हरियाणा के हिसार में कोर्ट ने देशद्रोह मामले में रामपाल की जमानत याचिका खारिज कर दी है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश परमिंदर कौर ने पुलिस के जवाब और बहस के बाद गुरुवार को यह फैसला सुनाया। रामपाल के वकील महेंद्र सिंह नैन और सचिन दास अगले सप्ताह हाईकोर्ट में जमानत याचिका दायर करेंगे। इस मामले में 980 से अधिक आरोपी हैं। इनमें से रामपाल और हाल ही में गिरफ्तार एक आरोपी जेल में है। रामपाल चार आपराधिक मामलों से बरी हो चुके हैं। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हत्या के दो मामलों में उनकी सजा निलंबित कर दी है। करीब 19 साल पहले रोहतक के करौंथा आश्रम में समर्थकों और आर्य समाजियों के बीच हुए संघर्ष में एक युवक की हत्या हुई थी। 14 जुलाई 2014 को रोहतक अदालत में सुनवाई थी। यह सुनवाई हिसार अदालत से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए होनी थी। इस दिन रामपाल के समर्थकों ने हिसार अदालत परिसर में उपद्रव किया। उन्होंने अदालत परिसर को घेरा, एक शीशा तोड़ा और वकीलों से मारपीट की। जिला बार एसोसिएशन ने हड़ताल कर हाईकोर्ट में अदालत की अवमानना याचिका दायर की। रामपाल 2 बार अदालत में पेश नहीं हुए। उनके खिलाफ 10 और 17 नवंबर 2014 को गैर जमानती वारंट जारी किए गए। 17 नवंबर को भी गिरफ्तारी न होने पर हाईकोर्ट ने 20 नवंबर तक का समय दिया। 18 नवंबर को पुलिस की कार्रवाई के जवाब में रामपाल के कमांडो ने पेट्रोल बम फेंके और गोलियां चलाईं। पुलिस ने देशद्रोह समेत कई मामले दर्ज किए। रामपाल नवंबर 2014 से जेल में हैं। पिछले दिनों हाईकोर्ट ने उम्रकैद की सजा पर रोक लगा दी। अब यहां पढ़िए, बाबा रामपाल के जन्म से लेकर जेल जाने तक की कहानी… पुलिस और बाबा के समर्थकों के बीच हुई थी हिंसक झड़क
इसके बाद बाबा के जीवन में भूचाल आना बंद नहीं हुए। बाबा के खिलाफ आर्यसमाज के लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दी। कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी। इसके बाद 12 मई 2013 को नाराज आर्य के लोगों और रामपाल के समर्थकों में एक बार फिर झड़प हुई। इस झड़प में तीन लोगों की मौत हो गई। करीब 100 लोग घायल हो गए। 2014 में, रामपाल के खिलाफ अदालत में पेश न होने के कारण अवमानना के आरोप में गिरफ्तारी का आदेश दिया गया। बाबा रामपाल पर कई आरोप लगे
पुलिस ने सतलोक आश्रम पर धावा बोला, जहां उनके अनुयायियों ने उनकी गिरफ्तारी को रोकने के लिए प्रतिरोध किया। इस घेराबंदी में कई लोग घायल हुए और एक सप्ताह तक चले इस घेराबंदी में छह लोगों की मौत हो गई। इसके बाद, रामपाल को गिरफ्तार कर चंडीगढ़ ले जाया गया जहां उनका मुकदमा चलाया गया। बाबा रामपाल पर कई आरोप लगे, जिनमें हत्या, अवैध हथियार रखना, और दंगा करना शामिल थे। 2014 से जेल में बंद है बाबा रामपाल
रामपाल की गिरफ्तारी के बाद, उन्हें अदालत में पेश किया गया और कई सालों तक कानूनी लड़ाई चलती रही। 2018 में, हिसार की अदालत ने उन्हें दोषी ठहराया और आजीवन कारावास की सजा सुनाई। वर्तमान में, बाबा रामपाल जेल में हैं, लेकिन उनके अनुयायियों की संख्या अब भी काफी है, जो उनकी शिक्षाओं का पालन करते हैं और उन्हें निर्दोष मानते हैं।
एक जूनियर इंजीनियर से लेकर एक विवादास्पद धार्मिक गुरु बनने तक का उनका सफर काफी घटनाओं से भरा रहा है। जेल में होने के बावजूद, उनके अनुयायी अब भी उनकी शिक्षाओं में विश्वास करते हैं और उन्हें आदर देते हैं।
हरियाणा के हिसार में कोर्ट ने देशद्रोह मामले में रामपाल की जमानत याचिका खारिज कर दी है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश परमिंदर कौर ने पुलिस के जवाब और बहस के बाद गुरुवार को यह फैसला सुनाया। रामपाल के वकील महेंद्र सिंह नैन और सचिन दास अगले सप्ताह हाईकोर्ट में जमानत याचिका दायर करेंगे। इस मामले में 980 से अधिक आरोपी हैं। इनमें से रामपाल और हाल ही में गिरफ्तार एक आरोपी जेल में है। रामपाल चार आपराधिक मामलों से बरी हो चुके हैं। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हत्या के दो मामलों में उनकी सजा निलंबित कर दी है। करीब 19 साल पहले रोहतक के करौंथा आश्रम में समर्थकों और आर्य समाजियों के बीच हुए संघर्ष में एक युवक की हत्या हुई थी। 14 जुलाई 2014 को रोहतक अदालत में सुनवाई थी। यह सुनवाई हिसार अदालत से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए होनी थी। इस दिन रामपाल के समर्थकों ने हिसार अदालत परिसर में उपद्रव किया। उन्होंने अदालत परिसर को घेरा, एक शीशा तोड़ा और वकीलों से मारपीट की। जिला बार एसोसिएशन ने हड़ताल कर हाईकोर्ट में अदालत की अवमानना याचिका दायर की। रामपाल 2 बार अदालत में पेश नहीं हुए। उनके खिलाफ 10 और 17 नवंबर 2014 को गैर जमानती वारंट जारी किए गए। 17 नवंबर को भी गिरफ्तारी न होने पर हाईकोर्ट ने 20 नवंबर तक का समय दिया। 18 नवंबर को पुलिस की कार्रवाई के जवाब में रामपाल के कमांडो ने पेट्रोल बम फेंके और गोलियां चलाईं। पुलिस ने देशद्रोह समेत कई मामले दर्ज किए। रामपाल नवंबर 2014 से जेल में हैं। पिछले दिनों हाईकोर्ट ने उम्रकैद की सजा पर रोक लगा दी। अब यहां पढ़िए, बाबा रामपाल के जन्म से लेकर जेल जाने तक की कहानी… पुलिस और बाबा के समर्थकों के बीच हुई थी हिंसक झड़क
इसके बाद बाबा के जीवन में भूचाल आना बंद नहीं हुए। बाबा के खिलाफ आर्यसमाज के लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दी। कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी। इसके बाद 12 मई 2013 को नाराज आर्य के लोगों और रामपाल के समर्थकों में एक बार फिर झड़प हुई। इस झड़प में तीन लोगों की मौत हो गई। करीब 100 लोग घायल हो गए। 2014 में, रामपाल के खिलाफ अदालत में पेश न होने के कारण अवमानना के आरोप में गिरफ्तारी का आदेश दिया गया। बाबा रामपाल पर कई आरोप लगे
पुलिस ने सतलोक आश्रम पर धावा बोला, जहां उनके अनुयायियों ने उनकी गिरफ्तारी को रोकने के लिए प्रतिरोध किया। इस घेराबंदी में कई लोग घायल हुए और एक सप्ताह तक चले इस घेराबंदी में छह लोगों की मौत हो गई। इसके बाद, रामपाल को गिरफ्तार कर चंडीगढ़ ले जाया गया जहां उनका मुकदमा चलाया गया। बाबा रामपाल पर कई आरोप लगे, जिनमें हत्या, अवैध हथियार रखना, और दंगा करना शामिल थे। 2014 से जेल में बंद है बाबा रामपाल
रामपाल की गिरफ्तारी के बाद, उन्हें अदालत में पेश किया गया और कई सालों तक कानूनी लड़ाई चलती रही। 2018 में, हिसार की अदालत ने उन्हें दोषी ठहराया और आजीवन कारावास की सजा सुनाई। वर्तमान में, बाबा रामपाल जेल में हैं, लेकिन उनके अनुयायियों की संख्या अब भी काफी है, जो उनकी शिक्षाओं का पालन करते हैं और उन्हें निर्दोष मानते हैं।
एक जूनियर इंजीनियर से लेकर एक विवादास्पद धार्मिक गुरु बनने तक का उनका सफर काफी घटनाओं से भरा रहा है। जेल में होने के बावजूद, उनके अनुयायी अब भी उनकी शिक्षाओं में विश्वास करते हैं और उन्हें आदर देते हैं।