मोहाली के कुराली में पंजाब रोडवेज के ड्राइवर की हत्या के बाद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। पंजाब की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार ने कच्चे ड्राइवर-कंडक्टर की इंश्योरेंस ही बंद कर दी। यही नहीं, जालंधर रोडवेज डिपो की रोडवेज यूनियन के सीनियर उपाध्यक्ष चानण सिंह बताते हैं कि नवंबर 2024 में सरकार ने सैलरी में 6 फीसदी इंक्रीमेंट दिया था। यह इंक्रीमेंट 35 रुपए के करीब मिला। इसके बदले सरकार ने हमारी ESIC बंद कर दी। इसके बाद से हमारे 27 डिपो के कच्चे ड्राइवर-कंडक्टर बिना इंश्योरेंस क्लेम सिक्योरिटी के काम कर रहे हैं। एक साल से करीब 7 हजार ड्राइवर-कंडक्टरों की ESIC स्कीम बंद है। यही वजह है कि जब मंगलवार को जालंधर डिपो के ड्राइवर जसमीत का कुराली में रॉड मारकर मर्डर किया गया, तो उसके परिवार को किसी तरह का क्लेम नहीं नहीं पाया, न ही सरकार और विभाग ने भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि अब एक साल से किसी कच्चे मुलाजिम का विभाग की तरफ से कोई इंश्योरेंस ही नहीं है। चानण सिंह ने उठाए कर्मचारियों के 3 अहम मुद्दे ESIC बंद होने से न बिल पास हो रहे न सहूलियत मिल रही
रोडवेज यूनियन के सीनियर मीत प्रधान (वाइस प्रेसिडेंट) चानण सिंह ने कहा कि 1 साल से उनको ESIC से बाहर कर दिया गया है। इस एक साल के अंदर उनके 10 के लगभग ड्राइवर-कंडक्टर साथियों की हादसों में जान जा चुकी है। जालंधर डिपो में ही 150 ड्राइवर हैं। किसी को भी ESIC का फायदा नहीं मिल रहा। न तो हमारे बिल पास हो रहे हैं और न ही कोई सहूलियत मिल रही है। सैलरी में 35 रुपए बढ़ाकर इंश्योरेंस बंद कर दिया
सरकार ने कहा था कि आपको सालाना 5 से 6 परसेंट सालाना इंक्रीमेंट देंगे। हमें लास्ट ईयर इंक्रीमेंट मिला भी था, इससे उनकी सैलरी 30 से 35 रुपए ही बढ़ी, लेकिन ढाई से 3 लाख रुपए की ESIC स्कीम बंद कर दी गई। जब इसका कारण पूछा गया तो डिपार्टमेंट का कहना था कि आपको इंक्रीमेंट दिया गया है, इसलिए स्कीम बंद की गई है। ड्राइवरों-कंडक्टरों की कोई फाइनेंशियल सिक्योरिटी नहीं
रोडवेज यूनियन के सीनियर मीत प्रधान (वाइस प्रेसिडेंट) चानण सिंह ने कहा कि सरकार ने इंक्रीमेंट देने के बाद ये नहीं सोचा कि ESIC स्कीम बंद करने का ड्राइवरों-कंडक्टरों के परिवारों पर कैसा असर पड़ेगा। हमारी जान चली जाए तो परिवार को कोई फाइनेंशियल सिक्योरिटी नहीं है। जालंधर, पठानकोट, बटाला, अमृतसर में ड्राइवरों की डेथ पर नहीं मिला पैसा
चानण सिंह ने बताया कि 1 साल से इंश्योरेंस बंद है। इस दौरान 10 के लगभग ड्राइवर-कंडक्टरों की डेथ हो चुकी है या वो एक्सीडेंट में घायल हो चुके हैं। अगर ये ESIC स्कीम में होते तो खर्च का क्लेम कर सकते थे। बीते 6 महीने में ही पठानकोट, फिर बटाला, अमृतसर और अब जालंधर के ड्राइवर साथी की मौत हो गई। किसी को भी सरकार और ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट की तरफ से कोई पैसा नहीं दिया गया। ये सभी लोग 6 हजार से लेकर 12 हजार के बीच नौकरी कर रहे हैं। इनके परिवार कैसे गुजारा करेंगे, सरकार को ये सोचना चाहिए। ESIC स्कीम में डेथ पर 3 लाख की सहायता और पेंशन मिलती
चानण सिंह ने बताया कि हर साल सड़क हादसों में पक्के ड्राइवरों के साथ कच्चे मुलाजिमों की भी डेथ होती है। अभी 4 अक्तूबर की शाम को ही जालंधर रोडवेज के ड्राइवर जगजीत का कुराली में कत्ल हो गया। अगर उसके पास ESIC स्कीम होती तो परिवार को डेथ पर 3 लाख रुपए और जितनी सैलरी थी, उसके बराबर पेंशन मिलती। आज हमें जगजीत के लिए धरना देना पड़ रहा है। परिवार के लिए मुआवजे की मांग करनी पड़ रही है। बसें रोकनी पड़ रही हैं। अगर ESIC स्कीम होती तो इस सबकी नौबत ही न आती। सरकार ने हल न निकाला तो कल शव रख प्रदर्शन करेंगे
पंजाब रोडवेज यूनियन के मुलाजिमों ने कहा कि कुराली में कत्ल किए गए जगजीत का मोहाली के सरकारी अस्पताल से पोस्टमॉर्टम हो गया है। अगर सरकार ने परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने और 1 करोड़ रुपए देने का ऐलान न किया तो सभी 27 डिपुओं के कच्चे कर्मचारी रोडवेज की सेवाएं रोक देंगे। बसें नहीं चलाएंगे और शव को जालंधर लाकर यहां प्रदर्शन करेंगे। जगजीत का संस्कार तभी होगा जब सरकार उनकी मांगों को मानेगी और ESIC स्कीम को बहाल करने का भरोसा देगी। कुराली में हॉर्न विवाद में दो दिन पहले रोडवेज ड्राइवर की हत्या
पंजाब के मोहाली में मंगलवार शाम को रोडवेज के ड्राइवर की हत्या कर दी गई थी। बस चंडीगढ़ से जालंधर आ रही थी। मोहाली के कुराली में रेड लाइट पर पहुंचने पर ड्राइवर ने साइड लेने के लिए हॉर्न बजाया तो आगे खड़ी बोलेरो के ड्राइवर ने छाती में रॉड मार दी थी। रॉड लगते ही ड्राइवर मौके पर ही गिर गया। लोगों ने उसे उठाकर कुराली के सिविल अस्पताल पहुंचाया। यहां से डॉक्टरों ने फर्स्ट एड देने के बाद मोहाली रेफर कर दिया। वहां पहुंचते ही उसे डेड डिक्लेयर कर दिया गया। मृतक ड्राइवर की पहचान जगजीत सिंह (36) के रूप में हुई है। वह जालंधर रोडवेज डिपो में तैनात था।
मोहाली के कुराली में पंजाब रोडवेज के ड्राइवर की हत्या के बाद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। पंजाब की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार ने कच्चे ड्राइवर-कंडक्टर की इंश्योरेंस ही बंद कर दी। यही नहीं, जालंधर रोडवेज डिपो की रोडवेज यूनियन के सीनियर उपाध्यक्ष चानण सिंह बताते हैं कि नवंबर 2024 में सरकार ने सैलरी में 6 फीसदी इंक्रीमेंट दिया था। यह इंक्रीमेंट 35 रुपए के करीब मिला। इसके बदले सरकार ने हमारी ESIC बंद कर दी। इसके बाद से हमारे 27 डिपो के कच्चे ड्राइवर-कंडक्टर बिना इंश्योरेंस क्लेम सिक्योरिटी के काम कर रहे हैं। एक साल से करीब 7 हजार ड्राइवर-कंडक्टरों की ESIC स्कीम बंद है। यही वजह है कि जब मंगलवार को जालंधर डिपो के ड्राइवर जसमीत का कुराली में रॉड मारकर मर्डर किया गया, तो उसके परिवार को किसी तरह का क्लेम नहीं नहीं पाया, न ही सरकार और विभाग ने भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि अब एक साल से किसी कच्चे मुलाजिम का विभाग की तरफ से कोई इंश्योरेंस ही नहीं है। चानण सिंह ने उठाए कर्मचारियों के 3 अहम मुद्दे ESIC बंद होने से न बिल पास हो रहे न सहूलियत मिल रही
रोडवेज यूनियन के सीनियर मीत प्रधान (वाइस प्रेसिडेंट) चानण सिंह ने कहा कि 1 साल से उनको ESIC से बाहर कर दिया गया है। इस एक साल के अंदर उनके 10 के लगभग ड्राइवर-कंडक्टर साथियों की हादसों में जान जा चुकी है। जालंधर डिपो में ही 150 ड्राइवर हैं। किसी को भी ESIC का फायदा नहीं मिल रहा। न तो हमारे बिल पास हो रहे हैं और न ही कोई सहूलियत मिल रही है। सैलरी में 35 रुपए बढ़ाकर इंश्योरेंस बंद कर दिया
सरकार ने कहा था कि आपको सालाना 5 से 6 परसेंट सालाना इंक्रीमेंट देंगे। हमें लास्ट ईयर इंक्रीमेंट मिला भी था, इससे उनकी सैलरी 30 से 35 रुपए ही बढ़ी, लेकिन ढाई से 3 लाख रुपए की ESIC स्कीम बंद कर दी गई। जब इसका कारण पूछा गया तो डिपार्टमेंट का कहना था कि आपको इंक्रीमेंट दिया गया है, इसलिए स्कीम बंद की गई है। ड्राइवरों-कंडक्टरों की कोई फाइनेंशियल सिक्योरिटी नहीं
रोडवेज यूनियन के सीनियर मीत प्रधान (वाइस प्रेसिडेंट) चानण सिंह ने कहा कि सरकार ने इंक्रीमेंट देने के बाद ये नहीं सोचा कि ESIC स्कीम बंद करने का ड्राइवरों-कंडक्टरों के परिवारों पर कैसा असर पड़ेगा। हमारी जान चली जाए तो परिवार को कोई फाइनेंशियल सिक्योरिटी नहीं है। जालंधर, पठानकोट, बटाला, अमृतसर में ड्राइवरों की डेथ पर नहीं मिला पैसा
चानण सिंह ने बताया कि 1 साल से इंश्योरेंस बंद है। इस दौरान 10 के लगभग ड्राइवर-कंडक्टरों की डेथ हो चुकी है या वो एक्सीडेंट में घायल हो चुके हैं। अगर ये ESIC स्कीम में होते तो खर्च का क्लेम कर सकते थे। बीते 6 महीने में ही पठानकोट, फिर बटाला, अमृतसर और अब जालंधर के ड्राइवर साथी की मौत हो गई। किसी को भी सरकार और ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट की तरफ से कोई पैसा नहीं दिया गया। ये सभी लोग 6 हजार से लेकर 12 हजार के बीच नौकरी कर रहे हैं। इनके परिवार कैसे गुजारा करेंगे, सरकार को ये सोचना चाहिए। ESIC स्कीम में डेथ पर 3 लाख की सहायता और पेंशन मिलती
चानण सिंह ने बताया कि हर साल सड़क हादसों में पक्के ड्राइवरों के साथ कच्चे मुलाजिमों की भी डेथ होती है। अभी 4 अक्तूबर की शाम को ही जालंधर रोडवेज के ड्राइवर जगजीत का कुराली में कत्ल हो गया। अगर उसके पास ESIC स्कीम होती तो परिवार को डेथ पर 3 लाख रुपए और जितनी सैलरी थी, उसके बराबर पेंशन मिलती। आज हमें जगजीत के लिए धरना देना पड़ रहा है। परिवार के लिए मुआवजे की मांग करनी पड़ रही है। बसें रोकनी पड़ रही हैं। अगर ESIC स्कीम होती तो इस सबकी नौबत ही न आती। सरकार ने हल न निकाला तो कल शव रख प्रदर्शन करेंगे
पंजाब रोडवेज यूनियन के मुलाजिमों ने कहा कि कुराली में कत्ल किए गए जगजीत का मोहाली के सरकारी अस्पताल से पोस्टमॉर्टम हो गया है। अगर सरकार ने परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने और 1 करोड़ रुपए देने का ऐलान न किया तो सभी 27 डिपुओं के कच्चे कर्मचारी रोडवेज की सेवाएं रोक देंगे। बसें नहीं चलाएंगे और शव को जालंधर लाकर यहां प्रदर्शन करेंगे। जगजीत का संस्कार तभी होगा जब सरकार उनकी मांगों को मानेगी और ESIC स्कीम को बहाल करने का भरोसा देगी। कुराली में हॉर्न विवाद में दो दिन पहले रोडवेज ड्राइवर की हत्या
पंजाब के मोहाली में मंगलवार शाम को रोडवेज के ड्राइवर की हत्या कर दी गई थी। बस चंडीगढ़ से जालंधर आ रही थी। मोहाली के कुराली में रेड लाइट पर पहुंचने पर ड्राइवर ने साइड लेने के लिए हॉर्न बजाया तो आगे खड़ी बोलेरो के ड्राइवर ने छाती में रॉड मार दी थी। रॉड लगते ही ड्राइवर मौके पर ही गिर गया। लोगों ने उसे उठाकर कुराली के सिविल अस्पताल पहुंचाया। यहां से डॉक्टरों ने फर्स्ट एड देने के बाद मोहाली रेफर कर दिया। वहां पहुंचते ही उसे डेड डिक्लेयर कर दिया गया। मृतक ड्राइवर की पहचान जगजीत सिंह (36) के रूप में हुई है। वह जालंधर रोडवेज डिपो में तैनात था।