हिमाचल प्रदेश में अनियोजित निर्माण पर सुप्रीम कोर्ट (SC) ने अपनी स्वत: संज्ञान वाली जनहित याचिका पर आज (मंगलवार को) सुनवाई की। SC ने एक आदेश पारित किया, जिसमें हिमाचल सरकार से राज्य में प्राकृतिक संसाधनों के दोहन और पारिस्थितिक असंतुलन से संबंधित कुछ सवालों के जवाब मांगे गए। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने सवालों की एक प्रश्नावली जारी की, राज्य सरकार को इसका जवाब 28 अक्टूबर तक देना है। अदालत ने कहा कि, सवालों को लेकर विस्तृत आदेश आज सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड कर दिए जाएंगे। SC के सवाल पारिस्थितिक असंतुलन, प्राकृतिक आपदाओं, उनके कारणों और राज्य सरकार द्वारा उठाए गए कदमों से संबंधित होंगे। कोर्ट ने ये सवाल एमिकस क्यूरी की रिपोर्ट के पेज नंबर 65 के आधार पर पूछे हैं। राज्य सरकार की जिम्मेदारी राज्य सरकार को पारिस्थितिक असंतुलन के मुद्दे पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। सरकार को अनियोजित शहरीकरण और वनों की कटाई पर रोक लगाने और पर्यावरण संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। कोर्ट ने राज्य सरकार से एक विस्तृत रिपोर्ट मांगी है, जिसमें पारिस्थितिक असंतुलन के कारणों और समाधानों का उल्लेख करना होगा। हिमाचल को लेकर SC पहले भी सख्त टिप्पणी कर चुका इससे पहले, एमएस प्रिस्टीन होटल्स एंड रिजॉर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड की ओर से दायर याचिका की सुनवाई के दौरान 1 अगस्त 2025 को जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने कहा था- यदि हिमाचल में निर्माण कार्य और विकास योजनाएं इसी तरह बिना वैज्ञानिक दृष्टिकोण के चलती रहीं तो वह दिन दूर नहीं जब हिमाचल देश के नक्शे से गायब हो जाएगा। भगवान करें कि ऐसा न हो। बेंच ने प्रिस्टीन होटल्स एंड रिजॉर्ट्स प्राइवेट की याचिका को खारिज करते हुए हिमालय क्षेत्र में पर्यावरण विनाश से जुड़े इस केस को जनहित याचिका माना। राज्य सरकार की रिपोर्ट की समीक्षा की 15 सितंबर 2025 को यह केस जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने सुना। इसमें राज्य सरकार की ओर से दायर रिपोर्ट की समीक्षा की गई। इसके बाद, आज दोबारा सुनवाई हुई। कैसे सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला दरअसल, एमएस प्रिस्टीन होटल्स एंड रिजॉर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड शिमला के साथ तारादेवी मंदिर के पास होटल बनाना चाहता है, लेकिन हिमाचल सरकार ने लगभग 4 महीने पहले ही तारादेवी के जंगल को ग्रीन एरिया (हरित क्षेत्र) नोटिफाई किया। ग्रीन एरिया में किसी को भी निर्माण की अनुमति नहीं दी जा सकती। इससे प्रिस्टीन होटल्स एंड रिजॉर्ट्स का होटल बनाने का सपना पूरा नहीं हो पाएगा। इसके बाद, प्रिस्टीन होटल्स एंड रिजॉर्ट्स ने राज्य सरकार की नोटिफिकेशन को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। कोर्ट ने 28 जुलाई को प्रिस्टीन होटल्स एंड रिजॉर्ट्स की याचिका को खारिज कर दिया। इसके बाद से यह मामला जनहित याचिका के तौर पर सुना जा रहा है। शिमला में 17 ग्रीन एरिया नोटिफाई
हिमाचल सरकार ने शिमला शहर व उप नगरों के 17 जंगलों को ग्रीन एरिया नोटिफाई कर रखा है। ग्रीन एरिया में निर्माण कार्य पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसका मकसद भी जंगलों को बचाना है। शिमला के ग्रीन एरिया में कई लोगों ने पहले ही जमीन खरीद रखी है, लेकिन उन्हें भी ग्रीन एरिया में निर्माण की इजाजत नहीं मिल रही है।
हिमाचल प्रदेश में अनियोजित निर्माण पर सुप्रीम कोर्ट (SC) ने अपनी स्वत: संज्ञान वाली जनहित याचिका पर आज (मंगलवार को) सुनवाई की। SC ने एक आदेश पारित किया, जिसमें हिमाचल सरकार से राज्य में प्राकृतिक संसाधनों के दोहन और पारिस्थितिक असंतुलन से संबंधित कुछ सवालों के जवाब मांगे गए। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने सवालों की एक प्रश्नावली जारी की, राज्य सरकार को इसका जवाब 28 अक्टूबर तक देना है। अदालत ने कहा कि, सवालों को लेकर विस्तृत आदेश आज सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड कर दिए जाएंगे। SC के सवाल पारिस्थितिक असंतुलन, प्राकृतिक आपदाओं, उनके कारणों और राज्य सरकार द्वारा उठाए गए कदमों से संबंधित होंगे। कोर्ट ने ये सवाल एमिकस क्यूरी की रिपोर्ट के पेज नंबर 65 के आधार पर पूछे हैं। राज्य सरकार की जिम्मेदारी राज्य सरकार को पारिस्थितिक असंतुलन के मुद्दे पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। सरकार को अनियोजित शहरीकरण और वनों की कटाई पर रोक लगाने और पर्यावरण संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। कोर्ट ने राज्य सरकार से एक विस्तृत रिपोर्ट मांगी है, जिसमें पारिस्थितिक असंतुलन के कारणों और समाधानों का उल्लेख करना होगा। हिमाचल को लेकर SC पहले भी सख्त टिप्पणी कर चुका इससे पहले, एमएस प्रिस्टीन होटल्स एंड रिजॉर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड की ओर से दायर याचिका की सुनवाई के दौरान 1 अगस्त 2025 को जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने कहा था- यदि हिमाचल में निर्माण कार्य और विकास योजनाएं इसी तरह बिना वैज्ञानिक दृष्टिकोण के चलती रहीं तो वह दिन दूर नहीं जब हिमाचल देश के नक्शे से गायब हो जाएगा। भगवान करें कि ऐसा न हो। बेंच ने प्रिस्टीन होटल्स एंड रिजॉर्ट्स प्राइवेट की याचिका को खारिज करते हुए हिमालय क्षेत्र में पर्यावरण विनाश से जुड़े इस केस को जनहित याचिका माना। राज्य सरकार की रिपोर्ट की समीक्षा की 15 सितंबर 2025 को यह केस जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने सुना। इसमें राज्य सरकार की ओर से दायर रिपोर्ट की समीक्षा की गई। इसके बाद, आज दोबारा सुनवाई हुई। कैसे सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला दरअसल, एमएस प्रिस्टीन होटल्स एंड रिजॉर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड शिमला के साथ तारादेवी मंदिर के पास होटल बनाना चाहता है, लेकिन हिमाचल सरकार ने लगभग 4 महीने पहले ही तारादेवी के जंगल को ग्रीन एरिया (हरित क्षेत्र) नोटिफाई किया। ग्रीन एरिया में किसी को भी निर्माण की अनुमति नहीं दी जा सकती। इससे प्रिस्टीन होटल्स एंड रिजॉर्ट्स का होटल बनाने का सपना पूरा नहीं हो पाएगा। इसके बाद, प्रिस्टीन होटल्स एंड रिजॉर्ट्स ने राज्य सरकार की नोटिफिकेशन को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। कोर्ट ने 28 जुलाई को प्रिस्टीन होटल्स एंड रिजॉर्ट्स की याचिका को खारिज कर दिया। इसके बाद से यह मामला जनहित याचिका के तौर पर सुना जा रहा है। शिमला में 17 ग्रीन एरिया नोटिफाई
हिमाचल सरकार ने शिमला शहर व उप नगरों के 17 जंगलों को ग्रीन एरिया नोटिफाई कर रखा है। ग्रीन एरिया में निर्माण कार्य पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसका मकसद भी जंगलों को बचाना है। शिमला के ग्रीन एरिया में कई लोगों ने पहले ही जमीन खरीद रखी है, लेकिन उन्हें भी ग्रीन एरिया में निर्माण की इजाजत नहीं मिल रही है।