अपनी मर्जी से शादी करने मात्र से जोड़े को सुरक्षा की मांग करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। यदि उनके साथ दुर्व्यवहार या मारपीट की जाती है तो कोर्ट और पुलिस उनके बचाव में आएगी। उन्हें एक-दूसरे के साथ खड़े होकर समाज का सामना करना चाहिए। ये आदेश मंगलवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस सौरभ श्रीवास्तव ने चित्रकूट की श्रेया केसरवानी और अन्य की याचिका का निपटारा करते हुए दिया। हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट का हवाला देते हुए कहा- जिन्होंने अपनी मर्जी से शादी कर ली हो, कोर्ट ऐसे युवाओं को सुरक्षा देने के लिए नहीं बनी है। सुरक्षा की गुहार लगाने के लिए उन्हें वास्तविक खतरा होना चाहिए। अब पूरा मामला पढ़िए…
चित्रकूट में युवक ने लव मैरिज की। इसके बाद कोर्ट में सुरक्षा को लेकर याचिका दायर की। कोर्ट ने कहा- याचिकाकर्ताओं ने SP चित्रकूट को प्रार्थना पत्र दिया है। पुलिस वास्तविक खतरे की स्थिति को देखकर कानून के मुताबिक जरूरी कदम उठाए। याचियों ने कोर्ट में अपील की थी कि हमारे जीवन में विपक्षी हस्तक्षेप न करें। कोर्ट ने कहा- याचिकाकर्ताओं पर ऐसा कोई खतरा नहीं दिख रहा, जिसके आधार पर उन्हें पुलिस संरक्षण दिलाया जाए। दूसरे पक्ष की तरफ से याचियों पर शारीरिक या मानसिक हमला करने का कोई सबूत नहीं है। याचियों ने विपक्षियों के किसी आचरण को लेकर FIR दर्ज करने की पुलिस को कोई अर्जी नहीं दी है। इसलिए पुलिस सुरक्षा देने का कोई केस नहीं बनता। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने छात्रा से कहा था- रेप के लिए खुद जिम्मेदार हो… 10 अप्रैल को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने छात्रा पर टिप्पणी करते हुए कहा था- ‘रेप को खुद जिम्मेदार हो।’ कोर्ट ने रेप के आरोपी को जमानत दे दी थी। कोर्ट ने कहा था- सेक्स दोनों की सहमति से हुआ था। यदि पीड़ित के आरोपों को सही मान भी लिया जाए, तो इस नतीजे पर पहुंचा जा सकता है कि उसने खुद ही मुसीबत को न्योता दिया था। मेडिकल जांच में हाइमन टूटा हुआ पाया गया था, लेकिन डॉक्टर ने यौन हिंसा की बात नहीं की। गौतमबुद्धनगर की एक यूनिवर्सिटी में MA की छात्रा ने 1 सितंबर 2024 को थाना सेक्टर 126 में रेप का केस दर्ज कराया था। छात्रा ने अपनी शिकायत में लिखा था कि वह नोएडा के सेक्टर 126 स्थित एक पीजी हॉस्टल (पेइंग गेस्ट) में रहकर पढ़ाई करती है। 21 सितंबर 2024 को वह अपनी दोस्तों के साथ दिल्ली घूमने गई थी। हौज खास में सभी ने पार्टी की, जहां उसकी तीन दोस्तों के साथ तीन लड़के भी आए थे। छात्रा ने बताया था कि बार में निश्चल चांडक भी आया था। सबने शराब पी। पीड़ित छात्रा को काफी नशा हो गया था। रात के 3 बजे थे। निश्चल ने उसे अपने साथ चलने को कहा। पीड़ित ने आरोप लगाया कि आरोपी निश्चल रास्ते भर उसे गलत तरीके से छूता रहा। छात्रा ने नोएडा के एक घर में चलने को कहा था, लेकिन लड़का हरियाणा के गुरुग्राम स्थित अपने किसी रिश्तेदार के फ्लैट पर ले गया, जहां उसके साथ दो बार रेप किया। पूरी खबर पढ़ें… अनुकंपा नियुक्ति का मकसद चूल्हे की आग को जिंदा रखना है : हाईकोर्ट इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा- अनुकंपा नियुक्ति का मकसद घर के मुखिया की मौत से ठंडी हो चुकी चूल्हे की आग को जिंदा रखना है। जिंदगी को मालामाल बनाना नहीं। जीविका चलाने में सक्षम परिवार को नियुक्ति देना नीति और संविधान के खिलाफ है। इस टिप्पणी के साथ जस्टिस अजय भनोट की अदालत ने प्रयागराज की चंचल सोनकर की याचिका खारिज कर दी। याची ने भारतीय स्टेट बैंक में तैनात रहे पति की मौत के बाद अनुकंपा नियुक्ति की मांग की थी। बैंक प्रबंधन ने 24 जुलाई 2023 को उनका दावा यह कहते हुए खारिज कर दिया कि परिवार की आर्थिक स्थिति ‘वित्तीय संकट’ की श्रेणी में नहीं आती। इसके खिलाफ चंचल ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
अधिवक्ता ने दलील दी कि 17 नवंबर 2022 को पति के निधन के बाद याची पत्नी गृहिणी है, जो बेसहारा हो गई है। लिहाजा, वह अनुकंपा नियुक्ति की हकदार है। वहीं, बैंक की ओर से बताया गया कि कर्मचारी के निधन के बाद परिवार को विभिन्न मदों में करीब 1.55 करोड़ रुपए मिल चुके हैं। ब्याज की दरों के मुताबिक परिवार की मासिक आय करीब 99,555 रुपए बनती है, जो मृतक के अंतिम मासिक वेतन से करीब 75% ज्यादा है। इसलिए परिवार को ‘वित्तीय संकट’ की श्रेणी में नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति के दावे को खारिज कर दिया। ——————– हाईकोर्ट से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… इलाहाबाद हाईकोर्ट बोला- स्तन पकड़ना और लड़की को खींचना रेप नहीं, ये सिर्फ गंभीर यौन उत्पीड़न ‘पीड़िता के स्तनों को पकड़ना, उसके पायजामे का नाड़ा तोड़ना, उसे पुलिया के नीचे खींचकर ले जाने की कोशिश करना रेप या रेप की कोशिश नहीं मान सकते।’ यह टिप्पणी इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा की पीठ ने की। जस्टिस मिश्रा ने 3 आरोपियों के खिलाफ दायर क्रिमिनल रिवीजन पिटीशन स्वीकार कर ली। अदालत ने आरोपी आकाश और पवन पर IPC की धारा 376 (बलात्कार) और POCSO अधिनियम की धारा 18 के तहत लगे आरोपों को घटा दिया। पढ़ें पूरी खबर…
अपनी मर्जी से शादी करने मात्र से जोड़े को सुरक्षा की मांग करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। यदि उनके साथ दुर्व्यवहार या मारपीट की जाती है तो कोर्ट और पुलिस उनके बचाव में आएगी। उन्हें एक-दूसरे के साथ खड़े होकर समाज का सामना करना चाहिए। ये आदेश मंगलवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस सौरभ श्रीवास्तव ने चित्रकूट की श्रेया केसरवानी और अन्य की याचिका का निपटारा करते हुए दिया। हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट का हवाला देते हुए कहा- जिन्होंने अपनी मर्जी से शादी कर ली हो, कोर्ट ऐसे युवाओं को सुरक्षा देने के लिए नहीं बनी है। सुरक्षा की गुहार लगाने के लिए उन्हें वास्तविक खतरा होना चाहिए। अब पूरा मामला पढ़िए…
चित्रकूट में युवक ने लव मैरिज की। इसके बाद कोर्ट में सुरक्षा को लेकर याचिका दायर की। कोर्ट ने कहा- याचिकाकर्ताओं ने SP चित्रकूट को प्रार्थना पत्र दिया है। पुलिस वास्तविक खतरे की स्थिति को देखकर कानून के मुताबिक जरूरी कदम उठाए। याचियों ने कोर्ट में अपील की थी कि हमारे जीवन में विपक्षी हस्तक्षेप न करें। कोर्ट ने कहा- याचिकाकर्ताओं पर ऐसा कोई खतरा नहीं दिख रहा, जिसके आधार पर उन्हें पुलिस संरक्षण दिलाया जाए। दूसरे पक्ष की तरफ से याचियों पर शारीरिक या मानसिक हमला करने का कोई सबूत नहीं है। याचियों ने विपक्षियों के किसी आचरण को लेकर FIR दर्ज करने की पुलिस को कोई अर्जी नहीं दी है। इसलिए पुलिस सुरक्षा देने का कोई केस नहीं बनता। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने छात्रा से कहा था- रेप के लिए खुद जिम्मेदार हो… 10 अप्रैल को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने छात्रा पर टिप्पणी करते हुए कहा था- ‘रेप को खुद जिम्मेदार हो।’ कोर्ट ने रेप के आरोपी को जमानत दे दी थी। कोर्ट ने कहा था- सेक्स दोनों की सहमति से हुआ था। यदि पीड़ित के आरोपों को सही मान भी लिया जाए, तो इस नतीजे पर पहुंचा जा सकता है कि उसने खुद ही मुसीबत को न्योता दिया था। मेडिकल जांच में हाइमन टूटा हुआ पाया गया था, लेकिन डॉक्टर ने यौन हिंसा की बात नहीं की। गौतमबुद्धनगर की एक यूनिवर्सिटी में MA की छात्रा ने 1 सितंबर 2024 को थाना सेक्टर 126 में रेप का केस दर्ज कराया था। छात्रा ने अपनी शिकायत में लिखा था कि वह नोएडा के सेक्टर 126 स्थित एक पीजी हॉस्टल (पेइंग गेस्ट) में रहकर पढ़ाई करती है। 21 सितंबर 2024 को वह अपनी दोस्तों के साथ दिल्ली घूमने गई थी। हौज खास में सभी ने पार्टी की, जहां उसकी तीन दोस्तों के साथ तीन लड़के भी आए थे। छात्रा ने बताया था कि बार में निश्चल चांडक भी आया था। सबने शराब पी। पीड़ित छात्रा को काफी नशा हो गया था। रात के 3 बजे थे। निश्चल ने उसे अपने साथ चलने को कहा। पीड़ित ने आरोप लगाया कि आरोपी निश्चल रास्ते भर उसे गलत तरीके से छूता रहा। छात्रा ने नोएडा के एक घर में चलने को कहा था, लेकिन लड़का हरियाणा के गुरुग्राम स्थित अपने किसी रिश्तेदार के फ्लैट पर ले गया, जहां उसके साथ दो बार रेप किया। पूरी खबर पढ़ें… अनुकंपा नियुक्ति का मकसद चूल्हे की आग को जिंदा रखना है : हाईकोर्ट इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा- अनुकंपा नियुक्ति का मकसद घर के मुखिया की मौत से ठंडी हो चुकी चूल्हे की आग को जिंदा रखना है। जिंदगी को मालामाल बनाना नहीं। जीविका चलाने में सक्षम परिवार को नियुक्ति देना नीति और संविधान के खिलाफ है। इस टिप्पणी के साथ जस्टिस अजय भनोट की अदालत ने प्रयागराज की चंचल सोनकर की याचिका खारिज कर दी। याची ने भारतीय स्टेट बैंक में तैनात रहे पति की मौत के बाद अनुकंपा नियुक्ति की मांग की थी। बैंक प्रबंधन ने 24 जुलाई 2023 को उनका दावा यह कहते हुए खारिज कर दिया कि परिवार की आर्थिक स्थिति ‘वित्तीय संकट’ की श्रेणी में नहीं आती। इसके खिलाफ चंचल ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
अधिवक्ता ने दलील दी कि 17 नवंबर 2022 को पति के निधन के बाद याची पत्नी गृहिणी है, जो बेसहारा हो गई है। लिहाजा, वह अनुकंपा नियुक्ति की हकदार है। वहीं, बैंक की ओर से बताया गया कि कर्मचारी के निधन के बाद परिवार को विभिन्न मदों में करीब 1.55 करोड़ रुपए मिल चुके हैं। ब्याज की दरों के मुताबिक परिवार की मासिक आय करीब 99,555 रुपए बनती है, जो मृतक के अंतिम मासिक वेतन से करीब 75% ज्यादा है। इसलिए परिवार को ‘वित्तीय संकट’ की श्रेणी में नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति के दावे को खारिज कर दिया। ——————– हाईकोर्ट से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… इलाहाबाद हाईकोर्ट बोला- स्तन पकड़ना और लड़की को खींचना रेप नहीं, ये सिर्फ गंभीर यौन उत्पीड़न ‘पीड़िता के स्तनों को पकड़ना, उसके पायजामे का नाड़ा तोड़ना, उसे पुलिया के नीचे खींचकर ले जाने की कोशिश करना रेप या रेप की कोशिश नहीं मान सकते।’ यह टिप्पणी इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा की पीठ ने की। जस्टिस मिश्रा ने 3 आरोपियों के खिलाफ दायर क्रिमिनल रिवीजन पिटीशन स्वीकार कर ली। अदालत ने आरोपी आकाश और पवन पर IPC की धारा 376 (बलात्कार) और POCSO अधिनियम की धारा 18 के तहत लगे आरोपों को घटा दिया। पढ़ें पूरी खबर…