दिल्ली ब्लास्ट के बाद जांच एजेंसियों के निशाने पर आई फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी का चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी विदेश जाने की फिराक में था। उसने किसी ऐसे देश में जाने की प्लानिंग बनाई थी, जो इंडियन पासपोर्ट को ऑन अराइवल वीजा प्रोवाइड करवाते हैं। ED को उसके ट्रैवल से जुड़ी कुछ एयर टिकटें और बुकिंग की जानकारी मिली है। ED ने कोर्ट में पेश किए गए रिमांड पेपर में भी विदेश जाने की जानकारी दी। उसके करीबी रिश्तेदार भी खाड़ी देशों में बसे हुए हैं। उन्हीं के माध्यम से वह विदेश जाने की तैयारी में था। उसके मोबाइल की भी फोरेंसिक जांच करवाई जा रही है। ED ने अपनी जांच में पाया कि 2018 से 2025 तक यूनिवर्सिटी ने स्टूडेंट्स से फीस और अन्य मदों से 415 करोड़ रुपए से अधिक राशि ली। यूनिवर्सिटी ने स्टूडेंट्स को गलत दावे दिखाकर इतनी बड़ी रकम ली। इसमें से अधिकतर राशि उन कंपनियों में ट्रांसफर की गई, जो उसके परिवार के सदस्यों के नाम रजिस्टर्ड है। जांच के दौरान 50 बैंक अकाउंट्स के डॉक्यूमेंट्स खंगाले जा रहे हैं। सस्पेक्टेड ट्रांजैक्शन के कारण ED ने इस रकम को ‘प्रोसीड्स ऑफ क्राइम’ माना है। ED के अधिकारियों का दावा है कि 415 करोड़ शुरुआती आंकड़ा है। जांच आगे बढ़ने पर और भी बड़ी रकम और प्रॉपर्टी का खुलासा हो सकता है। सिद्दीकी 1 दिसंबर तक ED की हिरासत में है। जानिए ED ने क्यों मानी अल फलाह की कमाई ‘प्रोसीड्स ऑफ क्राइम’… ये कंपनियां ED के निशाने पर रिमांड के दौरान झूठे दावे और फंडिंग को लेकर पूछताछ होगी
ED के स्पेशल प्रोसिक्यूटर साइमन बेंजामिन ने कोर्ट में बताया कि जांच में यूनिवर्सिटी ने अपनी वेबसाइट, ब्रोशर और एडमिशन विज्ञापनों में झूठा दावा किया कि वह UGC की धारा 12B के तहत मान्यता प्राप्त है और NAAC से ‘A’ ग्रेड प्राप्त है। जबकि सच यह है कि UGC ने कभी 12B मान्यता नहीं दी और NAAC ने तो यूनिवर्सिटी को शो-कॉज नोटिस तक जारी कर फर्जी दावे हटाने को कहा था। जांच में यह भी सामने आया कि छात्रों से वसूली गई फीस और लोगों से ठगे गए पैसे का इस्तेमाल निजी और व्यक्तिगत खर्चों में किया गया। कई गवाहों ने स्वीकार किया है कि सारे फाइनेंशियल फैसले चेयरमैन लेते थे। ईडी अधिकारियों का कहना है रिमांड के दौरान सर्चिंग में जब्त ₹48 लाख कैश, डिजिटल डिवाइस, रिकॉर्ड्स और शेल एंटिटी काे लेकर जवाद अहमद सिद्दकी से पूछताछ की जाएगी। साथ ही उसके विदेशी कनेक्शन और फंडिंग का सोर्स पता किया जाएगा। अभी तक ये पता चल रहा था कि खाड़ी देशों में उसके परिवार के सदस्य रहते हैं और वहां से फंडिंग की जा रही है।
दिल्ली ब्लास्ट के बाद जांच एजेंसियों के निशाने पर आई फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी का चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी विदेश जाने की फिराक में था। उसने किसी ऐसे देश में जाने की प्लानिंग बनाई थी, जो इंडियन पासपोर्ट को ऑन अराइवल वीजा प्रोवाइड करवाते हैं। ED को उसके ट्रैवल से जुड़ी कुछ एयर टिकटें और बुकिंग की जानकारी मिली है। ED ने कोर्ट में पेश किए गए रिमांड पेपर में भी विदेश जाने की जानकारी दी। उसके करीबी रिश्तेदार भी खाड़ी देशों में बसे हुए हैं। उन्हीं के माध्यम से वह विदेश जाने की तैयारी में था। उसके मोबाइल की भी फोरेंसिक जांच करवाई जा रही है। ED ने अपनी जांच में पाया कि 2018 से 2025 तक यूनिवर्सिटी ने स्टूडेंट्स से फीस और अन्य मदों से 415 करोड़ रुपए से अधिक राशि ली। यूनिवर्सिटी ने स्टूडेंट्स को गलत दावे दिखाकर इतनी बड़ी रकम ली। इसमें से अधिकतर राशि उन कंपनियों में ट्रांसफर की गई, जो उसके परिवार के सदस्यों के नाम रजिस्टर्ड है। जांच के दौरान 50 बैंक अकाउंट्स के डॉक्यूमेंट्स खंगाले जा रहे हैं। सस्पेक्टेड ट्रांजैक्शन के कारण ED ने इस रकम को ‘प्रोसीड्स ऑफ क्राइम’ माना है। ED के अधिकारियों का दावा है कि 415 करोड़ शुरुआती आंकड़ा है। जांच आगे बढ़ने पर और भी बड़ी रकम और प्रॉपर्टी का खुलासा हो सकता है। सिद्दीकी 1 दिसंबर तक ED की हिरासत में है। जानिए ED ने क्यों मानी अल फलाह की कमाई ‘प्रोसीड्स ऑफ क्राइम’… ये कंपनियां ED के निशाने पर रिमांड के दौरान झूठे दावे और फंडिंग को लेकर पूछताछ होगी
ED के स्पेशल प्रोसिक्यूटर साइमन बेंजामिन ने कोर्ट में बताया कि जांच में यूनिवर्सिटी ने अपनी वेबसाइट, ब्रोशर और एडमिशन विज्ञापनों में झूठा दावा किया कि वह UGC की धारा 12B के तहत मान्यता प्राप्त है और NAAC से ‘A’ ग्रेड प्राप्त है। जबकि सच यह है कि UGC ने कभी 12B मान्यता नहीं दी और NAAC ने तो यूनिवर्सिटी को शो-कॉज नोटिस तक जारी कर फर्जी दावे हटाने को कहा था। जांच में यह भी सामने आया कि छात्रों से वसूली गई फीस और लोगों से ठगे गए पैसे का इस्तेमाल निजी और व्यक्तिगत खर्चों में किया गया। कई गवाहों ने स्वीकार किया है कि सारे फाइनेंशियल फैसले चेयरमैन लेते थे। ईडी अधिकारियों का कहना है रिमांड के दौरान सर्चिंग में जब्त ₹48 लाख कैश, डिजिटल डिवाइस, रिकॉर्ड्स और शेल एंटिटी काे लेकर जवाद अहमद सिद्दकी से पूछताछ की जाएगी। साथ ही उसके विदेशी कनेक्शन और फंडिंग का सोर्स पता किया जाएगा। अभी तक ये पता चल रहा था कि खाड़ी देशों में उसके परिवार के सदस्य रहते हैं और वहां से फंडिंग की जा रही है।