दिल्ली ब्लास्ट केस में गिरफ्तार डॉ. मुजम्मिल शकील फरीदाबाद में अल-फलाह यूनिवर्सिटी से 700 मीटर दूरी पर ही आतंक की नर्सरी तैयार कर रहा था। यहां करीब 200 वर्गगज में एक अंडर ग्राउंड इमारत बनाई जा रही थी, जहां 15-20 बच्चों को धार्मिक शिक्षा दी जा रही थी। जिस प्लॉट में यह निर्माण हुआ, उसकी पावर ऑफ अटॉर्नी यूनिवर्सिटी की मस्जिद के इमाम मोहम्मद इश्तियाक के नाम है। इस कथित रूप से तैयार हो रहे मदरसे में चेहरा तो मोहम्मद इश्तियाक को बनाया गया था, लेकिन फंडिंग डॉ. मुजम्मिल ही कर रहा था। यहां पानी की व्यवस्था के लिए बोरवेल लगवाने को डॉ. मुजम्मिल ने इमाम को ऑनलाइन 35 हजार रुपए ट्रांसफर किए थे। अब ये निर्माणाधीन इमारत भी जांच एजेंसियों की रडार पर है। जम्मू एवं कश्मीर पुलिस की टीम ने डॉ. मुजम्मिल को गिरफ्तार करने के बाद उसके बैंक खातों की गहन जांच शुरू की। जानिए…कैसे मदरसे की आड़ में अवैध निर्माण किया कॉलोनी भी अवैध, निर्माण के लिए मंजूरी नहीं
दैनिक भास्कर एप की टीम कच्चे रास्ते से होकर उस जगह पहुंची, जहां निर्माण कार्य चल रहा है। मदरसे का साइन बोर्ड दिखाई दिया। यहां से एक रेतीला रास्ता खेतों की तरफ जाता है। आगे बढ़े तो अन अप्रूव्ड कॉलोनी में कुछ मकान बने दिखे। कुछ निर्माणाधीन हैं। लोगों से मदरसे के बारे में पूछा तो उन्होंने जानकारी होने से मना कर दिया। इसी दौरान एक महिला ने इशारा करके मदरसे के बेसमेंट के बारे में बताया। कॉलोनी अवैध है और इस निर्माण के लिए कोई मंजूरी नहीं ली गई। 10 हजार पगार वाले इमाम के पास पैसा कहां से आया
हिरासत में लिए गए इमाम इश्तियाक की पत्नी हसीन ने बताया है कि उनके शौहर को यूनिवर्सिटी 10 हजार रुपए मासिक पगार देती थी। शुरुआत में यह पगार सिर्फ 2 हजार रुपए थी। इमाम ने फतेहपुरा तगा में भी 5-6 साल पहले प्लॉट लेकर मकान बनाया था। अब जिस प्लॉट में मदरसा बनाया जा रहा था, इसकी पावर ऑफ अटॉर्नी भी इमाम इश्तियाक के नाम है। यह कॉलोनी शकील खान नाम के शख्स ने काटी थी। कई साल पहले इमाम ने इश्तियाक को दूसरी जगह प्लॉट दिया था, लेकिन उस जमीन पर विवाद था। बाद में कॉलोनाइजर ने यह दूसरा प्लॉट दिया। 15-20 बच्चे इमाम से दीनी तालीम लेने आते थे
आसपास के लोगों ने बताया कि यहां मुस्लिम आबादी ज्यादा है। 4-5 महीने पहले से जब बेसमेंट का निर्माण चल रहा था, तब कुछ लोग अकसर कार में आते थे। ये लोग लेबर को बताते थे कि कैसे निर्माण होना है। निर्माण चल रहा था, तब भी इमाम इश्तियाक आसपास के लोगों के घर जाता था। इसके बाद 15-20 बच्चे यहां आने लगे, जिन्हें दीनी तालीम दी जाती थी। मौलवी का इरादा अच्छा लग रहा था
कॉलोनी की एक महिला ने बताया कि इमाम का इरादा अच्छा लग रहा था। वह कहता था कि आसपास की कॉलोनियों के गरीब बच्चों को मुफ्त धार्मिक शिक्षा देंगे। करीब दो घंटे तक यहां तालीम दी जाती थी। हालांकि इमाम की गिरफ्तारी के बाद से यहां पेरेंट्स ने बच्चों को भेजना बंद कर दिया है। प्लॉट का मौका-मुआयना करने पर बेसमेंट की जानकारी मिली। बेसमेंट आधा अधूरा था, लेकिन इसकी गहराई और बनावट सस्पेक्टेड थी। बेसमेंट में वेंटिलेशन की व्यवस्था थी। यहां पंखे भी लगे हुए मिले और चटाई व दरी भी थी। दोस्ती कर कमरा किराए पर लिया
जांच में सामने आया कि इमाम इश्तियाक पिछले 20 वर्षों से फरीदाबाद में रह रहा था। यूनिवर्सिटी की मस्जिद में धार्मिक कक्षाएं आयोजित करता था। इन कक्षाओं में अल फलाह के मेडिकल छात्रों और स्टाफ को शामिल किया जाता था। डॉ. मुजम्मिल नमाज पढ़ने आता था और उसने मौलवी से दोस्ती कर फतेहपुर तगा गांव में उसका कमरा किराए पर ले लिया। विस्फोटक सामग्री छिपाने में मदद का आरोप
इसी कमरे में डॉ. मुजम्मिल ने अमोनियम नाइट्रेट रखा था। बाद में पुलिस ने इश्तियाक के फतेहपुर तगा स्थित घर से भी 2,563 किलोग्राम विस्फोटक बरामद किया, जो अल फलाह यूनिवर्सिटी से महज 4 किमी दूर है। पुलिस का मानना है कि उन्होंने मुजम्मिल को किराए का कमरा देकर विस्फोटक को स्टोर करने की सुविधा दी। इसलिए इश्तियाक को 13 नवंबर को औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया गया। जम्मू-कश्मीर पुलिस उसे श्रीनगर ले जाकर पूछताछ करेगी और उनकी हिरासत अवधि 7 दिनों के लिए बढ़ा दी गई है। डॉक्टर-मौलवी आतंकी मॉड्यूल का शक
इस मामले में जांच से जुड़े दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि यह मॉड्यूल JeM का ‘डॉक्टर-मौलवी’ नेटवर्क हो सकता है, जो रेडिकलाइजेशन के नए तरीके दिखाता है। इश्तियाक से पूछताछ में और खुलासे हो सकते हैं। क्योंकि इस केस में जम्मू कश्मीर के शोपियां से एक और मौलवी इरफान अहमद को भी अरेस्ट किया गया है। ————————— ये खबरें भी पढ़ें… दिल्ली ब्लास्ट-18 घंटे पहले नूंह में था आतंकी उमर:कैश निकलवाने ATM पहुंचा, पैसे नहीं निकले तो गार्ड को लेकर 20 मिनट घूमा दिल्ली में विस्फोटक के साथ खुद को उड़ाने वाला फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी का असिस्टेंट प्रोफेसर उमर नबी का नूंह में ATM के बाहर का CCTV फुटेज सामने आया है। दिल्ली में ब्लास्ट (10 नवंबर) से करीब 18 घंटे पहले नूंह में उमर i-20 कार लेकर ATM में कैश निकालने के लिए पहुंचा था। (पूरी खबर पढ़ें) फरीदाबाद-नूंह में आतंक के नेटवर्क को तोड़ने की तैयारी:मस्जिद, किराएदारों, दुकानों, कार डीलर्स की चेकिंग; यूनिवर्सिटी पर 2 FIR हुई दिल्ली में लाल किले के सामने बम ब्लास्ट के बाद फरीदाबाद और नूंह में आतंक का नेटवर्क लगातार सामने आ रहा है। इसे तोड़ने के लिए NIA समेत अन्य जांच एजेंसियां और क्राइम ब्रांच की टीमें लगातार मस्जिद, किराएदारों के कमरे, खाद-बीज की दुकानें, कारों की बिक्री करने वाले डीलर, गेस्ट हाउस, धर्मशालाओं की चेकिंग कर रही है। (पूरी खबर पढ़ें) आतंकी मॉड्यूल के कॉन्टैक्ट वाले 200 लोग रडार पर:डॉ. मुजम्मिल और डॉ. शाहीन ने मदद के नाम पर रुपए बांटे; अब तक 60 हिरासत में दिल्ली ब्लास्ट मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, कई चौंकाने वाले खुलासे हो रहे है। अब सुरक्षा एजेंसियों की जांच में फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी के डॉ. मुजम्मिल और लेडी डॉ. शाहीन की मोबाइल की कॉल डिटेल और डिजिटल ट्रांसफर पेमेंट्स से चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। (पूरी खबर पढ़ें)
दिल्ली ब्लास्ट केस में गिरफ्तार डॉ. मुजम्मिल शकील फरीदाबाद में अल-फलाह यूनिवर्सिटी से 700 मीटर दूरी पर ही आतंक की नर्सरी तैयार कर रहा था। यहां करीब 200 वर्गगज में एक अंडर ग्राउंड इमारत बनाई जा रही थी, जहां 15-20 बच्चों को धार्मिक शिक्षा दी जा रही थी। जिस प्लॉट में यह निर्माण हुआ, उसकी पावर ऑफ अटॉर्नी यूनिवर्सिटी की मस्जिद के इमाम मोहम्मद इश्तियाक के नाम है। इस कथित रूप से तैयार हो रहे मदरसे में चेहरा तो मोहम्मद इश्तियाक को बनाया गया था, लेकिन फंडिंग डॉ. मुजम्मिल ही कर रहा था। यहां पानी की व्यवस्था के लिए बोरवेल लगवाने को डॉ. मुजम्मिल ने इमाम को ऑनलाइन 35 हजार रुपए ट्रांसफर किए थे। अब ये निर्माणाधीन इमारत भी जांच एजेंसियों की रडार पर है। जम्मू एवं कश्मीर पुलिस की टीम ने डॉ. मुजम्मिल को गिरफ्तार करने के बाद उसके बैंक खातों की गहन जांच शुरू की। जानिए…कैसे मदरसे की आड़ में अवैध निर्माण किया कॉलोनी भी अवैध, निर्माण के लिए मंजूरी नहीं
दैनिक भास्कर एप की टीम कच्चे रास्ते से होकर उस जगह पहुंची, जहां निर्माण कार्य चल रहा है। मदरसे का साइन बोर्ड दिखाई दिया। यहां से एक रेतीला रास्ता खेतों की तरफ जाता है। आगे बढ़े तो अन अप्रूव्ड कॉलोनी में कुछ मकान बने दिखे। कुछ निर्माणाधीन हैं। लोगों से मदरसे के बारे में पूछा तो उन्होंने जानकारी होने से मना कर दिया। इसी दौरान एक महिला ने इशारा करके मदरसे के बेसमेंट के बारे में बताया। कॉलोनी अवैध है और इस निर्माण के लिए कोई मंजूरी नहीं ली गई। 10 हजार पगार वाले इमाम के पास पैसा कहां से आया
हिरासत में लिए गए इमाम इश्तियाक की पत्नी हसीन ने बताया है कि उनके शौहर को यूनिवर्सिटी 10 हजार रुपए मासिक पगार देती थी। शुरुआत में यह पगार सिर्फ 2 हजार रुपए थी। इमाम ने फतेहपुरा तगा में भी 5-6 साल पहले प्लॉट लेकर मकान बनाया था। अब जिस प्लॉट में मदरसा बनाया जा रहा था, इसकी पावर ऑफ अटॉर्नी भी इमाम इश्तियाक के नाम है। यह कॉलोनी शकील खान नाम के शख्स ने काटी थी। कई साल पहले इमाम ने इश्तियाक को दूसरी जगह प्लॉट दिया था, लेकिन उस जमीन पर विवाद था। बाद में कॉलोनाइजर ने यह दूसरा प्लॉट दिया। 15-20 बच्चे इमाम से दीनी तालीम लेने आते थे
आसपास के लोगों ने बताया कि यहां मुस्लिम आबादी ज्यादा है। 4-5 महीने पहले से जब बेसमेंट का निर्माण चल रहा था, तब कुछ लोग अकसर कार में आते थे। ये लोग लेबर को बताते थे कि कैसे निर्माण होना है। निर्माण चल रहा था, तब भी इमाम इश्तियाक आसपास के लोगों के घर जाता था। इसके बाद 15-20 बच्चे यहां आने लगे, जिन्हें दीनी तालीम दी जाती थी। मौलवी का इरादा अच्छा लग रहा था
कॉलोनी की एक महिला ने बताया कि इमाम का इरादा अच्छा लग रहा था। वह कहता था कि आसपास की कॉलोनियों के गरीब बच्चों को मुफ्त धार्मिक शिक्षा देंगे। करीब दो घंटे तक यहां तालीम दी जाती थी। हालांकि इमाम की गिरफ्तारी के बाद से यहां पेरेंट्स ने बच्चों को भेजना बंद कर दिया है। प्लॉट का मौका-मुआयना करने पर बेसमेंट की जानकारी मिली। बेसमेंट आधा अधूरा था, लेकिन इसकी गहराई और बनावट सस्पेक्टेड थी। बेसमेंट में वेंटिलेशन की व्यवस्था थी। यहां पंखे भी लगे हुए मिले और चटाई व दरी भी थी। दोस्ती कर कमरा किराए पर लिया
जांच में सामने आया कि इमाम इश्तियाक पिछले 20 वर्षों से फरीदाबाद में रह रहा था। यूनिवर्सिटी की मस्जिद में धार्मिक कक्षाएं आयोजित करता था। इन कक्षाओं में अल फलाह के मेडिकल छात्रों और स्टाफ को शामिल किया जाता था। डॉ. मुजम्मिल नमाज पढ़ने आता था और उसने मौलवी से दोस्ती कर फतेहपुर तगा गांव में उसका कमरा किराए पर ले लिया। विस्फोटक सामग्री छिपाने में मदद का आरोप
इसी कमरे में डॉ. मुजम्मिल ने अमोनियम नाइट्रेट रखा था। बाद में पुलिस ने इश्तियाक के फतेहपुर तगा स्थित घर से भी 2,563 किलोग्राम विस्फोटक बरामद किया, जो अल फलाह यूनिवर्सिटी से महज 4 किमी दूर है। पुलिस का मानना है कि उन्होंने मुजम्मिल को किराए का कमरा देकर विस्फोटक को स्टोर करने की सुविधा दी। इसलिए इश्तियाक को 13 नवंबर को औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया गया। जम्मू-कश्मीर पुलिस उसे श्रीनगर ले जाकर पूछताछ करेगी और उनकी हिरासत अवधि 7 दिनों के लिए बढ़ा दी गई है। डॉक्टर-मौलवी आतंकी मॉड्यूल का शक
इस मामले में जांच से जुड़े दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि यह मॉड्यूल JeM का ‘डॉक्टर-मौलवी’ नेटवर्क हो सकता है, जो रेडिकलाइजेशन के नए तरीके दिखाता है। इश्तियाक से पूछताछ में और खुलासे हो सकते हैं। क्योंकि इस केस में जम्मू कश्मीर के शोपियां से एक और मौलवी इरफान अहमद को भी अरेस्ट किया गया है। ————————— ये खबरें भी पढ़ें… दिल्ली ब्लास्ट-18 घंटे पहले नूंह में था आतंकी उमर:कैश निकलवाने ATM पहुंचा, पैसे नहीं निकले तो गार्ड को लेकर 20 मिनट घूमा दिल्ली में विस्फोटक के साथ खुद को उड़ाने वाला फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी का असिस्टेंट प्रोफेसर उमर नबी का नूंह में ATM के बाहर का CCTV फुटेज सामने आया है। दिल्ली में ब्लास्ट (10 नवंबर) से करीब 18 घंटे पहले नूंह में उमर i-20 कार लेकर ATM में कैश निकालने के लिए पहुंचा था। (पूरी खबर पढ़ें) फरीदाबाद-नूंह में आतंक के नेटवर्क को तोड़ने की तैयारी:मस्जिद, किराएदारों, दुकानों, कार डीलर्स की चेकिंग; यूनिवर्सिटी पर 2 FIR हुई दिल्ली में लाल किले के सामने बम ब्लास्ट के बाद फरीदाबाद और नूंह में आतंक का नेटवर्क लगातार सामने आ रहा है। इसे तोड़ने के लिए NIA समेत अन्य जांच एजेंसियां और क्राइम ब्रांच की टीमें लगातार मस्जिद, किराएदारों के कमरे, खाद-बीज की दुकानें, कारों की बिक्री करने वाले डीलर, गेस्ट हाउस, धर्मशालाओं की चेकिंग कर रही है। (पूरी खबर पढ़ें) आतंकी मॉड्यूल के कॉन्टैक्ट वाले 200 लोग रडार पर:डॉ. मुजम्मिल और डॉ. शाहीन ने मदद के नाम पर रुपए बांटे; अब तक 60 हिरासत में दिल्ली ब्लास्ट मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, कई चौंकाने वाले खुलासे हो रहे है। अब सुरक्षा एजेंसियों की जांच में फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी के डॉ. मुजम्मिल और लेडी डॉ. शाहीन की मोबाइल की कॉल डिटेल और डिजिटल ट्रांसफर पेमेंट्स से चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। (पूरी खबर पढ़ें)