मुंबई के मझगांव सिविल सेशंस कोर्ट से जुड़ा एक रिश्वतकांड का मामला सामने आया है। ये पूरा वाकया मंगलवार का है, जब कोर्ट के क्लर्क और टाइपिस्ट चंद्रकांत वासुदेव (40) को ₹15 लाख रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा गया। एंंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) के अनुसार शिकायतकर्ता ने 10 नवंबर को फैसला पक्ष में सुनाने के लिए ₹25 लाख की रिश्वत मांगने की शिकायत की थी। PTI न्यूज एजेंसी ने बताया कि ACB ने सिविल सेशंस कोर्ट के जज को भी आरोपी बनाया है। 10 साल पुराने मामले को समझें शिकायतकर्ता की पत्नी ने 2015 में कंपनी की जमीन पर कब्जे को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। अप्रैल 2016 में हाईकोर्ट ने विवादित जमीन पर किसी तीसरे पक्ष को अधिकार देने पर रोक लगा दी थी। क्योंकि जमीन की कीमत 10 करोड़ रुपये से कम थी, इसलिए 2024 में मामला माजगांव सिविल सेशंस कोर्ट में भेज दिया गया। इस साल 9 सितंबर को सुनवाई के बाद वासुदेव ने शिकायतकर्ता को फोन कर रिश्वत की बात बताई। उसने 12 सितंबर को चेंबूर में मुलाकात तय की, जहां फिर से ₹25 लाख की रिश्वत मांगकर उसके पक्ष में फैसला दिलाने का भरोसा दिया। उसने बताया कि जज की तरफ से वह बात कर रहा है। ₹25 लाख में से ₹10 लाख खुद के लिए और ₹15 लाख जज के लिए मांगे। शिकायतकर्ता ने रिश्वत देने से इनकार कर दिया, लेकिन क्लर्क बार-बार कॉल कर दबाव डालता रहा। कॉफी शॉप में ₹15 लाख लेते पकड़ा गया क्लर्क 10 नवंबर को शिकायतकर्ता ने ACB के वर्ली कार्यालय में क्लर्क की रिश्वत मांगने की शिकायत की। उसी दिन, ACB के निर्देशानुसार, शिकायतकर्ता ने बातचीत करके रकम ₹15 लाख पर लाकर जल्द ही मिलने का फैसला किया। जांच में यह साबित हो गया कि वासुदेव ₹15 लाख लेने को तैयार था। इसके बाद 12 नवंबर को ACB ने चेंबूर के उसी स्टारबक्स कैफे में जाल बिछाया और क्लर्क को रिश्वत लेते हुए पकड़ लिया। गिरफ्तारी के बाद वासुदेव ने जज को फोन कर बताया कि रकम मिल गई है। ACB ने इस बातचीत को रिकॉर्ड किया और उसके आधार पर जज को भी आरोपी बनाया। दोनों पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7, 7(ए) और 12 के तहत केस दर्ज किया गया है। ACB अधिकारियों ने बताया कि जज की गिरफ्तारी के लिए प्रधान जिला न्यायाधीश से अनुमति मांगी गई है और फिलहाल मंजूरी का इंतजार है। वहीं, गिरफ्तार क्लर्क को बुधवार को ACB अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे 16 नवंबर तक ACB की हिरासत में भेज दिया गया। रिश्वत और गड़बड़ी के आरोप में बॉम्बे हाईकोर्ट ने दो जजों को नौकरी से हटाया इससे पहले अक्टूबर में बॉम्बे हाईकोर्ट ने भ्रष्टाचार और गलत काम करने के आरोप में दो निचली अदालतों के जजों को नौकरी से निकाल दिया था। इनमें अतिरिक्त सत्र जज धनंजय निकम और सिविल जज इरफान शेख शामिल थे। ACB ने सातारा के जज धनंजय निकम के खिलाफ केस दर्ज किया था। उन पर आरोप था कि उन्होंने एक धोखाधड़ी के केस में आरोपी को जमानत देने के लिए ₹5 लाख रिश्वत मांगी थी। शिकायत में कहा गया कि एक महिला के पिता पर सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी का आरोप था और वे जेल में थे। जब निचली अदालत ने जमानत नहीं दी, तो महिला ने सातारा कोर्ट में नई अर्जी लगाई, जिसे निकम सुन रहे थे। ACB का कहना है कि मुंबई के किशोर सांभाजी खरात और सातारा के आनंद मोहन खरात ने महिला से जज के कहने पर ₹5 लाख मांगे थे। दिसंबर 2024 में जांच के दौरान रिश्वत मांगने की बात सच साबित हुई। इसके बाद ACB ने निकम और दोनों बिचौलियों पर रिश्वत विरोधी कानून के तहत केस दर्ज किया। दूसरे जज इरफान शेख पर आरोप था कि वे नशे से जुड़े मामलों (NDPS एक्ट) की सुनवाई करते समय भ्रष्टाचार में शामिल थे और जब्त किए गए नशे के सामान में हेराफेरी करते थे। उनके खिलाफ एक याचिका अब भी हाईकोर्ट में चल रही है। जांच पूरी होने के बाद हाईकोर्ट ने दोनों जजों को नौकरी से हटा दिया। —— ये खबर भी पढ़ें… फर्जी आदेश पारित करने के आरोप में अपर सत्र जज और सीजेएम निलंबित जिला एवं सत्र न्यायालय में रहे दो न्यायाधीशों को निलंबित कर दिया है। छह साल पहले एक प्रशासनिक अफसर के मामले में फर्जी फैसला जारी किए जाने के आरोप में यह कार्रवाई की गई है। जिस जज की साइन से फर्जी आदेश पारित किया था, उसी जज ने खुद पुलिस थाने जाकर एफआईआर दर्ज कराई थी। पूरी खबर पढें
मुंबई के मझगांव सिविल सेशंस कोर्ट से जुड़ा एक रिश्वतकांड का मामला सामने आया है। ये पूरा वाकया मंगलवार का है, जब कोर्ट के क्लर्क और टाइपिस्ट चंद्रकांत वासुदेव (40) को ₹15 लाख रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा गया। एंंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) के अनुसार शिकायतकर्ता ने 10 नवंबर को फैसला पक्ष में सुनाने के लिए ₹25 लाख की रिश्वत मांगने की शिकायत की थी। PTI न्यूज एजेंसी ने बताया कि ACB ने सिविल सेशंस कोर्ट के जज को भी आरोपी बनाया है। 10 साल पुराने मामले को समझें शिकायतकर्ता की पत्नी ने 2015 में कंपनी की जमीन पर कब्जे को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। अप्रैल 2016 में हाईकोर्ट ने विवादित जमीन पर किसी तीसरे पक्ष को अधिकार देने पर रोक लगा दी थी। क्योंकि जमीन की कीमत 10 करोड़ रुपये से कम थी, इसलिए 2024 में मामला माजगांव सिविल सेशंस कोर्ट में भेज दिया गया। इस साल 9 सितंबर को सुनवाई के बाद वासुदेव ने शिकायतकर्ता को फोन कर रिश्वत की बात बताई। उसने 12 सितंबर को चेंबूर में मुलाकात तय की, जहां फिर से ₹25 लाख की रिश्वत मांगकर उसके पक्ष में फैसला दिलाने का भरोसा दिया। उसने बताया कि जज की तरफ से वह बात कर रहा है। ₹25 लाख में से ₹10 लाख खुद के लिए और ₹15 लाख जज के लिए मांगे। शिकायतकर्ता ने रिश्वत देने से इनकार कर दिया, लेकिन क्लर्क बार-बार कॉल कर दबाव डालता रहा। कॉफी शॉप में ₹15 लाख लेते पकड़ा गया क्लर्क 10 नवंबर को शिकायतकर्ता ने ACB के वर्ली कार्यालय में क्लर्क की रिश्वत मांगने की शिकायत की। उसी दिन, ACB के निर्देशानुसार, शिकायतकर्ता ने बातचीत करके रकम ₹15 लाख पर लाकर जल्द ही मिलने का फैसला किया। जांच में यह साबित हो गया कि वासुदेव ₹15 लाख लेने को तैयार था। इसके बाद 12 नवंबर को ACB ने चेंबूर के उसी स्टारबक्स कैफे में जाल बिछाया और क्लर्क को रिश्वत लेते हुए पकड़ लिया। गिरफ्तारी के बाद वासुदेव ने जज को फोन कर बताया कि रकम मिल गई है। ACB ने इस बातचीत को रिकॉर्ड किया और उसके आधार पर जज को भी आरोपी बनाया। दोनों पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7, 7(ए) और 12 के तहत केस दर्ज किया गया है। ACB अधिकारियों ने बताया कि जज की गिरफ्तारी के लिए प्रधान जिला न्यायाधीश से अनुमति मांगी गई है और फिलहाल मंजूरी का इंतजार है। वहीं, गिरफ्तार क्लर्क को बुधवार को ACB अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे 16 नवंबर तक ACB की हिरासत में भेज दिया गया। रिश्वत और गड़बड़ी के आरोप में बॉम्बे हाईकोर्ट ने दो जजों को नौकरी से हटाया इससे पहले अक्टूबर में बॉम्बे हाईकोर्ट ने भ्रष्टाचार और गलत काम करने के आरोप में दो निचली अदालतों के जजों को नौकरी से निकाल दिया था। इनमें अतिरिक्त सत्र जज धनंजय निकम और सिविल जज इरफान शेख शामिल थे। ACB ने सातारा के जज धनंजय निकम के खिलाफ केस दर्ज किया था। उन पर आरोप था कि उन्होंने एक धोखाधड़ी के केस में आरोपी को जमानत देने के लिए ₹5 लाख रिश्वत मांगी थी। शिकायत में कहा गया कि एक महिला के पिता पर सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी का आरोप था और वे जेल में थे। जब निचली अदालत ने जमानत नहीं दी, तो महिला ने सातारा कोर्ट में नई अर्जी लगाई, जिसे निकम सुन रहे थे। ACB का कहना है कि मुंबई के किशोर सांभाजी खरात और सातारा के आनंद मोहन खरात ने महिला से जज के कहने पर ₹5 लाख मांगे थे। दिसंबर 2024 में जांच के दौरान रिश्वत मांगने की बात सच साबित हुई। इसके बाद ACB ने निकम और दोनों बिचौलियों पर रिश्वत विरोधी कानून के तहत केस दर्ज किया। दूसरे जज इरफान शेख पर आरोप था कि वे नशे से जुड़े मामलों (NDPS एक्ट) की सुनवाई करते समय भ्रष्टाचार में शामिल थे और जब्त किए गए नशे के सामान में हेराफेरी करते थे। उनके खिलाफ एक याचिका अब भी हाईकोर्ट में चल रही है। जांच पूरी होने के बाद हाईकोर्ट ने दोनों जजों को नौकरी से हटा दिया। —— ये खबर भी पढ़ें… फर्जी आदेश पारित करने के आरोप में अपर सत्र जज और सीजेएम निलंबित जिला एवं सत्र न्यायालय में रहे दो न्यायाधीशों को निलंबित कर दिया है। छह साल पहले एक प्रशासनिक अफसर के मामले में फर्जी फैसला जारी किए जाने के आरोप में यह कार्रवाई की गई है। जिस जज की साइन से फर्जी आदेश पारित किया था, उसी जज ने खुद पुलिस थाने जाकर एफआईआर दर्ज कराई थी। पूरी खबर पढें