दिल्ली कार ब्लास्ट से सुर्खियों में आई फरीदाबाद की अल फलाह यूनिवर्सिटी के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी पर पुलिस ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। महू निवासी जवाद के भाई हमूद सिद्दीकी को पुलिस ने हैदराबाद से गिरफ्तार किया है। उसे 16 नवंबर को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया है। आरोप है कि हमूद ने चिटफंड कंपनी खोलकर पैसा दोगुना करने का झांसा दिया, फिर लोगों से निवेश करवाया। इसके बाद रुपए लेकर भाग गया। इस मामले में पुलिस उसको 25 साल से तलाश रही थी। जवाद फरीदाबाद की उस अल फलाह यूनिवर्सिटी का संस्थापक चेयरमैन है, जिसमें धमाके का मुख्य आरोपी डॉ. उमर नबी पढ़ाता था। वह अल फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट का संचालक भी है। चिटफंड कंपनी खोली, निवेश का पैसा लेकर भागा था
महू थाने के टीआई कमल सिंह गेहलोद ने बताया- साल 2000 में जवाद ने अपने भाई हमूद के साथ मिलकर उसी के नाम पर चिटफंड कंपनी खोली थी। लोगों को पैसा दोगुना करने का लालच देकर इसमें इन्वेस्टमेंट कराया। सेना के रिटायर्ड कर्मचारी और मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विसेस (MES) में काम करने वाले को भी फंसाया। इसके बाद सारा पैसा लेकर दोनों भाई परिवार समेत महू से भाग निकले। कंपनी में निवेश करने वाले लोगों ने मामले में पुलिस में केस दर्ज कराया था। टीआई गेहलोद का कहना है कि हमूद हैदराबाद में रिचकॉम प्राइवेट लिमिटेड के नाम से शेयर मार्केट में इन्वेस्टमेंट फर्म चला रहा था। पुलिस ने सिद्दीकी परिवार के रिश्तेदारों से उसकी जानकारी निकाली। इसके बाद योजनाबद्ध तरीके से कार्रवाई करते हुए उसे पकड़ा। धोखाधड़ी के साथ मारपीट की धाराओं में भी केस
इंदौर ग्रामीण एसपी यांगचेन डोलकर भूटिया ने बताया कि हमूद के खिलाफ महू थाने में साल 2000 में धोखाधड़ी के तीन केस दर्ज किए गए थे। इसके अलावा 1988 में मारपीट और जान से मारने की कोशिश की धाराओं में भी केस दर्ज थे। हमूद पर 10 हजार रुपए का इनाम घोषित था। हमूद ने 1995 और 1996 में अल फहद फिनकॉम नाम से इन्वेस्टमेंट कंपनी खोली थी। इसमें जवाद और हमून डायरेक्टर थे। इनकी पत्नियां भी इसमें शामिल थीं। करीब दो साल कंपनी चलाई। इसके बाद पैसा लेकर फरार हो गए। तीनों मामलों में करीब 35 लाख रुपए के गबन की शिकायत हुई थी। पूछताछ में पता चला है कि भागने के बाद हमूद ने परिवार से कोई संपर्क नहीं रखा। दो दिन पहले बुरहानपुर आई थी एनआईए की टीम
10 नवंबर को दिल्ली में लाल किले के पास हुंडई i20 कार में ब्लास्ट हुआ था। इसमें 13 लोगों की जान चली गई थी। इस सिलसिले में नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) की एक टीम जांच के लिए 15 नवंबर को बुरहानपुर भी आई थी। हालांकि, टीम ने स्थानीय पुलिस अफसरों से संपर्क नहीं किया था। पिता शहर काजी रहे, सौतेला भाई जेल जा चुका है
जवाद का परिवार करीब 25 साल पहले महू के कायस्थ मोहल्ले में रहता था। उसके दो भाई भी यहीं पढ़े-लिखे हैं। पिता मोहम्मद हम्माद सिद्दीकी महू के शहर काजी रह चुके हैं। उसका सौतेला भाई अफाम हत्या के मामले में जेल जा चुका है।
जवाद ने इंदौर के गोविंदराम सेकसरिया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस (GSITS) से बीटेक की डिग्री ली थी। इससे पहले वह महू के क्रिश्चियन मिशनरी स्कूल राजेश्वर विद्यालय से 11वीं तक पढ़ा था। उसने सिविल सर्विसेज परीक्षा में तीन बार इंटरव्यू तक दिया, लेकिन सिलेक्शन नहीं हो सका था। अल फलाह यूनिवर्सिटी में 3 कॉलेज, 600 बेड का अस्पताल
अल फलाह यूनिवर्सिटी के तहत तीन कॉलेज संचालित हैं- अल फलाह स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, ब्राउन हिल कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी और अल फलाह स्कूल ऑफ एजुकेशन एंड ट्रेनिंग। यूनिवर्सिटी परिसर में ही 600 बिस्तरों वाला अस्पताल भी है, जहां मेडिकल कॉलेज में पढ़ने वाले डॉक्टर ही इलाज करते थे। साल 2015 में यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (यूजीसी) द्वारा इसे मान्यता दी गई थी। पिता के नाम पर है मकान
महू में जवाद के परिवार का मकान कायस्थ मोहल्ले में बना है। चार मंजिला इमारत में 25 से ज्यादा खिड़कियां हैं। एक बड़ा तलघर भी है। 90 के दशक में बने इस मकान को स्थानीय लोग मौलाना की बिल्डिंग के नाम से जानते हैं। मकान जवाद के पिता हम्माद के नाम पर हैं, उनकी 1995 में मौत हो चुकी है। मामले से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… दिल्ली कार ब्लास्ट मामले का महू से कनेक्शन दिल्ली में हुए कार ब्लास्ट और हरियाणा के फरीदाबाद से जब्त विस्फोटक के मामले में एक नया मोड़ आया है। जांच में सामने आया है कि आतंकी साजिश के आरोपों से घिरी अल-फलाह यूनिवर्सिटी का चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी मूल रूप से महू का रहने वाला है। पढ़ें पूरी खबर… दिल्ली ब्लास्ट-NIA ने आतंकी डॉ. उमर को सुसाइड बॉम्बर माना दिल्ली में लाल किले के पास चांदनी चौक में 10 नवंबर को हुंडई i20 कार में ब्लास्ट सुसाइड अटैक ही था। NIA ने रविवार को बताया कि कार चला रहा डा. उमर उल नबी एक आत्मघाती हमलावर (सुसाइड बॉम्बर) था। यह पहली बार है, जब किसी सुरक्षा एजेंसी ने ऑफिशियल तौर पर इसकी पुष्टि की है। पढे़ं पूरी खबर…
दिल्ली कार ब्लास्ट से सुर्खियों में आई फरीदाबाद की अल फलाह यूनिवर्सिटी के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी पर पुलिस ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। महू निवासी जवाद के भाई हमूद सिद्दीकी को पुलिस ने हैदराबाद से गिरफ्तार किया है। उसे 16 नवंबर को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया है। आरोप है कि हमूद ने चिटफंड कंपनी खोलकर पैसा दोगुना करने का झांसा दिया, फिर लोगों से निवेश करवाया। इसके बाद रुपए लेकर भाग गया। इस मामले में पुलिस उसको 25 साल से तलाश रही थी। जवाद फरीदाबाद की उस अल फलाह यूनिवर्सिटी का संस्थापक चेयरमैन है, जिसमें धमाके का मुख्य आरोपी डॉ. उमर नबी पढ़ाता था। वह अल फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट का संचालक भी है। चिटफंड कंपनी खोली, निवेश का पैसा लेकर भागा था
महू थाने के टीआई कमल सिंह गेहलोद ने बताया- साल 2000 में जवाद ने अपने भाई हमूद के साथ मिलकर उसी के नाम पर चिटफंड कंपनी खोली थी। लोगों को पैसा दोगुना करने का लालच देकर इसमें इन्वेस्टमेंट कराया। सेना के रिटायर्ड कर्मचारी और मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विसेस (MES) में काम करने वाले को भी फंसाया। इसके बाद सारा पैसा लेकर दोनों भाई परिवार समेत महू से भाग निकले। कंपनी में निवेश करने वाले लोगों ने मामले में पुलिस में केस दर्ज कराया था। टीआई गेहलोद का कहना है कि हमूद हैदराबाद में रिचकॉम प्राइवेट लिमिटेड के नाम से शेयर मार्केट में इन्वेस्टमेंट फर्म चला रहा था। पुलिस ने सिद्दीकी परिवार के रिश्तेदारों से उसकी जानकारी निकाली। इसके बाद योजनाबद्ध तरीके से कार्रवाई करते हुए उसे पकड़ा। धोखाधड़ी के साथ मारपीट की धाराओं में भी केस
इंदौर ग्रामीण एसपी यांगचेन डोलकर भूटिया ने बताया कि हमूद के खिलाफ महू थाने में साल 2000 में धोखाधड़ी के तीन केस दर्ज किए गए थे। इसके अलावा 1988 में मारपीट और जान से मारने की कोशिश की धाराओं में भी केस दर्ज थे। हमूद पर 10 हजार रुपए का इनाम घोषित था। हमूद ने 1995 और 1996 में अल फहद फिनकॉम नाम से इन्वेस्टमेंट कंपनी खोली थी। इसमें जवाद और हमून डायरेक्टर थे। इनकी पत्नियां भी इसमें शामिल थीं। करीब दो साल कंपनी चलाई। इसके बाद पैसा लेकर फरार हो गए। तीनों मामलों में करीब 35 लाख रुपए के गबन की शिकायत हुई थी। पूछताछ में पता चला है कि भागने के बाद हमूद ने परिवार से कोई संपर्क नहीं रखा। दो दिन पहले बुरहानपुर आई थी एनआईए की टीम
10 नवंबर को दिल्ली में लाल किले के पास हुंडई i20 कार में ब्लास्ट हुआ था। इसमें 13 लोगों की जान चली गई थी। इस सिलसिले में नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) की एक टीम जांच के लिए 15 नवंबर को बुरहानपुर भी आई थी। हालांकि, टीम ने स्थानीय पुलिस अफसरों से संपर्क नहीं किया था। पिता शहर काजी रहे, सौतेला भाई जेल जा चुका है
जवाद का परिवार करीब 25 साल पहले महू के कायस्थ मोहल्ले में रहता था। उसके दो भाई भी यहीं पढ़े-लिखे हैं। पिता मोहम्मद हम्माद सिद्दीकी महू के शहर काजी रह चुके हैं। उसका सौतेला भाई अफाम हत्या के मामले में जेल जा चुका है।
जवाद ने इंदौर के गोविंदराम सेकसरिया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस (GSITS) से बीटेक की डिग्री ली थी। इससे पहले वह महू के क्रिश्चियन मिशनरी स्कूल राजेश्वर विद्यालय से 11वीं तक पढ़ा था। उसने सिविल सर्विसेज परीक्षा में तीन बार इंटरव्यू तक दिया, लेकिन सिलेक्शन नहीं हो सका था। अल फलाह यूनिवर्सिटी में 3 कॉलेज, 600 बेड का अस्पताल
अल फलाह यूनिवर्सिटी के तहत तीन कॉलेज संचालित हैं- अल फलाह स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, ब्राउन हिल कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी और अल फलाह स्कूल ऑफ एजुकेशन एंड ट्रेनिंग। यूनिवर्सिटी परिसर में ही 600 बिस्तरों वाला अस्पताल भी है, जहां मेडिकल कॉलेज में पढ़ने वाले डॉक्टर ही इलाज करते थे। साल 2015 में यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (यूजीसी) द्वारा इसे मान्यता दी गई थी। पिता के नाम पर है मकान
महू में जवाद के परिवार का मकान कायस्थ मोहल्ले में बना है। चार मंजिला इमारत में 25 से ज्यादा खिड़कियां हैं। एक बड़ा तलघर भी है। 90 के दशक में बने इस मकान को स्थानीय लोग मौलाना की बिल्डिंग के नाम से जानते हैं। मकान जवाद के पिता हम्माद के नाम पर हैं, उनकी 1995 में मौत हो चुकी है। मामले से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… दिल्ली कार ब्लास्ट मामले का महू से कनेक्शन दिल्ली में हुए कार ब्लास्ट और हरियाणा के फरीदाबाद से जब्त विस्फोटक के मामले में एक नया मोड़ आया है। जांच में सामने आया है कि आतंकी साजिश के आरोपों से घिरी अल-फलाह यूनिवर्सिटी का चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी मूल रूप से महू का रहने वाला है। पढ़ें पूरी खबर… दिल्ली ब्लास्ट-NIA ने आतंकी डॉ. उमर को सुसाइड बॉम्बर माना दिल्ली में लाल किले के पास चांदनी चौक में 10 नवंबर को हुंडई i20 कार में ब्लास्ट सुसाइड अटैक ही था। NIA ने रविवार को बताया कि कार चला रहा डा. उमर उल नबी एक आत्मघाती हमलावर (सुसाइड बॉम्बर) था। यह पहली बार है, जब किसी सुरक्षा एजेंसी ने ऑफिशियल तौर पर इसकी पुष्टि की है। पढे़ं पूरी खबर…