हरियाणा में सरकारी डॉक्टरों और विभाग के अफसरों के बीच चल रहा विवाद अब और तूल पकड़ गया है। समीक्षा बैठक में सीनियर डॉक्टरों के साथ अपमानजनक व्यवहार का एक नया केस सामने आया है। 8 सितंबर को पंचकूला में हुई बैठक में सीएमओ-पीएमओ स्तर की लेडी डॉक्टर से यह तक कह दिया गया कि प्रदेश में बाढ़ आई है- जाकर कहीं डूब मरो। लगातार सामने आ रही इस तरह की घटनाओं के बाद हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विस एसोसिएशन (HCMSA) ने स्वास्थ्य मंत्री आरती राव से मिलने का निर्णय लिया है। एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजेश ख्यालिया ने कहा- कई साल की कड़ी मेहनत व पढ़ाई के बाद डॉक्टर बनते हैं। अफसरों की ओर से बैठकों में शर्मिंदा किया जाना मर्यादित नहीं। इससे पहले 3 सितंबर को नेशनल हेल्थ मिशन के एमडी की मौजूदगी में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से हुई बैठक में अफसरों की डांट सुनकर एक लेडी डॉक्टर रो पड़ी थी। हिसार, झज्जर व सिरसा के सरकारी डॉक्टरों की सामूहिक शिकायत पर HCMSA ने 4 सितंबर को सीएम नायब सैनी को लेटर लिखा, जिसमें सीएम से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की गई। खास बात यह है कि इस शिकायत के बाद भी अफसरों के रवैये में सुधार नहीं आया और शिकायत के 4 दिन बाद फिर बैठक में यह घटना हो गई। पंचकूला की बैठक में लेडी डॉक्टरों को क्यों कहा डूब मरो… बी‑पाल‑एम रेजीमेन पर जवाब न मिलने पर भड़के अफसर
8 सितंबर को पंचकूला के रेस्ट हाउस में स्वास्थ्य विभाग की बैठक हुई। बैठक में डीजी हेल्थ डॉ. कुलदीप सिंह समेत निदेशक स्तर के कई विभागीय अधिकारी थे। जिलों से सिविल सर्जन (सीएमओ), प्रिंसिपल मेडिकल ऑफिसर (पीएमओ) स्तर के चिकित्सा अधिकारियों को बुलाया गया। बैठक में मौजूद एक डॉक्टर ने बताया है कि जब एक बड़े अधिकारी ने बी‑पाल‑एम रेजीमेन के बारे में कुछ डॉक्टरों से पूछा, तो उन्हें इनकी जानकारी नहीं थी। इस पर वह अधिकारी भड़क गए। बैठक में एक साथ बैठी थीं महिला चिकित्सा अधिकारी
बैठक में कई जिलों की महिला डॉक्टर अधिकारी एक साथ बैठी थीं। इन डॉक्टरों पर एक अधिकारी की नजर पड़ी तो उन्होंने उनसे एक सवाल किया कि टीबी को लेकर बी‑पाल‑एम रेजीमेन क्या है? इस सवाल पर इन महिला चिकित्सा अधिकारियों ने जवाब नहीं दिया। इस पर भड़के अधिकारी ने यहां तक कह दिया कि आजकल बाढ़ आई हुई है, कहीं पर चुल्लू भर पानी में डूब मरो। अधिकारी यहीं नहीं रुके। आगे कहा- विभाग ने कई महीने से टीबी के इलाज का यह प्रोग्राम चला रखा है, लेकिन मौजिज पदों पर बैठे डॉक्टरों को इसके बारे में पता नहीं होना काफी शर्म की बात है। HCMSA अध्यक्ष बोले- डीजी हेल्थ के बयान से अब अति हो गई
HCMSA के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजेश ख्यालिया ने कहा कि एसोसिएशन कार्यकारिणी की चर्चा हो गई है। अब मामले को हेल्थ मिनिस्टर आरती राव के सामने रखा जाएगा। डीजी हेल्थ डॉ. कुलदीप और डीजी एमसीएच डॉ. विरेंद्र यादव का बैठकों में डॉक्टरों के साथ व्यवहार अच्छा नहीं है। ख्यालिया ने कहा कि डीजी हेल्थ ने ‘डॉक्टर कहलाने का हक नहीं…’ वाला बयान देकर अति कर दी है। हम कई साल की पढ़ाई करके एमबीबीएस और एमडी करते हैं। कई सालों की मेहनत से एक डॉक्टर बनता है। एसोसिएशन कड़ा कदम उठाएगी। सिलसिलेवार पढ़ें…कहां से विवाद शुरू और कैसे सीएम तक शिकायत पहुंची 3 सितंबर को वीसी पर सार्थक मीटिंग में विवाद शुरू
3 सितंबर को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक हुई। जिसमें नेशनल हेल्थ मिशन के एमडी, डीजी हेल्थ, MCH के डायरेक्टर समेत सभी जिलों के सीएमओ, पीएमओ, डिप्टी सीएमओ और एसएमओ जुड़े। यह बैठक केंद्र व राज्य सरकारी की स्वास्थ्य योजनाओं की समीक्षा के लिए थी। रिव्यू करने वाले अधिकारियों की टिप्पणी की वजह से मीटिंग विवाद में आई। जब अफसरों की डांट सुनकर रो पड़ीं लेडी डॉक्टर
इस मीटिंग में अफसर बार-बार चार्जशीट करने की धमकी दे रहे थे। बैठक में शामिल रहे एक डॉक्टर ने बताया कि अफसरों के रवैये से आहत होकर एक सीनियर महिला डॉक्टर की तो आंखों में आंसू आ गए। सीएमओ लेवल की इस लेडी डॉक्टर की रिटायरमेंट पास ही है। बैठक ले रहे अधिकारियों ने सख्त लहजे में यहां तक कह दिया कि आपको काम नहीं करना आता, आपको तो हटा देना चाहिए। कई जिलों के डॉक्टरों ने एसोसिएशन को शिकायत की
इस बैठक के बाद कई चिकित्सक अधिकारियों ने हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन के पास अपनी सामूहिक शिकायत दर्ज कराई। यह एसोसिएशन सरकारी डॉक्टरों का प्रतिनिधित्व करती है। दिलचस्प है कि वर्तमान में डीजी हेल्थ डॉ. कुलदीप भी इस एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं। तब उनकी पोस्टिंग रोहतक में थी। ताजा विवाद पर अफसर टिप्पणी करने से बच रहे
8 सितंबर को पंचकूला में हुई बैठक के संबंध में अधिकारी अब कुछ भी कहने से बच रहे हैं। इस संबंध में पक्ष जानने के लिए डीजी हेल्थ डॉ. कुलदीप के मोबाइल पर कई बार कॉल की गई, लेकिन उन्होंने रिसीव नहीं की। इससे पहले 9 सितंबर को उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा था- एक डिप्टी सीएमओ को विभाग 3 लाख से ज्यादा सैलरी देता है। जब उसके कार्यों की समीक्षा की जाती है तो वह निल मिलती है। बैठक में एक डॉक्टर से पूछा गया कि टीबी और मलेरिया का इलाज कैसे होता है, तो उसे इसकी जानकारी ही नहीं थी। ऐसे में उसे डॉक्टर कहलाने का ही हक नहीं।
हरियाणा में सरकारी डॉक्टरों और विभाग के अफसरों के बीच चल रहा विवाद अब और तूल पकड़ गया है। समीक्षा बैठक में सीनियर डॉक्टरों के साथ अपमानजनक व्यवहार का एक नया केस सामने आया है। 8 सितंबर को पंचकूला में हुई बैठक में सीएमओ-पीएमओ स्तर की लेडी डॉक्टर से यह तक कह दिया गया कि प्रदेश में बाढ़ आई है- जाकर कहीं डूब मरो। लगातार सामने आ रही इस तरह की घटनाओं के बाद हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विस एसोसिएशन (HCMSA) ने स्वास्थ्य मंत्री आरती राव से मिलने का निर्णय लिया है। एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजेश ख्यालिया ने कहा- कई साल की कड़ी मेहनत व पढ़ाई के बाद डॉक्टर बनते हैं। अफसरों की ओर से बैठकों में शर्मिंदा किया जाना मर्यादित नहीं। इससे पहले 3 सितंबर को नेशनल हेल्थ मिशन के एमडी की मौजूदगी में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से हुई बैठक में अफसरों की डांट सुनकर एक लेडी डॉक्टर रो पड़ी थी। हिसार, झज्जर व सिरसा के सरकारी डॉक्टरों की सामूहिक शिकायत पर HCMSA ने 4 सितंबर को सीएम नायब सैनी को लेटर लिखा, जिसमें सीएम से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की गई। खास बात यह है कि इस शिकायत के बाद भी अफसरों के रवैये में सुधार नहीं आया और शिकायत के 4 दिन बाद फिर बैठक में यह घटना हो गई। पंचकूला की बैठक में लेडी डॉक्टरों को क्यों कहा डूब मरो… बी‑पाल‑एम रेजीमेन पर जवाब न मिलने पर भड़के अफसर
8 सितंबर को पंचकूला के रेस्ट हाउस में स्वास्थ्य विभाग की बैठक हुई। बैठक में डीजी हेल्थ डॉ. कुलदीप सिंह समेत निदेशक स्तर के कई विभागीय अधिकारी थे। जिलों से सिविल सर्जन (सीएमओ), प्रिंसिपल मेडिकल ऑफिसर (पीएमओ) स्तर के चिकित्सा अधिकारियों को बुलाया गया। बैठक में मौजूद एक डॉक्टर ने बताया है कि जब एक बड़े अधिकारी ने बी‑पाल‑एम रेजीमेन के बारे में कुछ डॉक्टरों से पूछा, तो उन्हें इनकी जानकारी नहीं थी। इस पर वह अधिकारी भड़क गए। बैठक में एक साथ बैठी थीं महिला चिकित्सा अधिकारी
बैठक में कई जिलों की महिला डॉक्टर अधिकारी एक साथ बैठी थीं। इन डॉक्टरों पर एक अधिकारी की नजर पड़ी तो उन्होंने उनसे एक सवाल किया कि टीबी को लेकर बी‑पाल‑एम रेजीमेन क्या है? इस सवाल पर इन महिला चिकित्सा अधिकारियों ने जवाब नहीं दिया। इस पर भड़के अधिकारी ने यहां तक कह दिया कि आजकल बाढ़ आई हुई है, कहीं पर चुल्लू भर पानी में डूब मरो। अधिकारी यहीं नहीं रुके। आगे कहा- विभाग ने कई महीने से टीबी के इलाज का यह प्रोग्राम चला रखा है, लेकिन मौजिज पदों पर बैठे डॉक्टरों को इसके बारे में पता नहीं होना काफी शर्म की बात है। HCMSA अध्यक्ष बोले- डीजी हेल्थ के बयान से अब अति हो गई
HCMSA के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजेश ख्यालिया ने कहा कि एसोसिएशन कार्यकारिणी की चर्चा हो गई है। अब मामले को हेल्थ मिनिस्टर आरती राव के सामने रखा जाएगा। डीजी हेल्थ डॉ. कुलदीप और डीजी एमसीएच डॉ. विरेंद्र यादव का बैठकों में डॉक्टरों के साथ व्यवहार अच्छा नहीं है। ख्यालिया ने कहा कि डीजी हेल्थ ने ‘डॉक्टर कहलाने का हक नहीं…’ वाला बयान देकर अति कर दी है। हम कई साल की पढ़ाई करके एमबीबीएस और एमडी करते हैं। कई सालों की मेहनत से एक डॉक्टर बनता है। एसोसिएशन कड़ा कदम उठाएगी। सिलसिलेवार पढ़ें…कहां से विवाद शुरू और कैसे सीएम तक शिकायत पहुंची 3 सितंबर को वीसी पर सार्थक मीटिंग में विवाद शुरू
3 सितंबर को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक हुई। जिसमें नेशनल हेल्थ मिशन के एमडी, डीजी हेल्थ, MCH के डायरेक्टर समेत सभी जिलों के सीएमओ, पीएमओ, डिप्टी सीएमओ और एसएमओ जुड़े। यह बैठक केंद्र व राज्य सरकारी की स्वास्थ्य योजनाओं की समीक्षा के लिए थी। रिव्यू करने वाले अधिकारियों की टिप्पणी की वजह से मीटिंग विवाद में आई। जब अफसरों की डांट सुनकर रो पड़ीं लेडी डॉक्टर
इस मीटिंग में अफसर बार-बार चार्जशीट करने की धमकी दे रहे थे। बैठक में शामिल रहे एक डॉक्टर ने बताया कि अफसरों के रवैये से आहत होकर एक सीनियर महिला डॉक्टर की तो आंखों में आंसू आ गए। सीएमओ लेवल की इस लेडी डॉक्टर की रिटायरमेंट पास ही है। बैठक ले रहे अधिकारियों ने सख्त लहजे में यहां तक कह दिया कि आपको काम नहीं करना आता, आपको तो हटा देना चाहिए। कई जिलों के डॉक्टरों ने एसोसिएशन को शिकायत की
इस बैठक के बाद कई चिकित्सक अधिकारियों ने हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन के पास अपनी सामूहिक शिकायत दर्ज कराई। यह एसोसिएशन सरकारी डॉक्टरों का प्रतिनिधित्व करती है। दिलचस्प है कि वर्तमान में डीजी हेल्थ डॉ. कुलदीप भी इस एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं। तब उनकी पोस्टिंग रोहतक में थी। ताजा विवाद पर अफसर टिप्पणी करने से बच रहे
8 सितंबर को पंचकूला में हुई बैठक के संबंध में अधिकारी अब कुछ भी कहने से बच रहे हैं। इस संबंध में पक्ष जानने के लिए डीजी हेल्थ डॉ. कुलदीप के मोबाइल पर कई बार कॉल की गई, लेकिन उन्होंने रिसीव नहीं की। इससे पहले 9 सितंबर को उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा था- एक डिप्टी सीएमओ को विभाग 3 लाख से ज्यादा सैलरी देता है। जब उसके कार्यों की समीक्षा की जाती है तो वह निल मिलती है। बैठक में एक डॉक्टर से पूछा गया कि टीबी और मलेरिया का इलाज कैसे होता है, तो उसे इसकी जानकारी ही नहीं थी। ऐसे में उसे डॉक्टर कहलाने का ही हक नहीं।