पंजाब की खडूर साहिब लोकसभा सीट से सांसद अमृतपाल सिंह एक बार पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट पहुंच गए हैं। उन्होंने खुद पर तीसरी बार लगाई गई नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA) को चुनौती दी है। उन्होंने NSA को पूरी तरह से गैर कानूनी बताया है। उनकी तरफ से दलील दी गई है कि यह पूरी तरह से संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है। अमृतपाल सिंह साल 2023 से जेल में हैं। उन्होंने अदालत में दलील दी है कि सरकार ने बिना कोई नया कारण उनकी हिरासत बढ़ा दी है। वहीं, जिन मामलों को आधार बनाकर सरकार ने उनकी NSA बढ़ाई है, उनमें उनकी सीधी भूमिका नहीं है। याचिका में यह भी तर्क दिया गया है कि कुछ घटनाएं तो उस समय हुईं, जब वह डिब्रूगढ़ जेल में थे। वहीं, उन घटनाओं में शामिल होने का उनका कोई सवाल नहीं है। गवाहों पर भी उठाया सवाल अमृतपाल ने कहा कि पुलिस ने जो गवाह बनाए हैं, वे भी भरोसेमंद नहीं हैं। उनके बयान एक-दूसरे से मेल नहीं खाते और कोई मजबूत सबूत भी नहीं है। याचिका में यह भी कहा गया कि जिला मजिस्ट्रेट (DM) को NSA की धारा 3(2) के तहत किसी को हिरासत में रखने का आदेश देने का अधिकार नहीं है। सरकार ही आदेश दे सकती है ऐसा आदेश सिर्फ राज्य सरकार या केंद्र सरकार ही दे सकती है। उनकी तरफ से सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले की दलील दी है, जिसमें कहा गया है कि DM उस समय आदेश देते हैं, जब इलाके में तुरंत खतरा हो, लेकिन यहां ऐसा कोई खतरा नहीं था। NSA की धारा 3(4) के मुताबिक डिटेंशन आदेश की रिपोर्ट तुरंत सरकार को भेजनी चाहिए, लेकिन इसमें 9 दिन में भेजी गई है।
पंजाब की खडूर साहिब लोकसभा सीट से सांसद अमृतपाल सिंह एक बार पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट पहुंच गए हैं। उन्होंने खुद पर तीसरी बार लगाई गई नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA) को चुनौती दी है। उन्होंने NSA को पूरी तरह से गैर कानूनी बताया है। उनकी तरफ से दलील दी गई है कि यह पूरी तरह से संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है। अमृतपाल सिंह साल 2023 से जेल में हैं। उन्होंने अदालत में दलील दी है कि सरकार ने बिना कोई नया कारण उनकी हिरासत बढ़ा दी है। वहीं, जिन मामलों को आधार बनाकर सरकार ने उनकी NSA बढ़ाई है, उनमें उनकी सीधी भूमिका नहीं है। याचिका में यह भी तर्क दिया गया है कि कुछ घटनाएं तो उस समय हुईं, जब वह डिब्रूगढ़ जेल में थे। वहीं, उन घटनाओं में शामिल होने का उनका कोई सवाल नहीं है। गवाहों पर भी उठाया सवाल अमृतपाल ने कहा कि पुलिस ने जो गवाह बनाए हैं, वे भी भरोसेमंद नहीं हैं। उनके बयान एक-दूसरे से मेल नहीं खाते और कोई मजबूत सबूत भी नहीं है। याचिका में यह भी कहा गया कि जिला मजिस्ट्रेट (DM) को NSA की धारा 3(2) के तहत किसी को हिरासत में रखने का आदेश देने का अधिकार नहीं है। सरकार ही आदेश दे सकती है ऐसा आदेश सिर्फ राज्य सरकार या केंद्र सरकार ही दे सकती है। उनकी तरफ से सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले की दलील दी है, जिसमें कहा गया है कि DM उस समय आदेश देते हैं, जब इलाके में तुरंत खतरा हो, लेकिन यहां ऐसा कोई खतरा नहीं था। NSA की धारा 3(4) के मुताबिक डिटेंशन आदेश की रिपोर्ट तुरंत सरकार को भेजनी चाहिए, लेकिन इसमें 9 दिन में भेजी गई है।