जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क का प्रसिद्ध ढिकाला पर्यटन जोन 15 नवंबर को पर्यटकों के लिए खोला जाएगा। कॉर्बेट पार्क में रात्रि विश्राम की सुविधा 15 नवंबर से शुरू होगी। अभी तक 200 से अधिक विदेशी पर्यटक रात्रि विश्राम के लिए कक्ष बुक कर चुके हैं। जनवरी 2026 तक सभी रूम फुल हो चुके हैं। ढिकाला जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान का सबसे बड़ा और सबसे लोकप्रिय सफारी क्षेत्र है। ढिकाला जोन हर साल मानसून के बाद 15 नवंबर से खुलता है और पर्यटकों के लिए सबसे पसंदीदा क्षेत्र माना जाता है। इसे हर साल 15 जून को पर्यटकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बंद कर दिया जाता है। इस साल 90 दिन पहले विदेशी पर्यटकों के लिए बुकिंग शुरू कर दी थी। वहीं भारतीय पर्यटकों के लिए 45 दिन पहले बुकिंग शुरू की गई थी। ढिकाला जोन में जंगल सफारी और रात्रि विश्राम दोनों की सुविधा उपलब्ध है, जहां पर्यटक बंगाल टाइगर, हाथी, हिरण, भालू, मगरमच्छ और अन्य पक्षी प्रजातियों के साथ जैव विविधता का अनुभव करते हैं। अब जानिए कॉर्बेट में सफारी अनुभव क्यों है खास…
कॉर्बेट की सफारी कई कारणों से खास है। जिनमें रॉयल बंगाल टाइगर जैसे वन्यजीवों को देखने का मौका, विविध वनस्पतियों और जीवों से भरी प्राकृतिक सुंदरता और अलग-अलग सफारी जोन और अनुभवों का विकल्प शामिल है। यह भारत का सबसे पुराना राष्ट्रीय उद्यान है जो प्रकृति और वन्य जीवन के अनूठे अनुभव प्रदान करता है और पक्षी-प्रेमियों के लिए भी एक स्वर्ग है। बाघों का घर- कॉर्बेट को रॉयल बंगाल टाइगर का महत्वपूर्ण घर माना जाता है। यह पार्क पहाड़ियों, घास के मैदानों, झीलों और नदी के किनारों के साथ विभिन्न प्रकार के वातावरण प्रदान करता है। पक्षी-प्रेमियों के लिए स्वर्ग- यहां 600 से अधिक पक्षी प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें भारतीय पिटा, क्रेस्टेड सर्पेंट ईगल और हॉर्नबिल जैसी प्रजातियां शामिल हैं। अनूठे सफारी विकल्प- जीप सफारी और हाथी सफारी जैसे विभिन्न विकल्प उपलब्ध हैं, जो वन्यजीवों को देखने के अलग-अलग परिप्रेक्ष्य प्रदान करते हैं। अलग-अलग सफारी जोन- पार्क को सात अलग-अलग जोन में बांटा गया है, जिनमें से प्रत्येक वन्य जीवन का अनुभव करने के लिए एक अनूठा मौका देता है। प्रकृति का रोमांच- कॉर्बेट प्रकृति के साथ एक गहन और अप्रत्याशित अनुभव प्रदान करता है, जहां शांतिपूर्ण जंगल के रास्तों से गुजरते हुए अचानक वन्यजीवों को देख सकते हैं। कुछ हिस्सों में रात भर रहने की सुविधा भी उपलब्ध है, जो वन्यजीवों के बीच रहने का एक अविस्मरणीय अनुभव प्रदान करता है। जनवरी तक विदेशी पर्यटकों की बुकिंग फुल
कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक डॉ. साकेत बडोला ने बताया- ढिकाला जोन के जंगलों में सफारी के दौरान पर्यटक जब बंगाल टाइगर को उसकी प्राकृतिक आवास में चलते देखते हैं, तो यह दृश्य जीवनभर याद रहता है। कॉर्बेट के ग्रासलैंड, विशाल साल के जंगल और रामगंगा नदी का संगम हर सैलानी को मोह लेता है। यही कारण है कि ढिकाला को कॉर्बेट का दिल कहा जाता है। इस बार रिकॉर्ड संख्या में 200 से अधिक विदेशी पर्यटकों ने रात्रि विश्राम के लिए बुकिंग कराई है। अब 18 जनवरी 2026 तक विदेशी सैलानियों का कोटा पूरी तरह पैक हो चुका है। 1000 भारतीय पर्यटकों ने कराई बुकिंग
निदेशक डॉ. साकेत बडोला ने बताया- भारतीय पर्यटकों का उत्साह भी कम नहीं है। पार्क प्रशासन ने देशी पर्यटकों के लिए बुकिंग 45 दिन पहले खोली थी और दिसंबर 2025 तक भारतीय पर्यटकों का कोटा भी पूरी तरह भर चुका है। अब तक 1000 से अधिक भारतीय पर्यटक दिसंबर तक की बुकिंग कर चुके हैं। ढिकाला जोन में रात्रि विश्राम की सुविधाएं
डॉ. साकेत बडोला ने बताया- ढिकाला जोन में रात्रि विश्राम के लिए कुल 41 कमरे उपलब्ध हैं। इनमें से मुख्य ढिकाला कैंप में 28 कमरे, सुल्तान क्षेत्र में 2, गैरल में 6, खिनानौली में 3 और सर्फदुली क्षेत्र में 2 कमरे बने हैं। इसके अलावा 20 डॉरमेट्री की सुविधा भी उपलब्ध है। भारतीय सैलानियों के लिए दो लोगों का एक रूम प्रति नाइट करीब 4 हजार रुपए है। वहीं विदेशी सैलानियों के लिए यही सुविधा करीब 9 हजार रुपए प्रति रात तक की है। ऑनलाइन बुकिंग से आसान हुआ सफर
डॉ. साकेत बडोला ने बताया- पर्यटक कॉर्बेट पार्क की आधिकारिक वेबसाइट https://corbettgov.org पर जाकर ऑनलाइन बुकिंग कर सकते हैं। यहां से पर्यटक डे सफारी और नाइट स्टे दोनों की बुकिंग कर सकते हैं। पिछले साल आए थे 11,300 विदेशी सैलानी
डॉ. साकेत बडोला ने बताया- जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क भारत का पहला राष्ट्रीय उद्यान होने के साथ ही दुनियाभर के पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में कुल 4 लाख से अधिक पर्यटक कॉर्बेट पहुंचे, जिनमें 11,300 विदेशी सैलानी शामिल थे। साल दर साल विदेशी पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। वर्ष 2022-23 में 6,100 विदेशी पर्यटक आए, जबकि 2023-24 में यह संख्या बढ़कर 9 हजार हो गई। अन्य पर्यटन जोन भी आकर्षण का केंद्र
कॉर्बेट पार्क में कुल 8 ढिकाला, बिजरानी, झिरना, ढेला, दुर्गादेवी, सोननदी, गर्जिया और पाखरो सफारी जोन हैं। इनमें से ढिकाला, बिजरानी, झिरना, ढेला और दुर्गादेवी जोन सबसे लोकप्रिय हैं। कुछ जोन जैसे झिरना, ढेला और गर्जिया पूरे साल खुले रहते हैं, जबकि अन्य मानसून में बंद होते हैं। बिजरानी जोन में 7 कमरे रात्रि विश्राम के लिए उपलब्ध हैं। ढेला जोन में 2 रूम की सुविधा है। झिरना जोन में 4 कमरे हैं। पाखरो जोन और सोना नदी जोन में 2-2 कमरे रात्रि विश्राम के लिए बने हैं। स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा
ढिकाला जोन की एडवांस बुकिंग का सीधा फायदा रामनगर और आसपास के पर्यटन कारोबारियों को मिलेगा। होटल, गाइड, जीप सफारी ऑपरेटर, हस्तशिल्प विक्रेता और स्थानीय भोजनालयों को इससे अतिरिक्त आमदनी की उम्मीद है। पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी सैलानियों की बढ़ती संख्या से न केवल कॉर्बेट का वैश्विक पर्यटन ग्राफ ऊपर जाएगा, बल्कि स्थानीय लोगों को भी नए रोजगार के अवसर मिलेंगे। पर्यटन कारोबारियों ने की पहल की सराहना
ढिकाला जोन के अग्रिम बुकिंग पैक होने की खबर से स्थानीय पर्यटन कारोबारी और होटल व्यवसायी बेहद उत्साहित हैं। रामनगर के पर्यटन कारोबारी रमेश सुयाल ने कहा- कॉर्बेट पार्क प्रशासन का यह कदम बेहद सराहनीय है। विदेशी सैलानियों को यात्रा की अग्रिम योजना बनानी होती है। ऐसे में 90 दिन पहले बुकिंग खोलना एक बेहतरीन निर्णय है। इससे कॉर्बेट की अंतरराष्ट्रीय पहचान और मजबूत होगी। प्रसिद्ध वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर दीप रजवार ने कहा यह बेहद खुशी की बात है कि ढिकाला जोन 18 जनवरी 2026 तक विदेशी सैलानियों से पैक हो चुका है। इस पहल से कॉर्बेट में विदेशी पर्यटकों की संख्या में फिर से उछाल आएगा। विदेशी सैलानी न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देते हैं, बल्कि उनसे स्थानीय लोगों को कई चीजें सीखने का अवसर भी मिलता है।
जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क का प्रसिद्ध ढिकाला पर्यटन जोन 15 नवंबर को पर्यटकों के लिए खोला जाएगा। कॉर्बेट पार्क में रात्रि विश्राम की सुविधा 15 नवंबर से शुरू होगी। अभी तक 200 से अधिक विदेशी पर्यटक रात्रि विश्राम के लिए कक्ष बुक कर चुके हैं। जनवरी 2026 तक सभी रूम फुल हो चुके हैं। ढिकाला जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान का सबसे बड़ा और सबसे लोकप्रिय सफारी क्षेत्र है। ढिकाला जोन हर साल मानसून के बाद 15 नवंबर से खुलता है और पर्यटकों के लिए सबसे पसंदीदा क्षेत्र माना जाता है। इसे हर साल 15 जून को पर्यटकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बंद कर दिया जाता है। इस साल 90 दिन पहले विदेशी पर्यटकों के लिए बुकिंग शुरू कर दी थी। वहीं भारतीय पर्यटकों के लिए 45 दिन पहले बुकिंग शुरू की गई थी। ढिकाला जोन में जंगल सफारी और रात्रि विश्राम दोनों की सुविधा उपलब्ध है, जहां पर्यटक बंगाल टाइगर, हाथी, हिरण, भालू, मगरमच्छ और अन्य पक्षी प्रजातियों के साथ जैव विविधता का अनुभव करते हैं। अब जानिए कॉर्बेट में सफारी अनुभव क्यों है खास…
कॉर्बेट की सफारी कई कारणों से खास है। जिनमें रॉयल बंगाल टाइगर जैसे वन्यजीवों को देखने का मौका, विविध वनस्पतियों और जीवों से भरी प्राकृतिक सुंदरता और अलग-अलग सफारी जोन और अनुभवों का विकल्प शामिल है। यह भारत का सबसे पुराना राष्ट्रीय उद्यान है जो प्रकृति और वन्य जीवन के अनूठे अनुभव प्रदान करता है और पक्षी-प्रेमियों के लिए भी एक स्वर्ग है। बाघों का घर- कॉर्बेट को रॉयल बंगाल टाइगर का महत्वपूर्ण घर माना जाता है। यह पार्क पहाड़ियों, घास के मैदानों, झीलों और नदी के किनारों के साथ विभिन्न प्रकार के वातावरण प्रदान करता है। पक्षी-प्रेमियों के लिए स्वर्ग- यहां 600 से अधिक पक्षी प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें भारतीय पिटा, क्रेस्टेड सर्पेंट ईगल और हॉर्नबिल जैसी प्रजातियां शामिल हैं। अनूठे सफारी विकल्प- जीप सफारी और हाथी सफारी जैसे विभिन्न विकल्प उपलब्ध हैं, जो वन्यजीवों को देखने के अलग-अलग परिप्रेक्ष्य प्रदान करते हैं। अलग-अलग सफारी जोन- पार्क को सात अलग-अलग जोन में बांटा गया है, जिनमें से प्रत्येक वन्य जीवन का अनुभव करने के लिए एक अनूठा मौका देता है। प्रकृति का रोमांच- कॉर्बेट प्रकृति के साथ एक गहन और अप्रत्याशित अनुभव प्रदान करता है, जहां शांतिपूर्ण जंगल के रास्तों से गुजरते हुए अचानक वन्यजीवों को देख सकते हैं। कुछ हिस्सों में रात भर रहने की सुविधा भी उपलब्ध है, जो वन्यजीवों के बीच रहने का एक अविस्मरणीय अनुभव प्रदान करता है। जनवरी तक विदेशी पर्यटकों की बुकिंग फुल
कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक डॉ. साकेत बडोला ने बताया- ढिकाला जोन के जंगलों में सफारी के दौरान पर्यटक जब बंगाल टाइगर को उसकी प्राकृतिक आवास में चलते देखते हैं, तो यह दृश्य जीवनभर याद रहता है। कॉर्बेट के ग्रासलैंड, विशाल साल के जंगल और रामगंगा नदी का संगम हर सैलानी को मोह लेता है। यही कारण है कि ढिकाला को कॉर्बेट का दिल कहा जाता है। इस बार रिकॉर्ड संख्या में 200 से अधिक विदेशी पर्यटकों ने रात्रि विश्राम के लिए बुकिंग कराई है। अब 18 जनवरी 2026 तक विदेशी सैलानियों का कोटा पूरी तरह पैक हो चुका है। 1000 भारतीय पर्यटकों ने कराई बुकिंग
निदेशक डॉ. साकेत बडोला ने बताया- भारतीय पर्यटकों का उत्साह भी कम नहीं है। पार्क प्रशासन ने देशी पर्यटकों के लिए बुकिंग 45 दिन पहले खोली थी और दिसंबर 2025 तक भारतीय पर्यटकों का कोटा भी पूरी तरह भर चुका है। अब तक 1000 से अधिक भारतीय पर्यटक दिसंबर तक की बुकिंग कर चुके हैं। ढिकाला जोन में रात्रि विश्राम की सुविधाएं
डॉ. साकेत बडोला ने बताया- ढिकाला जोन में रात्रि विश्राम के लिए कुल 41 कमरे उपलब्ध हैं। इनमें से मुख्य ढिकाला कैंप में 28 कमरे, सुल्तान क्षेत्र में 2, गैरल में 6, खिनानौली में 3 और सर्फदुली क्षेत्र में 2 कमरे बने हैं। इसके अलावा 20 डॉरमेट्री की सुविधा भी उपलब्ध है। भारतीय सैलानियों के लिए दो लोगों का एक रूम प्रति नाइट करीब 4 हजार रुपए है। वहीं विदेशी सैलानियों के लिए यही सुविधा करीब 9 हजार रुपए प्रति रात तक की है। ऑनलाइन बुकिंग से आसान हुआ सफर
डॉ. साकेत बडोला ने बताया- पर्यटक कॉर्बेट पार्क की आधिकारिक वेबसाइट https://corbettgov.org पर जाकर ऑनलाइन बुकिंग कर सकते हैं। यहां से पर्यटक डे सफारी और नाइट स्टे दोनों की बुकिंग कर सकते हैं। पिछले साल आए थे 11,300 विदेशी सैलानी
डॉ. साकेत बडोला ने बताया- जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क भारत का पहला राष्ट्रीय उद्यान होने के साथ ही दुनियाभर के पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में कुल 4 लाख से अधिक पर्यटक कॉर्बेट पहुंचे, जिनमें 11,300 विदेशी सैलानी शामिल थे। साल दर साल विदेशी पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। वर्ष 2022-23 में 6,100 विदेशी पर्यटक आए, जबकि 2023-24 में यह संख्या बढ़कर 9 हजार हो गई। अन्य पर्यटन जोन भी आकर्षण का केंद्र
कॉर्बेट पार्क में कुल 8 ढिकाला, बिजरानी, झिरना, ढेला, दुर्गादेवी, सोननदी, गर्जिया और पाखरो सफारी जोन हैं। इनमें से ढिकाला, बिजरानी, झिरना, ढेला और दुर्गादेवी जोन सबसे लोकप्रिय हैं। कुछ जोन जैसे झिरना, ढेला और गर्जिया पूरे साल खुले रहते हैं, जबकि अन्य मानसून में बंद होते हैं। बिजरानी जोन में 7 कमरे रात्रि विश्राम के लिए उपलब्ध हैं। ढेला जोन में 2 रूम की सुविधा है। झिरना जोन में 4 कमरे हैं। पाखरो जोन और सोना नदी जोन में 2-2 कमरे रात्रि विश्राम के लिए बने हैं। स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा
ढिकाला जोन की एडवांस बुकिंग का सीधा फायदा रामनगर और आसपास के पर्यटन कारोबारियों को मिलेगा। होटल, गाइड, जीप सफारी ऑपरेटर, हस्तशिल्प विक्रेता और स्थानीय भोजनालयों को इससे अतिरिक्त आमदनी की उम्मीद है। पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी सैलानियों की बढ़ती संख्या से न केवल कॉर्बेट का वैश्विक पर्यटन ग्राफ ऊपर जाएगा, बल्कि स्थानीय लोगों को भी नए रोजगार के अवसर मिलेंगे। पर्यटन कारोबारियों ने की पहल की सराहना
ढिकाला जोन के अग्रिम बुकिंग पैक होने की खबर से स्थानीय पर्यटन कारोबारी और होटल व्यवसायी बेहद उत्साहित हैं। रामनगर के पर्यटन कारोबारी रमेश सुयाल ने कहा- कॉर्बेट पार्क प्रशासन का यह कदम बेहद सराहनीय है। विदेशी सैलानियों को यात्रा की अग्रिम योजना बनानी होती है। ऐसे में 90 दिन पहले बुकिंग खोलना एक बेहतरीन निर्णय है। इससे कॉर्बेट की अंतरराष्ट्रीय पहचान और मजबूत होगी। प्रसिद्ध वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर दीप रजवार ने कहा यह बेहद खुशी की बात है कि ढिकाला जोन 18 जनवरी 2026 तक विदेशी सैलानियों से पैक हो चुका है। इस पहल से कॉर्बेट में विदेशी पर्यटकों की संख्या में फिर से उछाल आएगा। विदेशी सैलानी न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देते हैं, बल्कि उनसे स्थानीय लोगों को कई चीजें सीखने का अवसर भी मिलता है।