हरियाणा की तहसीलों में आज सोमवार से पेपरलेस वर्क की शुरुआत हो गई है।। मुख्यमंत्री नायब सैनी ने राज्य स्तरीय कार्यक्रम में कुरुक्षेत्र की बाबैन तहसील से इस प्रोजेक्ट को पब्लिक को समर्पित किया। तहसील में पेपरलेस रजिस्ट्री (डीड) के साथ सीमांकन पोर्टल, वॉट्सऐप चैटबॉट और राजस्व न्यायालय मामला प्रबंध प्रणाली भी लागू की गई। इस ऑनलाइन प्रक्रिया में संपत्ति खरीदार और विक्रेता अपनी सुविधानुसार किसी भी समय (24×7) साइट पर रजिस्ट्रेशन कर सकेंगे। साथ ही अपनी मर्जी के मुताबिक अपॉइंटमेंट ले सकेंगे। डीड के लिए उनको बार-बार तहसील जाने से भी छुटकारा मिलेगा। सिर्फ डीड के वक्त ही फोटो और बायोमेट्रिक के लिए तहसील जाना है। अफसरों का कहना है कि यह प्रोजेक्ट आम जनता के लिए लैंड रजिस्ट्रेशन सिस्टम को सरल और कारगर बनाने के लिए बनाया गया है। पहले, अपॉइंटमेंट के दिन ही डॉक्यूमेंट की जांच होती थी, जिससे आपत्तियों या दस्तावेजों की कमी के कारण डीड पंजीकरण के केस 30% तक फेल हो जाते थे। अब, इस टेम्प्लेट-आधारित आवेदन को वेरिफाइ के लिए संबंधित तहसील कार्यालय भेजा जाएगा और उसी पोर्टल पर स्वीकृति प्राप्त करने के बाद, आवेदक भुगतान प्रक्रिया पूरी कर सकता है और अपॉइंटमेंट स्लॉट बुक कर सकता है। अब जानिए नई और पुरानी प्रक्रिया में क्या है अंतर…
हरियाणा की तहसीलों में आज सोमवार से पेपरलेस वर्क की शुरुआत हो गई है।। मुख्यमंत्री नायब सैनी ने राज्य स्तरीय कार्यक्रम में कुरुक्षेत्र की बाबैन तहसील से इस प्रोजेक्ट को पब्लिक को समर्पित किया। तहसील में पेपरलेस रजिस्ट्री (डीड) के साथ सीमांकन पोर्टल, वॉट्सऐप चैटबॉट और राजस्व न्यायालय मामला प्रबंध प्रणाली भी लागू की गई। इस ऑनलाइन प्रक्रिया में संपत्ति खरीदार और विक्रेता अपनी सुविधानुसार किसी भी समय (24×7) साइट पर रजिस्ट्रेशन कर सकेंगे। साथ ही अपनी मर्जी के मुताबिक अपॉइंटमेंट ले सकेंगे। डीड के लिए उनको बार-बार तहसील जाने से भी छुटकारा मिलेगा। सिर्फ डीड के वक्त ही फोटो और बायोमेट्रिक के लिए तहसील जाना है। अफसरों का कहना है कि यह प्रोजेक्ट आम जनता के लिए लैंड रजिस्ट्रेशन सिस्टम को सरल और कारगर बनाने के लिए बनाया गया है। पहले, अपॉइंटमेंट के दिन ही डॉक्यूमेंट की जांच होती थी, जिससे आपत्तियों या दस्तावेजों की कमी के कारण डीड पंजीकरण के केस 30% तक फेल हो जाते थे। अब, इस टेम्प्लेट-आधारित आवेदन को वेरिफाइ के लिए संबंधित तहसील कार्यालय भेजा जाएगा और उसी पोर्टल पर स्वीकृति प्राप्त करने के बाद, आवेदक भुगतान प्रक्रिया पूरी कर सकता है और अपॉइंटमेंट स्लॉट बुक कर सकता है। अब जानिए नई और पुरानी प्रक्रिया में क्या है अंतर…