पंजाब-हरियाणा में चल रहे विवाद के बीच भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (BBMB) ने फैसला लिया है कि हरियाणा को भाखड़ा डैम से तुरंत प्रभाव से 8500 क्यूसेक पानी छोड़ा जाएगा। बुधवार को 5 घंटे तक चली बोर्ड की मीटिंग में यह फैसला हुआ।हालांकि, पंजाब सरकार के अधिकारियों ने इसका सख्त विरोध किया। यह मीटिंग केंद्रीय बिजली मंत्रालय के आदेश पर हुई थी, जिसके मंत्री हरियाणा के पूर्व CM मनोहर लाल खट्टर हैं। इसकी अध्यक्षता बोर्ड के चेयरमैन मनोज त्रिपाठी ने की। वहीं, पंजाब सीएम का कहना है कि केंद्र की बीजेपी सरकार का पंजाब के हकों पर एक और डाका है। जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेंगे। वहीं, पता चला है कि पंजाब इस मामले में अब कानून राय लेने की सोचा रहा है। दूसरी तरफ पंजाब के वित्तमंत्री हरपाल सिंह चीमा ने प्रेस कांफ्रेंस कर रहा है कि हरियाणा व राजस्थान दोनों अपने हिस्से का पानी प्रयोग कर चुके है। हम एक भी बूंद पानी हरियाणा और राजस्थान को नहीं देंगे। वहीं, उन्होंने कहा कि केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू और सुनील जाखड़ को बीजेपी से तुरंत इस्तीफा देना चाहिए। वहीं, जाखड़ ने कहा कि मानवता के आधार पर पीने का पानी देने में घटिया राजनीति करना आम आदमी पार्टी को तो शोभा दे सकता है, लेकिन यह पंजाबी संस्कृति और उसके सिद्धांतों के खिलाफ है। वहीं, शिरोमणि अकाली दल ने कहा कि सरकार द्वारा ठोस कार्रवाई की जाए ताकि हरियाणा को पंजाब के किसी भी हेड वर्क के माध्यम से अतिरिक्त पानी जारी न किया जाए और पहले से हरियाणा में बह रहा अतिरिक्त पानी कम किया जाए। यदि भगवंत मान हरियाणा और केंद्र सरकार के दबाव में झुकते हैं और पंजाब के हितों को बेचते हैं, तो @Akali_Dal_ राज्य के जल अधिकारों की रक्षा के लिए एक जन आंदोलन शुरू करेगा। पंजाब के नेताओं की इस मुद्दे पर सिलसिलेवार राय जानिए बीजेपी का एक और डाका, बर्दाश्त नहीं करेंगे
पंजाब के सीएम भगवंत मान का कहना है पंजाब और पंजाबियों के हक के पानी को BBMB के जरिए हरियाणा को देने के फैसले का पूरा पंजाब कड़ा विरोध करता है। केंद्र और हरियाणा की बीजेपी सरकार पंजाब के खिलाफ एकजुट हो गई है। यह हमारे हकों पर बीजेपी का एक और डाका है। हम किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेंगे। विरोध का सामना करने के लिए तैयार रहे भाजपा। बीजेपी कभी भी पंजाब और पंजाबियों की अपनी नहीं हो सकती। हरियाणा ने अपने पानी का हिस्सा कहीं और प्रयोग किया पंजाब के वित्तमंत्री हरपाल सिंह चीमा ने चंडीगढ़ में प्रेस कांफ्रेंस कहा कहा केंद्र सरकार व हरियाणा सरकार ने पंजाब के खिलाफ बड़ी साजिश रची गई है। पूरा देश जानता है कि देश के अन्न भंडार को भरने में पंजाब का सबसे बड़ा योगदान रहता है। हरित क्रांति के आने के बाद देश के लोगों का पेट भरने के लिए पंजाब ने अपनी जमीन से भूमिगत जल निकाला। क्योंकि उस समय देश के कई हिस्सों में अकाल पड़ जाता था। आज पंजाब के 153 जोन में से 115 जोन ब्लैक जोन घोषित किए जा चुके हैं। उनमें पानी नाम की कोई चीज नहीं है। आज किसानों को 700 से 1500 फुट गहरे बोर लगवाने पड़ रहे हैं। लेकिन केंद्र सरकार भारत को मारने का यत्न कर रही है। हरियाणा को पानी एक भी बूंद नहीं जाने देंगे। हरियाणा सरकार को इस बारे में सोचना चाहिए था कि पानी का प्रयोग कैसे करना चाहिए। यदि वह पानी का बर्बाद न करते, तो 21 मई तक पूरा प्रयोग होना था। उन्होंने कहा कि इसका मतलब यह है कि जो पानी पीने के लिए दिया गया, वह अन्य कामों में प्रयोग किया गया। एक व्यक्ति को प्रतिदिन 135 लीटर पानी की जरूरत है। चीमा ने पंजाब के भाजपा नेताओं से पूछा कि क्या वे पंजाब से गद्दारी नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि रवनीत बिट्टू और सुनील जाखड़ को तुरंत इस्तीफा देना चाहिए। वे पंजाब विरोधी भूमिका निभा रहे हैं। पूरा देश उन्हें देख रहा है। उन्हें तुरंत पंजाब के साथ खड़ा होना चाहिए।
राजस्थान व हरियाणा ने अधिक पानी प्रयोग किया भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड से हरियाणा और राजस्थान को अपना पानी 21 मई से पहले प्रयोग करना था। वे अपने हिस्सा का पानी ले चुके हैं। राजस्थान का अलॉटेड शेयर 3398 MAF है। इसमें उन्होंने 3738 MAF प्रयोग कर लिया है। यह 10 % अधिक है। पंजाब को अलॉटेड शेयर 5512 MAF है। राज्य ने 4925 MAF पानी प्रयोग किया है। 89 फीसदी पानी प्रयोग किया है। 11 फीसदी बचता है। जबकि हरियाणा को 2987 MAF पानी अलॉट है। 3091 MAF पानी प्रयोग किया गया है। यह 103 फीसदी बनता है। डैमों में पानी बहुत कम है पंजाब के डैमों में पानी कम है। भाखड़ा डैम का लेवल 1680 फीट पानी भर सकता है। इसमें 1557 फीट पानी भरा है। पोंग डैम का लेवल 1390 फीट है। उसमें 1294 फीट पानी है। रणजीत सागर डैम में 1734 फीट पानी की क्षमता है। इसमें 1642 फीट पानी है। सिसोदिया और जैन के अपराधों पर डालने की कोशिश भाजपा प्रधान सुनीन जाखड़ को अमन अरोड़ा द्वारा पत्र लिखने व इस मुद्दे पर घेरने के बाद अब उन्होंने भी पंजाब सरकार को घेरा है। जाखड़ा कहना है कि आज जब अंतरराष्ट्रीय सीमा पर युद्ध जैसे हालात बने हुए हैं, ऐसे मौके पर पंजाब सरकार सूबे की फोर्स को धरनों और प्रदर्शनों में उलझा कर सूबे को अस्थिर कर रही है। जबकि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान खुद हरियाणा चुनावों के समय कहकर आए थे कि दिल्ली और हरियाणा को पानी दिया जाएगा और सुप्रीम कोर्ट में भी सरकार ने कहा था कि हमें किसान एसवाईएल नहर नहीं बनाने दे रहे। असल में, यह इनका दोहरा चरित्र है क्योंकि ये धरनों और प्रदर्शनों के बहाने दिल्ली में हुए 2000 करोड़ के क्लास रूम घोटाले में शामिल अपने नेताओं मनीष सिसोदिया और सतिंदर जैन के अपराधों पर पर्दा डालने की कोशिश कर रहे हैं। हम हमेशा पंजाब के हितों के साथ डटकर खड़े हैं और हमारा स्टैंड साफ है कि पंजाब के पास किसी भी सूबे को देने के लिए अतिरिक्त पानी नहीं है। लेकिन मानवता के आधार पर पीने का पानी देने में घटिया राजनीति करना आम आदमी पार्टी को तो शोभा दे सकता है, लेकिन यह पंजाबी संस्कृति और उसके सिद्धांतों के खिलाफ है। अमन अरोड़ा ने जाखड़ को पत्र लिखा पूछा सवाल वहीं, इस मामले में आम आदमी पार्टी AAP पंजाब प्रधान अमन अरोड़ा ने बीजेपी प्रधान सुनील जाखड़ को लिखा पत्र है। साथ ही कहा कि केंद्र और हरियाणा द्वारा पंजाब के पानी का हक मारने पर आप चुप क्यों है। आप पंजाब की मिट्टी के बेटे हो क्या आप की पंजाब की जनता के लिए कोई जवाब देही न। वहीं, आम आदमी ने आज पूरे राज्य में बीजेपी के खिलाफ प्रदर्शन करने का फैसला लिया है। इस दौरान वह पंजाब के हिस्से का पानी छोड़े जाने का विरोध करेंगे।भाजपा नेताओं के घरों और दफ्तर का घेराव किया जाएगा। हर जिले में आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता, मंत्री, सांसद और विधायक प्रदर्शन करेंगे। पंजाब के जज्बातों से न खेले बीजेपी मंत्री लालचंद कटारूचक का कहना है कि BBMB से 8500 क्यूसेक पानी हरियाणा को देने का फैसला पंजाब के जख्मों पर नमक छिड़कना है। बीजेपी के इस तरह के फैसले पंजाबियों का मनोबल नहीं तोड़ सकते हैं। बीजेपी को पंजाबियों और किसानों के जज्बातों के साथ खेलने का सिलसिला बंद करना चाहिए। पंजाब के इर्द-गिर्द पंजाब विरोधी माहौल बनाकर भाजपा अपनी राजनीतिक रोटियां सेक रही है। पंजाब के पास बिल्कुल भी फालतू पानी नहीं है और हरियाणा अपने हिस्से का पानी इस्तेमाल कर चुका है। हम पंजाब के पानियों की डट कर रक्षा करेंगे। ——————- पांच घंटे चली मीटिंग में कैसे हुआ हरियाणा को पानी देने का फैसला इस तरह चलेगी मीटिंग
BBMB के चंडीगढ़ मुख्यालय में हुई मीटिंग में हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली और सिंध के कमिश्नर के साथ भारत सरकार के प्रतिनिधि मौजूद थे। उन्होंने हरियाणा को कम पानी देने के लिए पंजाब के खिलाफ वोट का इस्तेमाल किया। जबकि, हिमाचल ने निष्पक्ष भूमिका निभाई। वहीं, पंजाब सरकार ने फैसले को मानने से इनकार कर दिया। हालांकि, भाजपा शासित राज्य एकजुट नजर आए। पंजाब ने साइन करने से मना कर दिया
सूत्रों के अनुसार, जब पंजाब सरकार के अधिकारी मीटिंग में काफी आक्रामक थे, तब हरियाणा ने पंजाब को तुरंत प्रभाव से अतिरिक्त पानी देने की बात कही। इससे पंजाब सरकार के प्रतिनिधि तल्खी में आ गए। उन्होंने साइन करने से मना कर दिया। जबकि, दूसरा मौका तब आया जब भाखड़ा के अधिकारियों ने कहा कि पंजाब के विरोध के बाद भी वह पानी छोड़ेंगे। पंजाब बोला- हरियाणा के लिए 1700 क्यूसिक पानी ही काफी
बोर्ड ने तर्क दिया कि स्पेशल केस के आधार पर हरियाणा को पानी देने के लिए रेगुलेशन मैनुअल अनुसार चलने की कोई जरूरत नहीं है। पंजाब सरकार ने इस पर सहमति देने से इनकार कर दिया। यह भी बात सामने आई कि रेगुलेशन मैनुअल संशोधन के लिए 3 मेंबरी तकनीकी कमेटी बना ली जाए। पंजाब सरकार ने इसे भी सहमति देने से इनकार कर दिया। पंजाब सरकार ने कहा कि अगर मानवता के आधार पर हरियाणा को पानी देने की जरूरत है, तो आबादी के हिसाब से हरियाणा को 1700 क्यूसेक पानी ही चाहिए। दो दिनों से गर्माया हुआ है विवाद
बता दें कि पंजाब और हरियाणा में पानी का विवाद 2 दिन से चल रहा है। पंजाब का कहना है कि हरियाणा अपने हिस्से का पानी इस्तेमाल कर चुका है। अब उनके पास हरियाणा को देने के लिए पानी की एक भी अतिरिक्त बूंद नहीं है। जबकि, हरियाणा दलील दे रहा है कि पंजाब उनके पानी में कटौती कर रहा है। दोनों पक्ष के CM इस मामले में खुलकर आ गए हैं। मामला केंद्र सरकार के पास पहुंचा। केंद्रीय बिजली मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने तो यहां तक कह दिया था कि पंजाब राजधर्म नहीं निभा रहा है। BBMB पर किसी को दबाव नहीं बनाने दिया जाएगा। इसके बाद पंजाब CM भगवंत मान ने हरियाणा CM को पत्र लिखा था कि उनके पास देने के लिए अतिरिक्त पानी नहीं है।
पंजाब-हरियाणा में चल रहे विवाद के बीच भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (BBMB) ने फैसला लिया है कि हरियाणा को भाखड़ा डैम से तुरंत प्रभाव से 8500 क्यूसेक पानी छोड़ा जाएगा। बुधवार को 5 घंटे तक चली बोर्ड की मीटिंग में यह फैसला हुआ।हालांकि, पंजाब सरकार के अधिकारियों ने इसका सख्त विरोध किया। यह मीटिंग केंद्रीय बिजली मंत्रालय के आदेश पर हुई थी, जिसके मंत्री हरियाणा के पूर्व CM मनोहर लाल खट्टर हैं। इसकी अध्यक्षता बोर्ड के चेयरमैन मनोज त्रिपाठी ने की। वहीं, पंजाब सीएम का कहना है कि केंद्र की बीजेपी सरकार का पंजाब के हकों पर एक और डाका है। जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेंगे। वहीं, पता चला है कि पंजाब इस मामले में अब कानून राय लेने की सोचा रहा है। दूसरी तरफ पंजाब के वित्तमंत्री हरपाल सिंह चीमा ने प्रेस कांफ्रेंस कर रहा है कि हरियाणा व राजस्थान दोनों अपने हिस्से का पानी प्रयोग कर चुके है। हम एक भी बूंद पानी हरियाणा और राजस्थान को नहीं देंगे। वहीं, उन्होंने कहा कि केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू और सुनील जाखड़ को बीजेपी से तुरंत इस्तीफा देना चाहिए। वहीं, जाखड़ ने कहा कि मानवता के आधार पर पीने का पानी देने में घटिया राजनीति करना आम आदमी पार्टी को तो शोभा दे सकता है, लेकिन यह पंजाबी संस्कृति और उसके सिद्धांतों के खिलाफ है। वहीं, शिरोमणि अकाली दल ने कहा कि सरकार द्वारा ठोस कार्रवाई की जाए ताकि हरियाणा को पंजाब के किसी भी हेड वर्क के माध्यम से अतिरिक्त पानी जारी न किया जाए और पहले से हरियाणा में बह रहा अतिरिक्त पानी कम किया जाए। यदि भगवंत मान हरियाणा और केंद्र सरकार के दबाव में झुकते हैं और पंजाब के हितों को बेचते हैं, तो @Akali_Dal_ राज्य के जल अधिकारों की रक्षा के लिए एक जन आंदोलन शुरू करेगा। पंजाब के नेताओं की इस मुद्दे पर सिलसिलेवार राय जानिए बीजेपी का एक और डाका, बर्दाश्त नहीं करेंगे
पंजाब के सीएम भगवंत मान का कहना है पंजाब और पंजाबियों के हक के पानी को BBMB के जरिए हरियाणा को देने के फैसले का पूरा पंजाब कड़ा विरोध करता है। केंद्र और हरियाणा की बीजेपी सरकार पंजाब के खिलाफ एकजुट हो गई है। यह हमारे हकों पर बीजेपी का एक और डाका है। हम किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेंगे। विरोध का सामना करने के लिए तैयार रहे भाजपा। बीजेपी कभी भी पंजाब और पंजाबियों की अपनी नहीं हो सकती। हरियाणा ने अपने पानी का हिस्सा कहीं और प्रयोग किया पंजाब के वित्तमंत्री हरपाल सिंह चीमा ने चंडीगढ़ में प्रेस कांफ्रेंस कहा कहा केंद्र सरकार व हरियाणा सरकार ने पंजाब के खिलाफ बड़ी साजिश रची गई है। पूरा देश जानता है कि देश के अन्न भंडार को भरने में पंजाब का सबसे बड़ा योगदान रहता है। हरित क्रांति के आने के बाद देश के लोगों का पेट भरने के लिए पंजाब ने अपनी जमीन से भूमिगत जल निकाला। क्योंकि उस समय देश के कई हिस्सों में अकाल पड़ जाता था। आज पंजाब के 153 जोन में से 115 जोन ब्लैक जोन घोषित किए जा चुके हैं। उनमें पानी नाम की कोई चीज नहीं है। आज किसानों को 700 से 1500 फुट गहरे बोर लगवाने पड़ रहे हैं। लेकिन केंद्र सरकार भारत को मारने का यत्न कर रही है। हरियाणा को पानी एक भी बूंद नहीं जाने देंगे। हरियाणा सरकार को इस बारे में सोचना चाहिए था कि पानी का प्रयोग कैसे करना चाहिए। यदि वह पानी का बर्बाद न करते, तो 21 मई तक पूरा प्रयोग होना था। उन्होंने कहा कि इसका मतलब यह है कि जो पानी पीने के लिए दिया गया, वह अन्य कामों में प्रयोग किया गया। एक व्यक्ति को प्रतिदिन 135 लीटर पानी की जरूरत है। चीमा ने पंजाब के भाजपा नेताओं से पूछा कि क्या वे पंजाब से गद्दारी नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि रवनीत बिट्टू और सुनील जाखड़ को तुरंत इस्तीफा देना चाहिए। वे पंजाब विरोधी भूमिका निभा रहे हैं। पूरा देश उन्हें देख रहा है। उन्हें तुरंत पंजाब के साथ खड़ा होना चाहिए।
राजस्थान व हरियाणा ने अधिक पानी प्रयोग किया भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड से हरियाणा और राजस्थान को अपना पानी 21 मई से पहले प्रयोग करना था। वे अपने हिस्सा का पानी ले चुके हैं। राजस्थान का अलॉटेड शेयर 3398 MAF है। इसमें उन्होंने 3738 MAF प्रयोग कर लिया है। यह 10 % अधिक है। पंजाब को अलॉटेड शेयर 5512 MAF है। राज्य ने 4925 MAF पानी प्रयोग किया है। 89 फीसदी पानी प्रयोग किया है। 11 फीसदी बचता है। जबकि हरियाणा को 2987 MAF पानी अलॉट है। 3091 MAF पानी प्रयोग किया गया है। यह 103 फीसदी बनता है। डैमों में पानी बहुत कम है पंजाब के डैमों में पानी कम है। भाखड़ा डैम का लेवल 1680 फीट पानी भर सकता है। इसमें 1557 फीट पानी भरा है। पोंग डैम का लेवल 1390 फीट है। उसमें 1294 फीट पानी है। रणजीत सागर डैम में 1734 फीट पानी की क्षमता है। इसमें 1642 फीट पानी है। सिसोदिया और जैन के अपराधों पर डालने की कोशिश भाजपा प्रधान सुनीन जाखड़ को अमन अरोड़ा द्वारा पत्र लिखने व इस मुद्दे पर घेरने के बाद अब उन्होंने भी पंजाब सरकार को घेरा है। जाखड़ा कहना है कि आज जब अंतरराष्ट्रीय सीमा पर युद्ध जैसे हालात बने हुए हैं, ऐसे मौके पर पंजाब सरकार सूबे की फोर्स को धरनों और प्रदर्शनों में उलझा कर सूबे को अस्थिर कर रही है। जबकि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान खुद हरियाणा चुनावों के समय कहकर आए थे कि दिल्ली और हरियाणा को पानी दिया जाएगा और सुप्रीम कोर्ट में भी सरकार ने कहा था कि हमें किसान एसवाईएल नहर नहीं बनाने दे रहे। असल में, यह इनका दोहरा चरित्र है क्योंकि ये धरनों और प्रदर्शनों के बहाने दिल्ली में हुए 2000 करोड़ के क्लास रूम घोटाले में शामिल अपने नेताओं मनीष सिसोदिया और सतिंदर जैन के अपराधों पर पर्दा डालने की कोशिश कर रहे हैं। हम हमेशा पंजाब के हितों के साथ डटकर खड़े हैं और हमारा स्टैंड साफ है कि पंजाब के पास किसी भी सूबे को देने के लिए अतिरिक्त पानी नहीं है। लेकिन मानवता के आधार पर पीने का पानी देने में घटिया राजनीति करना आम आदमी पार्टी को तो शोभा दे सकता है, लेकिन यह पंजाबी संस्कृति और उसके सिद्धांतों के खिलाफ है। अमन अरोड़ा ने जाखड़ को पत्र लिखा पूछा सवाल वहीं, इस मामले में आम आदमी पार्टी AAP पंजाब प्रधान अमन अरोड़ा ने बीजेपी प्रधान सुनील जाखड़ को लिखा पत्र है। साथ ही कहा कि केंद्र और हरियाणा द्वारा पंजाब के पानी का हक मारने पर आप चुप क्यों है। आप पंजाब की मिट्टी के बेटे हो क्या आप की पंजाब की जनता के लिए कोई जवाब देही न। वहीं, आम आदमी ने आज पूरे राज्य में बीजेपी के खिलाफ प्रदर्शन करने का फैसला लिया है। इस दौरान वह पंजाब के हिस्से का पानी छोड़े जाने का विरोध करेंगे।भाजपा नेताओं के घरों और दफ्तर का घेराव किया जाएगा। हर जिले में आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता, मंत्री, सांसद और विधायक प्रदर्शन करेंगे। पंजाब के जज्बातों से न खेले बीजेपी मंत्री लालचंद कटारूचक का कहना है कि BBMB से 8500 क्यूसेक पानी हरियाणा को देने का फैसला पंजाब के जख्मों पर नमक छिड़कना है। बीजेपी के इस तरह के फैसले पंजाबियों का मनोबल नहीं तोड़ सकते हैं। बीजेपी को पंजाबियों और किसानों के जज्बातों के साथ खेलने का सिलसिला बंद करना चाहिए। पंजाब के इर्द-गिर्द पंजाब विरोधी माहौल बनाकर भाजपा अपनी राजनीतिक रोटियां सेक रही है। पंजाब के पास बिल्कुल भी फालतू पानी नहीं है और हरियाणा अपने हिस्से का पानी इस्तेमाल कर चुका है। हम पंजाब के पानियों की डट कर रक्षा करेंगे। ——————- पांच घंटे चली मीटिंग में कैसे हुआ हरियाणा को पानी देने का फैसला इस तरह चलेगी मीटिंग
BBMB के चंडीगढ़ मुख्यालय में हुई मीटिंग में हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली और सिंध के कमिश्नर के साथ भारत सरकार के प्रतिनिधि मौजूद थे। उन्होंने हरियाणा को कम पानी देने के लिए पंजाब के खिलाफ वोट का इस्तेमाल किया। जबकि, हिमाचल ने निष्पक्ष भूमिका निभाई। वहीं, पंजाब सरकार ने फैसले को मानने से इनकार कर दिया। हालांकि, भाजपा शासित राज्य एकजुट नजर आए। पंजाब ने साइन करने से मना कर दिया
सूत्रों के अनुसार, जब पंजाब सरकार के अधिकारी मीटिंग में काफी आक्रामक थे, तब हरियाणा ने पंजाब को तुरंत प्रभाव से अतिरिक्त पानी देने की बात कही। इससे पंजाब सरकार के प्रतिनिधि तल्खी में आ गए। उन्होंने साइन करने से मना कर दिया। जबकि, दूसरा मौका तब आया जब भाखड़ा के अधिकारियों ने कहा कि पंजाब के विरोध के बाद भी वह पानी छोड़ेंगे। पंजाब बोला- हरियाणा के लिए 1700 क्यूसिक पानी ही काफी
बोर्ड ने तर्क दिया कि स्पेशल केस के आधार पर हरियाणा को पानी देने के लिए रेगुलेशन मैनुअल अनुसार चलने की कोई जरूरत नहीं है। पंजाब सरकार ने इस पर सहमति देने से इनकार कर दिया। यह भी बात सामने आई कि रेगुलेशन मैनुअल संशोधन के लिए 3 मेंबरी तकनीकी कमेटी बना ली जाए। पंजाब सरकार ने इसे भी सहमति देने से इनकार कर दिया। पंजाब सरकार ने कहा कि अगर मानवता के आधार पर हरियाणा को पानी देने की जरूरत है, तो आबादी के हिसाब से हरियाणा को 1700 क्यूसेक पानी ही चाहिए। दो दिनों से गर्माया हुआ है विवाद
बता दें कि पंजाब और हरियाणा में पानी का विवाद 2 दिन से चल रहा है। पंजाब का कहना है कि हरियाणा अपने हिस्से का पानी इस्तेमाल कर चुका है। अब उनके पास हरियाणा को देने के लिए पानी की एक भी अतिरिक्त बूंद नहीं है। जबकि, हरियाणा दलील दे रहा है कि पंजाब उनके पानी में कटौती कर रहा है। दोनों पक्ष के CM इस मामले में खुलकर आ गए हैं। मामला केंद्र सरकार के पास पहुंचा। केंद्रीय बिजली मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने तो यहां तक कह दिया था कि पंजाब राजधर्म नहीं निभा रहा है। BBMB पर किसी को दबाव नहीं बनाने दिया जाएगा। इसके बाद पंजाब CM भगवंत मान ने हरियाणा CM को पत्र लिखा था कि उनके पास देने के लिए अतिरिक्त पानी नहीं है।