उज्जैन में 6 सितंबर की रात तीन पुलिसकर्मियों की कार शिप्रा नदी में जा गिरी। इसमें सवार उन्हेल थाना प्रभारी अशोक शर्मा का शव रविवार जबकि एसआई मदनलाल निनामा का शव सोमवार को घटनास्थल से करीब 3 किलोमीटर दूर मिला था। वहीं, कॉन्स्टेबल आरती पाल की बॉडी 68 घंटे बाद मंगलवार को घटनास्थल से करीब 70 मीटर दूर मिली। रतलाम की रहने वाली आरती (40) अपने भाई की मौत के बाद सवा माह की रस्म में शामिल होने घर आई थीं, ड्यूटी पर लौटते ही हादसे का शिकार हो गई। उज्जैन में बुधवार को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। भाई लोकेंद्र पाल ने मुखाग्नि दी। 5 सितंबर को घर से ड्यूटी पर लौटी थी
आरती की मां शीला पाल ने कहा- वह हमारी बेटी नहीं, बेटा थी। आरती पूरे परिवार में सात भाइयों की इकलौती बहन थी। हमेशा हंसती रहती थी। उन्होंने बताया कि 30 जुलाई को आरती के बड़े भाई जितेंद्र पाल (45) का बीमारी की वजह से निधन हो गया था। इसके बाद की रस्मों के लिए 4 सितंबर को आरती घर आई थी। धूप ध्यान की रस्म के बाद सब मिलकर बैठे थे। इसी दौरान आरती ने नवमी के दिन दादाजी के श्राद्ध में आने का भी वादा किया था। परिजन ने कहा- आरती सभी भाइयों की आंखों का तारा थी। मां और काकी संतोष पाल में फर्क नहीं समझती थी। काकी को ही सब कुछ बताती थी। 5 सितंबर की शाम वह ड्यूटी पर लौट गई। 6 सितंबर को हादसा हो गया। 2012 में ड्यूटी जॉइन की थी
आरती ने 2012 में पुलिस विभाग जॉइन किया था। पहली पोस्टिंग उज्जैन के महाकाल थाने में मिली थी। पिछले 4 साल से उन्हेल थाने में पदस्थ थी। आरती का परिवार रतलाम के अरिहंत परिसर में रहता है। पिता अशोक कुमार पाल कलेक्ट्रेट से रिटायर्ड अधीक्षक हैं। मां शीला गृहिणी और छोटा भाई लोकेंद्र स्टाम्प वेंडर हैं। बड़े भाई जितेंद्र की मौत के बाद भाभी नीतू और 12 साल का भतीजा तव्य साथ ही रहते हैं। मकान भी पिता ने आरती के नाम कर रखा था। आरती ने शादी नहीं की थी। वह पूरी तरह नौकरी को समर्पित थी। चचेरा भाई गौरव बोला- दीदी हमेशा हमारे लिए खड़ी रहती थी। राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार
उज्जैन में बुधवार सुबह चक्र तीर्थ पर कांस्टेबल आरती पाल का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया गया। उनके भाई लोकेंद्र पाल ने मुखाग्नि दी। एडीजी उमेश जोगा, डीआईजी नवनीत भसीन, एसपी प्रदीप शर्मा और कलेक्टर रोशन सिंह ने उनकी अर्थी को कंधा दिया। उज्जैन कलेक्टर रोशन सिंह ने कहा- जिला प्रशासन और राज्य सरकार शोकाकुल परिवारों के साथ खड़े हैं। जो भी सहायता संभव होगी, वह हर स्तर पर दी जाएगी। इस तरह की दुर्घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए गंभीरता से चर्चा की जा रही है। एसपी प्रदीप शर्मा बोले- हमारी साथी आरती पाल का परिवार रतलाम का रहने वाला है। उनकी इच्छानुसार अंतिम संस्कार उज्जैन में ही कराया गया। यदि परिवार की ओर से अनुकंपा नियुक्ति की मांग आती है, तो उस पर भी आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। मामले से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… 68 घंटे बाद शिप्रा में मिला लेडी कॉन्स्टेबल का शव उज्जैन में नदी में बही कॉन्स्टेबल आरती पाल की कार मिल गई है। आरती का शव कार के पिछले हिस्से में मिला है। एसपी प्रदीप शर्मा ने कहा कि जिस पुल से कार गिरी थी, वहां से लगभग 70 मीटर आगे मिली है।आरती के पिता भी मौके पर पहुंचे। वे बार-बार बेसुध हो रहे थे। पढ़ें पूरी खबर…
उज्जैन में 6 सितंबर की रात तीन पुलिसकर्मियों की कार शिप्रा नदी में जा गिरी। इसमें सवार उन्हेल थाना प्रभारी अशोक शर्मा का शव रविवार जबकि एसआई मदनलाल निनामा का शव सोमवार को घटनास्थल से करीब 3 किलोमीटर दूर मिला था। वहीं, कॉन्स्टेबल आरती पाल की बॉडी 68 घंटे बाद मंगलवार को घटनास्थल से करीब 70 मीटर दूर मिली। रतलाम की रहने वाली आरती (40) अपने भाई की मौत के बाद सवा माह की रस्म में शामिल होने घर आई थीं, ड्यूटी पर लौटते ही हादसे का शिकार हो गई। उज्जैन में बुधवार को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। भाई लोकेंद्र पाल ने मुखाग्नि दी। 5 सितंबर को घर से ड्यूटी पर लौटी थी
आरती की मां शीला पाल ने कहा- वह हमारी बेटी नहीं, बेटा थी। आरती पूरे परिवार में सात भाइयों की इकलौती बहन थी। हमेशा हंसती रहती थी। उन्होंने बताया कि 30 जुलाई को आरती के बड़े भाई जितेंद्र पाल (45) का बीमारी की वजह से निधन हो गया था। इसके बाद की रस्मों के लिए 4 सितंबर को आरती घर आई थी। धूप ध्यान की रस्म के बाद सब मिलकर बैठे थे। इसी दौरान आरती ने नवमी के दिन दादाजी के श्राद्ध में आने का भी वादा किया था। परिजन ने कहा- आरती सभी भाइयों की आंखों का तारा थी। मां और काकी संतोष पाल में फर्क नहीं समझती थी। काकी को ही सब कुछ बताती थी। 5 सितंबर की शाम वह ड्यूटी पर लौट गई। 6 सितंबर को हादसा हो गया। 2012 में ड्यूटी जॉइन की थी
आरती ने 2012 में पुलिस विभाग जॉइन किया था। पहली पोस्टिंग उज्जैन के महाकाल थाने में मिली थी। पिछले 4 साल से उन्हेल थाने में पदस्थ थी। आरती का परिवार रतलाम के अरिहंत परिसर में रहता है। पिता अशोक कुमार पाल कलेक्ट्रेट से रिटायर्ड अधीक्षक हैं। मां शीला गृहिणी और छोटा भाई लोकेंद्र स्टाम्प वेंडर हैं। बड़े भाई जितेंद्र की मौत के बाद भाभी नीतू और 12 साल का भतीजा तव्य साथ ही रहते हैं। मकान भी पिता ने आरती के नाम कर रखा था। आरती ने शादी नहीं की थी। वह पूरी तरह नौकरी को समर्पित थी। चचेरा भाई गौरव बोला- दीदी हमेशा हमारे लिए खड़ी रहती थी। राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार
उज्जैन में बुधवार सुबह चक्र तीर्थ पर कांस्टेबल आरती पाल का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया गया। उनके भाई लोकेंद्र पाल ने मुखाग्नि दी। एडीजी उमेश जोगा, डीआईजी नवनीत भसीन, एसपी प्रदीप शर्मा और कलेक्टर रोशन सिंह ने उनकी अर्थी को कंधा दिया। उज्जैन कलेक्टर रोशन सिंह ने कहा- जिला प्रशासन और राज्य सरकार शोकाकुल परिवारों के साथ खड़े हैं। जो भी सहायता संभव होगी, वह हर स्तर पर दी जाएगी। इस तरह की दुर्घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए गंभीरता से चर्चा की जा रही है। एसपी प्रदीप शर्मा बोले- हमारी साथी आरती पाल का परिवार रतलाम का रहने वाला है। उनकी इच्छानुसार अंतिम संस्कार उज्जैन में ही कराया गया। यदि परिवार की ओर से अनुकंपा नियुक्ति की मांग आती है, तो उस पर भी आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। मामले से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… 68 घंटे बाद शिप्रा में मिला लेडी कॉन्स्टेबल का शव उज्जैन में नदी में बही कॉन्स्टेबल आरती पाल की कार मिल गई है। आरती का शव कार के पिछले हिस्से में मिला है। एसपी प्रदीप शर्मा ने कहा कि जिस पुल से कार गिरी थी, वहां से लगभग 70 मीटर आगे मिली है।आरती के पिता भी मौके पर पहुंचे। वे बार-बार बेसुध हो रहे थे। पढ़ें पूरी खबर…