गृह मंत्रालय ने शुक्रवार को लेह में 24 सितंबर के हुई हिंसा की न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं। रिटायर्ड सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस बीएस चौहान को निष्पक्ष जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है। जांच समिति पुलिस कार्रवाई और चार लोगों की मौत के कारणों का पता लगाएगी। दरअसल, 24 सितंबर को लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस ने राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था। इस दौरान सुरक्षाबलों और प्रदर्शनकारियों के बीच भिड़ंत हुई, जिसमें चार लोग मारे गए और 90 घायल हुए। दो दिन बाद 26 सितंबर को पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत गिरफ्तार कर लिया गया था और जोधपुर जेल भेज दिया गया था। वांगचुक की रिहाई के लिए उनकी पत्नी गीतांजलि अंगमो ने 2 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। लेह प्रशासन को सहयोग के निर्देश जस्टिस चौहान के साथ इस जांच समिति में मोहन सिंह परिहार (रिटायर्ड डिस्ट्रिक्ट जज) और तुषार आनंद (IAS) शामिल हैं। लद्दाख के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को जांच में पूरी तरह सहयोग देने का निर्देश दिया गया है। सरकार ने कहा कि वह हमेशा बातचीत के लिए तैयार है और लेह एपेक्स बॉडी तथा कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस के साथ उच्च स्तरीय समिति के जरिए चर्चा जारी रखेगी। 18 अक्टूबर को बुलाया गया है विरोध मार्च यह जांच 18 अक्टूबर को लेह में होने वाले विरोध मार्च से एक दिन पहले आई है। प्रदर्शनकारी सोनम वांगचुक समेत सभी गिरफ्तारियों की मांग कर रहे हैं। इसके चलते क्षेत्र में एहतियातन BNS की धारा 163 लगा दी गई है। 6 अक्टूबर को निर्धारित स्वायत्तता पर चर्चा रद्द हो गई थी। इंटरनेट बहाल हो गया है, लेकिन क्षेत्र में स्थिति पूरी तरह से सामान्य नहीं हो पाई है। अब जानिए हिंसा कैसे भड़की…2 पॉइंट में —————- लेह हिंसा से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… सोनम वांगचुक अरेस्ट केस- SC में 29 अक्टूबर को सुनवाई:पत्नी गीतांजलि ने कहा, वे याचिका में बदलाव करना चाहती हैं, कोर्ट ने अनुमति दी सुप्रीम कोर्ट में लद्दाख के एन्वायर्नमेंट एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की रिहाई की मांग वाली याचिका पर बुधवार को सुनवाई हुई। वांगचुक की पत्नी गीतांजलि अंगमो के वकील कपिल सिब्बल ने कोर्ट से कहा कि वे याचिका में कुछ बदलाव करना चाहते हैं। इस पर कोर्ट ने अनुमति दे दी और मामले की सुनवाई 29 अक्टूबर तक टाल दी। पूरी खबर पढ़ें…
गृह मंत्रालय ने शुक्रवार को लेह में 24 सितंबर के हुई हिंसा की न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं। रिटायर्ड सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस बीएस चौहान को निष्पक्ष जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है। जांच समिति पुलिस कार्रवाई और चार लोगों की मौत के कारणों का पता लगाएगी। दरअसल, 24 सितंबर को लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस ने राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था। इस दौरान सुरक्षाबलों और प्रदर्शनकारियों के बीच भिड़ंत हुई, जिसमें चार लोग मारे गए और 90 घायल हुए। दो दिन बाद 26 सितंबर को पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत गिरफ्तार कर लिया गया था और जोधपुर जेल भेज दिया गया था। वांगचुक की रिहाई के लिए उनकी पत्नी गीतांजलि अंगमो ने 2 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। लेह प्रशासन को सहयोग के निर्देश जस्टिस चौहान के साथ इस जांच समिति में मोहन सिंह परिहार (रिटायर्ड डिस्ट्रिक्ट जज) और तुषार आनंद (IAS) शामिल हैं। लद्दाख के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को जांच में पूरी तरह सहयोग देने का निर्देश दिया गया है। सरकार ने कहा कि वह हमेशा बातचीत के लिए तैयार है और लेह एपेक्स बॉडी तथा कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस के साथ उच्च स्तरीय समिति के जरिए चर्चा जारी रखेगी। 18 अक्टूबर को बुलाया गया है विरोध मार्च यह जांच 18 अक्टूबर को लेह में होने वाले विरोध मार्च से एक दिन पहले आई है। प्रदर्शनकारी सोनम वांगचुक समेत सभी गिरफ्तारियों की मांग कर रहे हैं। इसके चलते क्षेत्र में एहतियातन BNS की धारा 163 लगा दी गई है। 6 अक्टूबर को निर्धारित स्वायत्तता पर चर्चा रद्द हो गई थी। इंटरनेट बहाल हो गया है, लेकिन क्षेत्र में स्थिति पूरी तरह से सामान्य नहीं हो पाई है। अब जानिए हिंसा कैसे भड़की…2 पॉइंट में —————- लेह हिंसा से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… सोनम वांगचुक अरेस्ट केस- SC में 29 अक्टूबर को सुनवाई:पत्नी गीतांजलि ने कहा, वे याचिका में बदलाव करना चाहती हैं, कोर्ट ने अनुमति दी सुप्रीम कोर्ट में लद्दाख के एन्वायर्नमेंट एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की रिहाई की मांग वाली याचिका पर बुधवार को सुनवाई हुई। वांगचुक की पत्नी गीतांजलि अंगमो के वकील कपिल सिब्बल ने कोर्ट से कहा कि वे याचिका में कुछ बदलाव करना चाहते हैं। इस पर कोर्ट ने अनुमति दे दी और मामले की सुनवाई 29 अक्टूबर तक टाल दी। पूरी खबर पढ़ें…