यूपी के गाजियाबाद में ठगी के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। एसटीएफ ने गैंग के 6 सदस्यों को गिरफ्तार किया। गैंग 10 लाख रुपए के बदले 15 लाख रुपए के नकली नोट देता था। नकली नोट के अलावा ऑनलाइन गेमिंग ऐप और क्रिप्टो करेंसी लेन-देन पर भी करोड़ों की ठगी कर चुका है। पकड़े जाने के डर से गैंग मेबर्स, हर हफ्ते अपने रहने की जगह बदल देते थे। पुलिस को इनके पास से 100 से अधिक बैंक अकाउंट मिले हैं। ये लोग 100 करोड़ रुपए से अधिक की ठगी कर चुके हैं। गैंग का मास्टरमाइंड शुभम राज है। वो बिहार का रहने वाला है। 12वीं तक पढ़ा है। इस गैंग के पास से करीब 25.6 लाख रुपए कैश बरामद हुए। भारी मात्रा में कागज के नकली नोट और नोट गिनने की मशीन भी मिली। यूपी एसटीएफ ने बताया कि 11 सितंबर की पूरी रात गाजियाबाद में अलग-अलग जगहों पर रेड डालकर गैंग के कुल 6 लोगों को गिरफ्तार किया गया। अब विस्तार से पढ़िए पूरा मामला गैंग के सदस्य ठगी के 3 तरीके अपनाते थे पहलाः- गेमिंग ऐप के जरिए बैंक खातों से पैसे कमाते थे। दूसराः- क्रिप्टो करेंसी के नाम पर ठगी करते थे। तीसराः- 10 लाख या 20 लाख के 500-500 के असली नोट के बदले 15-25 लाख के छोटे नोट के नाम पर ठगी करते थे। खुद को आइटी कंपनी का इंजीनियर बनाकर किराए पर लिया कमरा
एसटीएफ से जुड़े सूत्रों ने दैनिक भास्कर को बताया कि मुख्य आरोपी को गाजियाबाद के सिद्धार्थ विहार के गौड़ सिद्धार्थम अपार्टमेंट से पकड़ा गया। आरोपी किराये पर कमरा लेकर वहां रह रहा था। पिछले एक हफ्ते से ठगी का नेटवर्क चला रहा था। शुभम राज ने खुद को एक आईटी कंपनी का इंजीनियर बताकर किराए पर कमरा लिया था। ठगी के लिए बाथरूम का करते थे उपयोग
ठगों ने जिस ब्रोकर से कमरा लिया था, वही फर्जी डॉक्यूमेंट बनाता था। बड़ी डील के लिए किराए पर नए-नए कमरे दिलवाता था। इन कमरों के बाथरूम में कुछ बदलाव कराकर पैसों की ठगी के दौरान इस्तेमाल करते थे। एसटीएफ ने बताया कि जब गैंग को नकली नोट देना होता था तो क्लाइंट को उसी कमरे में बुलाते थे। रुपए से भरे बैग को एक चादर में फैलाकर उसी पर पहले 200-100 रुपए के असली नोट मशीन से गिनते थे। इसके बाद उसे बाथरूम से बनाए सीक्रेट रास्ते से धीरे से नकली नोट में बदल देते थे। सीक्रेट बाथरूम किस तरह का था, किस तरह से वह नोट बदलते थे। इसकी पूरी जानकारी अभी सामने नहीं आई है। क्लाइंट के जाने के तुरंत बाद कमरा छोड़ देते
इसके बाद ऊपर से कुछ असली नोट रखकर सीधे भेज देते थे। जैसे ही क्लाइंट बाहर चला जाता था। उसके बाद ये भी कमरा तुरंत छोड़ देते थे और फरार हो जाते थे। ये गैंग कई महीनों से दिल्ली-एनसीआर से लेकर बिहार में सक्रिय था। ये खासतौर पर कम से कम 10 लाख की डील करते थे। या इससे ज्यादा की डील करते थे। 10 लाख के बदले 15 लाख देते थे। इनके पास से भारी मात्रा में नोटों की गड्डियां और नोट गिनने वाली मशीनें भी मिली हैं। पुलिस ने इसमें किराए पर कमरा दिलाने वाले ब्रोकर को भी गिरफ्तार किया है। ————————
यूपी के गाजियाबाद में ठगी के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। एसटीएफ ने गैंग के 6 सदस्यों को गिरफ्तार किया। गैंग 10 लाख रुपए के बदले 15 लाख रुपए के नकली नोट देता था। नकली नोट के अलावा ऑनलाइन गेमिंग ऐप और क्रिप्टो करेंसी लेन-देन पर भी करोड़ों की ठगी कर चुका है। पकड़े जाने के डर से गैंग मेबर्स, हर हफ्ते अपने रहने की जगह बदल देते थे। पुलिस को इनके पास से 100 से अधिक बैंक अकाउंट मिले हैं। ये लोग 100 करोड़ रुपए से अधिक की ठगी कर चुके हैं। गैंग का मास्टरमाइंड शुभम राज है। वो बिहार का रहने वाला है। 12वीं तक पढ़ा है। इस गैंग के पास से करीब 25.6 लाख रुपए कैश बरामद हुए। भारी मात्रा में कागज के नकली नोट और नोट गिनने की मशीन भी मिली। यूपी एसटीएफ ने बताया कि 11 सितंबर की पूरी रात गाजियाबाद में अलग-अलग जगहों पर रेड डालकर गैंग के कुल 6 लोगों को गिरफ्तार किया गया। अब विस्तार से पढ़िए पूरा मामला गैंग के सदस्य ठगी के 3 तरीके अपनाते थे पहलाः- गेमिंग ऐप के जरिए बैंक खातों से पैसे कमाते थे। दूसराः- क्रिप्टो करेंसी के नाम पर ठगी करते थे। तीसराः- 10 लाख या 20 लाख के 500-500 के असली नोट के बदले 15-25 लाख के छोटे नोट के नाम पर ठगी करते थे। खुद को आइटी कंपनी का इंजीनियर बनाकर किराए पर लिया कमरा
एसटीएफ से जुड़े सूत्रों ने दैनिक भास्कर को बताया कि मुख्य आरोपी को गाजियाबाद के सिद्धार्थ विहार के गौड़ सिद्धार्थम अपार्टमेंट से पकड़ा गया। आरोपी किराये पर कमरा लेकर वहां रह रहा था। पिछले एक हफ्ते से ठगी का नेटवर्क चला रहा था। शुभम राज ने खुद को एक आईटी कंपनी का इंजीनियर बताकर किराए पर कमरा लिया था। ठगी के लिए बाथरूम का करते थे उपयोग
ठगों ने जिस ब्रोकर से कमरा लिया था, वही फर्जी डॉक्यूमेंट बनाता था। बड़ी डील के लिए किराए पर नए-नए कमरे दिलवाता था। इन कमरों के बाथरूम में कुछ बदलाव कराकर पैसों की ठगी के दौरान इस्तेमाल करते थे। एसटीएफ ने बताया कि जब गैंग को नकली नोट देना होता था तो क्लाइंट को उसी कमरे में बुलाते थे। रुपए से भरे बैग को एक चादर में फैलाकर उसी पर पहले 200-100 रुपए के असली नोट मशीन से गिनते थे। इसके बाद उसे बाथरूम से बनाए सीक्रेट रास्ते से धीरे से नकली नोट में बदल देते थे। सीक्रेट बाथरूम किस तरह का था, किस तरह से वह नोट बदलते थे। इसकी पूरी जानकारी अभी सामने नहीं आई है। क्लाइंट के जाने के तुरंत बाद कमरा छोड़ देते
इसके बाद ऊपर से कुछ असली नोट रखकर सीधे भेज देते थे। जैसे ही क्लाइंट बाहर चला जाता था। उसके बाद ये भी कमरा तुरंत छोड़ देते थे और फरार हो जाते थे। ये गैंग कई महीनों से दिल्ली-एनसीआर से लेकर बिहार में सक्रिय था। ये खासतौर पर कम से कम 10 लाख की डील करते थे। या इससे ज्यादा की डील करते थे। 10 लाख के बदले 15 लाख देते थे। इनके पास से भारी मात्रा में नोटों की गड्डियां और नोट गिनने वाली मशीनें भी मिली हैं। पुलिस ने इसमें किराए पर कमरा दिलाने वाले ब्रोकर को भी गिरफ्तार किया है। ————————