जब बच्ची स्कूल जाती तो उसे रास्ते में रोक लेते। उसके साथ जबरदस्ती करते। दबाव बनाते कि हमारे साथ कैफे और होटलों में घूमने चलो। कलमा पढ़वाते। रोजा रखवाते। ये दर्द है राजस्थान में ब्यावर के बिजयनगर शहर में धर्मांतरण गिरोह की दरिंदगी का शिकार हुई एक बच्ची के परिजनों का। प्राइवेट स्कूल में पढ़ रही नाबालिग लड़कियों का देहशोषण और ब्लैकमेल कर धर्मांतरण का दबाव बनाने के मामले में कई नई बातें सामने आई हैं। एक भी आरोपी स्कूल में नहीं पढ़ता, कोई मजदूर, कोई वेल्डर पांचों आरोपी दोस्त हैं। इनमें से कुछ एक ही मोहल्ले के रहने वाले हैं। सभी हमाली, वेल्डिंग, पेंट करने और फर्नीचर का काम करते हैं। एक भी आरोपी स्कूल में नहीं पढ़ता है। इसके बावजूद इन्होंने कई स्कूल गर्ल्स को फंसा लिया। इन्होंने जिन लड़कियों को शिकार बनाया, वे भी एक ही मोहल्ले के आस-पास की रहने वाली हैं। आरोपियों ने एक के बाद एक कई लड़कियों को शिकार बनाया। गिरोह में शामिल हर आरोपी इन लड़कियों के नंबर एक-दूसरे से शेयर करता था। जो भी लड़की आरोपियों का शिकार बनती, उसके अश्लील फोटो वीडियो बना लिए जाते। इसी के दम पर ब्लैकमेल किया जाता। लड़कियों पर रोजा रखने और कलमा पढ़ने के लिए भी दबाव डाला जाता था। साथ होटल में जाने के लिए दबाव बनाते
भास्कर टीम दरिंदगी का शिकार हुई लड़कियों के परिजनों से मिली। एक बच्ची के ताऊ ने बताया- बच्ची की आपसे बात नहीं हो सकती है। वो बहुत ज्यादा डरी हुई है। फिलहाल उसे मजिस्ट्रेट के सामने बयान दर्ज करवाने के लिए नसीराबाद कोर्ट ले जा रहे हैं। पीड़िता के ताऊ ने हमें बताया- भतीजी को आरोपियों ने बहला फुसलाकर फंसा लिया था। उसे एक मोबाइल फोन दिया था। उसी मोबाइल से वो बच्ची से बात करते थे। जब बच्ची स्कूल जाती तो उसे रास्ते में रोक लेते। उसके साथ जबरदस्ती करते। दबाव बनाते कि हमारे साथ कैफे और होटलों में घूमने चलो। कई लड़के कर रहे थे ब्लैकमेल
बच्ची के पास मोबाइल मिला तो हमें पूरी बात पता चली। इसके बाद उसी मोबाइल से हमने आरोपी लड़के को कॉल किया। आरोपी ने बच्ची को गालियां निकालीं। वो उसे फोन पर ही मारने की धमकियां भी दे रहा था। इसके बाद हम थाने पहुंचे थे। एक के बाद एक अब एक कई बच्चियों को फंसाने के मामले सामने आ गए। बाद में हमें पता चला कि हमारी बच्ची को एक नहीं कई लड़के ब्लैकमेल कर रहे थे। आरोपियों का अजमेर ब्लैकमेल कांड जैसा ही तरीका
सभी आरोपियों का नाबालिग बच्चियों को फंसाने और शिकार करने का तरीका साल 1992 में हुए अजमेर ब्लैकमेल कांड के आरोपियों के तरीके जैसा ही था। यहां भी आरोपियों ने एक ही प्राइवेट स्कूल की बच्चियों को टारगेट कर रखा था। दरअसल इन सभी बच्चियों के स्कूल आने-जाने का रास्ता कुछ आरोपियों के मोहल्ले के पास से होकर गुजरता था। आरोपियों ने इसका ही फायदा उठाया था। पुलिस अब तक छह आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। एक नाबालिग को डिटेन किया है। पुलिस ने मंगलवार को एक कैफे संचालक और एक अन्य आरोपी को भी राउंड अप किया है। ब्यावर एसपी श्याम सिंह के अनुसार आरोपी कैफे संचालक का कैफे ही घटनास्थल था।
जब बच्ची स्कूल जाती तो उसे रास्ते में रोक लेते। उसके साथ जबरदस्ती करते। दबाव बनाते कि हमारे साथ कैफे और होटलों में घूमने चलो। कलमा पढ़वाते। रोजा रखवाते। ये दर्द है राजस्थान में ब्यावर के बिजयनगर शहर में धर्मांतरण गिरोह की दरिंदगी का शिकार हुई एक बच्ची के परिजनों का। प्राइवेट स्कूल में पढ़ रही नाबालिग लड़कियों का देहशोषण और ब्लैकमेल कर धर्मांतरण का दबाव बनाने के मामले में कई नई बातें सामने आई हैं। एक भी आरोपी स्कूल में नहीं पढ़ता, कोई मजदूर, कोई वेल्डर पांचों आरोपी दोस्त हैं। इनमें से कुछ एक ही मोहल्ले के रहने वाले हैं। सभी हमाली, वेल्डिंग, पेंट करने और फर्नीचर का काम करते हैं। एक भी आरोपी स्कूल में नहीं पढ़ता है। इसके बावजूद इन्होंने कई स्कूल गर्ल्स को फंसा लिया। इन्होंने जिन लड़कियों को शिकार बनाया, वे भी एक ही मोहल्ले के आस-पास की रहने वाली हैं। आरोपियों ने एक के बाद एक कई लड़कियों को शिकार बनाया। गिरोह में शामिल हर आरोपी इन लड़कियों के नंबर एक-दूसरे से शेयर करता था। जो भी लड़की आरोपियों का शिकार बनती, उसके अश्लील फोटो वीडियो बना लिए जाते। इसी के दम पर ब्लैकमेल किया जाता। लड़कियों पर रोजा रखने और कलमा पढ़ने के लिए भी दबाव डाला जाता था। साथ होटल में जाने के लिए दबाव बनाते
भास्कर टीम दरिंदगी का शिकार हुई लड़कियों के परिजनों से मिली। एक बच्ची के ताऊ ने बताया- बच्ची की आपसे बात नहीं हो सकती है। वो बहुत ज्यादा डरी हुई है। फिलहाल उसे मजिस्ट्रेट के सामने बयान दर्ज करवाने के लिए नसीराबाद कोर्ट ले जा रहे हैं। पीड़िता के ताऊ ने हमें बताया- भतीजी को आरोपियों ने बहला फुसलाकर फंसा लिया था। उसे एक मोबाइल फोन दिया था। उसी मोबाइल से वो बच्ची से बात करते थे। जब बच्ची स्कूल जाती तो उसे रास्ते में रोक लेते। उसके साथ जबरदस्ती करते। दबाव बनाते कि हमारे साथ कैफे और होटलों में घूमने चलो। कई लड़के कर रहे थे ब्लैकमेल
बच्ची के पास मोबाइल मिला तो हमें पूरी बात पता चली। इसके बाद उसी मोबाइल से हमने आरोपी लड़के को कॉल किया। आरोपी ने बच्ची को गालियां निकालीं। वो उसे फोन पर ही मारने की धमकियां भी दे रहा था। इसके बाद हम थाने पहुंचे थे। एक के बाद एक अब एक कई बच्चियों को फंसाने के मामले सामने आ गए। बाद में हमें पता चला कि हमारी बच्ची को एक नहीं कई लड़के ब्लैकमेल कर रहे थे। आरोपियों का अजमेर ब्लैकमेल कांड जैसा ही तरीका
सभी आरोपियों का नाबालिग बच्चियों को फंसाने और शिकार करने का तरीका साल 1992 में हुए अजमेर ब्लैकमेल कांड के आरोपियों के तरीके जैसा ही था। यहां भी आरोपियों ने एक ही प्राइवेट स्कूल की बच्चियों को टारगेट कर रखा था। दरअसल इन सभी बच्चियों के स्कूल आने-जाने का रास्ता कुछ आरोपियों के मोहल्ले के पास से होकर गुजरता था। आरोपियों ने इसका ही फायदा उठाया था। पुलिस अब तक छह आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। एक नाबालिग को डिटेन किया है। पुलिस ने मंगलवार को एक कैफे संचालक और एक अन्य आरोपी को भी राउंड अप किया है। ब्यावर एसपी श्याम सिंह के अनुसार आरोपी कैफे संचालक का कैफे ही घटनास्थल था।