पश्चिम बंगाल के मालदा में इलेक्शन ऑब्जर्वर बंधक मामले में CID ने मास्टरमाइंड मोफक्करुल इस्लाम को गिरफ्तार किया है। मोफक्करुल को बागडोगरा एयरपोर्ट से पकड़ा गया, जह वह भागने की फिराक में था। आरोप है कि मालदा के सुजापुर में 1 अप्रैल को हुए विरोध प्रदर्शन में कलकत्ता हाईकोर्ट के वकील मोफक्करुल इस्लाम (AIMIM के पूर्व उम्मीदवार) ने भड़काऊ भाषण दिए। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद, CEC कुमार ने जांच NIA को सौंप दी। NIA की टीम शुक्रवार को पश्चिम बंगाल पहुंचेगी। ECI ने 2 अप्रैल को जारी एक पत्र में कहा है कि NIA की टीम अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सीधे सुप्रीम कोर्ट को सौंपे। मामले की अगली सुनवाई 6 अप्रैल को होगी। प्रारंभिक जांच में बताया गया कि हजारों लोग कालियाचौक-2 ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिस (BDO) ऑफिस के बाहर खड़े थे। उन्होंने दो गेट भी बंद कर दिए, जिससे अधिकारी अंदर फंसे रहे। मालदा SIR हिंसा केस में हाईकोर्ट के वकील की भूमिका की जांच होगी मालदा में लगातार दो दिन प्रदर्शन हुआ… 1 अप्रैल: दोपहर में प्रदर्शन, शाम को अधिकारी बंधक बनाए गए मालदा में विरोध प्रदर्शन दिन में पहले कालियाचक 2 ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिस के बाहर शुरू हुआ था। जो देर रात तक जारी रहा। प्रदर्शनकारियों ने शुरू में न्यायिक अधिकारियों से मिलने की मांग की थी। अंदर जाने की परमिशन न मिलने पर, उन्होंने शाम करीब 4 बजे प्रदर्शन शुरू कर दिया और परिसर का घेराव कर लिया। अधिकारियों को साढ़े सात घंटे से ज्यादा समय तक बंधक बनाकर रखा गया था। इस मामले में पुलिस ने गुरुवार को 17 लोगों को गिरफ्तार किया, जिनमें एक चुनावी उम्मीदवार भी शामिल है। इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) के उम्मीदवार मौलाना शाहजहां अली और 16 लोगों को गिरफ्तार कर जिला अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 10 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया। गिरफ्तारी के बाद, अली ने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया और दावा किया कि उनकी राजनीतिक संबद्धता के कारण उन्हें फंसाया जा रहा है। 2 अप्रैल: कई जिलों में विरोध, सड़कें जाम कीं, आगजनी हुई कालियाचक की घटना के बाद मालदा में लगातार दूसरे दिन भी विरोध प्रदर्शन हुआ। गुरुवार को नारायणपुर में BSF कैंप के सामने भीड़ इकठ्ठा हो गई। लोगों ने नेशनल हाईवे-12 को जाम कर दिया। सड़क पर टायरों में आग लगा दी गई। मालदा, जलपाईगुड़ी, कूच बिहार और पुरबा बर्धमान में प्रदर्शनकारियों ने टायर जलाए, सड़कें जाम कीं और मौन जुलूस निकाले; इन जगहों पर 23 अप्रैल को मतदान होना है। सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला, CJI बोले- हमें पता है उपद्रवी कौन सुप्रीम कोर्ट ने इस पर एक्शन लिया और घटना को न्याय प्रशासन में बाधा डालने का एक ‘दुस्साहसी और जानबूझकर किया गया प्रयास’ बताया। CJI सूर्यकांत की बेंच ने इस बात पर चिंता जताई कि पहले से पता होने के बावजूद, राज्य के अधिकारी समय पर सुरक्षा मुहैया कराने में विफल रहे, जिसके कारण अधिकारियों को घंटों तक बिना खाना-पानी के रहना पड़ा। कोर्ट ने कहा- उन्हें नौ घंटे बंधक बनाकर रखा। खाना-पानी तक नहीं मिला। यह घटना सोची-समझी और भड़काऊ लगती है। हमें पता है उपद्रवी कौन हैं, इनका मकसद न्यायिक अधिकारियों का मनोबल गिराना और चुनावी प्रक्रिया को बाधित करना है। कोर्ट ने कहा- घेराव 3:30 बजे शुरू हुआ, हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल ने राज्य प्रशासन से तत्काल कार्रवाई का अनुरोध किया। रात 8:30 बजे तक कुछ नहीं किया गया। फिर रजिस्ट्रार जनरल ने गृह सचिव और डीजीपी से संपर्क किया। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को शीघ्र कार्रवाई का आश्वासन देने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। गृह सचिव और डीजीपी रात 12 बजे चीफ जस्टिस के घर पहुंचे। न्यायिक अफसर रात 12 बजे छूटे। घर जाते वक्त भी उनके वाहनों पर ईंट-डंडों से हमला हुआ। सीजेआई ने राज्य प्रशासन की कार्रवाई में देरी की निंदा की। उन्होंने कहा कि हमें यह देख निराशा हुई कि राज्य के सचिव से संपर्क नहीं हो सका। अदालत ने बंगाल के मुख्य सचिव, गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। बेंच ने सभी से उनके एक्शन न लेने पर स्पष्टीकरण मांगा है। अदालत ने इस घटना को लेकर राज्य प्रशासन की कड़ी आलोचना की और टिप्पणी की कि पश्चिम बंगाल सबसे अधिक ध्रुवीकृत राज्य है।
पश्चिम बंगाल के मालदा में इलेक्शन ऑब्जर्वर बंधक मामले में CID ने मास्टरमाइंड मोफक्करुल इस्लाम को गिरफ्तार किया है। मोफक्करुल को बागडोगरा एयरपोर्ट से पकड़ा गया, जह वह भागने की फिराक में था। आरोप है कि मालदा के सुजापुर में 1 अप्रैल को हुए विरोध प्रदर्शन में कलकत्ता हाईकोर्ट के वकील मोफक्करुल इस्लाम (AIMIM के पूर्व उम्मीदवार) ने भड़काऊ भाषण दिए। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद, CEC कुमार ने जांच NIA को सौंप दी। NIA की टीम शुक्रवार को पश्चिम बंगाल पहुंचेगी। ECI ने 2 अप्रैल को जारी एक पत्र में कहा है कि NIA की टीम अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सीधे सुप्रीम कोर्ट को सौंपे। मामले की अगली सुनवाई 6 अप्रैल को होगी। प्रारंभिक जांच में बताया गया कि हजारों लोग कालियाचौक-2 ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिस (BDO) ऑफिस के बाहर खड़े थे। उन्होंने दो गेट भी बंद कर दिए, जिससे अधिकारी अंदर फंसे रहे। मालदा SIR हिंसा केस में हाईकोर्ट के वकील की भूमिका की जांच होगी मालदा में लगातार दो दिन प्रदर्शन हुआ… 1 अप्रैल: दोपहर में प्रदर्शन, शाम को अधिकारी बंधक बनाए गए मालदा में विरोध प्रदर्शन दिन में पहले कालियाचक 2 ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिस के बाहर शुरू हुआ था। जो देर रात तक जारी रहा। प्रदर्शनकारियों ने शुरू में न्यायिक अधिकारियों से मिलने की मांग की थी। अंदर जाने की परमिशन न मिलने पर, उन्होंने शाम करीब 4 बजे प्रदर्शन शुरू कर दिया और परिसर का घेराव कर लिया। अधिकारियों को साढ़े सात घंटे से ज्यादा समय तक बंधक बनाकर रखा गया था। इस मामले में पुलिस ने गुरुवार को 17 लोगों को गिरफ्तार किया, जिनमें एक चुनावी उम्मीदवार भी शामिल है। इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) के उम्मीदवार मौलाना शाहजहां अली और 16 लोगों को गिरफ्तार कर जिला अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 10 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया। गिरफ्तारी के बाद, अली ने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया और दावा किया कि उनकी राजनीतिक संबद्धता के कारण उन्हें फंसाया जा रहा है। 2 अप्रैल: कई जिलों में विरोध, सड़कें जाम कीं, आगजनी हुई कालियाचक की घटना के बाद मालदा में लगातार दूसरे दिन भी विरोध प्रदर्शन हुआ। गुरुवार को नारायणपुर में BSF कैंप के सामने भीड़ इकठ्ठा हो गई। लोगों ने नेशनल हाईवे-12 को जाम कर दिया। सड़क पर टायरों में आग लगा दी गई। मालदा, जलपाईगुड़ी, कूच बिहार और पुरबा बर्धमान में प्रदर्शनकारियों ने टायर जलाए, सड़कें जाम कीं और मौन जुलूस निकाले; इन जगहों पर 23 अप्रैल को मतदान होना है। सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला, CJI बोले- हमें पता है उपद्रवी कौन सुप्रीम कोर्ट ने इस पर एक्शन लिया और घटना को न्याय प्रशासन में बाधा डालने का एक ‘दुस्साहसी और जानबूझकर किया गया प्रयास’ बताया। CJI सूर्यकांत की बेंच ने इस बात पर चिंता जताई कि पहले से पता होने के बावजूद, राज्य के अधिकारी समय पर सुरक्षा मुहैया कराने में विफल रहे, जिसके कारण अधिकारियों को घंटों तक बिना खाना-पानी के रहना पड़ा। कोर्ट ने कहा- उन्हें नौ घंटे बंधक बनाकर रखा। खाना-पानी तक नहीं मिला। यह घटना सोची-समझी और भड़काऊ लगती है। हमें पता है उपद्रवी कौन हैं, इनका मकसद न्यायिक अधिकारियों का मनोबल गिराना और चुनावी प्रक्रिया को बाधित करना है। कोर्ट ने कहा- घेराव 3:30 बजे शुरू हुआ, हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल ने राज्य प्रशासन से तत्काल कार्रवाई का अनुरोध किया। रात 8:30 बजे तक कुछ नहीं किया गया। फिर रजिस्ट्रार जनरल ने गृह सचिव और डीजीपी से संपर्क किया। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को शीघ्र कार्रवाई का आश्वासन देने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। गृह सचिव और डीजीपी रात 12 बजे चीफ जस्टिस के घर पहुंचे। न्यायिक अफसर रात 12 बजे छूटे। घर जाते वक्त भी उनके वाहनों पर ईंट-डंडों से हमला हुआ। सीजेआई ने राज्य प्रशासन की कार्रवाई में देरी की निंदा की। उन्होंने कहा कि हमें यह देख निराशा हुई कि राज्य के सचिव से संपर्क नहीं हो सका। अदालत ने बंगाल के मुख्य सचिव, गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। बेंच ने सभी से उनके एक्शन न लेने पर स्पष्टीकरण मांगा है। अदालत ने इस घटना को लेकर राज्य प्रशासन की कड़ी आलोचना की और टिप्पणी की कि पश्चिम बंगाल सबसे अधिक ध्रुवीकृत राज्य है।