तेलंगाना के नागरकुर्नूल जिले में श्रीशैलम लेफ्ट बैंक कैनाल (SLBC) टनल का एक हिस्सा 22 फरवरी को ढह गया। इसमें 8 कर्मचारी फंस गए। इन्हें सुरक्षित बाहर निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन सोमवार को तीसरे दिन भी जारी है। रेस्क्यू ऑपरेशन में आर्मी, NDRF, SDRF के अलावा राज्य सरकार की अन्य एजेंसी भी जुटी हुई हैं। उत्तराखंड के सिलक्यारा टनल में फंसे लोगों को निकालने वाली टीम को भी इसमें शामिल किया गया है। 2023 में सिलक्यारा टनल का एक हिस्सा गिर गया था। 17 दिन बाद 41 लोगों काे सुरक्षित निकाला गया था। तेलंगाना सरकार के मंत्री जुपल्ली कृष्ण राव ने कहा कि हादसा सुरंग के मुहाने से करीब 13 किलोमीटर दूर हुआ है। रेस्क्यू टीम फंसे हुए लोगों से 100 मीटर दूर है, लेकिन पानी और कीचड़ की वजह से ऑपरेशन में दिक्कत आ रही है। मजदूरों के बचने की संभावना कम है। हमारी कोशिश जारी है। टनल में एंडोस्कोपिक और रोबोटिक कैमरे लगाए गए
सोमवार को रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए टनल में एंडोस्कोपिक और रोबोटिक कैमरे लगाए गए हैं। साथ ही NDRF डॉग स्क्वाड की मदद भी ली जा रही है। LT के एंडोस्कोपिक ऑपरेटर दोवदीप ने कहा, एंडोस्कोपिक कैमरे से हम देख सकते हैं कि टनल के अंदर क्या हो रहा है। हमने उत्तराखंड में भी रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान ऐसा किया था। रेस्क्यू में NDRF-SDRF और आर्मी के जवान
रेस्क्यू के लिए NDRF के 145 और SDRF के 120 जवान तैनात हैं। सेना की एक इंजीनियर रेजिमेंट, जो सिकंदराबाद में इन्फैंट्री डिवीजन का हिस्सा है। उसे भी रेस्क्यू में लगाया गया है। हादसा 22 फरवरी की सुबह करीब 8:30 बजे हुआ था। टनल के एंट्री पॉइंट से 13 किमी अंदर टनल की छत का करीब 3 मीटर हिस्सा ढहा है। इस दौरान टनल के अंदर करीब 60 लोग काम कर रहे थे। 52 लोग किसी तरह जान बचाकर निकल आए, लेकिन टनल बोरिंग मशीन (TBM) चला रहे 8 लोग फंस गए। इनमें 2 इंजीनियर, 2 मशीन ऑपरेटर और चार मजदूर हैं। रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है। टनल के अंदर आवाज लगाई गई, रिस्पॉन्स नहीं मिला
जिलाधिकारी बी संतोष ने बताया कि रेस्क्यू टीमें सुरंग में वहां तक पहुंच गई हैं, जहां बोरिंग मशीन काम कर रही थी। अंदर फंसे कर्मचारियों से संपर्क नहीं हो सका। कीचड़ के कारण आगे बढ़ने में परेशानी आ रही है। SDRF के अधिकारी के मुताबिक, सुरंग के अंदर जाने का कोई रास्ता नहीं है। घुटनों तक कीचड़ है। सुरंग के अंदर ऑक्सीजन भेजी जा रही है। पानी निकालने के लिए 100 हॉर्स पॉवर का पंप मंगवाया गया है। रेस्क्यू ऑपरेशन की तस्वीरें… टनल में फंसे 8 मजदूर- 4 झारखंड, दो UP और एक-एक पंजाब और जम्मू-कश्मीर से उत्तर प्रदेश के चंदौली से हैं श्री निवास
तेलंगाना में धंसी सुरंग में फंसे श्री निवास (48) चंदौली जिले के सदर कोतवाली क्षेत्र के माटीगांव के रहने वाले हैं। श्री निवास साल 2008 से हैदराबाद मे जेपी कंपनी में जूनियर इंजीनियर (JE) पद पर कार्यरत हैं। इसके अलावा उन्नाव के रहने वाले मनोज कुमार (50) भी इसी कंपनी में बतौर इंजीनियर काम कर रहे हैं। वे बेहटा थाना के मटकुरी गांव के रहने वाले अर्जुन प्रसाद के बेटे हैं। पंजाब के गुरप्रीत 20 दिन पहले काम पर लौटे थे
पंजाब के तरनतारन के रहने वाले गुरप्रीत सिंह भी टनल में फंसे हैं। उनके घर में मां, पत्नी और 2 बेटियां हैं। बड़ी बेटी की उम्र 16 और छोटी की 13 साल है। पिता का देहांत हो चुका है। गुरप्रीत 10वीं तक पढ़ा है। 20 दिन पहले ही घर से काम पर लौटा था। परिवार के पास 2 एकड़ से कम जमीन है। अगस्त में सुनकीशाला में रिटेनिंग वॉल गिरी थी
इससे पहले अगस्त, 2024 में तेलंगाना में नागार्जुनसागर बांध के पास सुनकीशाला में रिटेनिंग वॉल गिर गई थी। भारत राष्ट्र समिति (BRS) ने इसके लिए कांग्रेस सरकार को जिम्मेदार ठहराया था और न्यायिक जांच की मांग की थी। कांग्रेस ने पलटवार करते हुए कहा था कि प्रोजेक्ट BRS शासन में शुरू हुआ था। खराब क्वालिटी की वजह से दीवार ढह गई। ———————————————— हादसे से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… असम खदान रेस्क्यू- 44 दिन बाद बाकी 5 शव बरामद, पहचान के लिए DNA टेस्ट होगा असम अवैध खदान हादसे में मारे गए पांच अन्य मजदूरों के शव बरामद कर लिए गए। रेस्क्यू टीम को सर्च ऑपरेशन में 44 दिन लग गए। पुलिस ने भास्कर को बताया कि शव पूरी तरह सड़ चुके हैं। मजदूरों की पहचान के लिए डीएनए टेस्ट किया जाएगा। इससे पहले 8 जनवरी को एक और 11 जनवरी को तीन शव मिले थे। पूरी खबर पढ़ें…
तेलंगाना के नागरकुर्नूल जिले में श्रीशैलम लेफ्ट बैंक कैनाल (SLBC) टनल का एक हिस्सा 22 फरवरी को ढह गया। इसमें 8 कर्मचारी फंस गए। इन्हें सुरक्षित बाहर निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन सोमवार को तीसरे दिन भी जारी है। रेस्क्यू ऑपरेशन में आर्मी, NDRF, SDRF के अलावा राज्य सरकार की अन्य एजेंसी भी जुटी हुई हैं। उत्तराखंड के सिलक्यारा टनल में फंसे लोगों को निकालने वाली टीम को भी इसमें शामिल किया गया है। 2023 में सिलक्यारा टनल का एक हिस्सा गिर गया था। 17 दिन बाद 41 लोगों काे सुरक्षित निकाला गया था। तेलंगाना सरकार के मंत्री जुपल्ली कृष्ण राव ने कहा कि हादसा सुरंग के मुहाने से करीब 13 किलोमीटर दूर हुआ है। रेस्क्यू टीम फंसे हुए लोगों से 100 मीटर दूर है, लेकिन पानी और कीचड़ की वजह से ऑपरेशन में दिक्कत आ रही है। मजदूरों के बचने की संभावना कम है। हमारी कोशिश जारी है। टनल में एंडोस्कोपिक और रोबोटिक कैमरे लगाए गए
सोमवार को रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए टनल में एंडोस्कोपिक और रोबोटिक कैमरे लगाए गए हैं। साथ ही NDRF डॉग स्क्वाड की मदद भी ली जा रही है। LT के एंडोस्कोपिक ऑपरेटर दोवदीप ने कहा, एंडोस्कोपिक कैमरे से हम देख सकते हैं कि टनल के अंदर क्या हो रहा है। हमने उत्तराखंड में भी रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान ऐसा किया था। रेस्क्यू में NDRF-SDRF और आर्मी के जवान
रेस्क्यू के लिए NDRF के 145 और SDRF के 120 जवान तैनात हैं। सेना की एक इंजीनियर रेजिमेंट, जो सिकंदराबाद में इन्फैंट्री डिवीजन का हिस्सा है। उसे भी रेस्क्यू में लगाया गया है। हादसा 22 फरवरी की सुबह करीब 8:30 बजे हुआ था। टनल के एंट्री पॉइंट से 13 किमी अंदर टनल की छत का करीब 3 मीटर हिस्सा ढहा है। इस दौरान टनल के अंदर करीब 60 लोग काम कर रहे थे। 52 लोग किसी तरह जान बचाकर निकल आए, लेकिन टनल बोरिंग मशीन (TBM) चला रहे 8 लोग फंस गए। इनमें 2 इंजीनियर, 2 मशीन ऑपरेटर और चार मजदूर हैं। रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है। टनल के अंदर आवाज लगाई गई, रिस्पॉन्स नहीं मिला
जिलाधिकारी बी संतोष ने बताया कि रेस्क्यू टीमें सुरंग में वहां तक पहुंच गई हैं, जहां बोरिंग मशीन काम कर रही थी। अंदर फंसे कर्मचारियों से संपर्क नहीं हो सका। कीचड़ के कारण आगे बढ़ने में परेशानी आ रही है। SDRF के अधिकारी के मुताबिक, सुरंग के अंदर जाने का कोई रास्ता नहीं है। घुटनों तक कीचड़ है। सुरंग के अंदर ऑक्सीजन भेजी जा रही है। पानी निकालने के लिए 100 हॉर्स पॉवर का पंप मंगवाया गया है। रेस्क्यू ऑपरेशन की तस्वीरें… टनल में फंसे 8 मजदूर- 4 झारखंड, दो UP और एक-एक पंजाब और जम्मू-कश्मीर से उत्तर प्रदेश के चंदौली से हैं श्री निवास
तेलंगाना में धंसी सुरंग में फंसे श्री निवास (48) चंदौली जिले के सदर कोतवाली क्षेत्र के माटीगांव के रहने वाले हैं। श्री निवास साल 2008 से हैदराबाद मे जेपी कंपनी में जूनियर इंजीनियर (JE) पद पर कार्यरत हैं। इसके अलावा उन्नाव के रहने वाले मनोज कुमार (50) भी इसी कंपनी में बतौर इंजीनियर काम कर रहे हैं। वे बेहटा थाना के मटकुरी गांव के रहने वाले अर्जुन प्रसाद के बेटे हैं। पंजाब के गुरप्रीत 20 दिन पहले काम पर लौटे थे
पंजाब के तरनतारन के रहने वाले गुरप्रीत सिंह भी टनल में फंसे हैं। उनके घर में मां, पत्नी और 2 बेटियां हैं। बड़ी बेटी की उम्र 16 और छोटी की 13 साल है। पिता का देहांत हो चुका है। गुरप्रीत 10वीं तक पढ़ा है। 20 दिन पहले ही घर से काम पर लौटा था। परिवार के पास 2 एकड़ से कम जमीन है। अगस्त में सुनकीशाला में रिटेनिंग वॉल गिरी थी
इससे पहले अगस्त, 2024 में तेलंगाना में नागार्जुनसागर बांध के पास सुनकीशाला में रिटेनिंग वॉल गिर गई थी। भारत राष्ट्र समिति (BRS) ने इसके लिए कांग्रेस सरकार को जिम्मेदार ठहराया था और न्यायिक जांच की मांग की थी। कांग्रेस ने पलटवार करते हुए कहा था कि प्रोजेक्ट BRS शासन में शुरू हुआ था। खराब क्वालिटी की वजह से दीवार ढह गई। ———————————————— हादसे से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… असम खदान रेस्क्यू- 44 दिन बाद बाकी 5 शव बरामद, पहचान के लिए DNA टेस्ट होगा असम अवैध खदान हादसे में मारे गए पांच अन्य मजदूरों के शव बरामद कर लिए गए। रेस्क्यू टीम को सर्च ऑपरेशन में 44 दिन लग गए। पुलिस ने भास्कर को बताया कि शव पूरी तरह सड़ चुके हैं। मजदूरों की पहचान के लिए डीएनए टेस्ट किया जाएगा। इससे पहले 8 जनवरी को एक और 11 जनवरी को तीन शव मिले थे। पूरी खबर पढ़ें…