रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह आर्मी कमांडर्स कॉन्फ्रेंस में शामिल होने के लिए गुरुवार शाम करीब 6:20 पर जैसलमेर पहुंचे। रक्षा मंत्री ने शौर्य पार्क और कैक्टस पार्क का उद्घाटन किया। इन स्थलों में भारतीय सेना के इतिहास, युद्धों और वीर जवानों की गाथाएं प्रदर्शित की गई। इसके बाद एक नया लाइट एंड साउंड शो भी शुरू किया। रक्षा मंत्री आर्मी कैंट में रात्रि विश्राम करेंगे। सुबह तनोट और लोंगेवाला जाएंगे। वहां जवानों से मुलाकात करेंगे और शहीदों को श्रद्धांजलि देंगे। इसके बाद आर्मी कमांडर्स कॉन्फ्रेंस में शामिल होंगे। शाम को दिल्ली लौटेंगे। बता दें कि गुरुवार 23 से 25 अक्टूबर, यानी तीन दिन तक आर्मी कमांडर्स कॉन्फ्रेंस जैसलमेर में हो रही है। जिसमें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सेना के अधिकारियों के साथ देश की सुरक्षा व्यवस्था और सैन्य तैयारियों को लेकर चर्चा करेंगे। इस दौरान राजनाथ सिंह के सामने थल सेना अध्यक्ष उपेंद्र द्विवेदी सेना में अग्निवीरों की स्थायी नियुक्ति 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 75 फीसदी करने का प्रस्ताव रखेंगे। पाकिस्तान को ठीक-ठाक डोज दे दिया
रक्षा मंत्री ने शौर्य पार्क के उद्घाटन के बाद राजनाथ सिंह ने कहा- अभी कुछ दिनों पहले ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान को ठीक-ठाक डोज दे दिया गया है। अब कुछ भी मिस एडवेंचर करने से पहले वह 100 बार सोचेगा। अगर पाकिस्तान ने दोबारा कोई मिस एडवेंचर किया, तो उसका परिणाम क्या होगा। यह पाकिस्तान को भी बहुत अच्छे से पता है। ऑपरेशन सिंदूर अभी खत्म नहीं हुआ है, उसे सिर्फ स्थगित किया गया है। लेकिन फिर भी मैं यह कहूंगा, कि हमें हर तरीके से, हमेशा अलर्ट रहने की आवश्यकता है। रक्षामंत्री ने कहा- बीते कुछ वर्षों में, सरकार ने बहुत ही बड़े स्तर पर, बॉर्डर एरिया में डेवलपमेंट एक्टिविटीज को शुरू किया है। अब जैसे-जैसे इस क्षेत्र में विकास होगा, वैसे वैसे आप सबके लिए चीजें और आसान होती जाएंगी। बोले- अभी सिर्फ पाक का हाल जाना, दल-बल के साथ जाते तो क्या हश्र होता रक्षा मंत्री ने सेना को रामचरित मानस का एक किस्सा सुनाया जिसमें अंगद का रावण के दरबार मे जाने का किस्सा था। रक्षा मंत्री ने बताया- रावण ने वानरों का मजाक उड़ाया था। इस पर अंगद ने हंसते हुए कहा कि जिसे तुम जिसे वानर समझ रहे हो। उसे तो हमने सिर्फ खबर लेने ही भेजा था और वो लंका को जला आया। सोचो जिस दिन असली योद्धा आएंगे तो वो तुम्हारा क्या हश्र करेंगे। वैसे ही हमारे पायलट ने केवल हाल चाल ही लेना चाहा था और पाकिस्तान की ये गत कर दी। कल अगर दल बल के साथ उनको मौका मिला तो पाकिस्तान का क्या हश्र होगा ये बताने की जरूरत नहीं है। रक्षा मंत्री ने कहा- हमारे शत्रु, चाहे वे बाहरी हों या आंतरिक, कभी निष्क्रिय नहीं रहते। वे हमेशा किसी न किसी रूप में सक्रिय रहते हैं। ऐसे में हमें उनकी गतिविधियों पर लगातार पैनी नजर रखनी होगी। उसी के अनुरूप कदम उठाने होंगे। हम एक परिवार हैं
रक्षा मंत्री ने कहा- जवानों को बड़ाखाना (जहां फौजी इकठ्ठा होते है) की परंपरा बहुत पुरानी है। यह न जाने कितने सालों से चली आ रही है। इस परंपरा के अब तक चलते रहने का कारण यह है, कि यह परंपरा हमें एक संदेश देती है, कि हममें से चाहे कोई मंत्री हो, कोई अधिकारी हो या फिर कोई सैनिक हो, हम चाहे किसी भी पद पर हों, लेकिन हम एक ही परिवार के अंग हैं। बड़ाखाना में आप सबके साथ भोजन करना यह बताता है, कि हम अपने पद से कहीं बढ़कर हैं, हम एक परिवार हैं। ये किसी डिनर या समारोह से बढ़कर
बड़ाखाना, कोई खाना खाने भर का आयोजन नहीं है, यह दिल जोड़ने का अवसर है। हमारी जो सेनाएं हैं, या फिर BSF समेत जितनी भी सिक्योरिटी फोर्सेज हैं, हर जगह अलग-अलग धर्म, जाति, अलग-अलग भाषाएं बोलने वाले तथा अलग-अलग प्रदेशों के लोग हैं। तमाम विविधताएं हमारी सेनाओं और सुरक्षाबलों में हैं। बड़ाखाना के अवसर पर, ये तमाम विविधता, एक ही थाली में दिखाई देने लग जाती हैं। इसलिए यह अवसर किसी भी समारोह या डिनर से कहीं ऊपर है। ईयर ऑफ रिफॉर्म्स पर फोकस
इस बार की कॉन्फ्रेंस को सेना ने “Year of Reforms” (सुधारों का वर्ष) का हिस्सा बताया है। इस दौरान सेना नेतृत्व नए ढांचे, तकनीकी सुधारों, और आधुनिक युद्ध की तैयारियों पर चर्चा करेगा। लक्ष्य यह है कि सेना को अधिक टेक्नोलॉजी-ड्रिवन और फ्यूचर रेडी फोर्स बनाया जाए। अग्निवीरों की स्थायी सेवा बढ़ाने पर होगा मंथन थलसेना के उच्च अधिकारियों का वार्षिक आर्मी कमांडर्स सम्मेलन इस बार सीमांत जिले जैसलमेर में आयोजित किया जा रहा है। यह बैठक कई दृष्टियों से विशेष मानी जा रही है, क्योंकि इसमें देश की सैन्य नीति से जुड़े कई अहम फैसले लिए जा सकते हैं। सबसे प्रमुख अग्निवीरों की स्थायी नियुक्ति 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 75 प्रतिशत तक करने का प्रस्ताव रखा जाएगा। अग्निवीर योजना की समीक्षा
सूत्रों के अनुसार, अग्निवीर योजना के तहत भर्ती हुए पहले बैच के जवान अगले वर्ष अपनी चार वर्षीय सेवा पूरी करेंगे। ऐसे में उनकी पुनर्नियुक्ति और भविष्य की योजना तय करने को लेकर यह बैठक निर्णायक साबित हो सकती है। रक्षा मंत्रालय इस पर गंभीरता से विचार कर रहा है कि अधिक संख्या में प्रशिक्षित अग्निवीरों को सेना में स्थायी अवसर मिले ताकि उनके अनुभव और दक्षता का उपयोग देश की सुरक्षा में और बेहतर ढंग से किया जा सके। पूर्व सैनिकों की भूमिका भी एजेंडे में
सम्मेलन में बढ़ती वेटरन (पूर्व सैनिक) संख्या को देखते हुए उनके अनुभव के उपयोग के विकल्पों पर भी चर्चा होगी। अभी पूर्व सैनिक सीमित भूमिकाओं, जैसे आर्मी वेलफेयर एजुकेशन सोसाइटी या एक्स-सर्विसमैन कंट्रीब्यूटरी हेल्थ स्कीम (ECHS) के तहत कार्यरत हैं, लेकिन अब उनकी विशेषज्ञता का फायदा व्यापक स्तर पर उठाने की दिशा में सरकार कदम बढ़ा सकती है। तीनों सेनाओं में ‘जॉइंटनेस’ पर फोकस
सम्मेलन में थलसेना, नौसेना और वायुसेना के बीच तालमेल और एकजुटता बढ़ाने के उपायों पर विशेष जोर दिया जाएगा। इसमें साझा प्रशिक्षण, उपकरणों का मानकीकरण, लॉजिस्टिक व सप्लाई चेन सुधार, कर्मियों का आपसी स्थानांतरण और सामाजिक संवाद बढ़ाने जैसे कदमों पर चर्चा होगी। इन प्रयासों का उद्देश्य भविष्य में थिएटर कमांड्स की स्थापना के लिए मजबूत आधार तैयार करना है। ऑपरेशनल तैयारियों की समीक्षा
जैसलमेर सम्मेलन में सेना की ऑपरेशनल तैयारियों की भी व्यापक समीक्षा होगी। इसमें क्षतिग्रस्त उपकरणों की मरम्मत और प्रतिस्थापन, आवश्यक सैन्य सामग्रियों की आपात खरीद, गोला-बारूद और हथियार प्रणालियों के भंडारण की स्थिति जैसे विषय शामिल होंगे। मिशन सुदर्शन चक्र के क्रियान्वयन की प्रगति की समीक्षा भी की जाएगी, जो तीनों सेनाओं और अन्य हितधारकों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण मिशन है। पहली बार ऑपरेशन सिंदूर के बाद बड़ी बैठक
यह सम्मेलन मई में हुए ऑपरेशन सिंदूर के बाद सेना कमांडरों की पहली बड़ी बैठक है। इससे पहले इसी माह दिल्ली में सम्मेलन का पहला चरण आयोजित किया गया था। जैसलमेर बैठक इस वर्ष की दूसरी आर्मी कमांडर्स कॉन्फ्रेंस का दूसरा चरण है। यह बैठक सेना के शीर्ष नेतृत्व को वर्तमान सुरक्षा स्थिति, उभरती चुनौतियों और भविष्य की रणनीतियों पर गहन चर्चा का अवसर प्रदान करेगी।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह आर्मी कमांडर्स कॉन्फ्रेंस में शामिल होने के लिए गुरुवार शाम करीब 6:20 पर जैसलमेर पहुंचे। रक्षा मंत्री ने शौर्य पार्क और कैक्टस पार्क का उद्घाटन किया। इन स्थलों में भारतीय सेना के इतिहास, युद्धों और वीर जवानों की गाथाएं प्रदर्शित की गई। इसके बाद एक नया लाइट एंड साउंड शो भी शुरू किया। रक्षा मंत्री आर्मी कैंट में रात्रि विश्राम करेंगे। सुबह तनोट और लोंगेवाला जाएंगे। वहां जवानों से मुलाकात करेंगे और शहीदों को श्रद्धांजलि देंगे। इसके बाद आर्मी कमांडर्स कॉन्फ्रेंस में शामिल होंगे। शाम को दिल्ली लौटेंगे। बता दें कि गुरुवार 23 से 25 अक्टूबर, यानी तीन दिन तक आर्मी कमांडर्स कॉन्फ्रेंस जैसलमेर में हो रही है। जिसमें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सेना के अधिकारियों के साथ देश की सुरक्षा व्यवस्था और सैन्य तैयारियों को लेकर चर्चा करेंगे। इस दौरान राजनाथ सिंह के सामने थल सेना अध्यक्ष उपेंद्र द्विवेदी सेना में अग्निवीरों की स्थायी नियुक्ति 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 75 फीसदी करने का प्रस्ताव रखेंगे। पाकिस्तान को ठीक-ठाक डोज दे दिया
रक्षा मंत्री ने शौर्य पार्क के उद्घाटन के बाद राजनाथ सिंह ने कहा- अभी कुछ दिनों पहले ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान को ठीक-ठाक डोज दे दिया गया है। अब कुछ भी मिस एडवेंचर करने से पहले वह 100 बार सोचेगा। अगर पाकिस्तान ने दोबारा कोई मिस एडवेंचर किया, तो उसका परिणाम क्या होगा। यह पाकिस्तान को भी बहुत अच्छे से पता है। ऑपरेशन सिंदूर अभी खत्म नहीं हुआ है, उसे सिर्फ स्थगित किया गया है। लेकिन फिर भी मैं यह कहूंगा, कि हमें हर तरीके से, हमेशा अलर्ट रहने की आवश्यकता है। रक्षामंत्री ने कहा- बीते कुछ वर्षों में, सरकार ने बहुत ही बड़े स्तर पर, बॉर्डर एरिया में डेवलपमेंट एक्टिविटीज को शुरू किया है। अब जैसे-जैसे इस क्षेत्र में विकास होगा, वैसे वैसे आप सबके लिए चीजें और आसान होती जाएंगी। बोले- अभी सिर्फ पाक का हाल जाना, दल-बल के साथ जाते तो क्या हश्र होता रक्षा मंत्री ने सेना को रामचरित मानस का एक किस्सा सुनाया जिसमें अंगद का रावण के दरबार मे जाने का किस्सा था। रक्षा मंत्री ने बताया- रावण ने वानरों का मजाक उड़ाया था। इस पर अंगद ने हंसते हुए कहा कि जिसे तुम जिसे वानर समझ रहे हो। उसे तो हमने सिर्फ खबर लेने ही भेजा था और वो लंका को जला आया। सोचो जिस दिन असली योद्धा आएंगे तो वो तुम्हारा क्या हश्र करेंगे। वैसे ही हमारे पायलट ने केवल हाल चाल ही लेना चाहा था और पाकिस्तान की ये गत कर दी। कल अगर दल बल के साथ उनको मौका मिला तो पाकिस्तान का क्या हश्र होगा ये बताने की जरूरत नहीं है। रक्षा मंत्री ने कहा- हमारे शत्रु, चाहे वे बाहरी हों या आंतरिक, कभी निष्क्रिय नहीं रहते। वे हमेशा किसी न किसी रूप में सक्रिय रहते हैं। ऐसे में हमें उनकी गतिविधियों पर लगातार पैनी नजर रखनी होगी। उसी के अनुरूप कदम उठाने होंगे। हम एक परिवार हैं
रक्षा मंत्री ने कहा- जवानों को बड़ाखाना (जहां फौजी इकठ्ठा होते है) की परंपरा बहुत पुरानी है। यह न जाने कितने सालों से चली आ रही है। इस परंपरा के अब तक चलते रहने का कारण यह है, कि यह परंपरा हमें एक संदेश देती है, कि हममें से चाहे कोई मंत्री हो, कोई अधिकारी हो या फिर कोई सैनिक हो, हम चाहे किसी भी पद पर हों, लेकिन हम एक ही परिवार के अंग हैं। बड़ाखाना में आप सबके साथ भोजन करना यह बताता है, कि हम अपने पद से कहीं बढ़कर हैं, हम एक परिवार हैं। ये किसी डिनर या समारोह से बढ़कर
बड़ाखाना, कोई खाना खाने भर का आयोजन नहीं है, यह दिल जोड़ने का अवसर है। हमारी जो सेनाएं हैं, या फिर BSF समेत जितनी भी सिक्योरिटी फोर्सेज हैं, हर जगह अलग-अलग धर्म, जाति, अलग-अलग भाषाएं बोलने वाले तथा अलग-अलग प्रदेशों के लोग हैं। तमाम विविधताएं हमारी सेनाओं और सुरक्षाबलों में हैं। बड़ाखाना के अवसर पर, ये तमाम विविधता, एक ही थाली में दिखाई देने लग जाती हैं। इसलिए यह अवसर किसी भी समारोह या डिनर से कहीं ऊपर है। ईयर ऑफ रिफॉर्म्स पर फोकस
इस बार की कॉन्फ्रेंस को सेना ने “Year of Reforms” (सुधारों का वर्ष) का हिस्सा बताया है। इस दौरान सेना नेतृत्व नए ढांचे, तकनीकी सुधारों, और आधुनिक युद्ध की तैयारियों पर चर्चा करेगा। लक्ष्य यह है कि सेना को अधिक टेक्नोलॉजी-ड्रिवन और फ्यूचर रेडी फोर्स बनाया जाए। अग्निवीरों की स्थायी सेवा बढ़ाने पर होगा मंथन थलसेना के उच्च अधिकारियों का वार्षिक आर्मी कमांडर्स सम्मेलन इस बार सीमांत जिले जैसलमेर में आयोजित किया जा रहा है। यह बैठक कई दृष्टियों से विशेष मानी जा रही है, क्योंकि इसमें देश की सैन्य नीति से जुड़े कई अहम फैसले लिए जा सकते हैं। सबसे प्रमुख अग्निवीरों की स्थायी नियुक्ति 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 75 प्रतिशत तक करने का प्रस्ताव रखा जाएगा। अग्निवीर योजना की समीक्षा
सूत्रों के अनुसार, अग्निवीर योजना के तहत भर्ती हुए पहले बैच के जवान अगले वर्ष अपनी चार वर्षीय सेवा पूरी करेंगे। ऐसे में उनकी पुनर्नियुक्ति और भविष्य की योजना तय करने को लेकर यह बैठक निर्णायक साबित हो सकती है। रक्षा मंत्रालय इस पर गंभीरता से विचार कर रहा है कि अधिक संख्या में प्रशिक्षित अग्निवीरों को सेना में स्थायी अवसर मिले ताकि उनके अनुभव और दक्षता का उपयोग देश की सुरक्षा में और बेहतर ढंग से किया जा सके। पूर्व सैनिकों की भूमिका भी एजेंडे में
सम्मेलन में बढ़ती वेटरन (पूर्व सैनिक) संख्या को देखते हुए उनके अनुभव के उपयोग के विकल्पों पर भी चर्चा होगी। अभी पूर्व सैनिक सीमित भूमिकाओं, जैसे आर्मी वेलफेयर एजुकेशन सोसाइटी या एक्स-सर्विसमैन कंट्रीब्यूटरी हेल्थ स्कीम (ECHS) के तहत कार्यरत हैं, लेकिन अब उनकी विशेषज्ञता का फायदा व्यापक स्तर पर उठाने की दिशा में सरकार कदम बढ़ा सकती है। तीनों सेनाओं में ‘जॉइंटनेस’ पर फोकस
सम्मेलन में थलसेना, नौसेना और वायुसेना के बीच तालमेल और एकजुटता बढ़ाने के उपायों पर विशेष जोर दिया जाएगा। इसमें साझा प्रशिक्षण, उपकरणों का मानकीकरण, लॉजिस्टिक व सप्लाई चेन सुधार, कर्मियों का आपसी स्थानांतरण और सामाजिक संवाद बढ़ाने जैसे कदमों पर चर्चा होगी। इन प्रयासों का उद्देश्य भविष्य में थिएटर कमांड्स की स्थापना के लिए मजबूत आधार तैयार करना है। ऑपरेशनल तैयारियों की समीक्षा
जैसलमेर सम्मेलन में सेना की ऑपरेशनल तैयारियों की भी व्यापक समीक्षा होगी। इसमें क्षतिग्रस्त उपकरणों की मरम्मत और प्रतिस्थापन, आवश्यक सैन्य सामग्रियों की आपात खरीद, गोला-बारूद और हथियार प्रणालियों के भंडारण की स्थिति जैसे विषय शामिल होंगे। मिशन सुदर्शन चक्र के क्रियान्वयन की प्रगति की समीक्षा भी की जाएगी, जो तीनों सेनाओं और अन्य हितधारकों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण मिशन है। पहली बार ऑपरेशन सिंदूर के बाद बड़ी बैठक
यह सम्मेलन मई में हुए ऑपरेशन सिंदूर के बाद सेना कमांडरों की पहली बड़ी बैठक है। इससे पहले इसी माह दिल्ली में सम्मेलन का पहला चरण आयोजित किया गया था। जैसलमेर बैठक इस वर्ष की दूसरी आर्मी कमांडर्स कॉन्फ्रेंस का दूसरा चरण है। यह बैठक सेना के शीर्ष नेतृत्व को वर्तमान सुरक्षा स्थिति, उभरती चुनौतियों और भविष्य की रणनीतियों पर गहन चर्चा का अवसर प्रदान करेगी।