चीफ इन्फॉर्मेशन कमिश्नर (CIC) और 8 इन्फॉर्मेशन कमिश्नर्स की नियुक्ति के लिए चयनित उम्मीदवारों की जातियों पर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने असहमति जताई। इनकी नियुक्ति को लेकर बुधवार को PM मोदी, राहुल और अमित शाह के बीच प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में डेढ़ घंटे चली मीटिंग हुई। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राहुल ने कुछ हफ्ते पहले सरकार से आवेदकों और चुने गए उम्मीदवारों की जाति (Caste) की जानकारी मांगी थी। बैठक के पहले सरकार ने नेता प्रतिपक्ष से इसकी जानकारी साझा की। इस पर राहुल ने कहा कि चयनित उम्मीदवारों में अनुसूचित जाति/जनजाति, OBC, EBC और अल्पसंख्यक समुदायों के नाम शामिल नहीं हैं। सूत्रों के मुताबिक, आवेदकों की लिस्ट में सिर्फ 7% लोग पिछड़े समुदाय से थे। वहीं, चयनित उम्मीदवारों में सिर्फ एक नाम पिछड़े समुदाय से था। राहुल ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई और सभी नियुक्तियों के मानदंडों पर सवाल उठाए। उन्होंने लिखित में अपना असहमति पत्र सौंपा और चयनित उम्मीदवारों से जुड़ी और जानकारी मांगी। राहुल CIC चुनने वाले 3 सदस्यीय सिलेक्शन कमेटी के सदस्य तीन महीने से चीफ इन्फॉर्मेशन कमिश्नर का पद खाली चीफ इन्फॉर्मेशन कमिश्नर का पद पिछले 3 महीने से खाली है। पूर्व CIC हीरालाल सामरिया 13 सितंबर, 2025 में 65 साल की उम्र में इस पद से रिटायर हुए। 2014 के बाद यह सातवां मौका है जब आयोग का प्रमुख पद करीब तीन महीने से खाली है। CIC पद पहली बार अगस्त 2014 में उस समय खाली हुआ था जब तत्कालीन CIC राजीव माथुर रिटायर हुए थे। इसके अलावा, आयोग में 10 में से 8 इन्फॉर्मेशन कमिश्नर्स के पद खाली हैं। अभी केवल दो इन्फॉर्मेशन कमिश्नर्स- अनंदी रामलिंगम और विनोद कुमार तिवारी ही कार्यरत हैं। पूर्व CIC की नियुक्ति पर भी विपक्ष ने असहमति जताई थी यह पहली बार नहीं है जब विपक्ष ने CIC की नियुक्ति को लेकर सरकार से असहमति जताई है। 2023 में सामरिया की नियुक्ति के समय भी विवाद हुआ था। तब प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली चयन समिति में विपक्षी सदस्य अधीर रंजन चौधरी ने आरोप लगाया था कि सरकार ने नियुक्ति को लेकर न तो उनसे कोई सलाह ली और न ही उन्हें जानकारी दी। 2020 में भी चयन पैनल की बैठक में चौधरी ने पूर्व IFS अधिकारी और इन्फॉर्मेशन कमिश्नर यशवर्धन कुमार सिन्हा को चीफ इन्फॉर्मेशन कमिश्नर्स और पत्रकार उदय महूरकर को इन्फॉर्मेशन कमिश्नर बनाए जाने का विरोध किया था। चौधरी की असहमति दर्ज होने के बावजूद सिन्हा और महूरकर की नियुक्ति कर दी गई थी। नेता प्रतिपक्ष राहुल के पास कई शक्तियां और अधिकार राहुल नेता प्रतिपक्ष बनने वाले गांधी परिवार के तीसरे सदस्य राहुल गांधी को 25 जून, 2024 में नेता प्रतिपक्ष बनाने की घोषणा हुई थी। राहुल अपने 20 साल के पॉलिटिकल करियर में पहली बार कोई संवैधानिक पद संभाल रहे हैं। वे इस पद पर रहने वाले गांधी परिवार के तीसरे सदस्य है। इससे पहले उनके पिता और पूर्व PM राजीव गांधी 1989-90 और मां सोनिया 1999 से 2004 तक इस पद पर रह चुकी हैं। 2024 चुनाव से पहले लोकसभा में 10 साल से नेता प्रतिपक्ष का पद खाली था। 2014 और 2019 में किसी विपक्षी दल के पास इसके लिए जरूरी न्यूनतम 10% सदस्य नहीं थे। 2024 के चुनाव में कांग्रेस 99 सीटों के साथ सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी बनी थी। ————————— राहुल से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… राहुल का शाह को डिबेट का चैलेंज: गृहमंत्री बोले- मैं तय करूंगा, मुझे क्या बोलना है; राहुल ने कहा- ये डरा, घबराया हुआ जवाब केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बुधवार को लोकसभा में चुनाव सुधार पर चर्चा का जवाब दिया। अपने भाषण की शुरुआत में कहा कि चुनाव सुधार पर चर्चा से बीजेपी के लोग भागते नहीं है। इस पर सदन में विपक्ष के नेता राहुल गांधी अपनी सीट से खड़े हुए और शाह से कहा कि मैं SIR पर अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस पर डिबेट के लिए आपको चैलेंज करता हूं। इस दौरान दोनों के बीच तीखी बहस भी हुई। पूरी खबर पढ़ें…
चीफ इन्फॉर्मेशन कमिश्नर (CIC) और 8 इन्फॉर्मेशन कमिश्नर्स की नियुक्ति के लिए चयनित उम्मीदवारों की जातियों पर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने असहमति जताई। इनकी नियुक्ति को लेकर बुधवार को PM मोदी, राहुल और अमित शाह के बीच प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में डेढ़ घंटे चली मीटिंग हुई। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राहुल ने कुछ हफ्ते पहले सरकार से आवेदकों और चुने गए उम्मीदवारों की जाति (Caste) की जानकारी मांगी थी। बैठक के पहले सरकार ने नेता प्रतिपक्ष से इसकी जानकारी साझा की। इस पर राहुल ने कहा कि चयनित उम्मीदवारों में अनुसूचित जाति/जनजाति, OBC, EBC और अल्पसंख्यक समुदायों के नाम शामिल नहीं हैं। सूत्रों के मुताबिक, आवेदकों की लिस्ट में सिर्फ 7% लोग पिछड़े समुदाय से थे। वहीं, चयनित उम्मीदवारों में सिर्फ एक नाम पिछड़े समुदाय से था। राहुल ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई और सभी नियुक्तियों के मानदंडों पर सवाल उठाए। उन्होंने लिखित में अपना असहमति पत्र सौंपा और चयनित उम्मीदवारों से जुड़ी और जानकारी मांगी। राहुल CIC चुनने वाले 3 सदस्यीय सिलेक्शन कमेटी के सदस्य तीन महीने से चीफ इन्फॉर्मेशन कमिश्नर का पद खाली चीफ इन्फॉर्मेशन कमिश्नर का पद पिछले 3 महीने से खाली है। पूर्व CIC हीरालाल सामरिया 13 सितंबर, 2025 में 65 साल की उम्र में इस पद से रिटायर हुए। 2014 के बाद यह सातवां मौका है जब आयोग का प्रमुख पद करीब तीन महीने से खाली है। CIC पद पहली बार अगस्त 2014 में उस समय खाली हुआ था जब तत्कालीन CIC राजीव माथुर रिटायर हुए थे। इसके अलावा, आयोग में 10 में से 8 इन्फॉर्मेशन कमिश्नर्स के पद खाली हैं। अभी केवल दो इन्फॉर्मेशन कमिश्नर्स- अनंदी रामलिंगम और विनोद कुमार तिवारी ही कार्यरत हैं। पूर्व CIC की नियुक्ति पर भी विपक्ष ने असहमति जताई थी यह पहली बार नहीं है जब विपक्ष ने CIC की नियुक्ति को लेकर सरकार से असहमति जताई है। 2023 में सामरिया की नियुक्ति के समय भी विवाद हुआ था। तब प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली चयन समिति में विपक्षी सदस्य अधीर रंजन चौधरी ने आरोप लगाया था कि सरकार ने नियुक्ति को लेकर न तो उनसे कोई सलाह ली और न ही उन्हें जानकारी दी। 2020 में भी चयन पैनल की बैठक में चौधरी ने पूर्व IFS अधिकारी और इन्फॉर्मेशन कमिश्नर यशवर्धन कुमार सिन्हा को चीफ इन्फॉर्मेशन कमिश्नर्स और पत्रकार उदय महूरकर को इन्फॉर्मेशन कमिश्नर बनाए जाने का विरोध किया था। चौधरी की असहमति दर्ज होने के बावजूद सिन्हा और महूरकर की नियुक्ति कर दी गई थी। नेता प्रतिपक्ष राहुल के पास कई शक्तियां और अधिकार राहुल नेता प्रतिपक्ष बनने वाले गांधी परिवार के तीसरे सदस्य राहुल गांधी को 25 जून, 2024 में नेता प्रतिपक्ष बनाने की घोषणा हुई थी। राहुल अपने 20 साल के पॉलिटिकल करियर में पहली बार कोई संवैधानिक पद संभाल रहे हैं। वे इस पद पर रहने वाले गांधी परिवार के तीसरे सदस्य है। इससे पहले उनके पिता और पूर्व PM राजीव गांधी 1989-90 और मां सोनिया 1999 से 2004 तक इस पद पर रह चुकी हैं। 2024 चुनाव से पहले लोकसभा में 10 साल से नेता प्रतिपक्ष का पद खाली था। 2014 और 2019 में किसी विपक्षी दल के पास इसके लिए जरूरी न्यूनतम 10% सदस्य नहीं थे। 2024 के चुनाव में कांग्रेस 99 सीटों के साथ सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी बनी थी। ————————— राहुल से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… राहुल का शाह को डिबेट का चैलेंज: गृहमंत्री बोले- मैं तय करूंगा, मुझे क्या बोलना है; राहुल ने कहा- ये डरा, घबराया हुआ जवाब केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बुधवार को लोकसभा में चुनाव सुधार पर चर्चा का जवाब दिया। अपने भाषण की शुरुआत में कहा कि चुनाव सुधार पर चर्चा से बीजेपी के लोग भागते नहीं है। इस पर सदन में विपक्ष के नेता राहुल गांधी अपनी सीट से खड़े हुए और शाह से कहा कि मैं SIR पर अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस पर डिबेट के लिए आपको चैलेंज करता हूं। इस दौरान दोनों के बीच तीखी बहस भी हुई। पूरी खबर पढ़ें…