बेंगलुरु पुलिस ने 29 साल की डर्मेटोलॉजिस्ट की मौत के लगभग छह महीने बाद उसके पति को हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने बताया कि विक्टोरिया अस्पताल के गैस्ट्रो-सर्जन 31 साल के डॉ. महेंद्र रेड्डी को पत्नी डॉ. कृतिका एम रेड्डी की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया है। कृतिका के पिता, के मुनिरेड्डी की शिकायत के आधार पर मराठाहल्ली पुलिस ने मामला दर्ज किया था। उनका कहना था कि विसरा रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है कि बेटी को एनेस्थीसिया की दवा प्रोपोफोल का ओवरडोज दिया गया था, ताकि मौत को प्राकृतिक बताया जा सके। घर पर कैनुला लगाया, 3 दिन तक ओवरडोज दिया डॉक्टर दंपती बेंगलुरु के गुंजूर में रहते थे। 21 अप्रैल को कृतिका ने पेट दर्द की शिकायत की, जिसके बाद महेंद्र ने दवाइयां इंजेक्ट करने के लिए उसके दाहिने पैर में एक कैनुला डाला। अगले दिन, काम पर जाने से पहले महेंद्र, कृतिका को उसके माता-पिता के घर छोड़ गया था। अगले दिन कृतिका ने पैर में दर्द की शिकायत की और व्हाट्सएप पर महेंद्र से पूछा कि क्या वह कैनुला हटा सकती है। उसने मना कर दिया। साथ ही कहा कि एक और खुराक दर्द को वापस आने से रोक देगी। उसी रात कृतिका ने माता-पिता के साथ खाना खाकर कमरे में चली गई। फिर महेंद्र ने आखिरी डोज का इंजेक्शन लगाया। 24 अप्रैल को सुबह 7.30 बजे, महेंद्र ने अपनी सास को फोन करके बताया कि कृतिका कोई रिएक्शन नहीं दे रही है। उसके पिता आए और उसे बिना हिले-डुले पाया। वे उसे अस्पताल ले गए, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। पत्नी का पोस्टमार्टम देखना चाहता था आरोपी महेंद्र कृतिका के परिवार ने दावा किया है कि महेंद्र ने मौत की जांच प्रक्रिया बाधित करने की कोशिश भी की। वह पोस्टमॉर्टम रूम में घुस रहा था। लेकिन पुलिस ने उसे अंदर जाने से मना कर दिया। एक रिश्तेदार के मुताबिक उन्हें यह बेहद असामान्य लगा और हमने फोरेंसिक जांच और विश्लेषण पर जोर दिया। डेक्कन हेराल्ड की रिपोर्ट के मुताबिक महेंद्र अक्सर हत्या और अपराध पर आधारित टीवी सीरीज और फिल्में देखता था। इसके बाद, उसका व्यवहार बदल गया था। प्रोपोफोल के ओवरडोज से मौत संभव- एक्सपर्ट प्रोपोफोल एक इंट्रावेनस एनेस्थेटिक है जिसका उपयोग सर्जरी या बेहोश करने की प्रक्रिया के दौरान किया जाता है। इसकी खुराक आमतौर पर शरीर के वजन के प्रति किलोग्राम के आधार पर 1 से 2.5 मिलीग्राम होती है, और बेहोशी बनाए रखने के लिए, 50-200 माइक्रोग्राम प्रति किलोग्राम होती है। ओवरडोज लेने से बीपी और हार्ट रेट में गिरावट आ सकती है, जिससे मृत्यु हो सकती है। कृतिका के पैसों पर निर्भर था महेंद्र रिश्तेदार के मुताबिक, विक्टोरिया अस्पताल में फेलोशिप के दौरान उसने जो पैसा कमाया, वह कहां गया। उसने अपने ससुर से उसके लिए एक अस्पताल बनवाने की मांग की, लेकिन उन्होंने उसे सलाह दी कि पहले मराठाहल्ली में नए क्लिनिक में काम करके अनुभव हासिल करे। हालांकि 13 अक्टूबर को कृतिका के परिवार को महेंद्र की अपराध का पता चला। तीन दिन पहले परिवार को यह भी पता चला कि महेंद्र का मुंबई में पोस्टग्रेजुएशन के दिनों से ही एक महिला के साथ कथित तौर पर रिश्ता था, जो उसकी शादी के बाद भी जारी रहा। यह बात महेंद्र के माता-पिता को पता थी। रिश्तेदार के मुताबिक, जब कृतिका के पिता ने पूछताछ की, तो पता चला कि महेंद्र के भाई पर धोखाधड़ी और आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें महेंद्र भी सह-आरोपी है।
बेंगलुरु पुलिस ने 29 साल की डर्मेटोलॉजिस्ट की मौत के लगभग छह महीने बाद उसके पति को हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने बताया कि विक्टोरिया अस्पताल के गैस्ट्रो-सर्जन 31 साल के डॉ. महेंद्र रेड्डी को पत्नी डॉ. कृतिका एम रेड्डी की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया है। कृतिका के पिता, के मुनिरेड्डी की शिकायत के आधार पर मराठाहल्ली पुलिस ने मामला दर्ज किया था। उनका कहना था कि विसरा रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है कि बेटी को एनेस्थीसिया की दवा प्रोपोफोल का ओवरडोज दिया गया था, ताकि मौत को प्राकृतिक बताया जा सके। घर पर कैनुला लगाया, 3 दिन तक ओवरडोज दिया डॉक्टर दंपती बेंगलुरु के गुंजूर में रहते थे। 21 अप्रैल को कृतिका ने पेट दर्द की शिकायत की, जिसके बाद महेंद्र ने दवाइयां इंजेक्ट करने के लिए उसके दाहिने पैर में एक कैनुला डाला। अगले दिन, काम पर जाने से पहले महेंद्र, कृतिका को उसके माता-पिता के घर छोड़ गया था। अगले दिन कृतिका ने पैर में दर्द की शिकायत की और व्हाट्सएप पर महेंद्र से पूछा कि क्या वह कैनुला हटा सकती है। उसने मना कर दिया। साथ ही कहा कि एक और खुराक दर्द को वापस आने से रोक देगी। उसी रात कृतिका ने माता-पिता के साथ खाना खाकर कमरे में चली गई। फिर महेंद्र ने आखिरी डोज का इंजेक्शन लगाया। 24 अप्रैल को सुबह 7.30 बजे, महेंद्र ने अपनी सास को फोन करके बताया कि कृतिका कोई रिएक्शन नहीं दे रही है। उसके पिता आए और उसे बिना हिले-डुले पाया। वे उसे अस्पताल ले गए, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। पत्नी का पोस्टमार्टम देखना चाहता था आरोपी महेंद्र कृतिका के परिवार ने दावा किया है कि महेंद्र ने मौत की जांच प्रक्रिया बाधित करने की कोशिश भी की। वह पोस्टमॉर्टम रूम में घुस रहा था। लेकिन पुलिस ने उसे अंदर जाने से मना कर दिया। एक रिश्तेदार के मुताबिक उन्हें यह बेहद असामान्य लगा और हमने फोरेंसिक जांच और विश्लेषण पर जोर दिया। डेक्कन हेराल्ड की रिपोर्ट के मुताबिक महेंद्र अक्सर हत्या और अपराध पर आधारित टीवी सीरीज और फिल्में देखता था। इसके बाद, उसका व्यवहार बदल गया था। प्रोपोफोल के ओवरडोज से मौत संभव- एक्सपर्ट प्रोपोफोल एक इंट्रावेनस एनेस्थेटिक है जिसका उपयोग सर्जरी या बेहोश करने की प्रक्रिया के दौरान किया जाता है। इसकी खुराक आमतौर पर शरीर के वजन के प्रति किलोग्राम के आधार पर 1 से 2.5 मिलीग्राम होती है, और बेहोशी बनाए रखने के लिए, 50-200 माइक्रोग्राम प्रति किलोग्राम होती है। ओवरडोज लेने से बीपी और हार्ट रेट में गिरावट आ सकती है, जिससे मृत्यु हो सकती है। कृतिका के पैसों पर निर्भर था महेंद्र रिश्तेदार के मुताबिक, विक्टोरिया अस्पताल में फेलोशिप के दौरान उसने जो पैसा कमाया, वह कहां गया। उसने अपने ससुर से उसके लिए एक अस्पताल बनवाने की मांग की, लेकिन उन्होंने उसे सलाह दी कि पहले मराठाहल्ली में नए क्लिनिक में काम करके अनुभव हासिल करे। हालांकि 13 अक्टूबर को कृतिका के परिवार को महेंद्र की अपराध का पता चला। तीन दिन पहले परिवार को यह भी पता चला कि महेंद्र का मुंबई में पोस्टग्रेजुएशन के दिनों से ही एक महिला के साथ कथित तौर पर रिश्ता था, जो उसकी शादी के बाद भी जारी रहा। यह बात महेंद्र के माता-पिता को पता थी। रिश्तेदार के मुताबिक, जब कृतिका के पिता ने पूछताछ की, तो पता चला कि महेंद्र के भाई पर धोखाधड़ी और आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें महेंद्र भी सह-आरोपी है।