सौरभ हत्याकांड में आरोपी पत्नी मुस्कान और उसका प्रेमी साहिल 9 दिन से मेरठ जेल में हैं। दोनों के केस लड़ने की जिम्मेदारी सरकारी वकील रेखा जैन को सौंपी गई है। मुस्कान ने 1 मार्च को नींद की दवा खरीदने से लेकर ड्रम, सीमेंट और चाकू खरीदने की दुकानों के बारे में पुलिस को बताया। पुलिस ने सभी दुकानों के मालिकों के बयान दर्ज किए। मुस्कान ने 3 मार्च की रात साहिल के साथ मिलकर सौरभ को मार डाला था, लेकिन डेडबॉडी 18 मार्च को बरामद हुई। दोनों घटनाक्रम के बीच 15 दिन का अंतर रहा। पुलिस ने सौरभ हत्याकांड में 4 अहम गवाह माने हैं। इनमें पहला- चाकू बेचने वाला, दूसरा- दवा दुकानदार, तीसरा- सीमेंट दुकानदार, चौथा- ड्रम दुकानदार। दैनिक भास्कर एप टीम भी उन गवाहों के पास पहुंची, जहां से मुस्कान ने पति सौरभ को मारने और उसकी बॉडी के 4 टुकड़ों को छिपाने के लिए सामान खरीदा था। यह सामान किस तरह लिया गया? ड्रम के लिए क्या बहाना बनाया? दवा के लिए क्या बीमारी बताई गई? पढ़िए रिपोर्ट… सबसे पहले हम गोल्डन सप्लाई सीमेंट शॉप पहुंचे। काउंटर पर बैठे राज ने कहा- शॉप के मालिक आशु भैया हैं। मुस्कान हत्याकांड में पुलिस कहती है कि सीमेंट हमारी दुकान से खरीदा गया, लेकिन मुस्कान हमारी दुकान से सीमेंट लेकर नहीं गई। दुकान में 2 CCTV लगे हैं, दोनों की रिकॉर्डिंग चेक करवाई गई, लेकिन मुस्कान दिखी नहीं है। दुकान के बाहर ठेले-रिक्शे वाले खड़े रहते हैं, अगर यहां से सीमेंट खरीदी जाती, तो कोई तो उसको पहचान ही लेता। उन्होंने कहा- हम दो या तीन बोरी सीमेंट बेचते भी नहीं हैं। ऐसे लोग जिन्हें फुटकर में खरीदना होता है, वे स्कूटी पर आते हैं, बोरी रखकर ले जाते हैं। हमारी दुकान का नाम गलत लिख दिया गया है। बाजार में आगे एक जैन सीमेंट की भी दुकान है, हो सकता है कि सीमेंट वहां से खरीदी गई हो। उन्होंने कहा- पुलिस 19 मार्च को पूछताछ के लिए आई थी। उन्होंने मुस्कान की तस्वीर दिखाकर पूछा कि क्या ये महिला तुम्हारे यहां से सीमेंट खरीदकर ले गई थी। पुलिस ने हमारे कैमरे भी चेक किए। कुछ नहीं मिला, कैमरों में 7 दिन की रिकार्डिंग रहती है। इसके बाद हमारी मुलाकात घंटाघर के बाजार में मुस्कान को ड्रम बेचने वाले सैफुद्दीन से हुई। वह कहते हैं- हमारी दुकान 50 साल पुरानी है। आज तक मैंने सुना नहीं कि किसी ने ड्रम का ऐसा इस्तेमाल किया हो। लोग ड्रम को अनाज, दूध, घरेलू चीजें स्टोर करने के लिए ले जाते हैं। मुस्कान 4 मार्च की सुबह हमारी दुकान पर आई थी। उसने गेहूं रखने के लिए एक बड़ा ड्रम मांगा था। हमने प्लास्टिक का ड्रम 1100 रुपए में बेचा। वह 200 लीटर का ड्रम ई रिक्शा पर लेकर गई। वो हमारे लिए सिर्फ एक ग्राहक थी। मीडिया में जब हमने सौरभ हत्याकांड की खबर पढ़ी, तब भी हम इस लड़की को पहचान नहीं सके, क्योंकि 15 दिन पुरानी बात हो चुकी थी, लेकिन जब पुलिसवाले हमसे पूछताछ करने आए, उन्होंने उसका फोटो दिखाया और सारी जानकारी दी, तब हमें याद आया कि मुस्कान ने हमारी ही दुकान से ड्रम लिया था। हमारे यहां CCTV नहीं है। उसके (मुस्कान) चेहरे पर कोई भी ऐसा हावभाव नजर नहीं आ रहा था कि वह इस ड्रम को लाश ठिकाने के लिए यूज करने वाली है। इस हत्या के बाद ड्रम बेचने वालों पर भी असर पड़ा है। लोग नीले ड्रम को बम या मिसाइल की तरह पेश कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर रील्स ने डर का माहौल भी बनाया है। लोग नीले रंग का ड्रम कम खरीद रहे हैं। अब हम लोग ड्रम का रंग बदलकर बेच रहे हैं। अब हम सफेद, नारंगी, पीले, काले, हरे और लाल रंग के ड्रम मंगवाने लगे हैं। इसके बाद हम खैरनगर में उषा मेडिकल स्टोर पहुंचे। यहां के संचालक अमित जोशी ने कहा- मुस्कान हमारी शॉप पर एक बुजुर्ग के साथ आई थी। बुजुर्ग के ही मोबाइल पर दवा का पर्चा दिखाया, वो एक डॉक्टर का प्रिस्क्रिप्शन था। हम बिना डॉक्टर के पर्चे के दवा नहीं बेचते। पर्चे में 2 सामान्य दवाएं और एक इंजेक्शन मिडाजोलम था। मिडाजोलम दवा को दौरा पड़ने पर या दिमाग में कुछ दिक्कत होने पर दिया जाता है। मुस्कान इस दवा का इस्तेमाल हत्या के लिए करने वाली हैं, यह कोई भी नहीं कह सकता था। हम सभी ग्राहकों से ये सब नहीं पूछते, हर दिन 100 से ज्यादा नए कस्टमर यहां आते हैं। उन्होंने कहा- मैंने तो उसे ढंग से पहचाना भी नहीं। जब पुलिसवालों ने हमसे पूछताछ की, तब हमें पता चला कि मुस्कान यहां आई थी। वो कब आई थी? किस टाइम आई थी? हम ये नहीं बता सकते। दुकान के CCTV में 15 दिन तक की ही रिकॉर्डिंग सुरक्षित रहती है। जो दवाएं मुस्कान काे चाहिए थी, उसमें एक इंजेक्शन हमारे यहां नहीं था, उसे हमने पड़ोस की दुकान से मंगाकर उन्हें दिया था। वो 5 एमएल का इंजेक्शन वॉयल था। अगर इंजेक्शन वॉयल को पेनिट्रेट (लगाने) करने की बजाय ओरली (मुंह से) देते हैं, तब वह रिएक्शन कर देता है। बर्तन दुकानदार अंकित ने कहा- हर दिन अलग-अलग कस्टमर हमारे पास आते हैं, लेकिन हमें उनके फेस याद नहीं रहते। हो सकता है कि मुस्कान हमारे यहां आई हो। यह चलता फिरता बाजार है। लोग हमारी दुकान से रोजमर्रा की चीजें खरीदने आते हैं। अगर वह हमारी दुकान आई होगी, तो हो सकता है कि उसने चाकू हमारी दुकान से खरीदा होगा। पुलिस मुस्कान को लेकर हमारी दुकान पर पूछताछ के लिए नहीं आई है। दरअसल, हमारे यहां CCTV की रिकॉर्डिंग 10 मार्च से है, उससे पुरानी नहीं है। जब टीवी पर मुस्कान का चेहरा देखा था, तब एक बार लगा कि शायद इसको कहीं देखा है। चूंकि ब्रह्मपुरी की वारदात है, ऐसे में हो सकता है कि वह हमारी ही दुकान से चाकू लेकर गई हो, लेकिन वह हमारी रेगुलर कस्टमर नहीं है। ये चाकू फ्रूट नाइफ है, इसे सब्जी-फल काटने में यूज करते हैं। चॉपिंग बोर्ड के साथ ये नाइफ का सेट बिकता है। हमारा ये इलाका हिंदू बाहुल्य है, इसलिए यहां चिकन आदि काटने के लिए चाकू लेने लोग नहीं आते। हम किसी कस्टमर से ये नहीं पूछते कि वो इस चाकू से क्या काटेंगे। कस्टमर आकर कहता है कि चाकू चाहिए। जैसा वो कहता है, वैसा दे देते हैं। हम आपको बताएं कि आजकल लोग यूट्यूब से देखकर बड़े-बड़े चाकू लेने आते हैं। अब पूरा मामला समझिए… 3 मार्च की रात साहिल के साथ मिलकर सौरभ को मार डाला
लंदन से लौटकर मेरठ आए मर्चेंट नेवी में अफसर सौरभ कुमार राजपूत की उनकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी ने 3 मार्च की रात को हत्या कर दी। इस काम में उसका साथ बॉयफ्रेंड साहिल शुक्ला उर्फ मोहित ने दिया। पहले खाने में दवा मिलाकर बेहोश किया। फिर बेडरूम में सोते समय पति के सीने में मुस्कान ने ही पहला चाकू मारा। मौत के बाद लाश को बाथरूम में ले गए। जहां साहिल ने दोनों हाथ और सिर काटकर धड़ से अलग किया। बॉडी को ठिकाने लगाने के लिए प्लास्टिक के ड्रम में टुकड़े डाले। फिर उसमें सीमेंट का घोल भर दिया। परिवार और पड़ोसियों को गुमराह करने के लिए मुस्कान शिमला-मनाली चली गई। 13 दिन तक वह इंस्टाग्राम पर वीडियो-फोटो अपलोड करती रही, ताकि लोग यही समझते रहें कि वे लोग घूम रहे हैं। इस कत्ल से पर्दा तब हटा, जब 18 मार्च को सौरभ का छोटा भाई राहुल अपने भाई के ब्रह्मपुरी के इंदिरा सेकेंड स्थित घर पर पहुंचा। यहां उसने मुस्कान को एक लड़के (साहिल) के साथ घूमते देखा। भाई कहां हैं? पूछने पर सही जवाब मुस्कान नहीं दे सकी। घर के अंदर से बदबू भी आ रही थी। राहुल ने शोर मचाया, तब पड़ोसी भी इकट्ठा हो गए। पुलिस आई तो मर्डर का पता चला। पुलिस कस्टडी में मुस्कान और साहिल ने कत्ल की पूरी कहानी सुनाई है। SP सिटी आयुष विक्रम सिंह ने कहा- 7 दिन में चार्जशीट कोर्ट में सब्मिट कर देंगे। साहिल, मुस्कान और सौरभ के मोबाइल रिकॉर्ड की फोरेंसिक रिपोर्ट के लिए आगरा लेटर भेजा गया है। सौरभ के बेडरूम, लॉबी और बाथरूम में बेंजामिन टेस्ट करके ब्लड के सैंपल लिए गए हैं। चादर और कपड़ों के नमूने भी मिले हैं, इनमें केस डायरी बनाने में काफी मदद मिली है। —————————————- सौरभ हत्याकांड से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें- मेरठ हत्याकांड, मुस्कान-साहिल को फांसी होगी या उम्रकैद: एक्सपर्ट बोले- रेयरेस्ट क्राइम; दोनों चाकू और कटा सिर-हाथ पिलो कवर में रखे, सीमेंट से जमाया सौरभ की बॉडी के 4 टुकड़े करके तकिए के कवर में रखे गए। 2 चाकू भी ड्रम में सीमेंट से जमा दिए गए। पुलिस ने इन्हें बरामद कर लिया है। अब अगर मुस्कान और साहिल अपने कबूलनामे से मुकर भी जाएं, तब भी सबूत पर्याप्त हैं। यह कहना है मेरठ के सरकारी वकील आलोक पांडेय का। अब तक कई ठोस सबूत पुलिस के हाथ लगे हैं। पढ़िए पूरी खबर…
सौरभ हत्याकांड में आरोपी पत्नी मुस्कान और उसका प्रेमी साहिल 9 दिन से मेरठ जेल में हैं। दोनों के केस लड़ने की जिम्मेदारी सरकारी वकील रेखा जैन को सौंपी गई है। मुस्कान ने 1 मार्च को नींद की दवा खरीदने से लेकर ड्रम, सीमेंट और चाकू खरीदने की दुकानों के बारे में पुलिस को बताया। पुलिस ने सभी दुकानों के मालिकों के बयान दर्ज किए। मुस्कान ने 3 मार्च की रात साहिल के साथ मिलकर सौरभ को मार डाला था, लेकिन डेडबॉडी 18 मार्च को बरामद हुई। दोनों घटनाक्रम के बीच 15 दिन का अंतर रहा। पुलिस ने सौरभ हत्याकांड में 4 अहम गवाह माने हैं। इनमें पहला- चाकू बेचने वाला, दूसरा- दवा दुकानदार, तीसरा- सीमेंट दुकानदार, चौथा- ड्रम दुकानदार। दैनिक भास्कर एप टीम भी उन गवाहों के पास पहुंची, जहां से मुस्कान ने पति सौरभ को मारने और उसकी बॉडी के 4 टुकड़ों को छिपाने के लिए सामान खरीदा था। यह सामान किस तरह लिया गया? ड्रम के लिए क्या बहाना बनाया? दवा के लिए क्या बीमारी बताई गई? पढ़िए रिपोर्ट… सबसे पहले हम गोल्डन सप्लाई सीमेंट शॉप पहुंचे। काउंटर पर बैठे राज ने कहा- शॉप के मालिक आशु भैया हैं। मुस्कान हत्याकांड में पुलिस कहती है कि सीमेंट हमारी दुकान से खरीदा गया, लेकिन मुस्कान हमारी दुकान से सीमेंट लेकर नहीं गई। दुकान में 2 CCTV लगे हैं, दोनों की रिकॉर्डिंग चेक करवाई गई, लेकिन मुस्कान दिखी नहीं है। दुकान के बाहर ठेले-रिक्शे वाले खड़े रहते हैं, अगर यहां से सीमेंट खरीदी जाती, तो कोई तो उसको पहचान ही लेता। उन्होंने कहा- हम दो या तीन बोरी सीमेंट बेचते भी नहीं हैं। ऐसे लोग जिन्हें फुटकर में खरीदना होता है, वे स्कूटी पर आते हैं, बोरी रखकर ले जाते हैं। हमारी दुकान का नाम गलत लिख दिया गया है। बाजार में आगे एक जैन सीमेंट की भी दुकान है, हो सकता है कि सीमेंट वहां से खरीदी गई हो। उन्होंने कहा- पुलिस 19 मार्च को पूछताछ के लिए आई थी। उन्होंने मुस्कान की तस्वीर दिखाकर पूछा कि क्या ये महिला तुम्हारे यहां से सीमेंट खरीदकर ले गई थी। पुलिस ने हमारे कैमरे भी चेक किए। कुछ नहीं मिला, कैमरों में 7 दिन की रिकार्डिंग रहती है। इसके बाद हमारी मुलाकात घंटाघर के बाजार में मुस्कान को ड्रम बेचने वाले सैफुद्दीन से हुई। वह कहते हैं- हमारी दुकान 50 साल पुरानी है। आज तक मैंने सुना नहीं कि किसी ने ड्रम का ऐसा इस्तेमाल किया हो। लोग ड्रम को अनाज, दूध, घरेलू चीजें स्टोर करने के लिए ले जाते हैं। मुस्कान 4 मार्च की सुबह हमारी दुकान पर आई थी। उसने गेहूं रखने के लिए एक बड़ा ड्रम मांगा था। हमने प्लास्टिक का ड्रम 1100 रुपए में बेचा। वह 200 लीटर का ड्रम ई रिक्शा पर लेकर गई। वो हमारे लिए सिर्फ एक ग्राहक थी। मीडिया में जब हमने सौरभ हत्याकांड की खबर पढ़ी, तब भी हम इस लड़की को पहचान नहीं सके, क्योंकि 15 दिन पुरानी बात हो चुकी थी, लेकिन जब पुलिसवाले हमसे पूछताछ करने आए, उन्होंने उसका फोटो दिखाया और सारी जानकारी दी, तब हमें याद आया कि मुस्कान ने हमारी ही दुकान से ड्रम लिया था। हमारे यहां CCTV नहीं है। उसके (मुस्कान) चेहरे पर कोई भी ऐसा हावभाव नजर नहीं आ रहा था कि वह इस ड्रम को लाश ठिकाने के लिए यूज करने वाली है। इस हत्या के बाद ड्रम बेचने वालों पर भी असर पड़ा है। लोग नीले ड्रम को बम या मिसाइल की तरह पेश कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर रील्स ने डर का माहौल भी बनाया है। लोग नीले रंग का ड्रम कम खरीद रहे हैं। अब हम लोग ड्रम का रंग बदलकर बेच रहे हैं। अब हम सफेद, नारंगी, पीले, काले, हरे और लाल रंग के ड्रम मंगवाने लगे हैं। इसके बाद हम खैरनगर में उषा मेडिकल स्टोर पहुंचे। यहां के संचालक अमित जोशी ने कहा- मुस्कान हमारी शॉप पर एक बुजुर्ग के साथ आई थी। बुजुर्ग के ही मोबाइल पर दवा का पर्चा दिखाया, वो एक डॉक्टर का प्रिस्क्रिप्शन था। हम बिना डॉक्टर के पर्चे के दवा नहीं बेचते। पर्चे में 2 सामान्य दवाएं और एक इंजेक्शन मिडाजोलम था। मिडाजोलम दवा को दौरा पड़ने पर या दिमाग में कुछ दिक्कत होने पर दिया जाता है। मुस्कान इस दवा का इस्तेमाल हत्या के लिए करने वाली हैं, यह कोई भी नहीं कह सकता था। हम सभी ग्राहकों से ये सब नहीं पूछते, हर दिन 100 से ज्यादा नए कस्टमर यहां आते हैं। उन्होंने कहा- मैंने तो उसे ढंग से पहचाना भी नहीं। जब पुलिसवालों ने हमसे पूछताछ की, तब हमें पता चला कि मुस्कान यहां आई थी। वो कब आई थी? किस टाइम आई थी? हम ये नहीं बता सकते। दुकान के CCTV में 15 दिन तक की ही रिकॉर्डिंग सुरक्षित रहती है। जो दवाएं मुस्कान काे चाहिए थी, उसमें एक इंजेक्शन हमारे यहां नहीं था, उसे हमने पड़ोस की दुकान से मंगाकर उन्हें दिया था। वो 5 एमएल का इंजेक्शन वॉयल था। अगर इंजेक्शन वॉयल को पेनिट्रेट (लगाने) करने की बजाय ओरली (मुंह से) देते हैं, तब वह रिएक्शन कर देता है। बर्तन दुकानदार अंकित ने कहा- हर दिन अलग-अलग कस्टमर हमारे पास आते हैं, लेकिन हमें उनके फेस याद नहीं रहते। हो सकता है कि मुस्कान हमारे यहां आई हो। यह चलता फिरता बाजार है। लोग हमारी दुकान से रोजमर्रा की चीजें खरीदने आते हैं। अगर वह हमारी दुकान आई होगी, तो हो सकता है कि उसने चाकू हमारी दुकान से खरीदा होगा। पुलिस मुस्कान को लेकर हमारी दुकान पर पूछताछ के लिए नहीं आई है। दरअसल, हमारे यहां CCTV की रिकॉर्डिंग 10 मार्च से है, उससे पुरानी नहीं है। जब टीवी पर मुस्कान का चेहरा देखा था, तब एक बार लगा कि शायद इसको कहीं देखा है। चूंकि ब्रह्मपुरी की वारदात है, ऐसे में हो सकता है कि वह हमारी ही दुकान से चाकू लेकर गई हो, लेकिन वह हमारी रेगुलर कस्टमर नहीं है। ये चाकू फ्रूट नाइफ है, इसे सब्जी-फल काटने में यूज करते हैं। चॉपिंग बोर्ड के साथ ये नाइफ का सेट बिकता है। हमारा ये इलाका हिंदू बाहुल्य है, इसलिए यहां चिकन आदि काटने के लिए चाकू लेने लोग नहीं आते। हम किसी कस्टमर से ये नहीं पूछते कि वो इस चाकू से क्या काटेंगे। कस्टमर आकर कहता है कि चाकू चाहिए। जैसा वो कहता है, वैसा दे देते हैं। हम आपको बताएं कि आजकल लोग यूट्यूब से देखकर बड़े-बड़े चाकू लेने आते हैं। अब पूरा मामला समझिए… 3 मार्च की रात साहिल के साथ मिलकर सौरभ को मार डाला
लंदन से लौटकर मेरठ आए मर्चेंट नेवी में अफसर सौरभ कुमार राजपूत की उनकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी ने 3 मार्च की रात को हत्या कर दी। इस काम में उसका साथ बॉयफ्रेंड साहिल शुक्ला उर्फ मोहित ने दिया। पहले खाने में दवा मिलाकर बेहोश किया। फिर बेडरूम में सोते समय पति के सीने में मुस्कान ने ही पहला चाकू मारा। मौत के बाद लाश को बाथरूम में ले गए। जहां साहिल ने दोनों हाथ और सिर काटकर धड़ से अलग किया। बॉडी को ठिकाने लगाने के लिए प्लास्टिक के ड्रम में टुकड़े डाले। फिर उसमें सीमेंट का घोल भर दिया। परिवार और पड़ोसियों को गुमराह करने के लिए मुस्कान शिमला-मनाली चली गई। 13 दिन तक वह इंस्टाग्राम पर वीडियो-फोटो अपलोड करती रही, ताकि लोग यही समझते रहें कि वे लोग घूम रहे हैं। इस कत्ल से पर्दा तब हटा, जब 18 मार्च को सौरभ का छोटा भाई राहुल अपने भाई के ब्रह्मपुरी के इंदिरा सेकेंड स्थित घर पर पहुंचा। यहां उसने मुस्कान को एक लड़के (साहिल) के साथ घूमते देखा। भाई कहां हैं? पूछने पर सही जवाब मुस्कान नहीं दे सकी। घर के अंदर से बदबू भी आ रही थी। राहुल ने शोर मचाया, तब पड़ोसी भी इकट्ठा हो गए। पुलिस आई तो मर्डर का पता चला। पुलिस कस्टडी में मुस्कान और साहिल ने कत्ल की पूरी कहानी सुनाई है। SP सिटी आयुष विक्रम सिंह ने कहा- 7 दिन में चार्जशीट कोर्ट में सब्मिट कर देंगे। साहिल, मुस्कान और सौरभ के मोबाइल रिकॉर्ड की फोरेंसिक रिपोर्ट के लिए आगरा लेटर भेजा गया है। सौरभ के बेडरूम, लॉबी और बाथरूम में बेंजामिन टेस्ट करके ब्लड के सैंपल लिए गए हैं। चादर और कपड़ों के नमूने भी मिले हैं, इनमें केस डायरी बनाने में काफी मदद मिली है। —————————————- सौरभ हत्याकांड से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें- मेरठ हत्याकांड, मुस्कान-साहिल को फांसी होगी या उम्रकैद: एक्सपर्ट बोले- रेयरेस्ट क्राइम; दोनों चाकू और कटा सिर-हाथ पिलो कवर में रखे, सीमेंट से जमाया सौरभ की बॉडी के 4 टुकड़े करके तकिए के कवर में रखे गए। 2 चाकू भी ड्रम में सीमेंट से जमा दिए गए। पुलिस ने इन्हें बरामद कर लिया है। अब अगर मुस्कान और साहिल अपने कबूलनामे से मुकर भी जाएं, तब भी सबूत पर्याप्त हैं। यह कहना है मेरठ के सरकारी वकील आलोक पांडेय का। अब तक कई ठोस सबूत पुलिस के हाथ लगे हैं। पढ़िए पूरी खबर…