पाकिस्तान के लिए जासूसी के आरोप में गिरफ्तार हिसार की यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा ने जमानत के लिए पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका लगाई है। ज्योति के एडवोकेट कुमार मुकेश का कहना है कि जल्द इस मामले में सुनवाई हो सकती है। इससे पहले, 23 अक्टूबर को हिसार सेशन कोर्ट ने ज्योति की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। साथ ही टिप्पणी की थी कि आरोपी की जमानत के बाद जांच में बाधा आ सकती है। हिसार पुलिस ने यूट्यूब चैनल ‘ट्रैवल विद जो’ चलाने वाली 34 वर्षीय ज्योति को 16 मई को आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (BNS) के कानून के तहत गिरफ्तार किया था। ज्योति फिलहाल हिसार की सेंट्रल जेल में बंद है। ज्योति की जमानत खारिज करते हुए सेशन कोर्ट ने क्या कहा… वकील ने ज्योति की जमानत के 3 आधार बताए… ज्योति ने कोई गोपनीय दस्तावेज नहीं भेजे
कुमार मुकेश ने बताया कि सीक्रेट एक्ट की धारा 3 यह कहती है कि अगर किसी ने डिफेंस से जुड़ी चीजों का प्लान, मैप या मॉडल बनाया है तो उसके लिए यह धारा यूज होती है। इस मामले में 14 साल तक की सजा का प्रावधान है। वहीं सरकार को प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित करने पड़ते हैं, ताकि लोग पहले से ही उस बारे में सजग रहे। पुलिस की फाइंडिंग में ऐसा कुछ नहीं है। चार्जशीट में यह नहीं बताया कि उसने ऐसा कौन सा प्रतिबंध तोड़ा है। सीक्रेट एक्ट से जुड़ा कुछ रिकवर नहीं
मुकेश ने आगे बताया कि पुलिस ने सीक्रेट एक्ट से जुड़ी एक चीज भी रिकवर नहीं की। आर्मी से जुड़ा कोई दस्तावेज पेश नहीं कर पाई है जिससे यह साबित हो सके ज्योति ने कोई गोपनीय जानकारी साझा की हो। अगर गवर्नमेंट के किसी सीक्रेट एक्ट का उल्लंघन होता भी है तो उसमें अधिकतम 3 साल की सजा का ही प्रावधान है। पाक एजेंट का सिर्फ नंबर, बातचीत नहीं
कुमार मुकेश ने बताया कि ज्योति के मोबाइल से पाक एजेंट शाकिर से संपर्क की बात पुलिस कह रही है। पूरी चार्जशीट में शाकिर से चेटिंग व कॉल रिकॉर्डिंग की एक बात सामने नहीं आई है। ना ये बताया गया है कि उसने कोई कॉल डिलीट की है। दानिश से भी ज्योति सिर्फ वीजा पर्पज से ही मिलती थी। वकील को अधूरी चार्जशीट मिली थी
ज्योति के वकील कुमार मुकेश ने बताया था कि पुलिस ने कोर्ट में अधूरी चार्जशीट सौंपी थी। पुलिस ने एक आवेदन दायर कर चार्जशीट को पूरी तरह से जमा न करने का कारण बताया, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया। पुलिस का तर्क था कि चार्जशीट में संवेदनशील जानकारी है जिसे सार्वजनिक नहीं किया जा सकता। इसके बाद, वकील को चार्जशीट की एक कॉपी सीडी में सौंपी गई। कोर्ट ने चार्जशीट के कुछ हिस्सों को प्रकाशित न करने का भी निर्देश दिया था।
पाकिस्तान के लिए जासूसी के आरोप में गिरफ्तार हिसार की यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा ने जमानत के लिए पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका लगाई है। ज्योति के एडवोकेट कुमार मुकेश का कहना है कि जल्द इस मामले में सुनवाई हो सकती है। इससे पहले, 23 अक्टूबर को हिसार सेशन कोर्ट ने ज्योति की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। साथ ही टिप्पणी की थी कि आरोपी की जमानत के बाद जांच में बाधा आ सकती है। हिसार पुलिस ने यूट्यूब चैनल ‘ट्रैवल विद जो’ चलाने वाली 34 वर्षीय ज्योति को 16 मई को आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (BNS) के कानून के तहत गिरफ्तार किया था। ज्योति फिलहाल हिसार की सेंट्रल जेल में बंद है। ज्योति की जमानत खारिज करते हुए सेशन कोर्ट ने क्या कहा… वकील ने ज्योति की जमानत के 3 आधार बताए… ज्योति ने कोई गोपनीय दस्तावेज नहीं भेजे
कुमार मुकेश ने बताया कि सीक्रेट एक्ट की धारा 3 यह कहती है कि अगर किसी ने डिफेंस से जुड़ी चीजों का प्लान, मैप या मॉडल बनाया है तो उसके लिए यह धारा यूज होती है। इस मामले में 14 साल तक की सजा का प्रावधान है। वहीं सरकार को प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित करने पड़ते हैं, ताकि लोग पहले से ही उस बारे में सजग रहे। पुलिस की फाइंडिंग में ऐसा कुछ नहीं है। चार्जशीट में यह नहीं बताया कि उसने ऐसा कौन सा प्रतिबंध तोड़ा है। सीक्रेट एक्ट से जुड़ा कुछ रिकवर नहीं
मुकेश ने आगे बताया कि पुलिस ने सीक्रेट एक्ट से जुड़ी एक चीज भी रिकवर नहीं की। आर्मी से जुड़ा कोई दस्तावेज पेश नहीं कर पाई है जिससे यह साबित हो सके ज्योति ने कोई गोपनीय जानकारी साझा की हो। अगर गवर्नमेंट के किसी सीक्रेट एक्ट का उल्लंघन होता भी है तो उसमें अधिकतम 3 साल की सजा का ही प्रावधान है। पाक एजेंट का सिर्फ नंबर, बातचीत नहीं
कुमार मुकेश ने बताया कि ज्योति के मोबाइल से पाक एजेंट शाकिर से संपर्क की बात पुलिस कह रही है। पूरी चार्जशीट में शाकिर से चेटिंग व कॉल रिकॉर्डिंग की एक बात सामने नहीं आई है। ना ये बताया गया है कि उसने कोई कॉल डिलीट की है। दानिश से भी ज्योति सिर्फ वीजा पर्पज से ही मिलती थी। वकील को अधूरी चार्जशीट मिली थी
ज्योति के वकील कुमार मुकेश ने बताया था कि पुलिस ने कोर्ट में अधूरी चार्जशीट सौंपी थी। पुलिस ने एक आवेदन दायर कर चार्जशीट को पूरी तरह से जमा न करने का कारण बताया, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया। पुलिस का तर्क था कि चार्जशीट में संवेदनशील जानकारी है जिसे सार्वजनिक नहीं किया जा सकता। इसके बाद, वकील को चार्जशीट की एक कॉपी सीडी में सौंपी गई। कोर्ट ने चार्जशीट के कुछ हिस्सों को प्रकाशित न करने का भी निर्देश दिया था।