यूपी के कुशीनगर में देश की पहली रॉकेट्री और कैनसेट प्रतियोगिता का गुरुवार को आखिरी दिन था। इस इन-स्पेस कंपटीशन 2024-25 देशभर की 70 टीमों ने हिस्सा लिया। 40 टीमों को रॉकेट-कैनसेट प्रक्षेपण का मौका मिला, जिनमें 37 ने सफल प्रक्षेपण किया। आखिरी दिन इन स्पेस के चेयरमैन डॉ. पवन गोयनका और अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला भी बच्चों के बीच पहुंचे। पहली बार हो रही इस प्रतियोगिता में कई दिक्कतें भी आईं। इसकी वजह से पहले दिन 10 की जगह सिर्फ 4 रॉकेट ही लॉन्च हो सके। दूसरे दिन भी 20 की जगह 10 लॉन्च हुए। तीसरे दिन 30 का टारगेट था, लेकिन 13 ही रॉकेट लॉन्च किए जा सके। आखिरी दिन 10 राकेट लॉन्च हो सके, जबकि 40 टीमों को मौका मिलना था। लेकिन, खराब मौसम के चलते 10 टीमें ही पार्टिसिपेट कर सकीं। प्रतियोगिता में देश के 47 कॉलेजों से आए 70 टीमों के 600 प्रतिभागी शामिल हुए। इनमें 133 छात्राएं शामिल रहीं। कंपटीशन में मुंबई टीम विजेता रही। गुजरात की द्वारिका टीम रनरअप रही। जैसे ही प्राइज अनाउंस हुआ, मुंबई की छात्रा फफक पड़ी। साथी छात्राओं ने उसे संभाला और गले से लगा लिया। 4 तस्वीरें देखिए- शुभांशु ने छात्रा से बात की, कहा- गगनयान तेजी से काम चल रहा
गुरुवार दोपहर 12 बजे एस्ट्रोनॉट शुभांशु के साथ इन-स्पेस के चेयरमैन डॉ. पवन गोयनका भी पहुंचे। शुभांशु ने प्रतियोगिता में भाग ले रहे छात्रों से बातचीत की। इसके बाद उन्होंने कहा- हमें मिशन गगनयान के लिए अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन बनाना है। चांद पर जाना है, जिसका लक्ष्य 2035 तक का है। इस पर काम तेजी से चल रहा है। इसरो पूरी मजबूती से इस दिशा में कार्य कर रहा है। शुभांशु ने कहा- यह जो प्रतियोगिता हो रही है, यही देश का भविष्य है। पूरे देशभर के बच्चे यहां आए हैं। यह लॉन्चिंग हमारे देश के भविष्य की झलक दिखा रही है। इन बच्चों की क्षमता पर मुझे कोई शक नहीं है। ये बच्चे अपने आप रास्ता ढूंढ़कर वहां पहुंच जाएंगे, जहां जाना चाहते हैं। इन-स्पेस के चेयरमैन बोले- हर असफल लॉन्च भी नई सीख देता है
इन-स्पेस के चेयरमैन डॉ. पवन गोयनका ने कहा- ऐसे युवा ही भारत को अगली स्पेस टेक्नोलॉजी क्रांति की दिशा में ले जाएंगे। हर असफल लॉन्च भी एक नई सीख देता है। भारत में पहली बार हमने इस तरह का प्रयोग किया, जो पूरी तरह सफल रहा। यहां नए बच्चों ने खुद रॉकेट और कैनसेट बनाए और सफलतापूर्वक लॉन्च भी किए। हो सकता है, हम छोटे रॉकेट के लॉन्चिंग के लिए यहां पर परमानेंट लॉन्चिंग पैड बनाएंगे। जहां स्टूडेंट कभी भी आकर लॉन्चिंग सीख सकते हैं। प्रतियोगी छात्रों ने क्या कहा…
देवरिया सांसद की बड़ी भूमिका रही
इस पूरे कार्यक्रम में लोकसभा देवरिया सांसद शशांक मणि त्रिपाठी की अहम भूमिका रही। वह खुद भी आईआईटियन रहे हैं। इसकी वजह से उन्होंने अपने लोकसभा क्षेत्र में युवाओं को स्पेस साइंस से जोड़ने के लिए यह प्रोग्राम करने की पहल की। इसके लिए कुशीनगर के तमकुही राज तहसील में नारायणी नदी क्षेत्र को चुना गया। क्योंकि, यहां के आसपास का इलाका प्रक्षेपण और रिकवरी के लिए सही है। इसकी तैयारी से पहले इसरो और इन-स्पेस से जुड़े वैज्ञानिकों ने 6 महीने पहले एक प्रयोग भी किया था। वहीं, कुशीनगर के जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर ने कहा- इस कार्यक्रम के आयोजन से पूरे कुशीनगर में स्पेस और अन्य उपलब्धियों के रास्ते साफ हो गए हैं। जिला प्रशासन आसपास के इलाके में पहल करके काफी बड़ा प्रोजेक्ट लाएगा। इस बार अस्थाई लॉन्चिंग पैड और व्यवस्थाओं की वजह से कुछ दिक्कतें आईं, जिनको दूर करने के लिए एक अस्थाई लॉन्चिंग पैड और अन्य व्यवस्थाएं की जाएंगी। जिन किसानों की जमीन इस इलाके में है, उनको किसी और इलाके में बदले में जमीन दी जाएगी। आसपास के स्कूलों से छात्रों और अन्य ग्रामीणों को कैसे जोड़ा जाए, इस पर भी काम किया जाएगा। क्या होता है कैनसेट कैनसेट एक छोटा शैक्षिक उपग्रह मॉडल है, जिसका आकार लगभग एक सोडा कैन जितना होता है। इसे छात्रों को उपग्रह डिजाइन और अंतरिक्ष मिशन का अनुभव देने के लिए विकसित किया गया है। छोटे मॉडल रॉकेट से इसे लगभग एक किलोमीटर की ऊंचाई तक भेजा जाता है। इसकी मदद से तापमान, दबाव, ऊंचाई और जीपीएस डेटा जैसी जानकारियां एकत्र की जाती हैं। ————————- ये खबर भी पढ़िए… छात्रा बोली- प्रोफेसर कहते Phd कर लो, फिर शादी करूंगा, आगरा में VC बनकर तुम्हें जॉब दूंगा 2 साल मेरा ब्रेनवॉश किया गया। खुद को दुखियारा दिखाते रहे। कहते कि एक दिन में वाइस चांसलर बन जाऊंगा, तुम्हें जॉब पर रख लूंगा। हम साथ रहेंगे। मेरी तो जबरदस्ती शादी कर दी गई। मेरी बीवी मुझे समझती नहीं। आगरा के डॉ. भीमराव अंबेडकर यूनिवर्सिटी की PHD रिसर्च स्कॉलर ने दैनिक भास्कर ऑफिस पहुंचकर ये बातें कही। । पूरी खबर पढ़िए…
यूपी के कुशीनगर में देश की पहली रॉकेट्री और कैनसेट प्रतियोगिता का गुरुवार को आखिरी दिन था। इस इन-स्पेस कंपटीशन 2024-25 देशभर की 70 टीमों ने हिस्सा लिया। 40 टीमों को रॉकेट-कैनसेट प्रक्षेपण का मौका मिला, जिनमें 37 ने सफल प्रक्षेपण किया। आखिरी दिन इन स्पेस के चेयरमैन डॉ. पवन गोयनका और अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला भी बच्चों के बीच पहुंचे। पहली बार हो रही इस प्रतियोगिता में कई दिक्कतें भी आईं। इसकी वजह से पहले दिन 10 की जगह सिर्फ 4 रॉकेट ही लॉन्च हो सके। दूसरे दिन भी 20 की जगह 10 लॉन्च हुए। तीसरे दिन 30 का टारगेट था, लेकिन 13 ही रॉकेट लॉन्च किए जा सके। आखिरी दिन 10 राकेट लॉन्च हो सके, जबकि 40 टीमों को मौका मिलना था। लेकिन, खराब मौसम के चलते 10 टीमें ही पार्टिसिपेट कर सकीं। प्रतियोगिता में देश के 47 कॉलेजों से आए 70 टीमों के 600 प्रतिभागी शामिल हुए। इनमें 133 छात्राएं शामिल रहीं। कंपटीशन में मुंबई टीम विजेता रही। गुजरात की द्वारिका टीम रनरअप रही। जैसे ही प्राइज अनाउंस हुआ, मुंबई की छात्रा फफक पड़ी। साथी छात्राओं ने उसे संभाला और गले से लगा लिया। 4 तस्वीरें देखिए- शुभांशु ने छात्रा से बात की, कहा- गगनयान तेजी से काम चल रहा
गुरुवार दोपहर 12 बजे एस्ट्रोनॉट शुभांशु के साथ इन-स्पेस के चेयरमैन डॉ. पवन गोयनका भी पहुंचे। शुभांशु ने प्रतियोगिता में भाग ले रहे छात्रों से बातचीत की। इसके बाद उन्होंने कहा- हमें मिशन गगनयान के लिए अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन बनाना है। चांद पर जाना है, जिसका लक्ष्य 2035 तक का है। इस पर काम तेजी से चल रहा है। इसरो पूरी मजबूती से इस दिशा में कार्य कर रहा है। शुभांशु ने कहा- यह जो प्रतियोगिता हो रही है, यही देश का भविष्य है। पूरे देशभर के बच्चे यहां आए हैं। यह लॉन्चिंग हमारे देश के भविष्य की झलक दिखा रही है। इन बच्चों की क्षमता पर मुझे कोई शक नहीं है। ये बच्चे अपने आप रास्ता ढूंढ़कर वहां पहुंच जाएंगे, जहां जाना चाहते हैं। इन-स्पेस के चेयरमैन बोले- हर असफल लॉन्च भी नई सीख देता है
इन-स्पेस के चेयरमैन डॉ. पवन गोयनका ने कहा- ऐसे युवा ही भारत को अगली स्पेस टेक्नोलॉजी क्रांति की दिशा में ले जाएंगे। हर असफल लॉन्च भी एक नई सीख देता है। भारत में पहली बार हमने इस तरह का प्रयोग किया, जो पूरी तरह सफल रहा। यहां नए बच्चों ने खुद रॉकेट और कैनसेट बनाए और सफलतापूर्वक लॉन्च भी किए। हो सकता है, हम छोटे रॉकेट के लॉन्चिंग के लिए यहां पर परमानेंट लॉन्चिंग पैड बनाएंगे। जहां स्टूडेंट कभी भी आकर लॉन्चिंग सीख सकते हैं। प्रतियोगी छात्रों ने क्या कहा…
देवरिया सांसद की बड़ी भूमिका रही
इस पूरे कार्यक्रम में लोकसभा देवरिया सांसद शशांक मणि त्रिपाठी की अहम भूमिका रही। वह खुद भी आईआईटियन रहे हैं। इसकी वजह से उन्होंने अपने लोकसभा क्षेत्र में युवाओं को स्पेस साइंस से जोड़ने के लिए यह प्रोग्राम करने की पहल की। इसके लिए कुशीनगर के तमकुही राज तहसील में नारायणी नदी क्षेत्र को चुना गया। क्योंकि, यहां के आसपास का इलाका प्रक्षेपण और रिकवरी के लिए सही है। इसकी तैयारी से पहले इसरो और इन-स्पेस से जुड़े वैज्ञानिकों ने 6 महीने पहले एक प्रयोग भी किया था। वहीं, कुशीनगर के जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर ने कहा- इस कार्यक्रम के आयोजन से पूरे कुशीनगर में स्पेस और अन्य उपलब्धियों के रास्ते साफ हो गए हैं। जिला प्रशासन आसपास के इलाके में पहल करके काफी बड़ा प्रोजेक्ट लाएगा। इस बार अस्थाई लॉन्चिंग पैड और व्यवस्थाओं की वजह से कुछ दिक्कतें आईं, जिनको दूर करने के लिए एक अस्थाई लॉन्चिंग पैड और अन्य व्यवस्थाएं की जाएंगी। जिन किसानों की जमीन इस इलाके में है, उनको किसी और इलाके में बदले में जमीन दी जाएगी। आसपास के स्कूलों से छात्रों और अन्य ग्रामीणों को कैसे जोड़ा जाए, इस पर भी काम किया जाएगा। क्या होता है कैनसेट कैनसेट एक छोटा शैक्षिक उपग्रह मॉडल है, जिसका आकार लगभग एक सोडा कैन जितना होता है। इसे छात्रों को उपग्रह डिजाइन और अंतरिक्ष मिशन का अनुभव देने के लिए विकसित किया गया है। छोटे मॉडल रॉकेट से इसे लगभग एक किलोमीटर की ऊंचाई तक भेजा जाता है। इसकी मदद से तापमान, दबाव, ऊंचाई और जीपीएस डेटा जैसी जानकारियां एकत्र की जाती हैं। ————————- ये खबर भी पढ़िए… छात्रा बोली- प्रोफेसर कहते Phd कर लो, फिर शादी करूंगा, आगरा में VC बनकर तुम्हें जॉब दूंगा 2 साल मेरा ब्रेनवॉश किया गया। खुद को दुखियारा दिखाते रहे। कहते कि एक दिन में वाइस चांसलर बन जाऊंगा, तुम्हें जॉब पर रख लूंगा। हम साथ रहेंगे। मेरी तो जबरदस्ती शादी कर दी गई। मेरी बीवी मुझे समझती नहीं। आगरा के डॉ. भीमराव अंबेडकर यूनिवर्सिटी की PHD रिसर्च स्कॉलर ने दैनिक भास्कर ऑफिस पहुंचकर ये बातें कही। । पूरी खबर पढ़िए…