दुनिया की सबसे बड़ी प्रशासनिक कवायद जनगणना-2027 की शुरुआत से पहले पूरे तंत्र की जांच-परख के लिए 1 अक्टूबर से मॉकड्रिल शुरू होगी। सूत्रों ने बताया कि मॉक ड्रिल 60 दिन चलेगी। इस दौरान, जनगणना की तमाम गतिविधियां जांची जाएंगी। अनुभवों के आधार पर 6 महीने में खामियां दूर कर 1 अप्रैल 2026 से वास्तविक जनगणना शुरू की जाएगी। मॉकड्रिल में जनगणना कर्मी पूरी मशीनरी की टेस्टिंग और उस पर काम का अभ्यास करेंगे। स्मार्ट मैप, हाउस लिस्टिंग के तरीके, डेटा कलेक्शन, रियल टाइम डेटा ट्रांसफर, घर-घर जाकर लोकेशन ट्रैकिंग, एप में हर घर की जियो पिन बनाना और उसके अक्षांश एवं देशांतर के जीपीएस बनाने की पड़ताल होगी। हाउस लिस्टिंग में सबसे बड़ी जांच डिजिटल लेआउट मैपिंग की होगी। इसके तहत, मकानों और सभी प्रतिष्ठानों की जियो टैगिंग होगी। गणनाकर्मी घर पहुंचकर एप में लोकेशन ऑन करेंगे। उसे मैप पर पिन करेंगे। इस तरह मकान या प्रतिष्ठान की जियो टैगिंग हो जाएगी। हर गांव, कस्बे व शहर के हर मकान, दुकान, धर्मस्थल, होटल और अन्य इमारतें डॉट बनकर जीपीएस मानचित्र बन जाएंगी। मैप पर हर घर ‘डिजि डॉट’ बनेगा, इसके 5 फायदे होंगे 1. आपदा में सटीक राहत
जियो टैगिंग से बना डिजिटल लेआउट मैप बादल फटने, बाढ़ आने या भूकंप जैसी अनहोनी के समय उपयोगी साबित होगा। सुदूर हिमालयी क्षेत्र में बसे किसी गांव में बादल फटने जैसी घटना के समय इस मैप से तुरंत पता चल जाएगा कि किस घर में कितने लोग रहते हैं। होटलों में क्षमता के हिसाब से कितने लोग रहे होंगे। इस ब्योरे से बचाव के लिए जरूरी तमाम नौका, हेलीकॉप्टर, फूड पैकेट आदि की व्यवस्था करने में मदद मिलेगी। 2. परिसीमन में मदद मिलेगी
राजनीतिक सीमाएं जैसे संसदीय या विधानसभा क्षेत्रों का युक्तिसंगत तरीके से निर्धारण करने में भी इससे मदद मिलेगी। जियो टैगिंग से तैयार मैप से यह तस्वीर साफ हो जाएगी कि क्षेत्र में ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र का संतुलित बंटवारा कैसे हो। समुदायों को ऐसे न बांट दिया जाए कि एक मोहल्ला एक क्षेत्र में और दूसरा मोहल्ला किसी अन्य क्षेत्र में शामिल हो जए। घरों के डिजि डॉट से डिलिमिटेशन की प्रक्रिया में आसानी होगी। 3. शहरी प्लानिंग में आसानी
शहरों में सड़कों, स्कूलों, अस्पतालों या पार्कों की प्लानिंग करने में भी यह मैप उपयोगी साबित होगा। अगर किसी जगह के घरों के डिजिटल लेआउट में बच्चों की अधिकता होगी तो पार्क और स्कूल प्राथमिकता से बनाने की योजना तैयार की जा सकेंगी। यदि किसी बस्ती में कच्चे मकानों या खराब घरों की अधिकता दिखेगी तो वहां किसी मेडिकल इमरजेंसी के समय तत्काल मोबाइल राहत वैन भेजी जा सकेंगी। 4. शहरीकरण और पलायन दर का डेटा मिलेगा
इस जनगणना के दस साल बाद होनी वाली जनगणना में डिजिटल मैप के परिवर्तन आसानी से दर्ज किए जा सकेंगे। देश के विभिन्न हिस्सों में शहरीकरण की दर और पलायन के क्षेत्रों की मैपिंग की तुलना सटीक ढंग से की जा सकेगी। 5. मतदाता सूची से डुप्लीकेट नाम हट जाएंगे
आधार की पहचान के साथ जियो टैगिंग मतदाता सूची को सटीक और मजबूत बनाने में सहायक होगी। जब वोटर किसी भौगोलिक स्थान से डिजिटली जुड़ा होगा तो दोहरे पंजीकरण के समय उसके मूल निवास का पता भी सामने आएगा। पहला फेज 1 अप्रैल 2026 से शुरू होगा, घरों की लिस्टिंग होगी 2027 जनगणना दो चरणों में की जाएगी। भारत के महापंजीयक और जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने कहा कि 1 अप्रैल 2026 से मकानों की लिस्टिंग, सुपरवाइजर्स और गणना कर्मचारियों की नियुक्ति, काम का बंटवारा किया जाएगा। 1 फरवरी 2027 को जनसंख्या की जनगणना शुरू होगी। 1 जनवरी 26 से मार्च 2027 तक प्रशासनिक सीमाएं फ्रीज रहेंगी जनगणना का ज्यादातर काम पेपरलेस होगा
मोबाइल एप, पोर्टल और रियल टाइम डेटा ट्रांसफर से जनगणना बहुत हद तक पेपरलेस होगी। कागज पर लिखी जानकारी पढ़ने के लिए एआई आधारित इंटेलीजेंट कैरेक्टर रिकगनीशन टूल्स होंगे। जीपीएस टैगिंग और प्री-कोडेड ड्रॉपडाउन मैन्यू की व्यवस्था में गलती की गुंजाइश नहीं रहेगी। आम लोगों की मदद के लिए राष्ट्रव्यापी प्रचार होगा। 16 जून को जनगणना का गजट नोटिफिकेशन जारी हुआ था
गृह मंत्रालय ने सोमवार (16 जून) को जनगणना के लिए नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। केंद्र सरकार दो फेज में जातीय कराएगी। नोटिफिकेशन के मुताबिक, पहले फेज की शुरुआत 1 अक्टूबर 2026 से होगी। इसमें 4 पहाड़ी राज्य- हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख शामिल हैं। 1 मार्च 2027 से दूसरा फेज शुरू होगा। इसमें देश के बाकी राज्यों में जनगणना शुरू होगी। देश में 9वीं बार होगी जातीय गणना देश में अब तक कुल 8 बार जातीय जनगणना हुई है। 1872 से 1931 के बीच 7 बार ब्रिटिशकाल में और एक बार 2011 में आजाद भारत में। हालांकि, 2011 की जातीय जनगणना के आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए गए। जातीय जनगणना की घोषणा के साथ ही सरकार ने इसके क्रियान्वयन की रूपरेखा बनानी भी शुरू कर दी है। वर्ष 2011 की जातीय जनगणना में जो गलती हुई थी, केंद्र सरकार इस बार उसे दोहराना नहीं चाहती। तब सरकार ने जातियों की पहले से कोई सूची नहीं बनाई थी, जिसने अपनी जो भी जाति बताई, उसे ही दर्ज करते गए। नतीजा ये हुआ कि 46 लाख से भी ज्यादा जातियां दर्ज हो गईं। पूरी खबर पढ़ें…
दुनिया की सबसे बड़ी प्रशासनिक कवायद जनगणना-2027 की शुरुआत से पहले पूरे तंत्र की जांच-परख के लिए 1 अक्टूबर से मॉकड्रिल शुरू होगी। सूत्रों ने बताया कि मॉक ड्रिल 60 दिन चलेगी। इस दौरान, जनगणना की तमाम गतिविधियां जांची जाएंगी। अनुभवों के आधार पर 6 महीने में खामियां दूर कर 1 अप्रैल 2026 से वास्तविक जनगणना शुरू की जाएगी। मॉकड्रिल में जनगणना कर्मी पूरी मशीनरी की टेस्टिंग और उस पर काम का अभ्यास करेंगे। स्मार्ट मैप, हाउस लिस्टिंग के तरीके, डेटा कलेक्शन, रियल टाइम डेटा ट्रांसफर, घर-घर जाकर लोकेशन ट्रैकिंग, एप में हर घर की जियो पिन बनाना और उसके अक्षांश एवं देशांतर के जीपीएस बनाने की पड़ताल होगी। हाउस लिस्टिंग में सबसे बड़ी जांच डिजिटल लेआउट मैपिंग की होगी। इसके तहत, मकानों और सभी प्रतिष्ठानों की जियो टैगिंग होगी। गणनाकर्मी घर पहुंचकर एप में लोकेशन ऑन करेंगे। उसे मैप पर पिन करेंगे। इस तरह मकान या प्रतिष्ठान की जियो टैगिंग हो जाएगी। हर गांव, कस्बे व शहर के हर मकान, दुकान, धर्मस्थल, होटल और अन्य इमारतें डॉट बनकर जीपीएस मानचित्र बन जाएंगी। मैप पर हर घर ‘डिजि डॉट’ बनेगा, इसके 5 फायदे होंगे 1. आपदा में सटीक राहत
जियो टैगिंग से बना डिजिटल लेआउट मैप बादल फटने, बाढ़ आने या भूकंप जैसी अनहोनी के समय उपयोगी साबित होगा। सुदूर हिमालयी क्षेत्र में बसे किसी गांव में बादल फटने जैसी घटना के समय इस मैप से तुरंत पता चल जाएगा कि किस घर में कितने लोग रहते हैं। होटलों में क्षमता के हिसाब से कितने लोग रहे होंगे। इस ब्योरे से बचाव के लिए जरूरी तमाम नौका, हेलीकॉप्टर, फूड पैकेट आदि की व्यवस्था करने में मदद मिलेगी। 2. परिसीमन में मदद मिलेगी
राजनीतिक सीमाएं जैसे संसदीय या विधानसभा क्षेत्रों का युक्तिसंगत तरीके से निर्धारण करने में भी इससे मदद मिलेगी। जियो टैगिंग से तैयार मैप से यह तस्वीर साफ हो जाएगी कि क्षेत्र में ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र का संतुलित बंटवारा कैसे हो। समुदायों को ऐसे न बांट दिया जाए कि एक मोहल्ला एक क्षेत्र में और दूसरा मोहल्ला किसी अन्य क्षेत्र में शामिल हो जए। घरों के डिजि डॉट से डिलिमिटेशन की प्रक्रिया में आसानी होगी। 3. शहरी प्लानिंग में आसानी
शहरों में सड़कों, स्कूलों, अस्पतालों या पार्कों की प्लानिंग करने में भी यह मैप उपयोगी साबित होगा। अगर किसी जगह के घरों के डिजिटल लेआउट में बच्चों की अधिकता होगी तो पार्क और स्कूल प्राथमिकता से बनाने की योजना तैयार की जा सकेंगी। यदि किसी बस्ती में कच्चे मकानों या खराब घरों की अधिकता दिखेगी तो वहां किसी मेडिकल इमरजेंसी के समय तत्काल मोबाइल राहत वैन भेजी जा सकेंगी। 4. शहरीकरण और पलायन दर का डेटा मिलेगा
इस जनगणना के दस साल बाद होनी वाली जनगणना में डिजिटल मैप के परिवर्तन आसानी से दर्ज किए जा सकेंगे। देश के विभिन्न हिस्सों में शहरीकरण की दर और पलायन के क्षेत्रों की मैपिंग की तुलना सटीक ढंग से की जा सकेगी। 5. मतदाता सूची से डुप्लीकेट नाम हट जाएंगे
आधार की पहचान के साथ जियो टैगिंग मतदाता सूची को सटीक और मजबूत बनाने में सहायक होगी। जब वोटर किसी भौगोलिक स्थान से डिजिटली जुड़ा होगा तो दोहरे पंजीकरण के समय उसके मूल निवास का पता भी सामने आएगा। पहला फेज 1 अप्रैल 2026 से शुरू होगा, घरों की लिस्टिंग होगी 2027 जनगणना दो चरणों में की जाएगी। भारत के महापंजीयक और जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने कहा कि 1 अप्रैल 2026 से मकानों की लिस्टिंग, सुपरवाइजर्स और गणना कर्मचारियों की नियुक्ति, काम का बंटवारा किया जाएगा। 1 फरवरी 2027 को जनसंख्या की जनगणना शुरू होगी। 1 जनवरी 26 से मार्च 2027 तक प्रशासनिक सीमाएं फ्रीज रहेंगी जनगणना का ज्यादातर काम पेपरलेस होगा
मोबाइल एप, पोर्टल और रियल टाइम डेटा ट्रांसफर से जनगणना बहुत हद तक पेपरलेस होगी। कागज पर लिखी जानकारी पढ़ने के लिए एआई आधारित इंटेलीजेंट कैरेक्टर रिकगनीशन टूल्स होंगे। जीपीएस टैगिंग और प्री-कोडेड ड्रॉपडाउन मैन्यू की व्यवस्था में गलती की गुंजाइश नहीं रहेगी। आम लोगों की मदद के लिए राष्ट्रव्यापी प्रचार होगा। 16 जून को जनगणना का गजट नोटिफिकेशन जारी हुआ था
गृह मंत्रालय ने सोमवार (16 जून) को जनगणना के लिए नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। केंद्र सरकार दो फेज में जातीय कराएगी। नोटिफिकेशन के मुताबिक, पहले फेज की शुरुआत 1 अक्टूबर 2026 से होगी। इसमें 4 पहाड़ी राज्य- हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख शामिल हैं। 1 मार्च 2027 से दूसरा फेज शुरू होगा। इसमें देश के बाकी राज्यों में जनगणना शुरू होगी। देश में 9वीं बार होगी जातीय गणना देश में अब तक कुल 8 बार जातीय जनगणना हुई है। 1872 से 1931 के बीच 7 बार ब्रिटिशकाल में और एक बार 2011 में आजाद भारत में। हालांकि, 2011 की जातीय जनगणना के आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए गए। जातीय जनगणना की घोषणा के साथ ही सरकार ने इसके क्रियान्वयन की रूपरेखा बनानी भी शुरू कर दी है। वर्ष 2011 की जातीय जनगणना में जो गलती हुई थी, केंद्र सरकार इस बार उसे दोहराना नहीं चाहती। तब सरकार ने जातियों की पहले से कोई सूची नहीं बनाई थी, जिसने अपनी जो भी जाति बताई, उसे ही दर्ज करते गए। नतीजा ये हुआ कि 46 लाख से भी ज्यादा जातियां दर्ज हो गईं। पूरी खबर पढ़ें…