लद्दाख के लेह में 24 सितंबर के बाद से हालात सामान्य नहीं हैं। विपक्षी दलों ने हालात का जायजा लेने के लिए वहां प्रतिनिधिमंडल भेजने का फैसला लिया है। विपक्षी दलों कांग्रेस, माकपा, आम आदमी पार्टी (AAP), समाजवादी पार्टी (सपा) और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने लद्दाख में प्रतिनिधिमंडल भेजने पर बातचीत की है। लद्दाख को राज्य का दर्जा और जनजातीय दर्जा देने की मांग को लेकर 24 सितंबर को हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा हुई थी। हिंसा में चार लोग मारे गए थे। विपक्षी नेताओं ने विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई मौतों और उसके बाद इन्वायर्नमेंट एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत गिरफ्तारी की निंदा की है। इन पार्टियों ने गोलीबारी की घटना की न्यायिक जांच की मांग का भी समर्थन किया है। 9 अक्टूबर की रात से इंटरनेट बहाल लद्दाख की राजधानी लेह में स्थानीय लोगों के विरोध के बाद इंटरनेट सेवा 9 अक्टूबर की रात बहाल कर दी गई। हालांकि, इसका कोई ऑर्डर जारी नहीं हुआ। कलेक्टर ने सोशल मीडिया पर फेक न्यूज फैलाने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है। बीते 24 सितंबर को हिंसा के बाद इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई थी। न्यायिक जांच की मांग का समर्थन विपक्षी दलों ने लेह हिंसा की न्यायिक जांच कराने की लेह अपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस की मांग का भी समर्थन किया है। गृह मंत्रालय ने लेह में भूख हड़ताल का नेतृत्व कर रहे वांगचुक पर प्रदर्शनकारियों को उकसाने का आरोप लगाया है। हिंसा की घटनाओं के बाद वांगचुक ने अपनी भूख हड़ताल वापस ले ली। उन्हें 26 सितंबर को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत हिरासत में लिया गया था। ये खबर भी पढ़ें: वांगचुक की मांग– लेह हिंसा की न्यायिक जांच हो:कहा- जब तक ऐसा नहीं होता, जेल में रहूंगा; 4 लोगों की जान गई थी सोनम वांगचुक ने लेह हिंसा के दौरान हुई 4 लोगों की मौत की स्वतंत्र न्यायिक जांच की मांग की है। उन्होंने जोधपुर सेंट्रल जेल से एक पत्र लिखा है, जो 5 अक्टूबर को जारी किया गया। पढ़ें पूरी खबर…
लद्दाख के लेह में 24 सितंबर के बाद से हालात सामान्य नहीं हैं। विपक्षी दलों ने हालात का जायजा लेने के लिए वहां प्रतिनिधिमंडल भेजने का फैसला लिया है। विपक्षी दलों कांग्रेस, माकपा, आम आदमी पार्टी (AAP), समाजवादी पार्टी (सपा) और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने लद्दाख में प्रतिनिधिमंडल भेजने पर बातचीत की है। लद्दाख को राज्य का दर्जा और जनजातीय दर्जा देने की मांग को लेकर 24 सितंबर को हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा हुई थी। हिंसा में चार लोग मारे गए थे। विपक्षी नेताओं ने विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई मौतों और उसके बाद इन्वायर्नमेंट एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत गिरफ्तारी की निंदा की है। इन पार्टियों ने गोलीबारी की घटना की न्यायिक जांच की मांग का भी समर्थन किया है। 9 अक्टूबर की रात से इंटरनेट बहाल लद्दाख की राजधानी लेह में स्थानीय लोगों के विरोध के बाद इंटरनेट सेवा 9 अक्टूबर की रात बहाल कर दी गई। हालांकि, इसका कोई ऑर्डर जारी नहीं हुआ। कलेक्टर ने सोशल मीडिया पर फेक न्यूज फैलाने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है। बीते 24 सितंबर को हिंसा के बाद इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई थी। न्यायिक जांच की मांग का समर्थन विपक्षी दलों ने लेह हिंसा की न्यायिक जांच कराने की लेह अपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस की मांग का भी समर्थन किया है। गृह मंत्रालय ने लेह में भूख हड़ताल का नेतृत्व कर रहे वांगचुक पर प्रदर्शनकारियों को उकसाने का आरोप लगाया है। हिंसा की घटनाओं के बाद वांगचुक ने अपनी भूख हड़ताल वापस ले ली। उन्हें 26 सितंबर को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत हिरासत में लिया गया था। ये खबर भी पढ़ें: वांगचुक की मांग– लेह हिंसा की न्यायिक जांच हो:कहा- जब तक ऐसा नहीं होता, जेल में रहूंगा; 4 लोगों की जान गई थी सोनम वांगचुक ने लेह हिंसा के दौरान हुई 4 लोगों की मौत की स्वतंत्र न्यायिक जांच की मांग की है। उन्होंने जोधपुर सेंट्रल जेल से एक पत्र लिखा है, जो 5 अक्टूबर को जारी किया गया। पढ़ें पूरी खबर…