ति के साथ मिलने आई। हमने कहा कि हमें लड़का चाहिए। इन्वेस्टिगेशन का वीडियो देखने के लिए यहां क्लिक करें बच्चा बिक गया, फिर हमने बच्ची के लिए बात की
तीन दिन बाद संतोषी ने हमें फोन किया कि लड़का चाहिए तो मड़ियांव थाने के पास आना होगा। जब हम उसकी बताई जगह पर पहुंचे तो बोली, वो ऊंचे दामों में बिक गया। जल्दी आपको झारखंड से बच्चा दिलाएंगे। थोड़ा इंतजार करना होगा। हम हर हाल में इस नेटवर्क को बेनकाब करना चाहते थे। हम इंतजार करते रहे, लेकिन फोन नहीं आया। तब हमने छह दिन बाद संतोषी को फोन किया कि लड़का नहीं मिल पा रहा तो कोई बात नहीं, हमारे एक दोस्त का पांच साल का बेटा डिसेबल (दिव्यांग) है, उनको लड़की चाहिए। एक बच्ची नहीं आ पाई तो दूसरी अरेंज की
20वें दिन महिला दलाल संतोषी ने हमें अलीगंज के प्रसिद्ध हनुमान मंदिर के पास बुलाया। हम महिला साथी और टीम के एक सदस्य के साथ पहुंचे। उनके पास बच्चा नहीं था। वह अपने एक साथी के साथ आई थी, जिसने हम लोगों से कुछ दूरी बना रखी थी। ये लोग हमारी रेकी कर रहे थे। महिला दलाल ने कहा, रिकॉर्डिंग (बच्ची का वीडियो) अभी आई है। जिनका सामान (बच्चा) था, उनके भाई का एक्सीडेंट हो गया है। वह उनके घर गई हैं। संतोषी ने कहा- पार्टी (अपने दोस्त) को जाने मत देना। हम आपको एक घंटे बाद फोन कर लेंगे। उसके बाद महिला ने आधे-पौन घंटे बाद हमें शाहजहांपुर जाने के लिए कहा। हमने इनकार कर दिया। महिला दलाल हमें बराबर फोन करती रही। उसने दिल्ली से दूसरी बच्ची अरेंज की। कहा, पार्टी दिल्ली से आ रही है, थोड़ा समय लगेगा। रात करीब 12 बजे उसने फिर फोन किया। कहा, डालीगंज ओवरब्रिज के नीचे आ जाइए, आपका काम हो जाएगा। हम उसकी बताई जगह के लिए टीम और एक महिला साथी को लेकर निकल लिए। मोबाइल पर बातचीत के दौरान वह अलग-अलग लोकेशन पर बुलाती रही, रात करीब एक बजे बुद्धा पार्क के पास बुलाया। यहां वह एक व्यक्ति के साथ आई, जिसे वह अपना भाई बता रही थी। खुद हमारी कार में बैठ गई और भाई को पीछे आने को कहा। गाड़ी में बैठने के बाद भी वह हमें करीब 15 किलोमीटर दूर बालागंज चौराहा ले गई, फिर वहां से आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे पर ले गई। 50-60 किलोमीटर तक घुमाती रही। इस दौरान वह दिल्ली से बच्ची लेकर आ रही दूसरी महिला दलाल सोनी से बात करती रही। वह लोकेशन देती रही कि कहां पहुंचना है। इस दौरान हम उससे इस नेक्सस के बारे में जानकारी लेते रहे। आगरा एक्सप्रेस-वे पर दिखाई बच्ची
हम गाड़ी रुकने का इंतजार कर रहे थे। वहीं, संतोषी बराबर फोन कर दूसरी दलाल सोनी से लोकेशन का अपडेट ले रही थी। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे पर रात करीब दो बजे महिला दलाल संतोषी अचानक मोबाइल पर ज्यादा सक्रिय हुई। गाड़ी को सुनसान जगह ले जाने के लिए कहने लगी। संतोषी ने दूसरी गाड़ी (DL 1RT A6944) में बैठी अपनी साथी सोनी से भी संपर्क कर सुनसान जगह रुकने को कहा। फिर संतोषी उतरकर पीछे चल रही गाड़ी से बच्ची को गोद में लेकर आ गई। उनकी गाड़ी हमारी गाड़ी से आगे निकल गई। दलाल संतोषी ने हमें उस गाड़ी को फॉलो करने को कहा। दलाल संतोषी ने बच्ची को हमारी गोद में दे दिया। हमें उसकी उम्र 14 दिन बताई। वह जल्दबाजी दिखाते हुए पेमेंट मांगने लगी। इस दौरान वह आगे गाड़ी में चल रही सोनी से बराबर मोबाइल पर बात कर रही थी। मोबाइल पर सोनी की आवाज साफ सुनाई दे रही थी कि पीछे-पीछे क्यों चल रही हो? ये भी कहा कि अपनी गाड़ी आगे कर लो। ज्यादा आगे मत चलो। हाथ-पैर देख लीजिए, सही सलामत हैं ना- संतोषी
संतोषी ने कहा- बच्ची के हाथ-पैर चेक कर लीजिए, सही सलामत हैं ना। हमने कहा- हम लोग आपस में चर्चा करना चाहते हैं। चूंकि हमें कोई बच्चा खरीदना तो था नहीं, इसलिए गाड़ी से उतरकर हमने बहाना बनाया कि बच्ची का रंग सांवला है। संतोषी कहने लगी ऐसा नहीं है, बच्ची को देहात में सरसों का तेल वगैरह लगाकर धूप में लिटाया जाता है, इस वजह से रंग दब जाता है। संतोषी ने दलाल सोनी को फोन किया। सोनी फोन पर ही धमकाने लगी कि नौटंकी मत करो…जिस बच्ची की फोटो भेजी थी, वही है। दूसरी महिला दलाल सोनी की गाड़ी में एंट्री…टिशू पेपर से फेस साफ करेंगे तो ठीक लगेगी
हम सोनी को भी बेनकाब करना चाहते थे, इसलिए उसे भी बुलाने को कहा। थोड़ी ही देर में सोनी भी गाड़ी में आकर बैठ गई। सोनी कहने लगी कि सांवली नहीं है। जैसे हम लोग धूप में निकलते हैं तो रंग काला हो जाता है। पांच-छह दिन बंद जगह में रखेंगी तो रंग साफ हो जाएगा। 15-20 दिन में बच्चे का रंग बदलता ही है। हम लोग पता नहीं कितनी दूर से आए हैं। 12-13 हजार रुपए तो गाड़ी वाले ने लिए हैं। आठ दिन में रंग न साफ हो तो वापस कर देना
दलाल सोनी कहने लगी कि आप जरा सही से देखें। सुबह से इसका मुंह धुला नहीं है। धुलेंगे, टिशू पेपर से साफ करेंगे, तो रंग ठीक हो जाएगा। मेरा बच्चा खुद बहुत काला था, अब गोरा है। कहने लगी कि आप एक बार मन तो बनाइए। फिर दोनों दलाल कहने लगीं कि आप बच्चा ले लीजिए…आठ दिन में रंग साफ न हो तो वापस कर दीजिएगा। हमने बच्चे के मां-बाप के बारे में पूछा तो कहने लगीं, वो दिल्ली में हैं। बच्चा लेने से इनकार करने पर सोनी कहने लगी हम लोग होटल ले लेंगे, आप-दो तीन घंटे सोचने का समय ले लो। इसके कपड़े चेंज करेंगे, इसका फेस साफ करेंगे। दो-तीन दिन तक भेजती रही बच्चों के फोटो
बच्ची लेने से मना करने के बाद भी संतोषी बराबर फोन करती रही। उसने कई नवजात बच्चों की तस्वीरें हमें भेजीं। वॉट्सऐप मैसेज और कॉल किए। इस पूरे इन्वेस्टिगेशन के दौरान उसने 10 बच्चों के फोटो-वीडियो भेजे। इनमें से अधिकतर बच्चे तो सिर्फ दो-तीन दिन के ही थे। संतोषी ने हमें आखिरी बार जब फोन किया तो कहा- ‘लखनऊ में एक-दो दिन में एक डिलीवरी होनी है। जुड़वा हैं। एक बड़ी फाइल (लड़का) है, एक छोटी फाइल (लड़की) है। आप बड़ी फाइल ले लो और अपने दोस्त को छोटी फाइल दिला दो।’ ———————————– यह खबर भी पढ़ें… ‘यूरिन के रास्ते पत्थर डालेंगे, 24 घंटे बाद निकाल देंगे’, बिना बीमारी हो रहा मरीजों का ऑपरेशन; UP–बिहार के अस्पताल एक्सपोज UP–बिहार के अस्पतालों में बिना बीमारी के ही मरीजों की सर्जरी कर दी जा रही है। ऐसे लोगों को टारगेट किया जा रहा है, जिनके पास आयुष्मान कार्ड है। मरीजों को हॉस्पिटल तक ले जाने के लिए छोटे हेल्थ सेंटर से लेकर बड़े अस्पतालों तक के बीच नेक्सस बना हुआ है। यहां पढ़ें पूरी खबर
UP की राजधानी लखनऊ में दैनिक भास्कर के ऑपरेशन मासूम के बाद पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। चाइल्ड ट्रैफिकिंग गिरोह के 6 सदस्यों को गिरफ्तार किया है। 20 दिन के बच्ची का रेस्क्यू किया। बच्ची को 2 लाख रुपए में बेचने की तैयारी थी। उसको अस्पताल में भर्ती कराया गया है। सभी आरोपियों को कोर्ट में पेश करके जेल भेज दिया गया। इनमें संतोषी भी शामिल है, जिसने बच्ची के सौदे के समय कहा था- सांवली है…इसको जॉनसन बेबी पाउडर लगाना, 8 दिन में गोरी हो जाएगी। इसका रेट 30 हजार कम करा देंगे। ज्यादा सुंदर बच्चा चाहिए, तो मई तक रुक जाइए। हमारी एक पार्टी का 7वां महीना चल रहा है। 5 हजार रुपए में लखीमपुर से पता लगा लेंगे कि बड़ा (बेटा) निकल रहा है या छोटी (बेटी)। लखनऊ पुलिस ने बताया कि 22 फरवरी को दैनिक भास्कर की इन्वेस्टिगेशन स्टोरी पब्लिश हुई थी। इसके बाद संतोष कुमारी उर्फ संतोषी और बच्चों के सौदा करने वाले गैंग के अज्ञात सदस्यों के खिलाफ FIR दर्ज की गई थी। पुलिस आरोपियों की तलाश कर रही थी। इसी बीच मुखबिर से सूचना मिली कि संतोषी और गैंग के अन्य 5 सदस्य भागने की फिराक में हैं। सभी शंकरपुर ढाल के पास वाहन का इंतजार कर रहे हैं। लखनऊ की मड़ियांव थाना पुलिस और क्राइम ब्रांच की टीम ने छापा मारकर 3 महिलाओं और 3 पुरुषों को गिरफ्तार कर लिया। 20 दिन की बच्ची का रेस्क्यू किया गया
पुलिस ने आरोपियों के पास से 20 दिन की बच्ची का रेस्क्यू किया है। उसे 2 लाख रुपए में बेचने की तैयारी थी। पुलिस जांच कर रही है कि यह किसकी बच्ची है? आरोपियों को रिमांड पर लेकर इस बारे में भी पुलिस पूछताछ करेगी। लखनऊ क्राइम ब्रांच के प्रभारी शिवानंद मिश्रा ने बताया- भास्कर की इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट 5 लाख में लड़का, 3 लाख में लड़की प्रकाशित होने के बाद इस मामले का पता चला। इसके लिए पुलिस की टीम लगी थी। कड़ी मशक्कत के बाद 3 पुरुष और 3 महिलाओं के साथ एक 20 दिन की बच्ची बरामद की गई है। भास्कर की टीम 20 दिन के इन्वेस्टिगेशन के बाद गैंग तक पहुंची थी। रिपोर्टर ने गैंग को बताया कि उसकी कोई संतान नहीं है। इसके बाद संतोषी ने बच्चे का सौदा किया। पढ़िए भास्कर इन्वेस्टिगेशन में कैसे चेहरे सामने आए थे… लखनऊ के गुडंबा में चोरी का बच्चा बेचने वाली एक महिला की गिरफ्तारी के बाद हमने इन्वेस्टिगेशन शुरू की। हमें इस गिरोह की सदस्य संतोषी का पता चला, जिसकी उम्र 45 साल है। उसका मोबाइल नंबर मिला। हमने फोन पर कहा कि हमारी कोई संतान नहीं है। बच्चा चाहिए, चाहें जितना पैसा लगे। उसका पहला सवाल था कि मेरा नंबर कहां से मिला? हमने कहा कि जिन लोगों ने आपसे बच्चा खरीदा है, उन्होंने दिया है। हमने उससे मिलने की इच्छा जताई। दो-तीन जगह बदलकर लखनऊ में सीतापुर रोड पर छठा-मिल के पास वह बुजुर्ग व्यक्ति के साथ मिलने आई। हमने कहा कि हमें लड़का चाहिए। इन्वेस्टिगेशन का वीडियो देखने के लिए यहां क्लिक करें बच्चा बिक गया, फिर हमने बच्ची के लिए बात की
तीन दिन बाद संतोषी ने हमें फोन किया कि लड़का चाहिए तो मड़ियांव थाने के पास आना होगा। जब हम उसकी बताई जगह पर पहुंचे तो बोली, वो ऊंचे दामों में बिक गया। जल्दी आपको झारखंड से बच्चा दिलाएंगे। थोड़ा इंतजार करना होगा। हम हर हाल में इस नेटवर्क को बेनकाब करना चाहते थे। हम इंतजार करते रहे, लेकिन फोन नहीं आया। तब हमने छह दिन बाद संतोषी को फोन किया कि लड़का नहीं मिल पा रहा तो कोई बात नहीं, हमारे एक दोस्त का पांच साल का बेटा डिसेबल (दिव्यांग) है, उनको लड़की चाहिए। एक बच्ची नहीं आ पाई तो दूसरी अरेंज की
20वें दिन महिला दलाल संतोषी ने हमें अलीगंज के प्रसिद्ध हनुमान मंदिर के पास बुलाया। हम महिला साथी और टीम के एक सदस्य के साथ पहुंचे। उनके पास बच्चा नहीं था। वह अपने एक साथी के साथ आई थी, जिसने हम लोगों से कुछ दूरी बना रखी थी। ये लोग हमारी रेकी कर रहे थे। महिला दलाल ने कहा, रिकॉर्डिंग (बच्ची का वीडियो) अभी आई है। जिनका सामान (बच्चा) था, उनके भाई का एक्सीडेंट हो गया है। वह उनके घर गई हैं। संतोषी ने कहा- पार्टी (अपने दोस्त) को जाने मत देना। हम आपको एक घंटे बाद फोन कर लेंगे। उसके बाद महिला ने आधे-पौन घंटे बाद हमें शाहजहांपुर जाने के लिए कहा। हमने इनकार कर दिया। महिला दलाल हमें बराबर फोन करती रही। उसने दिल्ली से दूसरी बच्ची अरेंज की। कहा, पार्टी दिल्ली से आ रही है, थोड़ा समय लगेगा। रात करीब 12 बजे उसने फिर फोन किया। कहा, डालीगंज ओवरब्रिज के नीचे आ जाइए, आपका काम हो जाएगा। हम उसकी बताई जगह के लिए टीम और एक महिला साथी को लेकर निकल लिए। मोबाइल पर बातचीत के दौरान वह अलग-अलग लोकेशन पर बुलाती रही, रात करीब एक बजे बुद्धा पार्क के पास बुलाया। यहां वह एक व्यक्ति के साथ आई, जिसे वह अपना भाई बता रही थी। खुद हमारी कार में बैठ गई और भाई को पीछे आने को कहा। गाड़ी में बैठने के बाद भी वह हमें करीब 15 किलोमीटर दूर बालागंज चौराहा ले गई, फिर वहां से आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे पर ले गई। 50-60 किलोमीटर तक घुमाती रही। इस दौरान वह दिल्ली से बच्ची लेकर आ रही दूसरी महिला दलाल सोनी से बात करती रही। वह लोकेशन देती रही कि कहां पहुंचना है। इस दौरान हम उससे इस नेक्सस के बारे में जानकारी लेते रहे। आगरा एक्सप्रेस-वे पर दिखाई बच्ची
हम गाड़ी रुकने का इंतजार कर रहे थे। वहीं, संतोषी बराबर फोन कर दूसरी दलाल सोनी से लोकेशन का अपडेट ले रही थी। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे पर रात करीब दो बजे महिला दलाल संतोषी अचानक मोबाइल पर ज्यादा सक्रिय हुई। गाड़ी को सुनसान जगह ले जाने के लिए कहने लगी। संतोषी ने दूसरी गाड़ी (DL 1RT A6944) में बैठी अपनी साथी सोनी से भी संपर्क कर सुनसान जगह रुकने को कहा। फिर संतोषी उतरकर पीछे चल रही गाड़ी से बच्ची को गोद में लेकर आ गई। उनकी गाड़ी हमारी गाड़ी से आगे निकल गई। दलाल संतोषी ने हमें उस गाड़ी को फॉलो करने को कहा। दलाल संतोषी ने बच्ची को हमारी गोद में दे दिया। हमें उसकी उम्र 14 दिन बताई। वह जल्दबाजी दिखाते हुए पेमेंट मांगने लगी। इस दौरान वह आगे गाड़ी में चल रही सोनी से बराबर मोबाइल पर बात कर रही थी। मोबाइल पर सोनी की आवाज साफ सुनाई दे रही थी कि पीछे-पीछे क्यों चल रही हो? ये भी कहा कि अपनी गाड़ी आगे कर लो। ज्यादा आगे मत चलो। हाथ-पैर देख लीजिए, सही सलामत हैं ना- संतोषी
संतोषी ने कहा- बच्ची के हाथ-पैर चेक कर लीजिए, सही सलामत हैं ना। हमने कहा- हम लोग आपस में चर्चा करना चाहते हैं। चूंकि हमें कोई बच्चा खरीदना तो था नहीं, इसलिए गाड़ी से उतरकर हमने बहाना बनाया कि बच्ची का रंग सांवला है। संतोषी कहने लगी ऐसा नहीं है, बच्ची को देहात में सरसों का तेल वगैरह लगाकर धूप में लिटाया जाता है, इस वजह से रंग दब जाता है। संतोषी ने दलाल सोनी को फोन किया। सोनी फोन पर ही धमकाने लगी कि नौटंकी मत करो…जिस बच्ची की फोटो भेजी थी, वही है। दूसरी महिला दलाल सोनी की गाड़ी में एंट्री…टिशू पेपर से फेस साफ करेंगे तो ठीक लगेगी
हम सोनी को भी बेनकाब करना चाहते थे, इसलिए उसे भी बुलाने को कहा। थोड़ी ही देर में सोनी भी गाड़ी में आकर बैठ गई। सोनी कहने लगी कि सांवली नहीं है। जैसे हम लोग धूप में निकलते हैं तो रंग काला हो जाता है। पांच-छह दिन बंद जगह में रखेंगी तो रंग साफ हो जाएगा। 15-20 दिन में बच्चे का रंग बदलता ही है। हम लोग पता नहीं कितनी दूर से आए हैं। 12-13 हजार रुपए तो गाड़ी वाले ने लिए हैं। आठ दिन में रंग न साफ हो तो वापस कर देना
दलाल सोनी कहने लगी कि आप जरा सही से देखें। सुबह से इसका मुंह धुला नहीं है। धुलेंगे, टिशू पेपर से साफ करेंगे, तो रंग ठीक हो जाएगा। मेरा बच्चा खुद बहुत काला था, अब गोरा है। कहने लगी कि आप एक बार मन तो बनाइए। फिर दोनों दलाल कहने लगीं कि आप बच्चा ले लीजिए…आठ दिन में रंग साफ न हो तो वापस कर दीजिएगा। हमने बच्चे के मां-बाप के बारे में पूछा तो कहने लगीं, वो दिल्ली में हैं। बच्चा लेने से इनकार करने पर सोनी कहने लगी हम लोग होटल ले लेंगे, आप-दो तीन घंटे सोचने का समय ले लो। इसके कपड़े चेंज करेंगे, इसका फेस साफ करेंगे। दो-तीन दिन तक भेजती रही बच्चों के फोटो
बच्ची लेने से मना करने के बाद भी संतोषी बराबर फोन करती रही। उसने कई नवजात बच्चों की तस्वीरें हमें भेजीं। वॉट्सऐप मैसेज और कॉल किए। इस पूरे इन्वेस्टिगेशन के दौरान उसने 10 बच्चों के फोटो-वीडियो भेजे। इनमें से अधिकतर बच्चे तो सिर्फ दो-तीन दिन के ही थे। संतोषी ने हमें आखिरी बार जब फोन किया तो कहा- ‘लखनऊ में एक-दो दिन में एक डिलीवरी होनी है। जुड़वा हैं। एक बड़ी फाइल (लड़का) है, एक छोटी फाइल (लड़की) है। आप बड़ी फाइल ले लो और अपने दोस्त को छोटी फाइल दिला दो।’ ———————————– यह खबर भी पढ़ें… ‘यूरिन के रास्ते पत्थर डालेंगे, 24 घंटे बाद निकाल देंगे’, बिना बीमारी हो रहा मरीजों का ऑपरेशन; UP–बिहार के अस्पताल एक्सपोज UP–बिहार के अस्पतालों में बिना बीमारी के ही मरीजों की सर्जरी कर दी जा रही है। ऐसे लोगों को टारगेट किया जा रहा है, जिनके पास आयुष्मान कार्ड है। मरीजों को हॉस्पिटल तक ले जाने के लिए छोटे हेल्थ सेंटर से लेकर बड़े अस्पतालों तक के बीच नेक्सस बना हुआ है। यहां पढ़ें पूरी खबर