8 सितंबर को जयपुर में एक इंजीनियरिंग स्टूडेंट ने खुदकुशी कर ली थी। ये सिर्फ एक उदाहरण है। ऐसे ही न जाने कितने केस हैं, जिसमें किसी ने निजी जीवन में परेशानी, किसी ने नौकरी-पढ़ाई-बेरोजगारी के तनाव सहित अन्य कारणों से अपने जीवन को खत्म कर लिया। पिछले कई सालों में सुसाइड के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। विश्व में हर चौथे सेकेंड में कोई न कोई व्यक्ति सुसाइड की कोशिश करता है। हर 40वें सेकेंड में एक सुसाइड हो जाता है। आज (9 सितंबर) विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस है। भास्कर ने बढ़ते सुसाइड के मामलों को लेकर अजमेर के जेएलएन हॉस्पिटल के मनोचिकित्सा विभाग के एचओडी डॉ. महेंद्र जैन से बात की। जाना कि कैसे सुसाइड को रोका जाए। कैसे पहचानें कि हमारा कोई अपना तनाव में है। ऐसा कदम उठा सकता है। डॉ. महेंद्र जैन के अनुसार- अगर कोई सुसाइड करने की कोई बात करता है, तो उसे मजाक में नहीं लेना चाहिए। सुसाइड से पहले व्यक्ति कुछ न कुछ संकेत जरूर देता है। सुसाइड का विचार आते ही उसको दूसरों के साथ उस मनोभाव को साझा करने करने से सुसाइड की संभावना बहुत कम हो जाती है। कोई अचानक उदास रहने लगे
डॉ. महेंद्र जैन ने बताया- अपने परिवार, दोस्तों और आस-पास रहने वाले लोगों के व्यवहार में बदलाव की पहचान करें। कोई हंसमुख, चुलबुला, सबसे बोलकर चलने वाला इंसान अगर अचानक गुमसुम और उदास रहने लगे। अपने परिवार और दोस्तों से दूरी बना लें। ऐसे में उस व्यक्ति से बात कर उदास रहने का कारण जाने। उस इंसान को मोटिवेशन और आपके साथ की जरूरत होगी। ऐसी परिस्थिति में परिवार सबसे बड़ा सपोर्ट सिस्टम होता है। नींद न आना, रात-रातभर जागना
दिनचर्या पर फोकस करें। अगर कोई व्यक्ति रातभर सो नहीं पा रहा या ज्यादा सो रहा है। खाने-पीने का मन न होना। बाहर घूमने न जाने का मन। ये लक्षण नजर आने पर उस व्यक्ति से बात करें। ताकि वो अपनी परेशानी साझा कर खुद को हल्का महसूस करा सकें। अकेले में रोने की इच्छा
कई बार सुसाइड की कोशिश या सुसाइड करने वाले लोग अलग-थलग होने के साथ ही अकेले में रोते हैं। अंदर ही अंदर घुटन को वो बातचीत कर नहीं बता पाते। ऐसे लोगों को इग्नोर नहीं करें। उस व्यक्ति को ऐसे माहौल में लेकर जाए, जहां वो उस परिस्थिति को भूल सकें। खुद को डिमोटिवेट और अकेला फील करना
कोई व्यक्ति खुद को फेल ईयर महसूस करने लगे। उसे लगने लगे कि वो सबसे पीछे है। कोई उसकी बात को महत्व या उसकी भावनाओं को समझ नहीं पा रहा। खुद को हर काम करने में असहज फील करने लगे। अकेलापन फील करने लगे। सुसाइड की बातें करना
अगर कोई व्यक्ति सुसाइड की बात करने लगे। जीवन से निराशा और हताशा की बात करें। नेगेटिव बातें करना। ये सिर्फ कुछ लक्षण है। ऐसे ही कई लक्षण हैं, जिनसे हम सुसाइड से पहले पहचान कर सकते हैं। ये 4 उदाहरण पढ़िए… केस 1- अजमेर के एक सरकारी कॉलेज की महिला प्रोफेसर अपने पति के साथ घर पर अकेली रहती थीं। बच्चे विदेश में रहते थे। उनको गले में कैंसर भी हो गया। अकेलेपन और बीमारी के कारण वह डिप्रेशन में आ गई थीं। परिवार के लोगों ने काउंसलिंग करवाई, लेकिन वह अपनी बीमारी पर खुलकर नहीं बता पाई थीं। वह अपनी भावनाओं को छुपाने लगी थीं। इसी बीच उसने आनासागर झील में कूदकर सुसाइड कर लिया था। महिला प्रोफेसर ने सुसाइड नोट में लिखा था कि वह अपनी बीमारी से परेशान है। केस 2 एक केस न्यू मैरिड लड़की का था। उसकी एक ऐसे घर में शादी हुई थी, जहां आए दिन परिवार में लड़ाई-झगड़े होते रहते थे। सास उसे ताने देती थी। पति बाहर नौकरी करता था। इस कारण वह डिप्रेशन में आ गई थी। परिवार का सपोर्ट नहीं होने के कारण वह काउंसलिंग तक भी ठीक ढंग से नहीं करवा पाई। आखिर में उसने परेशान होकर फांसी का फंदा लगाकर सुसाइड कर लिया। केस 3 पिछले साल एक केस आया था। एक लड़की मोबाइल का ज्यादा उपयोग करने लगी थी। नींद पूरी नहीं होने के कारण स्कूल नहीं जाती थी। पढ़ाई में कमजोर थी तो पिता ने मोबाइल छीन लिया। पिता की डांट से नाराज होकर उसने घर पर फांसी का फंदा लगाकर सुसाइड कर लिया था। केस 4 एक एमबीबीएस स्टूडेंट की काउंसलिंग की थी। स्टूडेंट गेमिंग में लत लगने के कारण 22 लाख तक रुपए हार गया था। उसके ऊपर काफी कर्ज हो गया था। काउंसलिंग के बाद भी वह डिप्रेशन में रहा और उसने नोट लिखकर फांसी लगा ली थी।
हर 40वें सेकेंड में एक सुसाइड
विश्व में हर साल एक अरब से ज्यादा लोग आत्महत्या की कोशिश करते हैं। वहीं 8 लाख से ज्यादा लोग आत्महत्या कर लेते हैं। विश्व में हर चौथे सेकेंड में कोई न कोई व्यक्ति सुसाइड की कोशिश करता है। हर 40वें सेकेंड में एक सुसाइड हो जाती है। पुरुषों की तुलना में महिलाएं सुसाइड की दो से चार गुना ज्यादा कोशिश करती हैं। अगर आप जेएलएन हॉस्पिटल (अजमेर) की बात करें तो इमरजेंसी में सुसाइड अटेम्प्ट के रोज 10 केस आते हैं। इसमें से 5 या 6 महिला या माइनर गर्ल्स होती हैं। 50 से 80% सुसाइड डिप्रेशन के कारण होते हैं। नशे की लत दूसरा मुख्य कारण है।
8 सितंबर को जयपुर में एक इंजीनियरिंग स्टूडेंट ने खुदकुशी कर ली थी। ये सिर्फ एक उदाहरण है। ऐसे ही न जाने कितने केस हैं, जिसमें किसी ने निजी जीवन में परेशानी, किसी ने नौकरी-पढ़ाई-बेरोजगारी के तनाव सहित अन्य कारणों से अपने जीवन को खत्म कर लिया। पिछले कई सालों में सुसाइड के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। विश्व में हर चौथे सेकेंड में कोई न कोई व्यक्ति सुसाइड की कोशिश करता है। हर 40वें सेकेंड में एक सुसाइड हो जाता है। आज (9 सितंबर) विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस है। भास्कर ने बढ़ते सुसाइड के मामलों को लेकर अजमेर के जेएलएन हॉस्पिटल के मनोचिकित्सा विभाग के एचओडी डॉ. महेंद्र जैन से बात की। जाना कि कैसे सुसाइड को रोका जाए। कैसे पहचानें कि हमारा कोई अपना तनाव में है। ऐसा कदम उठा सकता है। डॉ. महेंद्र जैन के अनुसार- अगर कोई सुसाइड करने की कोई बात करता है, तो उसे मजाक में नहीं लेना चाहिए। सुसाइड से पहले व्यक्ति कुछ न कुछ संकेत जरूर देता है। सुसाइड का विचार आते ही उसको दूसरों के साथ उस मनोभाव को साझा करने करने से सुसाइड की संभावना बहुत कम हो जाती है। कोई अचानक उदास रहने लगे
डॉ. महेंद्र जैन ने बताया- अपने परिवार, दोस्तों और आस-पास रहने वाले लोगों के व्यवहार में बदलाव की पहचान करें। कोई हंसमुख, चुलबुला, सबसे बोलकर चलने वाला इंसान अगर अचानक गुमसुम और उदास रहने लगे। अपने परिवार और दोस्तों से दूरी बना लें। ऐसे में उस व्यक्ति से बात कर उदास रहने का कारण जाने। उस इंसान को मोटिवेशन और आपके साथ की जरूरत होगी। ऐसी परिस्थिति में परिवार सबसे बड़ा सपोर्ट सिस्टम होता है। नींद न आना, रात-रातभर जागना
दिनचर्या पर फोकस करें। अगर कोई व्यक्ति रातभर सो नहीं पा रहा या ज्यादा सो रहा है। खाने-पीने का मन न होना। बाहर घूमने न जाने का मन। ये लक्षण नजर आने पर उस व्यक्ति से बात करें। ताकि वो अपनी परेशानी साझा कर खुद को हल्का महसूस करा सकें। अकेले में रोने की इच्छा
कई बार सुसाइड की कोशिश या सुसाइड करने वाले लोग अलग-थलग होने के साथ ही अकेले में रोते हैं। अंदर ही अंदर घुटन को वो बातचीत कर नहीं बता पाते। ऐसे लोगों को इग्नोर नहीं करें। उस व्यक्ति को ऐसे माहौल में लेकर जाए, जहां वो उस परिस्थिति को भूल सकें। खुद को डिमोटिवेट और अकेला फील करना
कोई व्यक्ति खुद को फेल ईयर महसूस करने लगे। उसे लगने लगे कि वो सबसे पीछे है। कोई उसकी बात को महत्व या उसकी भावनाओं को समझ नहीं पा रहा। खुद को हर काम करने में असहज फील करने लगे। अकेलापन फील करने लगे। सुसाइड की बातें करना
अगर कोई व्यक्ति सुसाइड की बात करने लगे। जीवन से निराशा और हताशा की बात करें। नेगेटिव बातें करना। ये सिर्फ कुछ लक्षण है। ऐसे ही कई लक्षण हैं, जिनसे हम सुसाइड से पहले पहचान कर सकते हैं। ये 4 उदाहरण पढ़िए… केस 1- अजमेर के एक सरकारी कॉलेज की महिला प्रोफेसर अपने पति के साथ घर पर अकेली रहती थीं। बच्चे विदेश में रहते थे। उनको गले में कैंसर भी हो गया। अकेलेपन और बीमारी के कारण वह डिप्रेशन में आ गई थीं। परिवार के लोगों ने काउंसलिंग करवाई, लेकिन वह अपनी बीमारी पर खुलकर नहीं बता पाई थीं। वह अपनी भावनाओं को छुपाने लगी थीं। इसी बीच उसने आनासागर झील में कूदकर सुसाइड कर लिया था। महिला प्रोफेसर ने सुसाइड नोट में लिखा था कि वह अपनी बीमारी से परेशान है। केस 2 एक केस न्यू मैरिड लड़की का था। उसकी एक ऐसे घर में शादी हुई थी, जहां आए दिन परिवार में लड़ाई-झगड़े होते रहते थे। सास उसे ताने देती थी। पति बाहर नौकरी करता था। इस कारण वह डिप्रेशन में आ गई थी। परिवार का सपोर्ट नहीं होने के कारण वह काउंसलिंग तक भी ठीक ढंग से नहीं करवा पाई। आखिर में उसने परेशान होकर फांसी का फंदा लगाकर सुसाइड कर लिया। केस 3 पिछले साल एक केस आया था। एक लड़की मोबाइल का ज्यादा उपयोग करने लगी थी। नींद पूरी नहीं होने के कारण स्कूल नहीं जाती थी। पढ़ाई में कमजोर थी तो पिता ने मोबाइल छीन लिया। पिता की डांट से नाराज होकर उसने घर पर फांसी का फंदा लगाकर सुसाइड कर लिया था। केस 4 एक एमबीबीएस स्टूडेंट की काउंसलिंग की थी। स्टूडेंट गेमिंग में लत लगने के कारण 22 लाख तक रुपए हार गया था। उसके ऊपर काफी कर्ज हो गया था। काउंसलिंग के बाद भी वह डिप्रेशन में रहा और उसने नोट लिखकर फांसी लगा ली थी।
हर 40वें सेकेंड में एक सुसाइड
विश्व में हर साल एक अरब से ज्यादा लोग आत्महत्या की कोशिश करते हैं। वहीं 8 लाख से ज्यादा लोग आत्महत्या कर लेते हैं। विश्व में हर चौथे सेकेंड में कोई न कोई व्यक्ति सुसाइड की कोशिश करता है। हर 40वें सेकेंड में एक सुसाइड हो जाती है। पुरुषों की तुलना में महिलाएं सुसाइड की दो से चार गुना ज्यादा कोशिश करती हैं। अगर आप जेएलएन हॉस्पिटल (अजमेर) की बात करें तो इमरजेंसी में सुसाइड अटेम्प्ट के रोज 10 केस आते हैं। इसमें से 5 या 6 महिला या माइनर गर्ल्स होती हैं। 50 से 80% सुसाइड डिप्रेशन के कारण होते हैं। नशे की लत दूसरा मुख्य कारण है।