उत्तराखंड में यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) के तहत सरकार लिव-इन रिलेशन से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव करने जा रही है। नए प्रस्तावों के अनुसार अब अगर 21 साल से कम उम्र का कोई युवा लिव-इन में रह रहा है, तो सरकार यह जानकारी उसके माता-पिता को नहीं देगी। इसके साथ ही लिव-इन पार्टनर के गर्भवती होने या रिश्ता खत्म होने के बाद बच्चे के जन्म की सूचना देने की अनिवार्यता भी खत्म कर दी जाएगी। राज्य सरकार ने इन बदलावों को नागरिकों की “ प्राइवेसी और फ्रीडम” से जोड़ते हुए कोर्ट में शपथपत्र दाखिल किया है। नई नीति के तहत लिव-इन कपल की कोई पुलिस जांच या निगरानी नहीं होगी। कोई भी व्यक्ति बिना ठोस कारण किसी लिव-इन जोड़े की शिकायत भी नहीं कर सकेगा। विवाह पंजीकरण में भी अब धर्म या सामुदायिक प्रमाणपत्र की जरूरत नहीं होगी। यूसीसी में संशोधन का प्रस्ताव हाईकोर्ट में उत्तराखंड सरकार ने यूनिफॉर्म सिविल कोड, 2025 में संशोधन के लिए प्रस्ताव नैनीताल हाईकोर्ट में दाखिल किया है। सरकार ने कहा कि नए नियम नागरिकों की निजता की रक्षा करेंगे। शपथपत्र में बताया गया है कि विवाह पंजीकरण और लिव-इन संबंधों से जुड़ी कई शर्तों को हटाया जाएगा, जिससे कोई भी व्यक्ति अपनी इच्छा से संबंध या विवाह का पंजीकरण करा सकेगा। राज्य में अब तक 2 लाख विवाह, 58 लिव-इन पंजीकृत यूसीसी लागू होने के बाद उत्तराखंड में अब तक करीब 4 लाख लोगों ने विवाह पंजीकरण कराया है। इनमें 2 लाख से अधिक विवाह पंजीकृत हुए हैं।वहीं, 58 जोड़े लिव-इन में रह रहे हैं, जबकि एक जोड़े ने संबंध समाप्त किया है। इसके अलावा अब तक 284 तलाक के मामले दर्ज किए गए हैं। क्या बदलेंगे नए नियम याचिकाकर्ता बोले- सरकार निजी जीवन में झांक रही नैनीताल हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जी नरेंद्र और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की बेंच में अल्मसुद्दीन सहित अन्य याचिकाओं पर सुनवाई चल रही है। सरकार से संशोधन पर विस्तृत जवाब मांगा गया है।याचिकाकर्ता के अधिवक्ता कार्तीकेय हरि गुप्ता ने कहा कि सरकार को किसी की निजी जानकारी इकट्ठा करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा- सरकार यह कह रही है कि वो लिव-इन कपल की जानकारी माता-पिता को नहीं देगी, लेकिन सवाल ये है कि सरकार ऐसी जानकारी रख ही क्यों रही है? यह नागरिकों की निजी जिंदगी में दखल है। सरकार के ये बदलाव असली मुद्दों से ध्यान भटकाने वाले हैं। आर्टिकल 25 पर कोई संशोधन नहीं हुआ, सरकार केवल लोगों का ध्यान भटकाने वाले दिखावटी बदलाव कर रही है।
उत्तराखंड में यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) के तहत सरकार लिव-इन रिलेशन से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव करने जा रही है। नए प्रस्तावों के अनुसार अब अगर 21 साल से कम उम्र का कोई युवा लिव-इन में रह रहा है, तो सरकार यह जानकारी उसके माता-पिता को नहीं देगी। इसके साथ ही लिव-इन पार्टनर के गर्भवती होने या रिश्ता खत्म होने के बाद बच्चे के जन्म की सूचना देने की अनिवार्यता भी खत्म कर दी जाएगी। राज्य सरकार ने इन बदलावों को नागरिकों की “ प्राइवेसी और फ्रीडम” से जोड़ते हुए कोर्ट में शपथपत्र दाखिल किया है। नई नीति के तहत लिव-इन कपल की कोई पुलिस जांच या निगरानी नहीं होगी। कोई भी व्यक्ति बिना ठोस कारण किसी लिव-इन जोड़े की शिकायत भी नहीं कर सकेगा। विवाह पंजीकरण में भी अब धर्म या सामुदायिक प्रमाणपत्र की जरूरत नहीं होगी। यूसीसी में संशोधन का प्रस्ताव हाईकोर्ट में उत्तराखंड सरकार ने यूनिफॉर्म सिविल कोड, 2025 में संशोधन के लिए प्रस्ताव नैनीताल हाईकोर्ट में दाखिल किया है। सरकार ने कहा कि नए नियम नागरिकों की निजता की रक्षा करेंगे। शपथपत्र में बताया गया है कि विवाह पंजीकरण और लिव-इन संबंधों से जुड़ी कई शर्तों को हटाया जाएगा, जिससे कोई भी व्यक्ति अपनी इच्छा से संबंध या विवाह का पंजीकरण करा सकेगा। राज्य में अब तक 2 लाख विवाह, 58 लिव-इन पंजीकृत यूसीसी लागू होने के बाद उत्तराखंड में अब तक करीब 4 लाख लोगों ने विवाह पंजीकरण कराया है। इनमें 2 लाख से अधिक विवाह पंजीकृत हुए हैं।वहीं, 58 जोड़े लिव-इन में रह रहे हैं, जबकि एक जोड़े ने संबंध समाप्त किया है। इसके अलावा अब तक 284 तलाक के मामले दर्ज किए गए हैं। क्या बदलेंगे नए नियम याचिकाकर्ता बोले- सरकार निजी जीवन में झांक रही नैनीताल हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जी नरेंद्र और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की बेंच में अल्मसुद्दीन सहित अन्य याचिकाओं पर सुनवाई चल रही है। सरकार से संशोधन पर विस्तृत जवाब मांगा गया है।याचिकाकर्ता के अधिवक्ता कार्तीकेय हरि गुप्ता ने कहा कि सरकार को किसी की निजी जानकारी इकट्ठा करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा- सरकार यह कह रही है कि वो लिव-इन कपल की जानकारी माता-पिता को नहीं देगी, लेकिन सवाल ये है कि सरकार ऐसी जानकारी रख ही क्यों रही है? यह नागरिकों की निजी जिंदगी में दखल है। सरकार के ये बदलाव असली मुद्दों से ध्यान भटकाने वाले हैं। आर्टिकल 25 पर कोई संशोधन नहीं हुआ, सरकार केवल लोगों का ध्यान भटकाने वाले दिखावटी बदलाव कर रही है।