फिजिकल रिसर्च लैबोरेटरी (PRL) के साइंटिस्ट ने माउंट आबू स्थित इसरो के 1.2 मीटर टेलिस्कोप से इंटरस्टेलर (अंतरतारकीय) धूमकेतु 3I/ATLAS का अध्ययन किया है। इससे वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद मिलेगी कि सौर मंडल से बाहर का पदार्थ किन परिस्थितियों में बना है। ऐसे इंटरस्टेलर धूमकेतु कैसे व्यवहार करते हैं। PRL के वैज्ञानिकों ने देखा कि यह धूमकेतु हाल ही में सूर्य के निकटतम बिंदु (पेरिहीलियन) को पार कर भीतर के सौर मंडल से दूर जा रहा है। PRL टीम ने 12 से 15 नवंबर 2025 के बीच इसके इमेजिंग और स्पेक्ट्रोस्कोपी, दोनों मोड में अध्ययन किया। फॉल्स-कलर इमेज में दिखा लगभग गोल ‘कोमा’
टेलिस्कोप से प्राप्त फॉल्स-कलर छवियों में धूमकेतु के चारों तरफ फैला हुआ लगभग गोल कोमा स्पष्ट दिखाई देता है। कोमा वह चमकीला गैसीय और धूल का आवरण है, जो धूमकेतु को घेरता है। सूर्य की गर्मी से धूमकेतु की सतह पर जमी बर्फ सब्लिमेट (परिशुद्ध) होकर गैस और धूल में बदल जाती है, जिससे यह कोमा बनता है। 3I/ATLAS अब तक खोजे गए केवल तीन इंटरस्टेलर धूमकेतुओं में से एक है। इसे जुलाई 2025 में ATLAS सर्वे के दौरान खोजा गया था। यह एक हाइपरबॉलिक कक्षा में यात्रा कर रहा है, यानी यह किसी अन्य सितारा-तंत्र से आया है। सौर मंडल में दोबारा कभी नहीं लौटेगा। इसके 3,500 साल पुराने बर्फीले पदार्थ और अनोखी रासायनिक संरचना वैज्ञानिकों को हमारे सूर्य से बाहर बने पदार्थों को समझने का मौका देते हैं। धूल और आयन पूंछ की पुष्टि
डीप वाइड-फील्ड और मल्टी-बैंड इमेज में धूमकेतु की आयन-टेल (पूंछ) भी दिखाई है। यह वह पूंछ है, जिसमें गैसें सूर्य की सोलर विंड (सौर हवा) से धकेली जाती हैं। डस्ट-टेल (धूल की पूंछ) यदि मौजूद हो तो वह सूर्य की दिशा के विपरीत लंबी दिखाई देती है। स्पेक्ट्रोस्कोपी में दिखे CN, C₂ और C₃ के सिग्नेचर
PRL के वैज्ञानिकों ने सुबह के उजाले से ठीक पहले स्पेक्ट्रोस्कोपिक डेटा हासिल किया। इसमें सौर मंडल के सामान्य धूमकेतुओं में दिखने वाले प्रमुख CN, C₂ और C₃ अणु-बैंड स्पष्ट रूप से दर्ज हुए। ये उत्सर्जन-रेखाएं धूमकेतु की रासायनिक संरचना की पहचान में महत्वपूर्ण होती हैं। टीम ने धूमकेतु से निकल रही गैस की मात्रा यानी ‘प्रोडक्शन रेट’ की भी गणना की, जिससे धूमकेतु की सक्रियता का स्तर समझा जा सकता है। माउंट आबू वेधशाला का योगदान
राजस्थान के सिरोही जिले की माउंट आबू की यह वेधशाला गुरुशिखर के निकट 1680 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यह एक्सोप्लेनेट खोज सौर मंडल के अवलोकन और कई क्षणिक व स्थिर खगोलीय घटनाओं के अध्ययन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। PRL के 1.2 मीटर टेलिस्कोप ने वर्षों से कई दुर्लभ खगोलीय घटनाओं का डेटा जुटाया है। 3I/ATLAS का ऑब्जर्वेशन इसका ताजा उदाहरण है। नासा आज रात करेगा बड़ी घोषणा
इधर, नासा ने घोषणा की है कि वह आज रात एक मीडिया कॉन्फ्रेंस आयोजित करेगा, जिसमें वह मंगल की कक्षा से खींची गई धूमकेतु 3I/ATLAS की तस्वीरें जारी करेगा। यह तस्वीरें धूमकेतु के सूर्य के सबसे नजदीक पहुंचने के समय ली गई थीं। इन्हें बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
फिजिकल रिसर्च लैबोरेटरी (PRL) के साइंटिस्ट ने माउंट आबू स्थित इसरो के 1.2 मीटर टेलिस्कोप से इंटरस्टेलर (अंतरतारकीय) धूमकेतु 3I/ATLAS का अध्ययन किया है। इससे वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद मिलेगी कि सौर मंडल से बाहर का पदार्थ किन परिस्थितियों में बना है। ऐसे इंटरस्टेलर धूमकेतु कैसे व्यवहार करते हैं। PRL के वैज्ञानिकों ने देखा कि यह धूमकेतु हाल ही में सूर्य के निकटतम बिंदु (पेरिहीलियन) को पार कर भीतर के सौर मंडल से दूर जा रहा है। PRL टीम ने 12 से 15 नवंबर 2025 के बीच इसके इमेजिंग और स्पेक्ट्रोस्कोपी, दोनों मोड में अध्ययन किया। फॉल्स-कलर इमेज में दिखा लगभग गोल ‘कोमा’
टेलिस्कोप से प्राप्त फॉल्स-कलर छवियों में धूमकेतु के चारों तरफ फैला हुआ लगभग गोल कोमा स्पष्ट दिखाई देता है। कोमा वह चमकीला गैसीय और धूल का आवरण है, जो धूमकेतु को घेरता है। सूर्य की गर्मी से धूमकेतु की सतह पर जमी बर्फ सब्लिमेट (परिशुद्ध) होकर गैस और धूल में बदल जाती है, जिससे यह कोमा बनता है। 3I/ATLAS अब तक खोजे गए केवल तीन इंटरस्टेलर धूमकेतुओं में से एक है। इसे जुलाई 2025 में ATLAS सर्वे के दौरान खोजा गया था। यह एक हाइपरबॉलिक कक्षा में यात्रा कर रहा है, यानी यह किसी अन्य सितारा-तंत्र से आया है। सौर मंडल में दोबारा कभी नहीं लौटेगा। इसके 3,500 साल पुराने बर्फीले पदार्थ और अनोखी रासायनिक संरचना वैज्ञानिकों को हमारे सूर्य से बाहर बने पदार्थों को समझने का मौका देते हैं। धूल और आयन पूंछ की पुष्टि
डीप वाइड-फील्ड और मल्टी-बैंड इमेज में धूमकेतु की आयन-टेल (पूंछ) भी दिखाई है। यह वह पूंछ है, जिसमें गैसें सूर्य की सोलर विंड (सौर हवा) से धकेली जाती हैं। डस्ट-टेल (धूल की पूंछ) यदि मौजूद हो तो वह सूर्य की दिशा के विपरीत लंबी दिखाई देती है। स्पेक्ट्रोस्कोपी में दिखे CN, C₂ और C₃ के सिग्नेचर
PRL के वैज्ञानिकों ने सुबह के उजाले से ठीक पहले स्पेक्ट्रोस्कोपिक डेटा हासिल किया। इसमें सौर मंडल के सामान्य धूमकेतुओं में दिखने वाले प्रमुख CN, C₂ और C₃ अणु-बैंड स्पष्ट रूप से दर्ज हुए। ये उत्सर्जन-रेखाएं धूमकेतु की रासायनिक संरचना की पहचान में महत्वपूर्ण होती हैं। टीम ने धूमकेतु से निकल रही गैस की मात्रा यानी ‘प्रोडक्शन रेट’ की भी गणना की, जिससे धूमकेतु की सक्रियता का स्तर समझा जा सकता है। माउंट आबू वेधशाला का योगदान
राजस्थान के सिरोही जिले की माउंट आबू की यह वेधशाला गुरुशिखर के निकट 1680 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यह एक्सोप्लेनेट खोज सौर मंडल के अवलोकन और कई क्षणिक व स्थिर खगोलीय घटनाओं के अध्ययन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। PRL के 1.2 मीटर टेलिस्कोप ने वर्षों से कई दुर्लभ खगोलीय घटनाओं का डेटा जुटाया है। 3I/ATLAS का ऑब्जर्वेशन इसका ताजा उदाहरण है। नासा आज रात करेगा बड़ी घोषणा
इधर, नासा ने घोषणा की है कि वह आज रात एक मीडिया कॉन्फ्रेंस आयोजित करेगा, जिसमें वह मंगल की कक्षा से खींची गई धूमकेतु 3I/ATLAS की तस्वीरें जारी करेगा। यह तस्वीरें धूमकेतु के सूर्य के सबसे नजदीक पहुंचने के समय ली गई थीं। इन्हें बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।