हरियाणा में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है। मौसम विज्ञान विभाग (IMD) चंडीगढ़ ने आज पंचकूला, अंबाला, कुरुक्षेत्र, यमुनानगर, करनाल, कैथल, जींद, पानीपत, सोनीपत, रोहतक, झज्जर, गुरुग्राम, फरीदाबाद, नूंह और पलवल में बारिश का अलर्ट जारी किया है। विभाग के मुताबिक 19 सितंबर तक लगातार बारिश होगी। 20 सितंबर से मानसून की विदाई हो सकती है। मानसून सीजन में अभी तक सामान्य से 39 प्रतिशत ज्यादा बारिश हो चुकी है। यमुनानगर में सबसे ज्यादा बारिश दर्ज की गई है। बारिश से प्रदेश में 20 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें अधिकांश मौतें सितंबर महीने में हुई हैं। वहीं 70 से ज्यादा मकान ढहने या उनमें दरारें आने की सूचना है। हिसार में बारिश से नेशनल व स्टेट हाईवे डूबे
बारिश के कारण 15 दिनों से हिसार में स्टेट व नेशनल हाईवे डूबे हुए हैं। हिसार से चंडीगढ़, हांसी से बरवाला, हिसार से राजगढ़, हिसार से तोशाम और हिसार से भादरा रोड पर पानी भरा है इसके कारण कई गांवों के रूट डायवर्ट हो चुके हैं। प्रशासनिक टीमें लगातार जलभराव वाले क्षेत्रों का जायजा ले रही हैं। उधर, नुकसान की भरपाई के लिए खोला गया ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल बंद हो गया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, बारिश की वजह से 6300 गांवों में 29 लाख एकड़ से ज्यादा में फसलों को नुकसान हुआ है। मौसम वैज्ञानिक डॉ. मदन खीचड़ की 2 अहम बातें….
हरियाणा में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है। मौसम विज्ञान विभाग (IMD) चंडीगढ़ ने आज पंचकूला, अंबाला, कुरुक्षेत्र, यमुनानगर, करनाल, कैथल, जींद, पानीपत, सोनीपत, रोहतक, झज्जर, गुरुग्राम, फरीदाबाद, नूंह और पलवल में बारिश का अलर्ट जारी किया है। विभाग के मुताबिक 19 सितंबर तक लगातार बारिश होगी। 20 सितंबर से मानसून की विदाई हो सकती है। मानसून सीजन में अभी तक सामान्य से 39 प्रतिशत ज्यादा बारिश हो चुकी है। यमुनानगर में सबसे ज्यादा बारिश दर्ज की गई है। बारिश से प्रदेश में 20 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें अधिकांश मौतें सितंबर महीने में हुई हैं। वहीं 70 से ज्यादा मकान ढहने या उनमें दरारें आने की सूचना है। हिसार में बारिश से नेशनल व स्टेट हाईवे डूबे
बारिश के कारण 15 दिनों से हिसार में स्टेट व नेशनल हाईवे डूबे हुए हैं। हिसार से चंडीगढ़, हांसी से बरवाला, हिसार से राजगढ़, हिसार से तोशाम और हिसार से भादरा रोड पर पानी भरा है इसके कारण कई गांवों के रूट डायवर्ट हो चुके हैं। प्रशासनिक टीमें लगातार जलभराव वाले क्षेत्रों का जायजा ले रही हैं। उधर, नुकसान की भरपाई के लिए खोला गया ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल बंद हो गया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, बारिश की वजह से 6300 गांवों में 29 लाख एकड़ से ज्यादा में फसलों को नुकसान हुआ है। मौसम वैज्ञानिक डॉ. मदन खीचड़ की 2 अहम बातें….